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जवान भाभी की चु@@ई

जवान भाभी की चु@@ई—> दोपहर की उस तपती हुई खामोशी में मीरा अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी बाहर के सन्नाटे को देख रही थी। मीरा की उम्र करीब बत्तीस साल थी और उसका शरीर किसी तराशे हुए संगमरमर की मूर्ति की तरह सुडौल और भरा हुआ था। उसने एक झीनी सी सूती हरी … Read more

चू@@ में फंसा बैंगन कंपाउंडर ने निकाला

 एक छोटे से उत्तर भारतीय गाँव की कहानी है, जहाँ सुबह की धूप में खेतों की हरियाली चमकती और शाम को नदी किनारे की हवा में मिट्टी की सोंधी महक और बाँसुरी की धुन घुली रहती। वहाँ एक साधारण झोपड़ी में रहती थीं सरिता, उम्र में तैंतीस साल की एक विवाहित महिला – गोरी त्वचा … Read more

मस्त भाभी की रसीली चु@@ई

दोपहर की उस सुनसान घड़ी में पूरा घर एक अजीब सी खामोशी में डूबा हुआ था। सूरज की तपिश खिड़की के पर्दों को चीरकर अंदर आ रही थी और कमरे के माहौल को और भी भारी बना रही थी। सीमा भाभी, जिनकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी, सोफे पर बैठी पसीने की बूंदों को अपने … Read more

ऑफिस की वो आखिरी रात का जुनून

ऑफिस की गगनचुंबी इमारत की दसवीं मंजिल पर स्थित उस केबिन में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था और सिर्फ एयर कंडीशनर की हल्की सी घरघराहट सुनाई दे रही थी। अर्जुन अपनी मेज पर बैठा लैपटॉप पर नजरें गड़ाए हुए था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार सामने वाले केबिन की कांच की दीवार के पार जा … Read more

अजनबी शहर की वो मदहोश रात और मीरा का साथ

अजनबी शहर की वो मदहोश रात और मीरा का साथ—>रात के ग्यारह बज चुके थे और मुंबई के उस आलीशान होटल के रिसेप्शन पर भारी भीड़ थी क्योंकि मूसलाधार बारिश की वजह से सारी उड़ानें रद्द हो गई थीं। राहुल अपनी ब्रीफकेस थामे खड़ा था तभी उसकी नजर मीरा पर पड़ी जो एक गहरे नीले … Read more

मखमली रात की प्यासी खुदाई

मखमली रात की प्यासी खुदाई —> रात के ग्यारह बज चुके थे और पूरे घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। समीर अपने कमरे में लेटा हुआ खिड़की से बाहर देख रहा था, लेकिन उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। उसकी भाभी, रीना, जिसकी उम्र लगभग 34 वर्ष थी, आज घर में अकेली थी … Read more

ऑफिस के सन्नाटे में पिघलती मर्यादा की रेशमी दीवारें

  ऑफिस के सन्नाटे में पिघलती मर्यादा की रेशमी दीवारें—> रात के ग्यारह बज चुके थे और मुंबई की गगनचुंबी इमारतों के बीच स्थित उस कॉर्पोरेट ऑफिस की चौदहवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था। केबिन की कांच की खिड़कियों से बाहर शहर की लाइटें किसी टिमटिमाते जुगनू की तरह लग रही थीं, लेकिन केबिन … Read more

ऑफिस के सन्नाटे में पिघलती मर्यादा की रेशमी दीवारें

ऑफिस के सन्नाटे में पिघलती मर्यादा की रेशमी दीवारें—> रात के ग्यारह बज चुके थे और मुंबई की गगनचुंबी इमारतों के बीच स्थित उस कॉर्पोरेट ऑफिस की चौदहवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था। केबिन की कांच की खिड़कियों से बाहर शहर की लाइटें किसी टिमटिमाते जुगनू की तरह लग रही थीं, लेकिन केबिन के … Read more

जिम की तन्हाई और पुराने प्यार की मिठास

जिम की तन्हाई और पुराने प्यार की मिठास—>जिम की वो शाम बाकी शामों से बिल्कुल अलग थी क्योंकि उस समय वर्कआउट करने वाले लगभग सभी लोग जा चुके थे और सिर्फ मैं और सिमरन ही वहां बचे थे। सिमरन, जो कॉलेज के दिनों में मेरी सबसे अच्छी दोस्त हुआ करती थी और जिस पर मेरा … Read more

दोपहर की खामोशी और चाहत की अनकही दास्तान

  उस उमस भरी दोपहर में पूरा घर गहरी नींद में डूबा हुआ था, लेकिन आर्यन की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। वह अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा होकर बाहर की गर्मी को देख रहा था, लेकिन उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। बगल के कमरे में उसकी चाची, … Read more