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अजनबी हमसफर की चु@@ई

रात के साढ़े बारह बज चुके थे और राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था और कोच की हल्की नीली रोशनी में सब कुछ धुंधला और रहस्यमयी लग रहा था। आर्यन अपनी लोअर बर्थ पर लेटा हुआ था लेकिन उसकी आँखों से नींद कोसों दूर थी। उसके ठीक सामने वाली बर्थ पर मीरा बैठी हुई थी जो अपनी साड़ी के पल्लू को बार-बार ठीक कर रही थी। मीरा की उम्र लगभग 34 वर्ष रही होगी और उसका शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था। उसने गहरे लाल रंग की रेशमी साड़ी पहनी हुई थी जिसके नीचे से उसके भारी और रसीले तरबूज रह-रह कर अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे।

मीरा का गोरा रंग और उसकी आँखों की गहराई आर्यन को अपनी ओर खींच रही थी। साड़ी का ब्लाउज इतना टाइट था कि उसके तरबूज बाहर निकलने को बेताब दिख रहे थे और उन पर लगे दो नन्हे मटर ब्लाउज के कपड़े को भेदकर अपनी झलक दिखा रहे थे। आर्यन ने गौर किया कि मीरा भी उसे देख रही थी और उसकी साँसों की गति कुछ तेज हो गई थी। उन दोनों के बीच एक अनकही कशमकश चल रही थी। आर्यन ने हिम्मत जुटाई और धीरे से पूछा कि क्या उसे नींद नहीं आ रही है। मीरा ने एक गहरी आह भरी और अपनी गर्दन झुकाते हुए कहा कि उसे इस शोर में नींद नहीं आती। उसकी आवाज़ में एक ऐसी खनक थी जिसने आर्यन के बदन में बिजली सी दौड़ा दी।

बातों का सिलसिला शुरू हुआ और धीरे-धीरे दोनों के बीच की झिझक कम होने लगी। आर्यन ने ध्यान दिया कि बात करते समय मीरा का पल्लू जानबूझकर खिसक गया था जिससे उसके विशाल तरबूज अब और भी साफ़ नजर आ रहे थे। आर्यन की नजरें उन पर जमी हुई थीं और मीरा यह देख रही थी लेकिन उसने विरोध करने के बजाय अपनी आँखों में एक शरारती चमक ले आई। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर मीरा के हाथ को छुआ। मीरा का बदन कांप उठा लेकिन उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। वह स्पर्श इतना गरम और उत्तेजक था कि दोनों के दिलों की धड़कनें अब एक साथ तेज़ होने लगी थीं। कमरे में मौजूद हवा अब भारी और कामुक होने लगी थी।

आर्यन धीरे से उठकर मीरा की बर्थ पर उसके पास जाकर बैठ गया। मीरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी सांस ली। आर्यन ने अपने हाथ मीरा की कमर पर रखे और उसे अपनी ओर खींचा। रेशमी साड़ी के नीचे मीरा का बदन दहकते हुए अंगारे जैसा महसूस हो रहा था। आर्यन ने अपनी उंगलियों से मीरा के गालों को छुआ और फिर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उसके मटरों तक पहुँच गया। जैसे ही उसने अपने अंगूठे से उन मटरों को सहलाया मीरा के मुँह से एक दबी हुई कराह निकल गई। वह आर्यन के कंधे पर सर रखकर तेजी से सांसें लेने लगी और उसकी उंगलियां आर्यन के बालों में फंस गईं।

इच्छाओं का ज्वार अब अपनी सीमाएं लांघने को बेताब था। आर्यन ने मीरा के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपना प्यार बरसाने लगा। दोनों एक दूसरे के रस में डूबने लगे थे। आर्यन का हाथ धीरे-धीरे नीचे गया और साड़ी के परतों को हटाते हुए मीरा की रेशमी खाई तक पहुँच गया। जैसे ही आर्यन की उंगलियों ने उस नम और गरम खाई को छुआ मीरा का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया। वह खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और आर्यन के स्वागत के लिए तैयार थी। आर्यन ने महसूस किया कि उसका अपना खीरा भी अब पूरी तरह से सख्त और बेकाबू हो चुका था।

आर्यन ने धीरे से अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना बड़ा और गरम खीरा बाहर निकाला। मीरा ने जैसे ही उस विशाल खीरे को देखा उसकी आँखें फटी की फटी रह गई लेकिन अगले ही पल उसने अपनी आँखों में हवस की आग समेट ली। उसने झुककर उस खीरे को अपने मुँह में भर लिया और उसे बड़े चाव से चूसने लगी। आर्यन को ऐसा महसूस हुआ जैसे वह स्वर्ग के द्वार पर खड़ा हो। मीरा का खीरा चूसने का अंदाज़ इतना लाजवाब था कि आर्यन के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। उसने मीरा के सिर को पकड़ा और गहराई से उसके मुँह की खुदाई करने लगा। कुछ ही देर में दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो गए थे।

अब सब्र का बांध टूट चुका था। आर्यन ने मीरा को बर्थ पर लेटाया और उसकी टांगों को फैलाकर बीच में आ गया। उसने अपने खीरे की नोक को मीरा की तड़पती हुई खाई के मुहाने पर रखा। मीरा ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं और आर्यन की बाहों को जकड़ लिया। आर्यन ने एक ज़ोरदार झटका दिया और उसका पूरा खीरा मीरा की तंग खाई के अंदर समा गया। मीरा के मुँह से एक लंबी आह निकली और उसकी आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू की और खुदाई का असली खेल शुरू हुआ। हर धक्के के साथ मीरा के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन के सीने से टकरा रहे थे।

खुदाई की रफ़्तार अब बढ़ने लगी थी। आर्यन ने मीरा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया। मीरा घुटनों के बल बैठ गई और आर्यन ने उसके सुडौल पिछवाड़े के बीच से अपने खीरे को दोबारा उसकी खाई में उतार दिया। यह अंदाज़ मीरा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। वह अपने कूल्हों को पीछे की ओर धकेल रही थी ताकि आर्यन का खीरा उसकी गहराई तक जा सके। पूरे कोच में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और मीरा की सिसकारियां गूँज रही थीं। आर्यन ने मीरा के दोनों तरबूजों को पीछे से पकड़ लिया और पागलों की तरह उसे खोदने लगा। वह पल सचमुच जादुई था जहाँ दो अजनबी एक दूसरे की रूह में समा रहे थे।

काफी देर तक सामने से और पीछे से खुदाई करने के बाद अब दोनों का रस निकलने की कगार पर था। आर्यन ने अपनी रफ़्तार को चरम पर पहुँचा दिया और मीरा की खाई के अंदर ही अपना सारा गरम रस छोड़ दिया। मीरा का बदन भी उसी समय बुरी तरह से कांपने लगा और उसकी खाई से भी रसों की धारा बह निकली। दोनों एक दूसरे के ऊपर ढेर हो गए और जोर-जोर से हांफने लगे। उनकी सांसें एक दूसरे के चेहरों पर टकरा रही थीं। कुछ मिनटों के सन्नाटे के बाद आर्यन ने मीरा को गले लगा लिया। मीरा की आँखों में अब एक सुकून था। इस अजनबी मुलाकात ने उन्हें एक ऐसा अनुभव दिया था जिसे वे ताउम्र नहीं भूल सकते थे। सुबह होने वाली थी और ट्रेन अपनी मंजिल की ओर बढ़ रही थी लेकिन उनकी वह रात हमेशा के लिए अमर हो गई थी।

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