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कला की पाठशाला में अनकही प्यास

 दोपहर की सुनहरी धूप स्टूडियो की बड़ी खिड़कियों से छनकर आ रही थी, जहाँ कविता अपनी पेंटिंग में डूबी हुई थी। कविता के शरीर का हर मोड़ किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह था, उसके रेशमी ब्लाउज के भीतर दबे उसके पुष्ट और रसीले तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके पतले … Read more

तन्हाई का तपता अहसास और वह अनकही रात

पहाड़ की उस ठंडी रात में पुराने लकड़ी के केबिन के भीतर एक अलग ही गर्माहट महसूस हो रही थी। रोहित और माया पिछले कई दिनों से एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में यहाँ रुके हुए थे, लेकिन आज की रात कुछ अलग थी। बाहर बर्फबारी हो रही थी और अंदर अंगीठी की आग की लपटें … Read more

कला की पाठशाला में अनकही प्यास

दोपहर की सुनहरी धूप स्टूडियो की बड़ी खिड़कियों से छनकर आ रही थी, जहाँ कविता अपनी पेंटिंग में डूबी हुई थी। कविता के शरीर का हर मोड़ किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह था, उसके रेशमी ब्लाउज के भीतर दबे उसके पुष्ट और रसीले तरबूज हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। उसके पतले … Read more

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{ “title”: “किताबों के पन्नों के बीच छिपी एक कामुक रात”, “full_story”: “पहाड़ों के बीच बने उस पुराने विला में सन्नाटा पसरा हुआ था, सिवाय बाहर गिरते हुए सूखे पत्तों की हल्की सरसराहट के। आदित्य एक फोटोग्राफर था और यहाँ की शांति उसे अपनी ओर खींच लाई थी, लेकिन उसका ध्यान विला की मालकिन मीरा … Read more

रेल के सफर की अनकही रात

मीरा की उम्र कोई तीस के करीब रही होगी, लेकिन उसका शरीर किसी पकी हुई सुराही की तरह गढ़ा हुआ था जिसे देखकर किसी भी पुरुष का मन डोल जाए। उसकी नीली शिफॉन की साड़ी उसके अंगों से इस तरह चिपकी थी जैसे पानी बदन से लिपट जाता है, और जब वह चलती थी तो … Read more

कलाकार की प्रेरणा: एक गहरी खुदाई

शहर की शोर-शराबे से दूर, ऊँची पहाड़ियों पर स्थित एक पुराने लकड़ी के बंगले में राघव अपनी चित्रकारी की दुनिया में खोया हुआ था। बाहर सन्नाटा था, लेकिन राघव के भीतर एक अजीब सी बेचैनी थी जो उसे शांत नहीं बैठने दे रही थी। तभी कमरे का दरवाज़ा धीरे से खुला और माया अंदर आई, … Read more

कलात्मकता की परछाईं

पहाड़ों की उस ठंडी और धुंधली दोपहर में सन्नाटा पसरा हुआ था, जहाँ विक्रम अपने विशाल कैनवास पर नैना की जीवंत छवि उतारने की कोशिश कर रहा था। खिड़की से आती सुनहरी धूप नैना के अर्धनग्न बदन पर गिरकर उसे किसी कीमती प्रतिमा की तरह चमका रही थी, और विक्रम की पैनी आँखें उसकी हर … Read more

योगशाला की वह तपती और मदहोश कर देने वाली शाम

मीरा हमेशा से ही अनुशासन की पक्की थी, लेकिन आज योगशाला के उस बंद कमरे में उसकी एकाग्रता जैसे कहीं खो गई थी। उसके सामने खड़ा विक्रम, जो उसका सबसे पुराना और पसंदीदा शिष्य था, आज उसे एक अलग ही नज़र से देख रहा था। मीरा के शरीर पर चिपके हुए योग के कपड़े उसके … Read more

तूलिका की तपिश और मौन समर्पण

पुराने शहर की एक सुनसान कला दीर्घा के कोने में बने उस छोटे से कमरे में चारों ओर कैनवास बिखरे हुए थे और हवा में तारपीन के तेल की तीखी गंध घुली हुई थी। आर्यन अपनी अधूरी पेंटिंग के सामने खड़ा था, लेकिन उसकी नजरें सामने बैठी अवनि पर टिकी थीं, जो आज उसकी मॉडल … Read more

पहाड़ी हवेली की वह मदहोश रात

आर्यन की आँखों में एक अजीब सी चमक थी जब उसने स्नेहा को खिड़की के पास खड़ा देखा, जहाँ चाँदनी उसके गोरे बदन पर किसी मखमली चादर की तरह लिपटी हुई थी। स्नेहा ने एक हल्की रेशमी साड़ी पहनी थी जो उसके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बड़ी बेरहमी से बयां कर रही थी, और … Read more