नेहा मामी की रसीली चु@@ई—>
दोपहर की उस भीषण और उमस भरी गर्मी में घर के सन्नाटे को सिर्फ छत पर पुराने पड़ चुके पंखे की कराहती हुई आवाज़ ही तोड़ पा रही थी। रोहन अपने कमरे में बेतहाशा पसीने से तर-बतर बिस्तर पर लेटा हुआ था, लेकिन उसकी आँखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। बगल वाले कमरे में उसकी नेहा मामी सो रही थीं, जो पिछले कुछ दिनों से शहर आई हुई थीं क्योंकि उनके पति यानी रोहन के मामा किसी दफ्तर के काम से विदेश गए हुए थे। नेहा मामी की उम्र करीब पैंतीस साल थी, लेकिन उनके शरीर की बनावट किसी बीस साल की नवयौवना को भी मात देती थी। उनकी त्वचा का रंग गेहुआं था और उनके शरीर की सुडौलता ऐसी थी कि रोहन जब भी उन्हें देखता, उसके मन में एक अजीब सी हलचल और बेचेनी पैदा होने लगती थी जिसे वह चाहकर भी दबा नहीं पा रहा था।
नेहा मामी के शरीर की बनावट बेहद कामुक और आकर्षक थी, जिसे देखकर रोहन की रातों की नींद उड़ चुकी थी। उनके कंधे चौड़े थे और उनकी गर्दन सुराहीदार थी, जिस पर पसीने की बूंदें अक्सर चमकती रहती थीं। उनके शरीर का सबसे आकर्षक हिस्सा उनके भारी और सुडौल तरबूज थे, जो साड़ी के भीतर से हमेशा अपनी मौजूदगी का एहसास कराते रहते थे। जब वह चलती थीं, तो उन तरबूजों में होने वाली हलचल रोहन के दिल की धड़कनें बढ़ा देती थी। उनके तरबूजों के बीच की गहरी घाटी और उनके ऊपर उभरे हुए मटर जैसे दाने साड़ी के पतले कपड़े से भी साफ झलकते थे। मामी का पिछवाड़ा भी काफी भरा हुआ और गोल था, जो चलने पर बड़ी खूबसूरती से हिलता था। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनके कूल्हे काफी चौड़े थे, जिससे उनका पूरा शरीर एक सजीली सुराही की तरह नज़र आता था।
रोहन और नेहा मामी के बीच वैसे तो रिश्ता मर्यादा का था, लेकिन पिछले कुछ दिनों की तन्हाई ने दोनों के बीच एक अनकहा सा खिंचाव पैदा कर दिया था। मामी अक्सर रोहन से अपनी बोरियत और अकेलेपन की शिकायत करती थीं, और रोहन उनकी बातों को बड़े ध्यान से सुनता था। उस दोपहर जब रोहन पानी पीने के बहाने रसोई में गया, तो उसने देखा कि नेहा मामी वहां खड़ी होकर फ्रिज से ठंडी बोतल निकाल रही थीं। उन्होंने एक ढीली सी शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो पसीने के कारण उनके बदन से चिपक गई थी। उस साड़ी के पारदर्शी कपड़े से उनके पीठ का हिस्सा और उनके तरबूजों की गोलाई साफ दिखाई दे रही थी। रोहन उन्हें एकटक देखता रहा, और उसकी सांसें तेज़ होने लगीं। नेहा मामी ने पलटकर देखा और उनकी नज़रों में भी एक अजीब सी चमक थी, जैसे वे रोहन की भावनाओं को पढ़ रही हों।
उस दिन के बाद से आकर्षण और गहरा होता गया और हर छोटे स्पर्श में एक बिजली सी दौड़ने लगी। रोहन कभी गलती से उनके हाथ को छू देता, तो कभी उनके पास से गुज़रते वक्त उनके शरीर की गर्मी महसूस करता। नेहा मामी भी अब उसे रोकने की कोशिश नहीं करती थीं, बल्कि कई बार वह जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू ढीला छोड़ देती थीं जिससे उनके तरबूज और उन पर मौजूद मटर साफ़ दिखाई देने लगते थे। एक रात जब पूरा घर सो रहा था, रोहन ने देखा कि मामी के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था। वह दबे पांव अंदर गया और देखा कि मामी बिना ब्लाउज के सिर्फ एक पतली चादर ओढ़कर सो रही थीं। उनकी गहरी और रसीली खाई साफ़ नज़र आ रही थी जिसके आसपास के बाल काले और रेशमी थे। रोहन का खीरा उस वक्त अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा हो चुका था और उसे पैंट के भीतर संभालना मुश्किल हो रहा था।
रोहन की धड़कनें उसके कान के पास शोर मचा रही थीं और उसके मन में एक गहरा द्वंद्व चल रहा था कि वह आगे बढ़े या पीछे हट जाए। लेकिन नेहा मामी की गहरी सांसें और उनके बदन से उठती सोंधी महक ने उसे मदहोश कर दिया था। उसने धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रखा, जहाँ की त्वचा मखमल जैसी कोमल थी। नेहा मामी अचानक जाग गईं, लेकिन उन्होंने शोर नहीं मचाया। उनकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक दबी हुई प्यास थी। उन्होंने रोहन का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने तरबूजों की ओर खींच लिया। रोहन ने कांपते हाथों से उनके तरबूजों को सहलाना शुरू किया और फिर अपनी जीभ से उनके मटर को चाटने लगा। नेहा मामी के मुँह से एक दबी हुई आह निकली और उन्होंने रोहन के सिर को अपने सीने से जोर से चिपका लिया। अब झिझक खत्म हो चुकी थी और वासना की आग दोनों को अपनी चपेट में ले चुकी थी।
नेहा मामी ने रोहन की पैंट की ज़िप खोली और उसके सख्त और गरम खीरे को बाहर निकाल लिया। खीरे की लंबाई और उसकी सुडौलता देखकर उनकी आँखें फ़ैल गईं। उन्होंने उसे अपने कोमल हाथों में पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं। रोहन की आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा जब नेहा मामी ने अपना मुँह खोला और उसके खीरे को अपने मुँह में ले लिया। उनके मुँह की गर्मी और उनकी जीभ का जादू रोहन को स्वर्ग का एहसास करा रहा था। वह धीरे-धीरे खीरा चूस रही थीं, जैसे कोई रसीला फल खा रही हों। रोहन की उंगलियां उनकी रसीली खाई में चली गई थीं, जहाँ की नमी और गर्मी उसे पागल कर रही थी। वह अपनी उंगली से खाई को खोदने लगा, जिससे नेहा मामी का शरीर धनुष की तरह ऊपर उठने लगा और उनके मुँह से रसीली आवाज़ें निकलने लगीं।
अब खुदाई का वक्त आ चुका था और दोनों का सब्र जवाब दे चुका था। रोहन ने नेहा मामी को बिस्तर पर लिटाया और उनके पैरों को फैलाकर उनकी गहरी खाई के दर्शन किए। उसने अपने गरम और सख्त खीरे को उनकी खाई के मुहाने पर रखा और धीरे से दबाव डाला। जैसे ही खीरा अंदर गया, नेहा मामी के मुँह से एक लंबी कराह निकली, ‘ओह रोहन… बहुत बड़ा है तुम्हारा… धीरे…’। रोहन ने एक गहरा धक्का मारा और पूरा खीरा उनकी खाई की गहराइयों में समा गया। नेहा मामी ने अपनी टांगें रोहन की कमर के चारों ओर लपेट लीं और उसे और गहराई तक खींचने लगीं। खुदाई की प्रक्रिया अब तेज़ हो चुकी थी। हर धक्के के साथ रोहन का खीरा उनकी खाई की दीवारों को छूता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था। कमरे में केवल शरीर के टकराने की आवाज़ और दोनों की भारी सांसें सुनाई दे रही थीं।
खुदाई की गति अब चरम पर पहुँच रही थी। रोहन ने नेहा मामी को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया। उन्होंने अपने हाथ बिस्तर पर टिका दिए और उनका गोल पिछवाड़ा हवा में था। रोहन ने पीछे से अपना खीरा फिर से उनकी खाई में उतारा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने शुरू किए। नेहा मामी का पूरा शरीर हिल रहा था और उनके तरबूज नीचे की ओर लटककर झूल रहे थे। रोहन ने पीछे से उनके तरबूजों को पकड़ा और उनके मटर को मरोड़ते हुए खुदाई जारी रखी। ‘हाँ रोहन… और ज़ोर से… मुझे बिलकुल खोदो आज…’ मामी चिल्ला रही थीं। दोनों का पसीना आपस में मिल चुका था और रति-क्रीड़ा अपने सबसे ऊंचे मुकाम पर थी। रोहन को महसूस हुआ कि अब उसका रस निकलने वाला है, और ठीक उसी वक्त नेहा मामी का शरीर भी बुरी तरह कांपने लगा।
अंततः, रोहन ने एक आखिरी और बहुत गहरा धक्का मारा और अपना सारा गरम रस नेहा मामी की गहरी खाई के भीतर उड़ेल दिया। उसी पल नेहा मामी का भी रस निकल गया और वह ढीली होकर बिस्तर पर गिर पड़ीं। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे हुए थे, उनकी सांसें अब भी तेज़ थीं और दिल की धड़कनें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। उस खुदाई के बाद नेहा मामी के चेहरे पर एक अजीब सा संतोष और चमक थी जो रोहन ने पहले कभी नहीं देखी थी। वे दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, उस अनकहे रिश्ते की गहराई को महसूस करते हुए। नेहा मामी ने रोहन के माथे को चूमा और धीरे से फुसफुसाया, ‘तुमने आज मुझे वो सुख दिया है जिसके लिए मैं सालों से तरस रही थी।’ रोहन ने भी उन्हें कसकर गले लगा लिया, यह जानते हुए कि यह प्यास अब बार-बार उन्हें एक-दूसरे के करीब लाएगी।