कॉलेज वाली क्रश की याद और अधूरी चु@@ई की प्यास —> कॉलेज के वे दिन समीर की आँखों के सामने तैर रहे थे, जब नेहा उसकी बेंच पर बैठकर खिलखिलाती थी। बरसों बाद जब नेहा उससे एक सुनसान और आलीशान रिजॉर्ट में मिली, तो समीर के दिल की धड़कनें किसी नगाड़े की तरह बजने लगीं। उसने नेहा की उन गहरी नीली आँखों में झांका, जहाँ आज भी वही पुरानी चमक और एक अनकही प्यास मौजूद थी।
शाम की ठंडी हवाएं कमरे के पर्दों को हिला रही थीं, लेकिन कमरे के भीतर का माहौल धीरे-धीरे गर्म होता जा रहा था। नेहा ने हल्के गुलाबी रंग की सिल्क की नाइटी पहनी थी, जो उसके बदन की हर एक वक्रता को बड़ी बेबाकी से उभार रही थी। समीर ने उसके पास बैठकर उसकी रेशमी जुल्फों को छुआ, जिससे नेहा के पूरे बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई।
नेहा ने अपनी पलकें झुका लीं, जैसे वह समीर के स्पर्श के जादू को अपने भीतर उतार रही हो। समीर का हाथ धीरे से उसके कंधे से सरकते हुए उसकी मखमली पीठ पर जा टिका। उन दोनों के बीच की खामोशी अब और भी गहरी और उत्तेजक होती जा रही थी। समीर ने महसूस किया कि नेहा की साँसें अब पहले से कहीं ज्यादा तेज और गरम होने लगी हैं।
समीर ने नेहा की कमर को कसकर अपनी ओर खींचा, जिससे उन दोनों के जिस्मों के बीच की रही-सही दूरी भी खत्म हो गई। नेहा के नरम और उभरे हुए **तरबूज** अब समीर की सख्त छाती से बुरी तरह रगड़ खा रहे थे। समीर ने उसकी गर्दन के करीब जाकर अपनी गरम साँसें छोड़ीं, जिससे नेहा के जिस्म का कोना-कोना थरथरा उठा और उसके चेहरे पर गुलाबी चमक फैल गई।
नेहा ने अपनी आँखें मूँद लीं और समीर के गले में अपनी बाहें डालकर उसे अपने और भी करीब खींच लिया। यह केवल एक मिलन नहीं था, बल्कि सालों से दबी हुई उन हसरतों का एक ज्वालामुखी था जो आज फटने को बेताब था। समीर ने धीरे से नेहा के कानों के पास फुसफुसाया, जिससे उसकी कामुकता की आग में घी पड़ने जैसा अहसास हुआ और वह कांप उठी।
समीर के हाथ अब धीरे-धीरे नेहा की नाइटी की डोरियों की ओर बढ़ने लगे, जिन्हें उसने बहुत ही नजाकत से खोल दिया। सिल्क का वह पारदर्शी कपड़ा धीरे-धीरे उसके बदन से सरक कर फर्श पर जा गिरा। अब नेहा का गोरा और सुडौल बदन समीर की नजरों के सामने पूरी तरह से नुमाया था। समीर की आँखें उसके रसीले **तरबूजों** पर टिक गईं, जो देखने में बहुत आकर्षक थे।
उन **तरबूजों** के ठीक ऊपर छोटे-छोटे गुलाबी **मटर** अपनी पूरी अकड़ के साथ खड़े थे, जो समीर को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। समीर ने अपना मुँह नीचे झुकाया और एक **मटर** को अपनी गरम जुबान से सहलाने लगा। नेहा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली सिसकारी निकली और उसने समीर के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसाकर उसे अपनी छाती में और जोर से भींच लिया।
समीर अब नेहा के बदन के निचले हिस्सों की ओर बढ़ने लगा, जहाँ उसकी कामुकता की असली मंजिल छिपी हुई थी। उसने देखा कि नेहा की टांगों के बीच घने काले **बालों** के साये में उसकी गुलाबी **खाई** पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। समीर ने अपनी उंगलियों से उस **खाई** के नाजुक किनारों को सहलाया, जिससे नेहा का पूरा शरीर एक बिजली के झटके की तरह कांप उठा।
नेहा की उत्तेजना अब उस मोड़ पर थी जहाँ उसे केवल समीर का साथ चाहिए था। उसने बेताबी से समीर के कपड़े उतारना शुरू कर दिया, जब तक कि वह भी पूरी तरह निर्वस्त्र नहीं हो गया। जैसे ही समीर का विशाल **खीरा** नेहा की नजरों के सामने आया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और चाहत उभर आई। उसने उसे अपने हाथों में थाम लिया।
नेहा ने समीर को बिस्तर पर लेटने का इशारा किया और खुद उसके घुटनों के बल बैठ गई। उसने बड़े ही प्यार से समीर का **खीरा चूसना** शुरू कर दिया, जिससे समीर की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। नेहा की गरम और गीली जुबान का वह स्पर्श इतना अद्भुत था कि समीर को लगा जैसे वह स्वर्ग की सैर कर रहा हो। वह अपनी सुध-बुध पूरी तरह खो चुका था।
समीर ने अब और इंतजार करना मुनासिब नहीं समझा और उसने नेहा को बिस्तर पर चित लेटा दिया। उसने नेहा की रेशमी टांगों को फैलाया और अपनी जगह बनाई। समीर ने अपने **खीरे** का सिरा नेहा की **खाई** के मुहाने पर टिकाया और एक गहरा सांस लिया। जैसे ही उसने धीरे से दबाव डाला, नेहा की सिसकारी कमरे की खामोश दीवारों से टकराकर चारों ओर गूँजने लगी।
समीर अब पूरी गहराई के साथ **सामने से खोदना** शुरू कर चुका था। हर एक धक्के के साथ नेहा के **तरबूज** हवा में किसी लयबद्ध संगीत की तरह उछल रहे थे। नेहा की आँखों में पानी भर आया था, लेकिन वह दर्द का नहीं बल्कि परम आनंद का था। वह समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थी और उसे और भी जोर से **खोदने** के लिए उकसा रही थी।
कमरे का तापमान अब काफी बढ़ चुका था और दोनों के शरीर पसीने की बूंदों से चमक रहे थे। पसीने की वह महक उनके कामोत्तेजना को और भी ज्यादा भड़का रही थी। समीर ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और नेहा के **मटरों** को अपने दांतों से धीरे से दबाया। नेहा का बदन धनुष की तरह ऊपर की ओर तन गया और वह समीर के नीचे बेतहाशा मचलने लगी।
“समीर, तुम कमाल हो, मुझे और गहराई तक खोदो,” नेहा ने हांफते हुए कहा। समीर ने उसे पलट दिया और अब वह उसे **पिछवाड़े से खोदना** शुरू करने वाला था। नेहा का उभरा हुआ और सुडौल **पिछवाड़ा** समीर की नजरों के ठीक सामने था। उसने अपनी पकड़ मजबूत की और पीछे से एक जोरदार धक्का दिया, जिससे नेहा के मुँह से एक चीख निकल गई।
यह **खुदाई** अब अपने चरम पर पहुँच रही थी। समीर के हर धक्के के साथ नेहा का पूरा शरीर हिल रहा था और उसकी **खाई** से चिपचिपा रस बहकर समीर के जांघों तक पहुँच रहा था। उन दोनों का प्यार और वासना एक-दूसरे में इस कदर घुल-मिल गए थे कि अब उन्हें दुनिया की कोई सुध नहीं थी। वे बस एक-दूसरे में समा जाना चाहते थे।
समीर ने नेहा की कमर को थामकर उसे अपनी ओर खींचा और अपनी गति को और भी तीव्र कर दिया। नेहा अब बेकाबू हो चुकी थी, उसकी सिसकारियां अब ऊंची आवाजों में बदल गई थीं। उसे महसूस हो रहा था कि उसके भीतर का सारा तनाव अब पिघलकर बाहर आने वाला है। समीर का **खीरा** भी अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था और फटने को तैयार था।
अचानक नेहा का शरीर जोर-जोर से थरथराने लगा और उसने समीर को कसकर जकड़ लिया। उसका **रस निकलना** शुरू हो गया था और वह चरम सुख की गहराइयों में खो गई थी। ठीक उसी पल समीर ने भी अपना सारा वेग नेहा की **खाई** के भीतर खाली कर दिया। दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, उनकी धड़कनें अब भी बहुत तेज थीं लेकिन मन को शांति मिल गई थी।
काफी देर तक वे दोनों वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, जैसे वक्त को वहीं रोक देना चाहते हों। समीर ने नेहा के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में समेट लिया। नेहा की आँखों में अब एक संतोष था, जैसे उसकी बरसों की प्यास आज बुझ गई हो। कमरे की हवा अब भी उस मदहोश कर देने वाली खुशबू से महक रही थी।
समीर ने धीरे से नेहा की आँखों से आंसू पोंछे, जो खुशी के थे। उन्होंने पुरानी यादों को आज एक नया और खूबसूरत मोड़ दे दिया था। अधूरी रह गई वह कॉलेज की प्रेम कहानी आज अपनी पूर्णता को प्राप्त कर चुकी थी। नेहा ने समीर के सीने पर अपना सिर रखा और धीरे से मुस्कुरा दी, यह जानते हुए कि यह रात उनके जीवन की सबसे यादगार रात रहेगी।
बाहर रात का सन्नाटा गहरा रहा था, लेकिन कमरे के भीतर दो रूहें और दो जिस्म एक हो चुके थे। समीर और नेहा के बीच का वह भावनात्मक जुड़ाव अब और भी मजबूत हो गया था। इस **खुदाई** ने न केवल उनके जिस्मों की प्यास बुझाई थी, बल्कि उनके दिलों को भी हमेशा के लिए एक-दूसरे के करीब ला दिया था।