जवां भाभी की चु@@ई—>
दोपहर का वह सन्नाटा घर की दीवारों में जैसे कैद हो गया था, खिड़की से छनकर आती सुनहरी धूप फर्श पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थी। मीरा भाभी अपनी रेशमी साड़ी के पल्लू को संभालते हुए अलमारी के ऊपरी खाने से कुछ सामान निकालने की कोशिश कर रही थीं, जिससे उनकी पतली कमर का घेरा और गहरा हो गया था। उनके बदन से उठती चमेली के तेल और पसीने की मिली-जुली महक पूरे कमरे में एक नशीला माहौल पैदा कर रही थी, जिसे महसूस करते ही अर्जुन के मन में हलचल मच गई। अर्जुन दरवाजे पर खड़ा होकर उन्हें निहार रहा था, उसकी धड़कनें तेज थीं और आँखों में एक अजीब सी प्यास थी जो बरसों से दबी हुई थी। मीरा भाभी की उम्र कोई अठ्ठाईस साल रही होगी, उनका शरीर एक सजी हुई मूरत की तरह था जिसमें हर मोड़ पर एक गहरी दास्तान छिपी हुई थी।
मीरा भाभी का शरीर किसी परिपक्व फल की तरह रसीला और गठा हुआ था, उनकी साड़ी के नीचे छिपे उनके भारी तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे जो किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थे। उनके पीछे का हिस्सा यानी उनका चौड़ा पिछवाड़ा साड़ी के महीन कपड़े में से अपनी पूरी गोलाई का अहसास करा रहा था, जिसे देखकर अर्जुन की सांसें भारी होने लगी थीं। उनके गोरे बदन पर पसीने की चंद बूंदें चमक रही थीं, जो उनकी गर्दन से फिसलकर उन गहरे तरबूजों के बीच की घाटी में समा रही थीं। भाभी के चेहरे पर एक भोलापन था, लेकिन उनकी आँखों में एक अनकही तड़प भी झलकती थी जो शायद उनके पति की लंबी अनुपस्थिति का परिणाम थी। अर्जुन ने गौर किया कि उनकी कमर के पास की त्वचा कितनी रेशमी और मुलायम लग रही थी, जिसे छूने के लिए उसका मन व्याकुल हो उठा था।
अर्जुन और मीरा के बीच हमेशा से एक अनकहा रिश्ता था, जो देवर-भाभी की मर्यादा के साथ-साथ एक गहरी दोस्ती और आकर्षण का मिश्रण था। वे घंटों साथ बैठकर बातें करते, एक-दूसरे की छोटी-छोटी जरूरतों का ख्याल रखते, लेकिन आज उस शांति में कुछ अलग ही कशिश महसूस हो रही थी। मीरा ने पलटकर अर्जुन की ओर देखा और उसकी आँखों में छिपे उस तूफान को भांप लिया, लेकिन उन्होंने नजरें नहीं चुराईं बल्कि एक धीमी मुस्कुराहट दी। उस मुस्कुराहट ने अर्जुन के दिल में दबी हिचक की आखिरी दीवार को भी ढहा दिया, और उसे लगा कि आज शब्द नहीं बल्कि स्पर्श बात करेंगे। उन दोनों के बीच एक ऐसा भावनात्मक खिंचाव था जिसने उन्हें समाज की बंदिशों से परे एक नई दुनिया की दहलीज पर ला खड़ा किया था।
जैसे-जैसे पल बीत रहे थे, कमरे की गर्माहट बढ़ने लगी और दोनों के बीच का आकर्षण एक चुंबकीय शक्ति में तब्दील हो गया जो उन्हें करीब खींच रहा था। अर्जुन धीरे-धीरे मीरा की ओर बढ़ा, उसके कदमों की आहट भी उस सन्नाटे में गूंज रही थी, और मीरा वहीं स्थिर खड़ी रहीं जैसे वे इसी लम्हे का इंतजार कर रही हों। जब अर्जुन उनके बिल्कुल करीब पहुँचा, तो उनकी साँसों की गर्माहट एक-दूसरे के चेहरों पर महसूस होने लगी, जिससे एक अजीब सी सिहरन पैदा हुई। मीरा की साँसें अब तेज चलने लगी थीं और उनके तरबूज ब्लाउज के अंदर जैसे कैद से आजाद होने को मचल रहे थे, जिससे उनकी उत्तेजना साफ झलक रही थी। उनके बीच अब कोई पर्दा नहीं था, बस एक तड़प थी जो बरसों की प्यास बुझाने के लिए बेकरार थी और एक नई कहानी लिखने को आतुर थी।
अर्जुन के मन में एक पल के लिए झिझक आई, समाज के नियमों और रिश्तों की मर्यादा का विचार कौंधा, लेकिन मीरा की नशीली आँखों ने उन सभी शंकाओं को शांत कर दिया। मीरा ने अपने हाथ अर्जुन के कंधों पर रखे, उनकी उंगलियां अर्जुन के शरीर की गर्मी को महसूस कर रही थीं, जिससे अर्जुन का आत्म-नियंत्रण पूरी तरह से खत्म होने लगा। उन्होंने एक-दूसरे की आँखों में झांका और पाया कि वहाँ सिर्फ और सिर्फ एक-दूसरे को पाने की तीव्र इच्छा ही शेष थी, कोई डर नहीं था। यह पल उनके लिए सिर्फ शारीरिक मिलन का नहीं, बल्कि दो अकेले रूहों के एक होने का जरिया बन रहा था, जिसमें शर्म का कोई स्थान नहीं बचा था। वे दोनों जानते थे कि यह रास्ता उन्हें कहाँ ले जाएगा, फिर भी उन्होंने कदम पीछे नहीं हटाए और खुद को उस प्रवाह में पूरी तरह से छोड़ दिया।
पहला स्पर्श बेहद कोमल और बिजली जैसा था, जब अर्जुन ने अपनी कांपती उंगलियों से मीरा की कमर को छुआ, तो मीरा के पूरे बदन में एक करंट सा दौड़ गया। उनकी आँखें बंद हो गईं और उनके मुंह से एक हल्की सी आह निकली, जो अर्जुन के लिए हरी झंडी की तरह थी, जिसने उसे और आगे बढ़ने का साहस दिया। अर्जुन ने धीरे से उनके होंठों को अपने करीब लाया और उनके मधुर रस का स्वाद चखने लगा, यह चुंबन इतना गहरा था कि वे दुनिया को पूरी तरह भूल गए। मीरा के हाथ अर्जुन के बालों में उलझ गए और वे उसे अपनी ओर और भी मजबूती से खींचने लगीं, जैसे वे चाहती हों कि वह उनके अंदर समा जाए। उस स्पर्श में एक भूख थी, एक ऐसी प्यास जो सदियों से बुझी नहीं थी और अब वह लावा बनकर बहने को तैयार थी।
धीरे-धीरे उत्तेजना अपनी चरम सीमा की ओर बढ़ने लगी, अर्जुन ने मीरा की साड़ी के पल्लू को धीरे से कंधे से सरकाया, जिससे उनके दूधिया तरबूज अपनी पूरी शान के साथ बाहर आ गए। उनके ऊपर छोटे-छोटे मटर की तरह उभरे हुए हिस्से अर्जुन के स्पर्श के लिए तड़प रहे थे, जिन्हें देखते ही अर्जुन की लार टपकने लगी। उसने अपने हाथों में उन भारी तरबूजों को भरा और उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा, जिससे मीरा के बदन में झटके लगने लगे और उनकी कराहें तेज हो गईं। अर्जुन ने अपने मुंह से उन मटरों को सहलाया और उन्हें चूसना शुरू किया, जिससे मीरा का निचला हिस्सा पानी छोड़ने लगा और उनकी खाई गीली होने लगी। कमरे का तापमान अब बहुत ऊपर जा चुका था और दोनों के कपड़े एक-दूसरे के रास्ते से पूरी तरह हट चुके थे, अब वे पूरी तरह निर्वस्त्र थे।
अर्जुन की नजर अब मीरा की उस गुप्त खाई पर पड़ी जहाँ काले रेशमी बाल उस खजाने की रक्षा कर रहे थे, जो अब पूरी तरह से रस से लथपथ हो चुकी थी। उसने अपनी उंगलियों से उस खाई को टटोलना शुरू किया और जैसे ही उसकी उंगली अंदर गई, मीरा ने कसकर अर्जुन को पकड़ लिया और अपना पिछवाड़ा हवा में उठा दिया। अर्जुन ने अपनी जुबान से उस खाई को चाटना शुरू किया, मीरा के रस का स्वाद इतना नशीला था कि वह और भी पागल होने लगा, उसकी जीभ खाई की गहराई नाप रही थी। मीरा अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी थीं, उनकी सांसें घोड़ों की तरह चल रही थीं और वे अर्जुन के सिर को अपनी खाई की तरफ और भी जोर से दबा रही थीं। वह जगह अब पूरी तरह से चिकनी और गर्म हो गई थी, जो अब अर्जुन के मुख्य औजार यानी उसके सख्त खीरे के स्वागत के लिए बेकरार थी।
अर्जुन ने अब अपना विशाल और कड़क खीरा बाहर निकाला जो अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा था, जिसे देखकर मीरा की आँखों में एक चमक और थोड़ा सा डर आ गया। उसने मीरा को बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को चौड़ा करके उनकी खाई के मुहाने पर अपना खीरा टिका दिया, जो अब रस से पूरी तरह भीगा हुआ था। जैसे ही उसने पहला धक्का लगाया, उसका आधा खीरा उस तंग खाई के अंदर समा गया और मीरा के मुंह से एक जोर की चीख निकली जो दर्द और आनंद का मिला-जुला रूप थी। उसने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई और पूरा खीरा जड़ तक अंदर डाल दिया, जिससे मीरा का पूरा बदन कांप उठा और उन्होंने अर्जुन को अपनी बाहों में जकड़ लिया। अब खुदाई की प्रक्रिया पूरी तेजी से शुरू हो चुकी थी, कमरे में मांस के टकराने की आवाजें और उनकी भारी सांसों का शोर गूंजने लगा था।
सामने से खुदाई करते हुए अर्जुन ने मीरा के दोनों तरबूजों को अपने हाथों में दबोच लिया था और वह पूरी ताकत से अपने खीरे को उस खाई की गहराई में उतार रहा था। मीरा हर धक्के के साथ अपने पिछवाड़े को ऊपर उठातीं ताकि वह खीरा उनकी कोख तक पहुँच सके, उन्हें वह अहसास पागल कर रहा था। अर्जुन ने उनके चेहरे को चूमते हुए अपनी गति और बढ़ा दी, वह अब किसी जंगली जानवर की तरह मीरा की खाई में हल चला रहा था, जिससे मीरा का रस अब बाहर बहने लगा था। मीरा का चेहरा पसीने से भीग चुका था और उनकी आँखों की पुतलियाँ ऊपर चढ़ गई थीं, वे बस एक ही बात रट रही थीं कि ‘और तेज, और गहरा खोदो’। यह खुदाई अब अपने उस मुकाम पर पहुँच रही थी जहाँ सब कुछ खत्म होकर एक नए सिरे से शुरू होने वाला था।
कुछ देर बाद अर्जुन ने मीरा को पलट दिया और उन्हें घुटनों के बल झुकाकर उनके पीछे की तरफ आ गया, जहाँ उनका भारी पिछवाड़ा अब खुदाई के लिए तैयार था। उसने पीछे से अपना खीरा फिर से उस गीली खाई में उतारा, यह अंदाज मीरा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर गया क्योंकि अब खीरा उनकी गहराई को एक अलग कोण से छू रहा था। पीछे से खुदाई करते हुए अर्जुन ने उनके तरबूजों को पीछे से पकड़ लिया और पूरी लय के साथ उन्हें ठोकने लगा, जिससे मीरा का पूरा शरीर आगे-पीछे डोल रहा था। उनकी कराहें अब ऊंचे सुरों में तब्दील हो गई थीं और वे बिस्तर की चादर को अपने हाथों से भींच रही थीं, हर धक्का उन्हें जन्नत की सैर करा रहा था। अर्जुन भी अब अपने चरम के करीब था, उसका खीरा अंदर की दीवारों से रगड़ खाकर अत्यधिक गर्म हो चुका था और वह फटने को तैयार था।
अंततः वह पल आ ही गया जब दोनों का सब्र जवाब दे गया, अर्जुन ने आखिरी कुछ धक्के इतनी जोर से लगाए कि उसका खीरा मीरा की खाई की आखिरी दीवार तक जा पहुँचा। उसी पल मीरा के बदन में एक जोरदार झनझनाहट हुई और उनकी खाई ने अर्जुन के खीरे को कसकर जकड़ लिया, और उनका रस फूटकर बाहर निकलने लगा। अर्जुन ने भी अपना सारा गरम रस मीरा की उस गहरी खाई के अंदर छोड़ दिया, जिससे मीरा को एक असीम सुख की अनुभूति हुई और वे बिस्तर पर ढीली पड़ गईं। दोनों काफी देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, उनके शरीरों से निकलता पसीना एक हो चुका था और उनकी धड़कनें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। उस खुदाई ने उनके बीच की बरसों की तड़प को शांत कर दिया था और उन्हें एक अनूठे सुकून से भर दिया था जो शब्दों से परे था।
खुदाई के बाद की वह हालत शब्दों में बयान करना मुश्किल था, मीरा का बिखरा हुआ काजल, उनकी अस्त-व्यस्त जुल्फें और चेहरे पर छाया वह सुकून उनकी संतुष्टि की गवाही दे रहा था। अर्जुन ने उनके माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया, जैसे वह उन्हें कभी खुद से दूर नहीं होने देना चाहता हो। उनके बीच अब एक नया रिश्ता कायम हो चुका था, जो सिर्फ देवर-भाभी का नहीं बल्कि दो ऐसे प्रेमियों का था जिन्होंने एक-दूसरे की रूह को छुआ था। कमरे में छाई वह शांति अब और भी गहरी और सुखद लग रही थी, जैसे कुदरत ने भी उनके इस मिलन को अपनी स्वीकृति दे दी हो। वे दोनों जानते थे कि यह एक नई शुरुआत है, एक ऐसी गुप्त दुनिया की जहाँ वे जब चाहें एक-दूसरे की बाहों में पनाह ले सकते थे।