सिमरन की ऑफिस में चु@@ई—>रात के दस बज चुके थे और ऑफिस की गगनचुंबी इमारत में सन्नाटा पसरा हुआ था। सिमरन, जो अपनी टीम की लीडर थी, अभी भी अपनी डेस्क पर बैठी फाइलों में उलझी हुई थी। सिमरन की उम्र लगभग बत्तीस साल थी, लेकिन उसकी काया किसी बीस साल की नवयौवना को मात देती थी। उसका शरीर सुडौल और गठा हुआ था, उसकी कमर इतनी पतली थी कि कोई भी उसे एक हाथ से घेर ले, लेकिन उसके नीचे का पिछवाड़ा काफी भारी और मांसल था जो टाइट स्कर्ट में और भी ज्यादा उभर कर आ रहा था। उसके सफेद रेशमी शर्ट के बटन उसके सीने पर कसे हुए थे, जहाँ उसके बड़े-बड़े तरबूज अपनी जगह बनाने के लिए छटपटा रहे थे। शर्ट का एक बटन गलती से खुला रह गया था, जिससे उसके गोरे तरबूजों की गहरी घाटी साफ नजर आ रही थी, जो किसी भी मर्द का ईमान डगमगाने के लिए काफी थी।
उसके बगल वाली केबिन में रोहन बैठा था, जो सिमरन का जूनियर था। रोहन काफी समय से सिमरन की खूबसूरती का कायल था, लेकिन ऑफिस की मर्यादा के कारण उसने कभी अपनी भावनाओं को प्रकट नहीं किया था। आज रात दोनों अकेले थे और माहौल में एक अजीब सी गर्मी और खिंचाव महसूस हो रहा था। रोहन ने देखा कि सिमरन बार-बार अपने बालों को कान के पीछे कर रही थी और उसकी साँसें कुछ तेज चल रही थीं। सिमरन का चेहरा थकान से थोड़ा लाल हो गया था, जिससे वह और भी ज्यादा कामुक लग रही थी। रोहन की नजरें बार-बार सिमरन के उन हिलते हुए तरबूजों पर जाकर टिक जाती थीं, जो उसकी हर हरकत के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके मन में एक अजीब सा द्वंद्व चल रहा था—एक तरफ ऑफिस का डर और दूसरी तरफ सिमरन के प्रति उसकी असीमित प्यास।
सिमरन ने अचानक रोहन को अपने पास बुलाया। जब रोहन उसके करीब गया, तो उसे सिमरन के शरीर से आने वाली महंगी परफ्यूम और पसीने की मिली-जुली एक नशीली खुशबू आई। सिमरन ने अपनी कुर्सी पीछे घुमाई और रोहन की ओर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेताबी थी। उसने धीमे स्वर में कहा, ‘रोहन, ये काम तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा, मुझे बहुत थकान महसूस हो रही है।’ बात करते समय उसके होंठ आपस में टकरा रहे थे, जिससे रोहन का ध्यान भटक रहा था। रोहन ने हिम्मत जुटाकर कहा, ‘मैम, आपको आराम करना चाहिए, क्या मैं आपके कंधों की मालिश कर दूँ?’ सिमरन ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें मूँद लीं और धीरे से सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी।
रोहन के हाथ जैसे ही सिमरन के कंधों पर पड़े, दोनों के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। रोहन के हाथों का स्पर्श सिमरन की मखमली त्वचा पर बहुत सुखद लग रहा था। धीरे-धीरे रोहन ने अपनी उंगलियों को नीचे की ओर सरकाया और सिमरन की गर्दन के पीछे सहलाने लगा। सिमरन के मुँह से एक हल्की सी आह निकली, जो बंद कमरे में गूँज उठी। रोहन का आत्मविश्वास बढ़ गया और उसने अपने हाथों को सिमरन के शर्ट के ऊपर से ही उसके विशाल तरबूजों की ओर बढ़ाया। जैसे ही उसकी उंगलियों ने उन तरबूजों के ऊपरी हिस्से को छुआ, सिमरन की साँसें उखड़ गईं। उसने रोहन का हाथ हटाने के बजाय उसे और जोर से अपने सीने पर दबा लिया। माहौल अब पूरी तरह से बदल चुका था, झिझक की दीवारें ढहने लगी थीं।
सिमरन ने रोहन को अपनी ओर खींचा और उसके होंठों को चखना शुरू कर दिया। उन दोनों के बीच एक गहरा और रसीला मिठास का आदान-प्रदान होने लगा। रोहन ने सिमरन के शर्ट के बटनों को एक-एक कर खोलना शुरू किया। जैसे ही शर्ट खुली, सिमरन के भारी और गोरे तरबूज काली ब्रा से बाहर झाँकने लगे। रोहन ने अपनी जीभ से सिमरन की गर्दन से लेकर उसके तरबूजों के बीच की घाटी तक का सफर तय किया। सिमरन कराह उठी और उसने रोहन के बालों को अपनी उंगलियों में जकड़ लिया। रोहन ने अब अपने मुँह में उन तरबूजों के ऊपर लगे छोटे-छोटे मटरों को ले लिया और उन्हें धीरे-धीरे चूसने लगा। मटरों के कड़ेपन ने सिमरन को और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया और उसने रोहन की पैंट की चैन को खोलने के लिए अपने हाथ बढ़ा दिए।
जैसे ही पैंट की चैन खुली, रोहन का सख्त और गर्म खीरा बाहर निकल आया। सिमरन की आँखें उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर फटी की फटी रह गईं। उसने तुरंत अपना हाथ बढ़ाकर उस गर्म खीरे को अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया और उसे ऊपर-नीचे सहलाने लगी। सिमरन ने बिना देरी किए अपना सिर नीचे झुकाया और उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया। वह बड़े ही चाव से उस खीरे को चूसने लगी, जैसे वह दुनिया की सबसे स्वादिष्ट फल का स्वाद ले रही हो। रोहन के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह स्वर्ग के दरवाजे पर खड़ा हो। सिमरन की जीभ जब खीरे के ऊपरी हिस्से पर फिरती, तो रोहन का पूरा शरीर काँप उठता था।
अब सिमरन पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकी थी। उसने अपनी स्कर्ट और जाँघिया उतार फेंकी थी। उसकी रेशमी और चिकनी जाँघों के बीच उसकी गहरी और गुलाबी खाई अब पूरी तरह से सामने थी। उस खाई पर छोटे-छोटे काले बाल थे जो उसे और भी जंगली लुक दे रहे थे। रोहन ने सिमरन को टेबल पर लिटा दिया और उसकी जाँघों को चौड़ा करके उसकी खाई को अपनी जीभ से साफ करना शुरू किया। सिमरन अपनी कमर ऊपर की ओर झटका देने लगी, क्योंकि रोहन की जीभ उसकी खाई के संवेदनशील हिस्सों को सहला रही थी। खाई से अब रस बहने लगा था, जो रोहन के मुँह के चारों ओर लग गया था। सिमरन की कराहें अब ऑफिस की दीवारों से टकराकर गूँज रही थीं।
रोहन ने अब अपनी उंगली से उस खाई में खुदाई शुरू की। जैसे ही उसने एक उंगली अंदर डाली, उसे महसूस हुआ कि सिमरन अंदर से कितनी तंग और गर्म है। सिमरन ने अपनी टांगें रोहन के कंधों पर रख दीं और उसे और गहराई से खोदने के लिए उकसाने लगी। रोहन ने अब दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं और उन्हें तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। सिमरन का शरीर पसीने से भीग चुका था और उसकी आँखों में केवल वासना का समंदर था। उसने रोहन को खींचकर अपने ऊपर किया और कहा, ‘रोहन, अब और नहीं, प्लीज अपना ये गरम खीरा मेरी इस प्यासी खाई में डाल दो, मैं फटने वाली हूँ।’ रोहन ने भी अब और इंतज़ार करना ठीक नहीं समझा।
रोहन ने अपने खीरे को सिमरन की रसीली खाई के मुहाने पर टिकाया। सिमरन की खाई इतनी गीली थी कि खीरा आसानी से अंदर जाने के लिए तैयार था। जैसे ही रोहन ने एक जोरदार धक्का मारा, खीरा आधा सिमरन की तंग खाई के अंदर समा गया। सिमरन के मुँह से एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम आनंद की थी। उसने रोहन को कसकर अपनी बाहों में भर लिया। रोहन ने अब धीमी गति से खुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ सिमरन के बड़े-बड़े तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और रोहन के सीने से टकरा रहे थे। कमरे में केवल मांस के मांस से टकराने की आवाज़ और दोनों की तेज साँसों का शोर था। खुदाई की गति अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी।
रोहन अब सिमरन को पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार था। उसने सिमरन को टेबल पर हाथों के बल झुकने को कहा। सिमरन का भारी पिछवाड़ा अब रोहन के सामने था। रोहन ने पीछे से अपना खीरा फिर से उस गहरी खाई में उतारा। इस पोजीशन में खुदाई और भी ज्यादा गहरी और असरदार हो रही थी। सिमरन बार-बार ‘ओह रोहन, हाँ वहीं, और जोर से खोदो’ चिल्ला रही थी। रोहन के धक्के इतने जबरदस्त थे कि सिमरन का पूरा शरीर थरथरा रहा था। रोहन ने सिमरन के बालों को पीछे से पकड़ा और उसके कानों में कामुक बातें करने लगा, जिससे सिमरन की उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुँच गई। उसकी खाई अब पूरी तरह से रोहन के खीरे को जकड़ चुकी थी।
खुदाई की गति अब अपने चरम पर थी। रोहन और सिमरन दोनों का शरीर पसीने से लथपथ था, लेकिन उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं थी। सिमरन की खाई अब तेजी से सिकुड़ने लगी थी, जो इस बात का संकेत था कि उसका रस निकलने वाला है। रोहन ने भी अपनी गति को और तेज कर दिया, वह अपनी पूरी ताकत से सिमरन की खाई को खोद रहा था। अचानक सिमरन ने एक लंबी कराह भरी और उसका शरीर पूरी तरह से अकड़ गया, उसकी खाई से रस का फव्वारा छूट पड़ा। ठीक उसी समय, रोहन ने भी अपना सारा गरम लावा सिमरन की खाई की गहराइयों में उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए टेबल पर ही ढेर हो गए।
काफी देर तक दोनों की साँसें तेज चलती रहीं। सन्नाटे में केवल उनके दिल की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। सिमरन ने अपना सिर रोहन के कंधे पर रख दिया, उसके चेहरे पर एक गहरी संतुष्टि और सुकून का भाव था। रोहन ने सिमरन के माथे को चूमा और उसे धीरे से सहलाया। इस खुदाई के बाद दोनों के बीच का रिश्ता अब केवल बॉस और कर्मचारी का नहीं रह गया था, बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी पैदा हो गया था। सिमरन ने धीरे से कहा, ‘शुक्रिया रोहन, आज तुमने मुझे वो महसूस कराया जो सालों से अधूरा था।’ रोहन ने मुस्कुराते हुए उसे और कसकर पकड़ लिया।
अगले कुछ मिनटों तक वे वैसे ही रहे, पसीने और प्रेम की खुशबू में डूबे हुए। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपने कपड़े व्यवस्थित किए। ऑफिस का वह केबिन अब एक पवित्र गवाह बन चुका था उनकी उस गुप्त मुलाकात का। सिमरन ने अपने तरबूजों को वापस शर्ट के अंदर छुपाया और अपनी स्कर्ट ठीक की। रोहन ने भी अपनी पैंट पहन ली। जब वे ऑफिस से बाहर निकले, तो ठंडी हवा ने उनके गर्म शरीरों को छुआ, लेकिन उनके अंदर की आग अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुई थी। उन्हें पता था कि यह तो बस शुरुआत है और भविष्य में ऐसी कई और खुदाई की रातें उनका इंतज़ार कर रही हैं।
घर जाते समय सिमरन की आँखों में वही चमक थी जो पहले थकान के पीछे छुपी थी। रोहन ने उसे उसकी गाड़ी तक छोड़ा और विदा लेते समय एक आखिरी बार उसके होंठों की मिठास चखी। सिमरन ने कार स्टार्ट की और एक बार पीछे मुड़कर रोहन को देखा, उसकी आँखों में एक वादा था। रोहन भी अपनी बाइक पर बैठकर मुस्कुरा रहा था, उसे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बॉस अब उसकी सबसे करीबी बन चुकी थी। वह रात उन दोनों के जीवन की सबसे यादगार रातों में से एक बन गई थी, जहाँ मर्यादाओं की सीमाएँ पार हुई थीं और केवल शरीर और आत्मा का मिलन हुआ था।