जिम ट्रेनर संग चु@@ई—>
शाम के ढलते सूरज की रोशनी जिम की कांच की खिड़कियों से छनकर अंदर आ रही थी, जहाँ कविता अपनी कसरत में मशगूल थी। कविता की उम्र लगभग चौंतीस साल थी, लेकिन उसके शरीर की बनावट और उसका निखार किसी जवान लड़की से कम नहीं था। उसके शरीर के उभार, खासकर उसके भारी और सुडौल तरबूज, उसकी कसरत वाली टी-शर्ट को फाड़ देने की हद तक तने हुए थे। कविता अपने भारी पिछवाड़े को और भी सुडौल बनाने के लिए स्क्वाट्स कर रही थी, और हर बार जब वह नीचे झुकती, उसके शरीर की कामुकता देखते ही बनती थी। समीर, जो उसका नया जिम ट्रेनर था, पिछले दस मिनट से सिर्फ उसे ही निहार रहा था, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक और हवस मिश्रित प्रशंसा थी।
समीर की उम्र छब्बीस साल थी और उसका जिस्म लोहे जैसा मजबूत था, उसकी चौड़ी छाती और उभरे हुए डोले किसी भी महिला का मन डोलने के लिए काफी थे। वह धीरे से कविता के पास पहुँचा और बहुत ही कोमलता से उसके कमर पर अपने हाथ रखे, ताकि उसकी पोजीशन ठीक कर सके। समीर के हाथों का स्पर्श पाते ही कविता के पूरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई और उसकी सांसें कुछ तेज हो गईं। समीर ने उसके कानों के पास जाकर फुसफुसाते हुए कहा कि उसे थोड़ा और नीचे झुकना चाहिए ताकि उसके पिछवाड़े की मांसपेशियों पर सही दबाव पड़े। कविता ने समीर की आँखों में देखा और उसे वहाँ अपने लिए एक गहरी चाहत महसूस हुई, जिसने उसके मन में दबी हुई इच्छाओं को फिर से जगा दिया।
जिम में अब धीरे-धीरे भीड़ कम होने लगी थी और वातावरण में एक अलग ही तरह की गर्मी और उत्तेजना फैलने लगी थी। समीर ने जिम का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद कर दिया, यह कहते हुए कि वह कविता को एक विशेष पर्सनल ट्रेनिंग देना चाहता है। कविता के दिल की धड़कनें अब बेकाबू हो रही थीं, उसे पता था कि यह ट्रेनिंग अब कसरत से कहीं आगे जाने वाली है। समीर ने धीरे से कविता के करीब आकर उसके बालों को सहलाया और फिर उसके तरबूजों की ओर अपना हाथ बढ़ाया, जिन्हें देखकर वह कब से बेकरार था। उसने जैसे ही उन कोमल उभारों को अपने हाथों में लिया, कविता के मुंह से एक दबी हुई आह निकल गई और उसके मटर जैसे हिस्से टी-शर्ट के ऊपर से ही सख्त होने लगे।
समीर ने अब और इंतजार न करते हुए कविता के टी-शर्ट को ऊपर उठा दिया, जिससे उसके गोरे और विशाल तरबूज पूरी तरह से सामने आ गए। समीर ने अपनी जुबां से उन तरबूजों पर बने मटरों को चखना शुरू किया, जिससे कविता की कामुकता अपनी चरम सीमा पर पहुँचने लगी। उसने समीर के बालों को अपने हाथों में जकड़ लिया और उसे अपने शरीर से और भी सटा लिया, जैसे वह उसकी प्यास को शांत करना चाहती हो। समीर ने धीरे से कविता को जिम के बेंच पर लिटाया और उसके नीचे के कपड़ों को उतारना शुरू किया, जिससे उसकी गहरी और रसीली खाई अब पूरी तरह से समीर के सामने खुली हुई थी।
समीर ने अपनी पैंट उतारी और उसका विशाल खीरा बाहर निकल आया, जो पूरी तरह से तनकर अपनी ताकत का अहसास करा रहा था। कविता ने जैसे ही उस विशाल खीरे को देखा, उसकी आँखों में एक डर और असीम आनंद की चमक एक साथ तैर गई। समीर ने पहले अपनी उंगलियों से उस खाई को खोदना शुरू किया, जिससे कविता का शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठने लगा। वह अपनी उंगलियों को उस गहराई में ले जा रहा था जहाँ कविता को सबसे ज्यादा सुकून मिल रहा था। कविता ने समीर का हाथ पकड़कर उसे अपने खीरे को मुंह में लेने का इशारा किया और समीर का खीरा चूसना शुरू कर दिया, जिससे समीर के अंदर एक नया जोश भर गया।
अब समीर ने कविता को बेंच के किनारे पर लाकर उसके पैरों को ऊपर उठाया और सामने से खोदना शुरू किया। जैसे ही खीरा उस तंग खाई में समाया, कविता की एक तीखी चीख निकल गई, लेकिन वह दर्द नहीं बल्कि एक असीम सुख की पुकार थी। समीर बहुत ही धीमी गति से अंदर-बाहर हो रहा था, हर धक्के के साथ वह कविता की आत्मा तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था। दोनों का पसीना एक-दूसरे के जिस्म पर फिसल रहा था और जिम के शांत वातावरण में सिर्फ उनकी भारी सांसों और जिस्मों के टकराने की आवाजें गूँज रही थीं। कविता की आँखों से खुशी के आंसू निकल रहे थे क्योंकि उसे आज वह तृप्ति मिल रही थी जिसकी उसे बरसों से तलाश थी।
समीर ने अब स्थिति बदलते हुए कविता को पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया और उसे घुटनों के बल झुका दिया। उसके भारी पिछवाड़े के बीच से समीर ने अपना खीरा फिर से उस खाई में डाला और अब रफ्तार थोड़ी और बढ़ा दी। हर प्रहार के साथ कविता के तरबूज जोर-जोर से हिल रहे थे और वह बार-बार समीर का नाम पुकार रही थी। समीर ने उसे बालों से पकड़कर पीछे खींचा और पूरी ताकत से खुदाई जारी रखी, जिससे कविता के शरीर में कंपन पैदा होने लगा। खुदाई की यह प्रक्रिया इतनी गहन और भावुक थी कि दोनों ही अपनी सुध-बुध खो चुके थे और सिर्फ उस आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे।
अंत में, समीर की रफ्तार और भी तेज हो गई और कविता ने महसूस किया कि उसका रस छूटने वाला है। समीर ने एक जोरदार अंतिम धक्का लगाया और दोनों का रस एक साथ निकल आया, जिससे दोनों के शरीर ढीले पड़ गए। कविता समीर की बाहों में गिर गई और वे दोनों काफी देर तक उसी अवस्था में लेटे रहे, अपनी सांसों को सामान्य होने का इंतजार करते हुए। उस रात जिम की वह फर्श सिर्फ पसीने से नहीं, बल्कि दो रूहों के मिलन की गवाह बनी थी। कविता को ऐसा लग रहा था जैसे उसका पूरा शरीर नया हो गया हो और समीर की आँखों में अब एक गहरा सुकून और अपनी पसंदीदा शिष्या के प्रति अटूट प्रेम साफ झलक रहा था।