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प्यारी टीचर की चु@@ई

प्यारी टीचर की चु@@ई —> समीर लगभग पाँच साल बाद अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर नेहा मैम से शहर के सबसे पुराने और सुनसान पार्क के कोने वाले बेंच पर मिल रहा था। नेहा मैम अब बत्तीस साल की हो चुकी थीं, लेकिन उनकी खूबसूरती में कोई कमी नहीं आई थी, बल्कि वक्त के साथ उनकी काया और भी ज्यादा मादक और परिपक्व हो गई थी। उन्होंने गुलाबी रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जिसमें से उनके शरीर के हर उभार साफ झलक रहे थे और उनकी त्वचा की चमक समीर की आँखों में एक अजीब सी प्यास जगा रही थी। समीर उन्हें बस देखता ही रह गया क्योंकि उसकी यादों की वह पतली सी टीचर अब एक पूरी तरह से खिल चुकी स्त्री बन चुकी थीं जिसके जिस्म का एक-एक अंग आकर्षण का केंद्र बना हुआ था।

नेहा मैम के जिस्म की बनावट अब बहुत ही उत्तेजक हो गई थी और उनकी साड़ी के ब्लाउज के भीतर दबे हुए उनके दोनों तरबूज इतने बड़े और सख्त दिख रहे थे कि समीर के लिए अपनी नजरें हटाना नामुमकिन था। उनके तरबूज साड़ी के उस पतले कपड़े को फाड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और साड़ी के पल्लू से जब उनकी गहरी दरार हल्की सी दिखती, तो समीर के शरीर में सिहरन दौड़ जाती। उनकी कमर बहुत ही लचीली और गोरी थी, जिसे देखकर लग रहा था कि कोई भी हाथ वहाँ से हटना नहीं चाहेगा और उनके भारी पिछवाड़े ने साड़ी को पीछे से इतना कस दिया था कि उनकी हर हरकत पर वे थिरकते हुए महसूस होते थे।

बातों-बातों में पुराने दिनों की यादें ताजा होने लगीं और समीर ने महसूस किया कि नेहा मैम की नजरों में भी उसके लिए वही पुरानी चाहत फिर से अंगड़ाइयां लेने लगी थी। समीर ने धीरे से अपना हाथ बेंच पर सरकाया और उसकी उंगलियां गलती से मैम के हाथ से टकरा गईं, जिससे दोनों के बीच एक बिजली सी दौड़ गई। नेहा मैम ने हाथ हटाया नहीं, बल्कि समीर की आँखों में देखते हुए एक गहरी और भारी सांस भरी, जिससे उनके दोनों तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे और उनकी सांसों की गरमाहट समीर के चेहरे पर महसूस होने लगी। वह पल बहुत ही भावुक था क्योंकि दोनों के बीच सालों की दबी हुई इच्छाएं अब अचानक से फटने को तैयार थीं और उस सुनसान पार्क का सन्नाटा उनके दिलों की धड़कनों को और तेज कर रहा था।

जैसे ही समीर ने हिम्मत जुटाकर उनके कंधे पर अपना हाथ रखा, नेहा मैम की आँखों में एक हल्की सी शर्म और बहुत सारा समर्पण दिखाई दिया, लेकिन फिर भी उन्होंने एक बार मना करने की कोशिश की। उनका मन और शरीर आपस में लड़ रहे थे, पर समीर के युवा शरीर की खुशबू और उसकी बढ़ती हुई नजदीकी ने उनकी झिझक को धीरे-धीरे खत्म कर दिया। समीर ने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके कानों के पास जाकर फुसफुसाया कि वह उन्हें सालों से अपनी कल्पनाओं में देख रहा है। मैम ने बस अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी, जैसे वह खुद को समीर के हवाले करने के लिए तैयार हो चुकी हों और यहीं से उनके बीच की उस रात की असली शुरुआत हुई।

समीर ने अपनी उंगलियों से उनके साड़ी के पल्लू को नीचे गिराया और उनके कंधों को चूमना शुरू किया, जिससे नेहा मैम का पूरा शरीर कांपने लगा। जैसे ही समीर का हाथ उनके एक तरबूज पर पहुँचा और उसने उसे अपनी हथेली में भरकर धीरे से दबाया, मैम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली कराह निकल गई। उनके तरबूज इतने मुलायम और साथ ही इतने भरे हुए थे कि समीर ने उन्हें बार-बार दबाना शुरू कर दिया, जिससे उनके मटर साड़ी के कपड़े के ऊपर से ही सख्त होकर उभर आए। समीर ने अपनी उंगलियों से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, तो मैम ने अपनी कमर ऊपर की तरफ उचका दी और समीर का सिर अपने सीने से लगा लिया।

अब वे दोनों पार्क के उस झाड़ियों वाले घने हिस्से में पहुँच चुके थे जहाँ कोई भी उन्हें देख नहीं सकता था और वहाँ पहुँचते ही समीर ने नेहा मैम की साड़ी को पूरी तरह से खोल दिया। जब नेहा मैम सिर्फ अपने अंतःवस्त्रों में खड़ी थीं, तो समीर ने देखा कि उनके जिस्म पर काले रेशमी बाल कितने सुंदर लग रहे थे। समीर ने धीरे से उनके ब्लाउज को भी उतार दिया और उनके दोनों विशाल तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए, जो अपनी पूरी भव्यता के साथ हिल रहे थे। समीर ने नीचे झुककर उनके दोनों मटरों को बारी-बारी से अपने मुँह में लिया और उन्हें चूसना शुरू किया, जिससे मैम की कराहें और भी तेज हो गईं और वे समीर के बालों को अपनी उंगलियों में कसकर जकड़ने लगीं।

समीर ने अब अपना हाथ नीचे की तरफ बढ़ाया और उनकी रेशमी पेटीकोट के अंदर अपनी उंगलियां डालीं, जहाँ उसे उनकी गहरी और गीली खाई का एहसास हुआ। उनकी खाई पूरी तरह से गीली और गर्म थी, जिसे महसूस करते ही समीर का खीरा भी पूरी तरह से पत्थर जैसा सख्त हो गया था और अपनी पैंट के अंदर फड़फड़ा रहा था। समीर ने खाई में उंगली करना शुरू किया, जिससे नेहा मैम के शरीर में बिजली सी दौड़ने लगी और वह बार-बार ‘समीर… समीर…’ कहकर उसे पुकारने लगीं। उनकी खाई के पास वाले बाल बहुत ही मुलायम थे और समीर ने उन बालों के साथ खेलते हुए अपनी उंगली को और गहराई में डाला, जिससे मैम का पूरा शरीर पसीने से भीग गया।

अगले ही पल समीर ने अपना खीरा बाहर निकाला, जो साढ़े सात इंच का और बहुत ही मोटा तथा नसों से भरा हुआ था, उसे देखकर नेहा मैम की आँखें फटी की फटी रह गई। समीर ने उनके चेहरे के पास अपना खीरा ले जाकर रखा और नेहा मैम ने बिना किसी देरी के उस खीरा को अपने मुँह में ले लिया। वह बड़ी ही कुशलता से खीरा चूसना शुरू कर चुकी थीं और समीर को ऐसा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। उनका गर्म मुँह और जीभ का स्पर्श उस खीरे पर ऐसा जादू कर रहा था कि समीर को लगा कि उसका रस बस अभी छूट जाएगा, लेकिन उसने खुद पर काबू पाया और मैम को नीचे लिटा दिया।

समीर ने अब नेहा मैम की दोनों टांगों को फैलाया और उनकी गीली खाई के मुहाने पर अपना खीरा रखा, जो पूरी तरह से रस से सराबोर हो चुकी थी। जैसे ही समीर ने सामने से खोदना शुरू किया और अपना आधा खीरा उनकी खाई के अंदर उतारा, नेहा मैम ने जोर से चीख मारी और समीर की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। वह खुदाई इतनी गहरी और तीव्र थी कि हर धक्के के साथ नेहा मैम का पूरा शरीर हिल रहा था और उनके दोनों तरबूज ऊपर-नीचे पागलों की तरह नाच रहे थे। समीर ने अपनी गति बढ़ाई और पूरी ताकत से उन्हें खोदना शुरू किया, जिससे पार्क के उस सन्नाटे में उनके शरीरों के टकराने की ‘चप-चप’ की आवाज गूंजने लगी।

कुछ देर तक सामने से खोदने के बाद, समीर ने नेहा मैम को पलटा दिया और उन्हें घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वह पिछवाड़े से खोदना चाहता था और उसने अपना खीरा पीछे से उनकी खाई में डाल दिया। यह स्थिति और भी ज्यादा गहरी थी और हर धक्के पर समीर के खीरे का सीधा प्रहार उनकी गहराई के सबसे संवेदनशील हिस्से पर हो रहा था। नेहा मैम का पिछवाड़ा बहुत ही गद्देदार और विशाल था जो समीर के हर प्रहार को झेल रहा था और उनकी कराहें अब सिसकियों में बदल गई थीं। समीर ने उनके दोनों तरबूज पीछे से पकड़ लिए और उन्हें खींचते हुए खुदाई जारी रखी, जिससे नेहा मैम का रस निकलने ही वाला था।

खुदाई अपने चरम पर थी और समीर का खीरा अब पूरी तरह से गर्म और फटने को तैयार था, वहीं नेहा मैम भी अपने रस छूटने के करीब पहुँच चुकी थीं। समीर ने अपनी गति को और भी तीव्र कर दिया और पागलों की तरह उन्हें खोदने लगा, जिससे नेहा मैम का शरीर जोर-जोर से झटके लेने लगा और उन्होंने चिल्लाते हुए अपना सारा रस निकाल दिया। ठीक उसी पल, समीर ने भी अपना सारा गर्म रस उनकी खाई की गहराइयों में छोड़ दिया, जिससे दोनों को एक असीम और दिव्य शांति का अनुभव हुआ। वे दोनों पसीने से लथपथ होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और काफी देर तक बस एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते रहे।

खुदाई के बाद की वह हालत शब्दों में बयां करना मुश्किल थी, क्योंकि दोनों के जिस्म थककर चूर हो चुके थे लेकिन उनके मन पूरी तरह से संतुष्ट थे। समीर ने नेहा मैम के माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया, जबकि मैम की आँखों में एक अजीब सी चमक और चेहरे पर तृप्ति की लाली छाई हुई थी। उनकी साड़ी और कपड़े चारों तरफ बिखरे पड़े थे और उस एकांत पार्क की ठंडी हवा उनके पसीने से तरबतर शरीरों को राहत पहुँचा रही थी। उन्होंने धीरे-धीरे अपने कपड़े पहने और एक-दूसरे को फिर से मिलने का वादा किया, यह जानते हुए कि यह सिर्फ एक मुलाकात नहीं बल्कि एक कभी न खत्म होने वाले सिलसिले की शुरुआत थी।

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