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बर्फीली रात और जज्बातों की तपन

पहाड़ों की उस ऊँची चोटी पर बनी लकड़ी की कोठरी में बाहर बर्फ की चादर बिछी थी, लेकिन भीतर जज्बातों की एक अलग ही आग सुलग रही थी। राघव और अवनि पिछले दो सालों से एक-दूसरे के सहकर्मी थे, पर आज इस एकांत में उनके बीच की पेशेवर दीवारें धीरे-धीरे ढह रही थीं। अवनि ने … Read more

ऑफिस वाली गरम चु@@ई

रात के ग्यारह बज चुके थे और ऑफिस की विशाल इमारत में सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ हमारी केबिन की लाइट्स जल रही थीं क्योंकि प्रोजेक्ट की डेडलाइन सुबह की थी। प्रिया मेरे बगल वाली मेज पर बैठी लगातार टाइपिंग कर रही थी। वह आज बहुत ही आकर्षक लग रही थी, उसने एक तंग सफेद … Read more

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