अजनबी मुसाफिर के साथ रात का वो सफर और अधूरी चु@@ई—>रात के ग्यारह बज चुके थे और राजधानी एक्सप्रेस अपनी पूरी रफ़्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी। रिया अपनी बर्थ पर बैठी खिड़की से बाहर अंधेरे को देख रही थी, जहाँ सिर्फ दूर कहीं जलती लाइटें नजर आ रही थीं। उसके मन में एक अजीब सी हलचल थी, क्योंकि उसका सफर अभी बहुत लंबा था और उसे नींद नहीं आ रही थी।
तभी केबिन का दरवाजा धीरे से खुला और एक लंबा, सुदर्शन युवक अंदर दाखिल हुआ, जिसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। उसने अपना बैग ऊपर वाली बर्थ पर रखा और रिया की तरफ देख कर एक छोटा सा हैलो कहा, जिससे रिया के दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई। उस अजनबी का नाम आर्यन था और उसका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था।
केबिन में अब सिर्फ वो दोनों ही थे, क्योंकि बाकी दो मुसाफिर अगले स्टेशन पर उतर चुके थे और रात का सन्नाटा गहराता जा रहा था। रिया ने अपनी चादर थोड़ी ऊपर खींची, पर आर्यन की गहरी नजरें उसे महसूस हो रही थीं, जो उसकी देह के उभारों को बहुत सलीके से परख रही थीं। हवा में एक अनजानी सी महक थी, जो दोनों के बीच एक अनकहा आकर्षण पैदा कर रही थी।
ट्रेन के हिचकोलों के साथ रिया का शरीर कभी-कभी आर्यन की तरफ झुक जाता, जिससे उसके रेशमी बालों की खुशबू आर्यन के नथुनों तक पहुँच रही थी। आर्यन ने धीरे से बात शुरू की और बातों-बातों में दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे, जैसे बरसों की पहचान हो। रिया को आर्यन की आवाज में एक अजीब सा ठहराव और मर्दानगी महसूस हो रही थी, जो उसे भीतर तक झकझोर रही थी।
गर्मी बढ़ने लगी थी, इसलिए रिया ने अपनी मखमली कुर्ती के ऊपर का एक बटन खोल दिया, जिससे उसके गोरे और पुष्ट तरबूज की हल्की सी झलक दिखने लगी। आर्यन की नजरें उस दरार पर टिक गईं और उसकी सांसें भारी होने लगीं, जिसे देखकर रिया ने भी शर्म से अपनी पलकें झुका लीं। माहौल अब पूरी तरह से कामुकता के रंग में ढलने लगा था और धड़कनें बेकाबू हो रही थीं।
आर्यन ने धीरे से अपना हाथ रिया के घुटने पर रखा, जिससे रिया के पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई और उसने एक गहरी आह भरी। उस स्पर्श में एक अजीब सा अपनापन और भूख थी, जो रिया की सूनी जिंदगी में जैसे एक नया तूफान लेकर आई थी। रिया ने आर्यन का हाथ हटाया नहीं, बल्कि अपनी आँखें बंद कर उस अहसास को महसूस करने लगी।
धीरे-धीरे आर्यन का हाथ ऊपर बढ़ने लगा और रिया की जांघों को सहलाते हुए उसके रेशमी लिबास के भीतर घुसने की कोशिश करने लगा, जहाँ गर्माहट बहुत ज्यादा थी। रिया की सांसें अब तेज चलने लगी थीं और उसके तरबूज उत्तेजना के कारण भारी होकर कुर्ती के भीतर से बाहर आने को मचल रहे थे। उसने आर्यन के हाथ पर अपना हाथ रख दिया, जैसे वो उसे और करीब बुला रही हो।
आर्यन ने बिना देर किए रिया को अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गले पर अपने होंठ रख दिए, जिससे रिया का पूरा शरीर कांपने लगा। उसने रिया की कुर्ती के बाकी बटन भी खोल दिए, जिससे उसके विशाल और रसीले तरबूज पूरी तरह आजाद होकर आर्यन के सामने आ गए। आर्यन ने अपनी उंगलियों से उन तरबूजों पर उभरे नन्हे मटर को धीरे से दबाया, जिससे रिया के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी।
रिया की उत्तेजना अब चरम पर थी, उसने आर्यन की टी-शर्ट उतार दी और उसके मजबूत सीने को अपने हाथों से सहलाने लगी, जहाँ पसीने की कुछ बूंदें चमक रही थीं। आर्यन ने रिया के तरबूजों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हें चूसने लगा, जिससे रिया का शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठ गया। मटर अब पूरी तरह सख्त हो चुके थे और रिया के अंदर एक प्यास जाग चुकी थी।
आर्यन ने रिया को लिटा दिया और उसकी सलवार धीरे-धीरे नीचे सरकाने लगा, जहाँ उसके घने और मुलायम बाल नजर आने लगे, जो उसकी गुप्त जगह की रक्षा कर रहे थे। रिया की खाई अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और वहां से एक पारदर्शी रस बह रहा था, जो उसकी बेताबी की गवाही दे रहा था। आर्यन ने अपनी उंगलियां उस खाई में डालीं, जिससे रिया की आँखें पलट गईं।
रिया ने आर्यन की बेल्ट खोली और उसके पेंट के भीतर हाथ डालकर उसके विशाल और सख्त खीरा को बाहर निकाल लिया, जो अपनी पूरी लंबाई में तन चुका था। खीरा इतना गर्म और कड़ा था कि रिया के हाथों में वो समा नहीं रहा था, जिसे देखकर आर्यन की मर्दानगी पर रिया को गर्व महसूस हुआ। रिया ने झुककर उस खीरा चूसना शुरू किया, जिससे आर्यन के गले से दबी हुई आवाजें निकलने लगीं।
आर्यन ने रिया को घुमाकर बैठाया और उसके गुलाबी होंठों को चूसते हुए अपने हाथों से उसके पिछवाड़ा को सहलाने लगा, जो बहुत ही गदगद और मुलायम था। रिया ने आर्यन के खीरा को अपनी खाई के मुहाने पर टिकाया और धीरे से नीचे बैठने लगी, जिससे उसे एक हल्का सा दर्द और बहुत सारा सुख महसूस हुआ। खुदाई की शुरुआत हो चुकी थी और ट्रेन की लय के साथ उनकी लय भी मिल गई थी।
आर्यन अब रिया के ऊपर आ गया और सामने से खोदना शुरू किया, जिससे केबिन में मांस के टकराने की चप-चप की आवाजें गूँजने लगीं। रिया की खाई आर्यन के खीरा को पूरी तरह निगल चुकी थी और हर धक्के के साथ उसे अपनी रूह तक कांपती हुई महसूस हो रही थी। पसीने से लथपथ दोनों शरीर एक-दूसरे में इस तरह गुंथे थे जैसे कोई पुरानी अधूरी प्यास बुझा रहे हों।
थोड़ी देर बाद आर्यन ने रिया को उल्टा कर दिया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे रिया के तरबूज नीचे की तरफ लटक कर झूलने लगे। आर्यन ने पीछे से रिया की कमर को मजबूती से पकड़ा और गहरे धक्के लगाने लगा, जिससे रिया के बाल बिखर गए और वो बिस्तर पर अपनी उंगलियां गड़ाने लगी। ये खुदाई बहुत ही गहरी और जादुई थी, जो दोनों को मदहोश कर रही थी।
रिया को अब महसूस हो रहा था कि उसका अंत करीब है, उसकी खाई की दीवारें आर्यन के खीरा को कसकर जकड़ रही थीं और उसके पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ रही थी। आर्यन ने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और तेजी से धक्के मारने लगा, जिससे रिया का शरीर जोर-जोर से हिलने लगा। अंततः एक जोरदार झटके के साथ रिया का रस निकलना शुरू हुआ और वो निढाल होकर गिर पड़ी।
आर्यन ने भी रिया के भीतर ही अपना सारा गर्म लावा छोड़ दिया, जिससे रिया की खाई भीतर तक तृप्त हो गई और आर्यन उसके ऊपर ही ढह गया। दोनों की सांसें बहुत तेज थीं और पसीने की महक कमरे में फैली हुई थी, पर उनके चेहरों पर एक अजीब सा सुकून था। उस रात की उस खुदाई ने उन दो अजनबियों को हमेशा के लिए एक अनकहे रिश्ते में बांध दिया था।
अगली सुबह जब स्टेशन आया, तो दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा और बिना कुछ कहे समझ गए कि ये पल दोबारा शायद ही कभी आए। रिया ने अपनी साड़ी ठीक की और आर्यन ने अपना बैग उठाया, पर उन दोनों की यादों में वो रात, वो खीरा और वो खाई हमेशा के लिए अमर हो गए थे। सफर खत्म हो चुका था, पर उस अहसास की गूँज अभी भी रिया के शरीर में कहीं बाकी थी।
रिया ट्रेन से नीचे उतरी और एक बार मुड़कर आर्यन को देखा, जो खिड़की से उसे ही देख रहा था, उसकी नजरों में अब भी वही पुरानी चमक और हल्की सी शरारत थी। उसने आर्यन को विदा किया और अपने रास्ते चल पड़ी, पर उसका दिल जानता था कि उस अजनबी मुसाफिर के साथ हुई वो चु@@ई उसकी जिंदगी का सबसे हसीन और रूहानी अनुभव था।
अंधेरे केबिन में शुरू हुई वो दास्तान अब सुबह की धूप में एक सुखद याद बन चुकी थी, जिसने रिया के अकेलेपन को कुछ देर के लिए ही सही, पर पूरी तरह से भर दिया था। आर्यन भी अपनी मंजिल की तरफ बढ़ गया, पर उसके मन में भी रिया के उन तरबूजों की नरमी और खाई की गर्माहट हमेशा के लिए दर्ज हो चुकी थी, जो इस सफर का सबसे बड़ा इनाम था।
सफर तो रोज होते हैं, पर कुछ मुसाफिर ऐसे मिल जाते हैं जो रूह को छू लेते हैं और जिस्म की खुदाई को एक इबादत बना देते हैं, जैसा कि उस रात हुआ था। रिया अब अपनी दुनिया में लौट आई थी, पर उसके होंठों पर अभी भी आर्यन के उन मटर जैसे निप्पल को चूसने का स्वाद और उसकी खुशबू बसी हुई थी, जो उसे मुस्कुराने पर मजबूर कर रही थी।
इंसानी रिश्ते बहुत अजीब होते हैं, कभी-कभी बरसों का साथ भी वो सुख नहीं दे पाता जो एक रात का अजनबी दे जाता है, बशर्ते इरादे नेक और प्यास सच्ची हो। रिया और आर्यन की ये कहानी उस ट्रेन की पटरियों के साथ कहीं पीछे छूट गई थी, पर उनके दिलों की धड़कनों में वो चु@@ई आज भी उतनी ही ताजा और रसीली थी जितनी उस रात थी।
रिया ने घर पहुँचकर आइने में खुद को देखा और उसे अपनी आँखों में एक नई चमक नजर आई, जैसे किसी ने उसकी मुरझाई हुई कली को फिर से खिला दिया हो। उस अजनबी मुसाफिर का वो खीरा और उसकी वो जादुई छुअन रिया के सपनों में अब हर रात आने वाली थी, जो उसे ये याद दिलाती रहेगी कि वो कितनी खूबसूरत और चाहने योग्य है।
रात का वो सफर खत्म हुआ, पर अहसासों का सिलसिला शुरू हो गया था, जो शायद कभी खत्म नहीं होगा, क्योंकि कुछ कहानियाँ अधूरी रहकर ही पूरी होती हैं। रिया ने खिड़की खोली और ताजी हवा को अपने भीतर महसूस किया, जैसे आर्यन की सांसें अभी भी उसके आसपास कहीं मँडरा रही हों और उसे गुदगुदा रही हों, उस मीठी याद के साथ।
जीवन के इस सफर में अजनबियों का मिलना और फिर खो जाना एक दस्तूर है, पर जो लम्हे हम जी लेते हैं, वही हमारी असली पूंजी होती है, जो ताउम्र साथ रहती है। रिया खुश थी कि उसने उस रात को जिया और खुद को उस खुदाई के हवाले कर दिया, जिसने उसे एक नई पहचान और एक नया सुख प्रदान किया था, उस अजनबी के साथ।