राजस्थान के उस छोटे से गांव का नाम था कालापुर। आसपास की पहाड़ियों में घने जंगल, पुरानी कुएं, और वो हवेली जो गांव के सबसे कोने में खड़ी थी – भारी, पुरानी, दीवारों पर लता-बेलें चढ़ी हुईं। गांव में कुल १२० परिवार थे, पुरुष दिन भर खेतों में, मवेशी चराते, या बाजार में माल बेचते। महिलाएं सुबह से शाम तक घर संभालतीं, रोटियां सेंकतीं, बच्चों को पढ़ातीं। गांव में एक पुरानी परंपरा थी – हर अमावस्या को पूजा’ होती, जहां लोग हवेली के बाहर वाले मंदिर में जाकर दीये जलाते थे। कहते थे कि हवेली में कोई ‘काला साया’ रहता है, जो रात को निकलता है।
राहुल का परिवार भी गांव का ही था। उसके पिता दिल्ली में सरकारी नौकरी करते थे, मां घर संभालती थीं। दादी की मौत के बाद वसीयत आई – हवेली राहुल को मिली। राहुल २५ साल का था, आईटी इंजीनियर, शहर में रहता था, लेकिन दादी की याद में लौट आया। गांव पहुंचते ही सबने घेर लिया – चाचा-ताऊ, मौसी, बहनें। चाचा राम सिंह बोले – “बेटा, हवेली मत रहना। वो औरत… मीरा… रात को आती है। काला जादू करती है।” मौसी ने फुसफुसाया – “उसकी उम्र ४५ के आसपास है, लेकिन लगती २८ की। तंत्र-मंत्र से जवानी चुराई है।” गांव की एक युवती रानी, जो राहुल की बचपन की दोस्त थी, बोली – “भैया, कभी मत जाना। रात में दीया जलाकर बैठती है।”
राहुल ने हंसकर टाल दिया। वो हवेली में रहने लगा। दिन में गांव घूमता – राम सिंह चाचा के खेत में मदद करता, रानी के साथ पुरानी यादें ताजा करता। लेकिन रातें अजीब थीं। पहली रात कुछ नहीं हुआ। दूसरी रात, बारिश हो रही थी, राहुल छत पर खड़ा था। नीचे आंगन में एक छाया दिखी – लाल साड़ी, खुले बाल, हाथ में दीया। वो धीरे-धीरे मंत्र पढ़ रही थी –…” आवाज मीठी, लेकिन ठंडी। राहुल नीचे उतरा। दरवाजा खुला था। वो अंदर गया।
“कौन हो तुम?” उसने पूछा, आवाज कांप रही थी। औरत मुड़ी। गोरी, लंबी, आंखें काली-काली। तरबूज साड़ी के ब्लाउज से उभरे हुए, पिछवाड़ा इतना गोल कि साड़ी फटने को तैयार। “मीरा। यहां रहती हूं।” उसकी उम्र देखकर राहुल हैरान – २८-३० लग रही थी। लेकिन गांव वाले कहते थे ४५। वो मुस्कुराई – “डरो मत। मैं तुम्हारी दादी की सहेली नहीं, लेकिन उन्होंने मुझे यहां रहने दिया था।” राहुल ने पूछा – “रात को क्यों?” मीरा ने दीया रखा – “दिन में गांव वाले पत्थर मारते हैं। मैं सिर्फ रात में बाहर आ सकती हूं।”
धीरे-धीरे बातें बढ़ीं। राहुल हर रात मीरा से मिलने लगा। वो चाय बनाकर लाता, मीरा बताती गांव की कहानियां। “इस गांव में १५० साल पुरानी एक घटना है – एक राजकुमारी का प्रेमी मर गया था, उसने काला जादू किया। लेकिन गलत मंत्र से खुद शापित हो गई।” राहुल पूछता – “तुम्हारा क्या कनेक्शन?” मीरा चुप रहती। एक रात, जब चांदनी थी, मीरा ने बताया – “मैं यहां २० साल से हूं। पति की मौत के बाद तंत्र सीखा। लेकिन एक गलत प्रयोग… शाप लग गया। हवेली से बाहर नहीं जा सकती। अगर गई, तो जल जाऊंगी। एक बार कोशिश की थी… आग लग गई थी।” राहुल का दिल धड़का। मीरा की आंखें नम हो गईं – “अकेली हूं राहुल… इच्छाएं दबी हैं, लेकिन शरीर जलता है।”
राहुल की नजदीकी बढ़ रही थी। दिन में वो गांव के लोगों से पूछता – रानी बताती, “मीरा काली जादू करती है, लेकिन कभी नुकसान नहीं किया।” राम सिंह चाचा बोले – “बेटा, सावधान। वो तंत्र से जवानी रखती है।” लेकिन राहुल को मीरा में कुछ और लगता – एक दर्द, एक प्यास। वो उसकी मदद करना चाहता था।
एक रात, बारिश रुक गई। मीरा ने राहुल को अपने कमरे में बुलाया – पुराना लकड़ी का बिस्तर, दीवार पर तंत्र के चित्र। “आज कुछ बताऊंगी।” वो करीब आई। और उसे कुछ मंत्रों की किताबें दिखा रही थी लेकिन राहुल की आंखे उसके तरबूजों पर टिक गई जो बाहर निकलने को आतुर थे। मीरा ने उसे देखा और उसके अंदर भी हलचल होने लगी वो सालों से प्यासी थी। उसने अपना पल्लू गिरा दिया और जड़ा करीब आ गई। राहुल की सांसें तेज। मीरा ने उसका हाथ थामा – उंगलियां गर्म, नरम। “तुम्हारी आंखों में इच्छा देखती हूं।” राहुल शर्मा गया – “मीरा… मैं…” मीरा ने होंठों पर उंगली रखी – “चुप। बस महसूस करो।”
पहला चूसना हुआ – धीमा, गहरा। मीरा की जीभ राहुल के होंठों पर नाच रही थी, जैसे कोई पुरानी प्यास बुझ रही हो। राहुल की आंखें बंद हो गईं। उसकी उंगलियां मीरा की पीठ पर सरक रही थीं। मीरा की सांसें भारी – “राहुल… सालों बाद किसी ने छुआ है।” वो शरमा रही थी, लेकिन शरीर झुक रहा था। राहुल ने साड़ी का पल्लू सरकाया। तरबूज उजागर – भरे हुए, मटर सख्त उठे हुए। वो एक तरबूज को हाथ में लिया, हल्के से दबाया। मीरा की आह निकली – “हाय… नरम हाथ हैं तुम्हारे… और दबाओ।” राहुल ने मटर को जीभ से छुआ, चाटते हुए, जैसे कोई मीठा फल चख रहा हो। मीरा का शरीर लहरा उठा – “राहुल… मत रुको… मेरे तरबूजों को प्यार दो।”
धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ी। मीरा ने राहुल की शर्ट उतारी, उसकी छाती पर किस करती हुईं। “तुम्हारा बदन… कितना मजबूत।” राहुल ने मीरा को बिस्तर पर लिटाया। साड़ी पूरी तरह खुल गई। मीरा का नंगा बदन – खाई गीली चमक रही थी, बाल हल्के से। राहुल ने उंगलियां नीचे सरकाईं – खाई को छुआ, गर्म, नम। “मीरा… तुम्हारी खाई… कितनी सुंदर।” मीरा ने पैर फैलाए – “उंगली डालो… धीरे… खोदो मुझे।” राहुल ने उंगली से खोदना शुरू किया – अंदर-बाहर, बहुत धीमे। मीरा की कराहें गूंजीं – “हां… ऐसे ही… गहराई तक… मेरी इच्छा जगाओ राहुल।” पसीना उनकी गर्दनों से बह रहा था, दीये की रोशनी में चमक रहा था।
अब राहुल ने अपना खीरा निकाला – सख्त, तैयार। मीरा ने उसे हाथ में लिया, सहलाया – “कितना बड़ा… मेरी खाई के लिए परफेक्ट।” वो झुकी, खीरा मुंह में लिया – चूसने लगी, जीभ से चाटते हुए, गहराई तक। राहुल की कराह निकली – “मीरा… बस… मैं नहीं रुक पाऊंगा।” मीरा ने ऊपर खींचा – “आओ… सामने से खोदो मुझे।” राहुल ने ऊपर लेटकर खीरा खाई में डाला – धीरे-धीरे, जैसे कोई जड़ मिट्टी में उतर रही हो। मीरा की आंखें खुलीं – “हाय राम… इतना मोटा… पूरी भर दो राहुल।” राहुल धीमा था – हर धक्के में मीरा को पूरा महसूस करा रहा। तरबूज हिल रहे थे, मटर सख्त होकर कंपकंपा रहे थे। मीरा की उंगलियां राहुल की पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं – “जोर से… लेकिन प्यार से… मैं तुम्हारी हूं आज।”
फिर मीरा ने कहा – “अब पिछवाड़े से… मुझे वो सुख दो जो कभी नहीं मिला।” राहुल ने उसे पलटा। मीरा घुटनों पर, पिछवाड़ा ऊपर। राहुल ने पहले खाई चाटी – जीभ से गहराई तक, मीठा रस चखते हुए। मीरा की चीख निकली – “राहुल… जादू कर रहे हो… और चाटो… मेरी खाई को चूसो।” राहुल ने खीरा पिछवाड़े से डाला – गहरा, जोरदार, लेकिन धीमा। मीरा का शरीर लहरा रहा था – “हां… बस ऐसे… मेरी गांड… नहीं, पिछवाड़ा… फाड़ दो… लेकिन प्यार से।” खुदाई तेज हुई, लेकिन भावनाओं से भरी। मीरा बोली – “राहुल… मैं जल रही हूं… लेकिन सुख से… रस छूटने वाला है।”
चरम आया। मीरा का शरीर कांप उठा – खाई सिकुड़ने लगी, रस छूट गया – गर्म, भरपूर, जैसे कोई फव्वारा फूट पड़ा। राहुल भी रुक नहीं सका – रस निकल आया, मीरा की खाई में भरते हुए। दोनों थककर लिपट गए। मीरा ने राहुल के कान में फुसफुसाया – “ये सिर्फ शुरुआत है… लेकिन मेरा शाप… तुम्हारी मदद चाहिए।”
इसके बाद हर रात यही होता। दिन में राहुल गांव में रहता – रानी से बातें, राम सिंह चाचा के साथ चाय, लेकिन रात मीरा के पास। धीरे-धीरे वो और करीब आए। मीरा बताती अपनी कहानी – कैसे पति की मौत के बाद तंत्र सीखा, गलत मंत्र से शाप। राहुल उसे दिलासा देता – “मैं तुम्हें आजाद करवाऊंगा।”
एक रात, मीरा ने कहा – “गांव के बाहर एक गुफा है, जहां बाबा रहते हैं। वो तंत्र के गुरु हैं। शायद वो शाप तोड़ सकें। लेकिन दिन में नहीं जा सकते… रात में चलेंगे।” राहुल ने हामी भरी।
(कहानी जारी रहेगी… भाग २ में गुफा का रहस्य, बाबा, और ज्यादा गहरी खुदाई।) लाइक और शेयर करो पार्ट 2 जल्दी मिलेगा।