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दोपहर की खामोशी और चाहत की अनकही दास्तान

दोपहर की खामोशी और चाहत की अनकही दास्तान—>उस उमस भरी दोपहर में पूरा घर गहरी नींद में डूबा हुआ था, लेकिन आर्यन की आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। वह अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा होकर बाहर की गर्मी को देख रहा था, लेकिन उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। … Read more

दफ्तर की वो सर्द रात और रेशमी एहसास

दफ्तर की उस वीरान और शांत रात में समीर अपनी मेज पर बैठा हुआ था लेकिन उसका ध्यान सामने वाली केबिन में बैठी नैना मैम की ओर था। नैना दफ्तर की सीनियर प्रोजेक्ट लीड थी और उसकी उम्र लगभग बत्तीस साल थी, लेकिन उसका शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था जिसे देखकर समीर अक्सर … Read more

रिश्तों की ऊष्मा और मौसी का अनकहा प्रेम

दोपहर की उस तपती धूप में पूरा मोहल्ला सन्नाटे की चादर ओढ़े सोया हुआ था, लेकिन मीरा मौसी के पुराने घर के भीतर की हवा में एक अजीब सी बेचैनी और उमस भरी हुई थी। आर्यन पिछले तीन महीनों से अपनी पढ़ाई के सिलसिले में अपनी मौसी के पास शहर में रह रहा था और … Read more

कॉटेज में निशा की चु@@ई

पहाड़ों पर घना कोहरा छाया हुआ था और आसमान से लगातार तेज बारिश बरस रही थी, जिससे पूरा हिमाचल का यह छोटा सा रिसॉर्ट एक जादुई लेकिन सुनसान जगह लग रहा था। लकड़ी की बनी कॉटेजों के बीच निशा अपनी कॉटेज की खिड़की के पास खड़ी बारिश की बूंदों को देख रही थी। निशा की … Read more

खेत में चु@@ई करते पकड़े गए

सूरज डूबने को था और खेतों पर सुनहरी रोशनी फैली हुई थी। उत्तर प्रदेश के एक छोटे गांव के बाहर फैले गेहूं के विशाल खेतों में सुनीता धीरे-धीरे चल रही थी। सुनीता की उम्र पच्चीस साल थी, उसका शरीर जवानी की चरम सीमा पर था – भरे-भरे तरबूज, घुमावदार कमर और नाजुक कदम उसे देखते … Read more

ऑफिस का पहला दिन और चार मुस्टंडे

प्रिया आज अपने नए ऑफिस में पहली बार कदम रख रही थी और उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था क्योंकि सामने चार मजबूत, चौड़े कंधों वाले, घनी काली मूंछों से सजे हुए पुरुष पहले से ही अपनी कुर्सियों पर बैठे थे और जैसे ही उसने दरवाजा खोला, चारों की नजरें एक साथ उस पर … Read more

बर्फीली वादियों की गर्माहट

पहाड़ों की उस ऊँची चोटी पर स्थित लकड़ी के छोटे से केबिन में बाहर बर्फ की चादर बिछी हुई थी और ठंडी हवाएं खिड़कियों से टकराकर अजीब सी सुरीली आवाज़ें निकाल रही थीं। समीर और राधिका एक दूसरे के बेहद करीब बैठे थे, उनके बीच जल रही आग की लपटें उनके चेहरों पर एक सुनहरी … Read more

मामी की लंबी खुदाई

गर्मी की उन तपती दोपहरियों में जब पूरा गाँव सन्नाटे की चादर ओढ़कर सो जाता था, तब घर के भीतर एक अलग ही किस्म की बेचैनी पनप रही थी। अमन अपनी छुट्टियों में अपनी सगी मामी सुनीता के घर रहने आया था, जो शहर की आपाधापी से दूर एक शांत कस्बे में था। सुनीता मामी … Read more

बॉस की खुदाई

 राहुल पिछले छह महीनों से इस नामी एडवरटाइजिंग कंपनी में काम कर रहा था। उसकी उम्र मात्र चौबीस साल थी, लेकिन उसका शरीर काफी कसरती और सुडौल था। उसकी बॉस, महक, बत्तीस साल की एक बेहद आकर्षक और परिपक्व महिला थी। महक की साड़ी के पल्लू से झांकती उसकी गोरी कमर और उस पर टिका … Read more

ऑफिस की छत पर खुदाई

 रात के ग्यारह बज चुके थे और गुड़गांव के उस आलीशान ऑफिस में सिर्फ दो ही लोग बचे थे। आर्यन अपनी डेस्क पर बैठा फाइलों में उलझा था, पर उसका मन कहीं और ही भटक रहा था। उसकी नजरें बार-बार सामने वाले केबिन की ओर जा रही थीं, जहाँ उसकी सीनियर मैनेजर ऋचा मैम बैठी … Read more