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गरम चाची की रसीली चु@@ई

दोपहर की चिलचिलाती धूप में पूरा मोहल्ला एक गहरी नींद में सोया हुआ था, लेकिन आर्यन के मन में एक अजीब सी उत्तेजना और हलचल मची हुई थी। वह अपनी मीरा चाची के घर की सीढ़ियां बहुत ही धीरे-धीरे चढ़ रहा था, जहाँ चारों तरफ शांति का सन्नाटा पसरा हुआ था। मीरा चाची अपने पति … Read more

मास्टर जी संग चु@@ई

मास्टर जी संग चु@@ई—>स्नेहा ने जब समीर की बुटीक के अंदर कदम रखा, तो बाहर का तापमान भले ही कम था, लेकिन दुकान के अंदर की आबोहवा अचानक से भारी होने लगी थी। स्नेहा एक बेहद खूबसूरत और गदराए हुए शरीर वाली महिला थी, जिसकी उम्र करीब बत्तीस साल थी, लेकिन उसका आकर्षण किसी भी … Read more

पड़ोसी भाभी की चु@@ई

पड़ोसी भाभी की चु@@ई —> दोपहर का वक्त था और सूरज अपनी पूरी तपिश के साथ आसमान से आग बरसा रहा था, जिसकी वजह से गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। मैं अपने कमरे में लेटा हुआ खिड़की से बाहर देख रहा था, जहाँ सामने वाली छत पर सुनीता भाभी गीले कपड़े सुखा रही थीं। … Read more

प्यास और रसीली भाभी की चु@@ई

दोपहर का वक्त था और सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था, लेकिन मीरा के घर के भीतर का माहौल बाहर की गर्मी से कहीं ज्यादा तप्त और उत्तेजनापूर्ण बना हुआ था। मीरा, जिसकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी, अपने भरे हुए बदन और गोरे रंग की वजह से पूरे मोहल्ले की धड़कन थी, उसके … Read more

प्यारी मौसी की चु@@ई

गर्मियों की वह दोपहर आज भी आर्यन के जेहन में उतनी ही ताज़ा है जितनी वह उस वक्त थी जब वह अपनी मीना मौसी के घर छुट्टियों बिताने गया था। मीना मौसी, जिनकी उम्र करीब अड़तीस साल थी, अपनी ढलती जवानी के बावजूद किसी भी युवा लड़की को मात देने का दम रखती थीं। उनके … Read more

प्यारी मौसी की चु@@ई

गर्मियों की वह दोपहर आज भी आर्यन के जेहन में उतनी ही ताज़ा है जितनी वह उस वक्त थी जब वह अपनी मीना मौसी के घर छुट्टियों बिताने गया था। मीना मौसी, जिनकी उम्र करीब अड़तीस साल थी, अपनी ढलती जवानी के बावजूद किसी भी युवा लड़की को मात देने का दम रखती थीं। उनके … Read more

मामी की रसीली चु@@ई—>

  मामी की रसीली चु@@ई—>गर्मी की वे सुनहरी दोपहरें आज भी मेरे जहन में किसी ताज़ा जख्म और मीठी याद की तरह बसी हुई हैं जब मैं अपने मामा के घर छुट्टियां बिताने गया था। गाँव का वह बड़ा सा पुश्तैनी मकान जहाँ सन्नाटा भी अपनी एक अलग ही भाषा बोलता था और हवाओं में … Read more

बचपन की यार और मदहोश चु@@ई

समीर और मीनाक्षी की मुलाकात करीब दस सालों के बाद उस पुराने फार्महाउस के सुनसान बगीचे में हो रही थी जहाँ कभी वे बचपन में छुपम-छुपाई खेला करते थे। मीनाक्षी अब पहले जैसी दुबली-पतली लड़की नहीं रही थी बल्कि वह एक परिपक्व और बेहद आकर्षक महिला बन चुकी थी जिसकी देह का हर कोना वासना … Read more

मामी की रसीली चु@@ई

मामी की रसीली चु@@ई—>गर्मी की वे सुनहरी दोपहरें आज भी मेरे जहन में किसी ताज़ा जख्म और मीठी याद की तरह बसी हुई हैं जब मैं अपने मामा के घर छुट्टियां बिताने गया था। गाँव का वह बड़ा सा पुश्तैनी मकान जहाँ सन्नाटा भी अपनी एक अलग ही भाषा बोलता था और हवाओं में मिट्टी … Read more