नेहा मेरी पुरानी ट्यूशन टीचर थी, जिससे मैं लगभग पांच साल बाद मिल रहा था। वह शहर के एक शांत कोने में अपने फ्लैट में अकेली रहती थी और आज जब मैं उसके घर पहुँचा, तो बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। उसकी आवाज़ में वही पुरानी मिठास थी, लेकिन उसकी आँखों में अब एक अजीब सी गहराई और तड़प साफ नज़र आ रही थी। मैंने उसे नमस्ते किया और उसने मुझे अंदर बुला लिया, जहाँ कमरे की हल्की रोशनी में वह और भी हसीन लग रही थी।
नेहा ने एक गहरी नीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जिसका गला काफी गहरा था और उसके दोनों बड़े-बड़े रसीले तरबूज उस ब्लाउज से बाहर झाँकने के लिए बेताब दिख रहे थे। उसका शरीर पहले से कहीं ज्यादा गठीला और कामुक हो गया था, जिसे देखकर मेरे मन में हलचल मच गई। उसके तरबूज के ऊपर छोटे-छोटे मटर जैसे उभार साफ दिखाई दे रहे थे, जो शायद ठंड की वजह से या मेरी मौजूदगी के कारण सख्त हो गए थे। उसकी पतली कमर और चौड़े पिछवाड़े का मेल उसे किसी अप्सरा जैसा बना रहा था।
हम दोनों सोफे पर बैठकर पुरानी यादें ताज़ा करने लगे, लेकिन मेरा ध्यान उसकी बातों से ज्यादा उसके हिलते हुए तरबूजों पर था। नेहा ने महसूस कर लिया था कि मैं उसे किस नज़र से देख रहा हूँ, उसने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा और खिसका दिया, जिससे उसके गोरे और विशाल तरबूज का काफी हिस्सा नज़र आने लगा। वह मुझसे बहुत प्यार से बात कर रही थी, और उस बातचीत में एक अजीब सी कामुकता घुली हुई थी। वह बार-बार अपनी उँगलियों से अपने बालों को पीछे करती, जिससे उसकी गर्दन की खुशबू मुझ तक पहुँच रही थी।
अचानक बिजली चली गई और कमरे में अंधेरा छा गया, सिर्फ खिड़की से आती हल्की रोशनी ही सहारा थी। नेहा थोड़ा डरने का नाटक करते हुए मेरे करीब आ गई और उसका हाथ मेरे कंधे पर टिक गया। उस स्पर्श ने मेरे शरीर में बिजली दौड़ा दी और मेरा खीरा धीरे-धीरे अपनी जगह से ऊपर उठने लगा। मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर पर रखा, जो बेहद नरम और रेशमी महसूस हो रही थी। हम दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं और कमरे में सिर्फ हमारी धड़कनों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।
मैंने उसे अपनी ओर खींचा और उसके रसीले होंठों का स्वाद लेना शुरू किया, जैसे कोई भूखा इंसान किसी फल का रस पीता है। वह भी मेरा साथ देने लगी और अपनी जुबान से मेरे मुँह के अंदर खुदाई करने लगी। मेरे हाथ उसके भारी तरबूजों पर पहुँच गए और मैंने उन्हें धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। नेहा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली और उसने मेरे खीरे को अपनी साड़ी के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया। उसकी इस हरकत ने मेरी उत्तेजना को चरम पर पहुँचा दिया था।
मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया, जहाँ बेड पर लिटाते ही मैंने उसके सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जब वह पूरी तरह नग्न हुई, तो उसकी सुंदरता देख कर मैं दंग रह गया। उसकी रेशमी खाई के आसपास काले-काले छोटे बाल थे जो उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे। मैंने झुककर उसके तरबूजों को अपने मुँह में भर लिया और उनके मटर को अपनी जुबान से सहलाने लगा। नेहा कराहते हुए मेरे सिर को अपने तरबूजों की ओर और जोर से दबाने लगी।
अब बारी उसकी रेशमी खाई की थी, मैंने नीचे झुककर उसकी गहरी खाई को अपनी जुबान से चाटना शुरू किया। नेहा की खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस मेरे मुँह के जायके को और बढ़ा रहा था। वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींच रही थी और उसका पूरा शरीर कांप रहा था। मैंने अपनी उंगली से उसकी खाई में खुदाई शुरू की, जिससे वह और भी ज्यादा उत्तेजित होकर अपना पिछवाड़ा हवा में उठाने लगी। वह बस अब पूरी खुदाई के लिए तड़प रही थी।
उसने मेरा खीरा अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी, फिर धीरे से उसने मेरे खीरे को अपने मुँह में ले लिया। वह जिस तरह से मेरे खीरे को चूस रही थी, मुझे लगा कि मेरा रस अभी निकल जाएगा। उसके मुँह की गर्मी और उसकी जुबान का जादू मेरे खीरे को और भी सख्त और लंबा बना रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे इशारा किया कि अब वह और इंतज़ार नहीं कर सकती, उसे अपने अंदर मेरा पूरा खीरा महसूस करना था।
मैंने उसे सामने से खोदना (missionary) शुरू किया। जैसे ही मेरा सख्त खीरा उसकी तंग और गीली खाई के अंदर गया, हम दोनों के मुँह से एक साथ आह निकली। उसकी खाई इतनी गर्म और तंग थी कि हर धक्का मुझे स्वर्ग जैसा एहसास करा रहा था। मैं धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाने लगा और हर बार अपना पूरा खीरा उसकी खाई की गहराई तक उतारने लगा। नेहा की आँखों में आँसू और चेहरे पर चरम सुख की मुस्कान थी, वह बार-बार मेरा नाम पुकार रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उसे पलटा और उसके पिछवाड़े से खोदना (doggy style) शुरू किया। पीछे से उसके चौड़े पिछवाड़े को थपकी मारते हुए जब मैं अपना खीरा उसकी खाई में डालता, तो उसकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज उठती। उसके तरबूज नीचे की ओर लटक रहे थे और मैं उन्हें अपने हाथों में भरकर जोर-जोर से दबा रहा था। खुदाई की आवाज़ और हमारे पसीने की खुशबू ने माहौल को पूरी तरह से जंगली बना दिया था। वह बार-बार कह रही थी, ‘और जोर से खोदो, मुझे पूरा भर दो।’
हमारी खुदाई अब अपने आखिरी पड़ाव पर थी। हम दोनों का पसीना एक-दूसरे के शरीर से मिल रहा था। मैंने उसे फिर से सीधा लिटाया और अपनी पूरी ताकत से उसे खोदना शुरू किया। नेहा के पैरों ने मेरी कमर को कस लिया था और वह जोर-जोर से हाँफ रही थी। अचानक मुझे महसूस हुआ कि अब मेरा रस छूटने वाला है, और ठीक उसी समय नेहा की खाई ने भी अपना पूरा रस छोड़ दिया। हम दोनों एक साथ चरम सुख पर पहुँचे और मेरा सारा सफेद रस उसकी गहरी खाई के अंदर समा गया।
खुदाई खत्म होने के बाद हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में सिमट कर लेट गए। नेहा का चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और उसके तरबूज अब शांत थे, लेकिन उनकी मटर अभी भी सख्त थी। उसने मेरे माथे को चूमा और कहा कि उसे आज तक ऐसा सुख कभी नहीं मिला। हम दोनों का शरीर थक चुका था, लेकिन मन बहुत संतुष्ट था। वह रात हमारी ज़िंदगी की सबसे यादगार रात बन गई थी, जहाँ एक टीचर और स्टूडेंट के बीच के सारे बंधन टूट कर सिर्फ प्यार और खुदाई का रिश्ता रह गया था।