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पडोसन की रसीली चु@@ई

पडोसन की रसीली चु@@ई—>समीर अभी कुछ दिन पहले ही शहर के इस नए इलाके में रहने आया था और उसका फ्लैट दूसरी मंजिल पर था। उसके ठीक सामने वाले फ्लैट में रीमा रहती थी, जो लगभग बत्तीस साल की एक बेहद आकर्षक और सुडौल बदन वाली महिला थी। रीमा के पति अक्सर बिजनेस के सिलसिले में शहर से बाहर रहते थे, जिस वजह से वह अक्सर अकेली ही नजर आती थी। समीर ने जब पहली बार रीमा को देखा था, तभी से उसके मन में एक अजीब सी हलचल मच गई थी। रीमा का रंग एकदम साफ था और उसकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो किसी भी पुरुष को अपनी ओर आकर्षित कर सकती थी।

रीमा के शरीर की बनावट किसी अप्सरा से कम नहीं थी, उसके उभारों की गोलाई और उसकी कमर का लचीलापन समीर की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी था। जब भी वह साड़ी पहनकर बाहर निकलती, तो उसके रेशमी पल्लू के नीचे से झांकते उसके बड़े और रसीले तरबूज समीर की धड़कनें बढ़ा देते थे। उन तरबूजों की गोलाई इतनी मुकम्मल थी कि समीर अक्सर कल्पना करता कि उन्हें अपने हाथों में भरकर कैसा महसूस होगा। रीमा के चलने पर जब उसके पीछे का भारी पिछवाड़ा हिलता था, तो समीर की नजरें वहीं जम कर रह जाती थीं और वह घंटों तक बस उसी के बारे में सोचता रहता था।

एक शाम जब पूरे अपार्टमेंट की बिजली चली गई, तो समीर ने हिम्मत जुटाकर रीमा का दरवाजा खटखटाया ताकि वह पूछ सके कि क्या उसके पास मोमबत्ती है। रीमा ने दरवाजा खोला तो समीर उसे देखता ही रह गया, क्योंकि उसने उस समय एक ढीला सा नाईटगाउन पहना हुआ था जिसके भीतर उसके तरबूज बिना किसी सहारे के साफ झलक रहे थे। उन तरबूजों पर लगे मटर जैसे दाने कपड़े के ऊपर से ही अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। रीमा ने मुस्कुराते हुए समीर को अंदर आने को कहा और मोमबत्ती जलाने के बहाने दोनों के बीच बातों का सिलसिला शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बहुत ही व्यक्तिगत होता चला गया।

बातों-बातों में रीमा ने बताया कि वह कितनी अकेली महसूस करती है और कैसे उसके पति उसे समय नहीं दे पाते। समीर ने उसका हाथ पकड़ते हुए उसे सांत्वना देने की कोशिश की, और वही वह पहला स्पर्श था जिसने दोनों के बीच की झिझक को एक पल में खत्म कर दिया। समीर की उंगलियां जब रीमा की मखमली त्वचा से टकराईं, तो रीमा के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। समीर ने महसूस किया कि रीमा का शरीर गरम हो रहा है और उसकी सांसों की गति तेज हो गई है, जो इस बात का संकेत था कि वह भी इसी पल का इंतजार कर रही थी।

समीर धीरे से रीमा के करीब आया और उसके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होंठों का रस पीने लगा। रीमा ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया और अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं। समीर के हाथ अब रीमा के उन भारी और मुलायम तरबूजों पर थे, जिन्हें वह हल्के-हल्के दबा रहा था। रीमा के मुंह से एक धीमी सी कराह निकली जब समीर ने उसके मटर जैसे दानों को अपनी उंगलियों से सहलाया। कमरे में अंधेरा था, लेकिन दोनों के शरीर की गर्मी से पूरा माहौल कामुक हो चुका था और इच्छाओं का ज्वालामुखी फटने को तैयार था।

समीर ने धीरे-धीरे रीमा के नाईटगाउन को नीचे सरकाया और उसे पूरी तरह से प्राकृतिक अवस्था में ले आया। रीमा के जिस्म की महक समीर के दिमाग पर हावी हो रही थी और उसका खीरा अब अपनी पैंट के भीतर पूरी तरह से अकड़ चुका था। समीर ने अपने कपड़े उतारे और रीमा के सामने खड़ा हो गया, उसका विशाल खीरा रीमा की आंखों के सामने गर्व से तनकर खड़ा था। रीमा ने झुककर उस खीरे को अपने कोमल हाथों में पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी, जिससे समीर के मुँह से सिसकारी निकल गई और वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगा।

रीमा ने समीर के खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे धीरे-धीरे चूसने लगी, जैसे वह किसी ठंडी आइसक्रीम का मजा ले रही हो। समीर के लिए यह अनुभव बेहद सुखद था और वह रीमा के बालों में अपनी उंगलियां फिराते हुए उसे और गहराई तक ले जाने लगा। कुछ देर बाद समीर ने रीमा को सोफे पर लिटाया और उसकी गहरी खाई के पास अपनी जीभ ले गया। रीमा की खाई से एक मीठा सा रस निकल रहा था, जिसे समीर बड़े चाव से चाटने लगा। रीमा अपनी कमर ऊपर उठा-उठा कर समीर को सहयोग दे रही थी और उसकी उंगलियां समीर के बालों को मजबूती से पकड़े हुए थीं।

समीर ने अब रीमा की खाई में अपनी उंगली डाली और उसे अंदर-बाहर करने लगा, जिससे रीमा की सिसकारियां और तेज हो गईं। उसने समीर से विनती की कि वह अब और इंतजार नहीं कर सकती और उसे पूरी तरह से अपनी खुदाई का आनंद दे। समीर ने रीमा की टांगों को चौड़ा किया और अपने तपते हुए खीरे को उसकी रसीली खाई के मुहाने पर टिका दिया। एक जोर का धक्का मारते हुए समीर ने अपना पूरा खीरा रीमा की गहराई में उतार दिया। रीमा के मुंह से एक तेज चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की शुरुआत थी।

समीर ने सामने से खोदना शुरू किया और हर धक्के के साथ वह रीमा की गहराइयों को नाप रहा था। रीमा के तरबूज समीर की छाती से टकरा रहे थे और हर बार जब समीर का खीरा पूरी तरह अंदर जाता, तो रीमा की आँखें बंद हो जाती थीं। दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे और कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज गूँज रही थी। समीर ने रीमा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया। इस स्थिति में समीर के धक्के और भी गहरे लग रहे थे और रीमा का पिछवाड़ा समीर की जांघों से टकराकर एक मधुर संगीत पैदा कर रहा था।

खुदाई की यह प्रक्रिया काफी देर तक चलती रही और दोनों ही चरम सुख की दहलीज पर पहुँच चुके थे। समीर के धक्के अब और भी तेज और अनियंत्रित हो गए थे, वह रीमा के अंदर अपने अस्तित्व को पूरी तरह से उड़ेल देना चाहता था। रीमा भी अपनी कमर को झटके दे-देकर समीर का स्वागत कर रही थी। अचानक रीमा का शरीर थरथराने लगा और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा, और ठीक उसी पल समीर के खीरे ने भी अपना पूरा गरम रस रीमा की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए सोफे पर गिर पड़े, उनकी सांसें उखड़ी हुई थीं लेकिन मन को असीम शांति मिल चुकी थी।

इस अद्भुत खुदाई के बाद समीर और रीमा घंटों तक एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। रीमा का चेहरा संतुष्टि की चमक से दमक रहा था और समीर को ऐसा लग रहा था जैसे उसने दुनिया की सबसे बड़ी जंग जीत ली हो। उस रात के बाद उनके बीच का रिश्ता सिर्फ पड़ोसियों का नहीं रहा, बल्कि एक गहरा और कामुक जुड़ाव बन गया। वे जानते थे कि जब भी मौका मिलेगा, वे फिर से इसी तरह एक-दूसरे के शरीर की प्यास बुझाएंगे और इस रसीले खेल का आनंद लेंगे। समीर ने रीमा के माथे को चूमा और धीरे से उसके कानों में कहा कि वह हमेशा उसके साथ रहेगा।

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