Join WhatsApp Click Here
Join Telegram Click Here

जवान चाची की चु@@ई

जवान चाची की चु@@ई —> दोपहर का वक्त था और पूरा घर सन्नाटे में डूबा हुआ था, सिवाय मीना चाची के कमरे से आती हल्की सी आवाज के। मीना चाची की उम्र पैंतीस के आसपास रही होगी, लेकिन उनके बदन की बनावट आज भी किसी भी पुरुष का मन विचलित करने के लिए काफी थी। उनकी साड़ी के पल्लू से झांकते हुए वे भरे हुए और रसीले तरबूज समीर की आंखों में हर वक्त बसे रहते थे। समीर, जो उनका सगा भतीजा नहीं था बल्कि दूर के रिश्ते में आता था, पिछले कुछ दिनों से उन्हीं के घर पर रुका हुआ था और उसकी नजरें अक्सर चाची के उन भारी भरकम अंगों पर जाकर टिक जाती थीं।

मीना चाची की काया सचमुच किसी अप्सरा जैसी थी, खासकर उनका वह चौड़ा और गदराया हुआ पिछवाड़ा, जो साड़ी के भीतर भी अपनी मौजूदगी का अहसास कराता रहता था। उनके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी और जब वह बात करती थीं, तो उनके होंठों की थिरकन समीर के भीतर एक अजीब सी आग लगा देती थी। उस दिन चाची ने गहरे नीले रंग की पतली सी शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके गोरे बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी। समीर ने देखा कि चाची अलमारी के ऊपर कुछ सामान रखने की कोशिश कर रही थीं, जिससे उनके तरबूज ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे।

समीर धीरे से कमरे के भीतर दाखिल हुआ और चाची की मदद करने के बहाने उनके करीब खड़ा हो गया। जैसे ही उसने हाथ ऊपर बढ़ाया, उसका शरीर चाची के नरम बदन से स्पर्श कर गया। वह पहला स्पर्श किसी बिजली के झटके जैसा था, जिसने दोनों के भीतर सोई हुई इच्छाओं को जगा दिया। समीर को महसूस हुआ कि चाची के शरीर से एक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी। चाची ने मुड़कर समीर की तरफ देखा, उनकी आंखों में एक अजीब सी ललक और झिझक का मिला-जुला भाव था, लेकिन उन्होंने खुद को पीछे नहीं हटाया। समीर ने साहस जुटाया और अपना हाथ चाची की कमर पर रख दिया, जहां से उनकी रेशमी त्वचा साड़ी के नीचे से झलक रही थी।

चाची की सांसें तेज होने लगी थीं और उनकी छाती ऊपर-नीचे होने लगी, जिससे उन रसीले तरबूज के ऊपर लगे हुए छोटे-छोटे मटर ब्लाउज के कपड़े के ऊपर ही साफ उभर आए थे। समीर ने धीरे से अपना चेहरा चाची की गर्दन के पास ले जाकर उनके कान के पीछे गर्म सांसें छोड़ीं। चाची के मुंह से एक धीमी सी आह निकली और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं। समीर का हाथ अब चाची की साड़ी के भीतर रेंग रहा था और उसने धीरे से उनके उन कोमल अंगों को अपनी हथेलियों में भर लिया। चाची ने समीर के बालों में अपनी उंगलियां फंसा दीं और उसे अपने और करीब खींच लिया, मानो उनकी बरसों की प्यास अब बांध तोड़ रही हो।

समीर ने अब और देरी न करते हुए चाची के होंठों को अपने कब्जे में ले लिया और उनका रसपान करने लगा। कमरे की गर्मी अब बढ़ने लगी थी और दोनों के शरीर पसीने से भीगने लगे थे। समीर ने धीरे-धीरे चाची के कपड़े उतारने शुरू किए, और जब चाची पूरी तरह से निर्वस्त्र हुईं, तो समीर की आंखें फटी की फटी रह गईं। उनके शरीर का हर हिस्सा कामुकता की कहानी कह रहा था। समीर ने देखा कि चाची की वह गहरी और रहस्यमयी खाई अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से प्यार का रस रिस रहा था। चाची ने भी समीर के कपड़े उतार फेंके और उसका वह कड़क और लंबा खीरा देखकर उनके मुंह से एक ठंडी आह निकली।

समीर ने चाची को बिस्तर पर लिटाया और उनके पैरों को फैलाकर उस गहरी खाई का मुआयना करने लगा। वह जगह इतनी सुंदर और आमंत्रित करने वाली थी कि समीर खुद को रोक नहीं पाया। उसने झुककर अपनी जुबान से उस खाई को चाटना शुरू किया। चाची बिस्तर पर तड़पने लगीं और उनके हाथ समीर के सिर को अपनी खाई की तरफ और जोर से दबाने लगे। समीर ने जब अपनी उंगली से उस खाई में खुदाई शुरू की, तो चाची का शरीर धनुष की तरह तन गया और उनके मुंह से सिसकियां निकलने लगीं। चाची ने समीर का हाथ पकड़कर उसे अपने खीरे की तरफ इशारा किया, जो अब पूरी तरह से खुदाई के लिए तैयार हो चुका था।

समीर ने अपना वह फन फैलाए हुए खीरे को चाची की गहरी खाई के द्वार पर रखा। जैसे ही उसने हल्का सा दबाव डाला, चाची के मुंह से एक दर्द भरी लेकिन आनंददायक चीख निकली। वह खाई काफी तंग थी, लेकिन समीर के प्यार के रस ने उसे अब फिसलन भरा बना दिया था। समीर ने धीरे-धीरे उस खाई में खुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ चाची के तरबूज हवा में उछलते और समीर के सीने से टकराते। चाची ने समीर को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया था और उनकी टांगें समीर की कमर के चारों ओर लिपट गई थीं। कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाजें और उनकी गहरी सांसों का शोर गूंज रहा था।

खुदाई की गति अब धीरे-धीरे तेज होने लगी थी। समीर ने चाची को घुमाया और उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया, जिससे उनका वह विशाल पिछवाड़ा समीर के सामने था। समीर ने पीछे से खुदाई करना शुरू किया, और यह अंदाज चाची को और भी ज्यादा मदहोश कर गया। चाची का पिछवाड़ा हर धक्के के साथ थरथरा रहा था और समीर का खीरा पूरी गहराई तक उस खाई को नाप रहा था। चाची के मुंह से अब बेतहाशा आवाजें निकल रही थीं, वह समीर को और जोर से खोदने के लिए उकसा रही थीं। समीर की मेहनत अब रंग ला रही थी और दोनों का शरीर चरम आनंद की ओर बढ़ रहा था।

अंततः, वह क्षण आ ही गया जब दोनों की बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो गई। समीर ने अपनी खुदाई की रफ्तार को चरम पर पहुंचा दिया और चाची की खाई के भीतर अपने खीरे से सारा रस छोड़ दिया। उसी वक्त चाची का भी रस निकल गया और वह निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ीं। दोनों के जिस्म पसीने से लथपथ थे और सांसें अभी भी तेज थीं। समीर ने चाची को पीछे से गले लगा लिया और वे दोनों उसी हालत में काफी देर तक पड़े रहे। उस दोपहर की उस गुप्त खुदाई ने उनके बीच एक ऐसा रिश्ता बना दिया था, जिसकी कल्पना उन दोनों ने कभी नहीं की थी। चाची के चेहरे पर अब एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी और समीर को अपनी मर्दानगी पर गर्व महसूस हो रहा था।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page