आर्यन जब अपनी मौसी के घर पहुँचा, तो उसे अंदाज़ा नहीं था कि ये छुट्टियाँ उसके जीवन का सबसे बड़ा और यादगार मोड़ साबित होंगी। निशा मौसी, जिनकी उम्र करीब अड़तीस साल थी, अपनी खूबसूरती और ढलती जवानी के उस पड़ाव पर थीं जहाँ एक औरत का आकर्षण अपने सबसे ऊँचे शिखर पर होता है। उनकी आँखों में हमेशा से एक अजीब सी उदासी और गहरापन रहा था, जिसे आर्यन बचपन से ही देखता आ रहा था, लेकिन इस बार कुछ अलग ही कशिश थी। मौसी का पति व्यापार के सिलसिले में अक्सर महीनों के लिए शहर से बाहर रहता था, जिससे उनके उस आलीशान घर में एक भारी सन्नाटा पसरा रहता था, जो अब आर्यन की मौजूदगी से धीरे-धीरे टूटने वाला था।
निशा मौसी का शरीर किसी कुशल शिल्पी द्वारा तराशी हुई संगमरमर की मूर्ति जैसा था, जिसमें वक्त के साथ और भी निखार आ गया था। जब वो हल्के बैंगनी रंग की सूती साड़ी पहनकर घर के रोजमर्रा के कामों में व्यस्त होती थीं, तो उनकी कमर का उतार-चढ़ाव और उनके भारी तरबूज साड़ी के ब्लाउज के भीतर से बाहर झाँकने की नाकाम कोशिश करते नज़र आते थे। उनके गोरे रंग पर वो गहरी साड़ी किसी बिजली की तरह कौंधती थी, और जब वो रसोई में काम करते हुए इधर-उधर मुड़ती थीं, तो उनके पिछवाड़े की मटकन किसी भी मर्द को मदहोश करने के लिए काफी थी। उनके तरबूजों के बीच का गहरा फासला और उन पर उभरे छोटे-छोटे मटर जैसे दाने आर्यन की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी थे।
एक रात की बात है, जब बाहर तेज़ हवाएँ चल रही थीं और पूरा मोहल्ला गहरी नींद में सो चुका था, आर्यन और मौसी हॉल में बैठे पुराने एलबम देख रहे थे। बातों-बातों में मौसी ने अपनी तनहाई का ज़िक्र किया और बताया कि कैसे उन्हें इस बड़े घर में अकेलेपन से डर लगता है और उन्हें किसी के साथ और स्पर्श की कितनी ज़रूरत महसूस होती है। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर धीरे से उनका कोमल हाथ अपने हाथ में लिया, और उस पहली छुअन में ही शरीर में एक तेज़ बिजली सी दौड़ गई। मौसी ने अपना हाथ पीछे नहीं हटाया, बल्कि आर्यन की उँगलियों को और भी कसकर थाम लिया, उनकी साँसें अचानक तेज़ होने लगी थीं और उनके भारी तरबूज तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे थे।
हॉल की मद्धम रोशनी में दोनों एक-दूसरे की आँखों में छिपी प्यास को साफ पढ़ पा रहे थे। आर्यन धीरे से सोफे से उठा और मौसी के सामने खड़ा हो गया, उसने उनके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और उनके होंठों की मिठास को चखने लगा। मौसी ने एक लंबी आह भरी और आर्यन को अपनी बाहों में जकड़ लिया, जैसे वो बरसों की प्यास आज ही बुझा लेना चाहती हों। उनके बीच की झिझक अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और केवल एक-दूसरे के जिस्म की तपिश महसूस हो रही थी। आर्यन ने धीरे से मौसी की साड़ी का पल्लू सरकाया, जिससे उनके उभरे हुए तरबूज और उन पर लगे मटर जैसे दाने पूरी तरह सामने आ गए।
आर्यन की आँखों में जो भूख थी, उसे देखकर मौसी के बदन में सिहरन दौड़ गई। उन्होंने आर्यन को अपने बेडरूम की तरफ ले जाने का इशारा किया, जहाँ सिर्फ चाँदनी की हल्की रोशनी खिड़की से छनकर आ रही थी। कमरे में पहुँचते ही आर्यन ने मौसी को बिस्तर पर लिटा दिया और उनके बदन की खुशबू को महसूस करने लगा। उसने धीरे-धीरे मौसी के अंगों को चूमना शुरू किया, पहले उनके गले पर अपनी ज़बान फिराई और फिर नीचे उतरते हुए उनके भारी तरबूजों पर अपना मुँह टिका दिया। मौसी अपनी आँखें बंद किए बस उस सुखद अहसास में खोई हुई थीं और उनके मुँह से दबी-दबी कराहें निकल रही थीं।
जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था, नज़दीकियाँ और भी गहरी होती जा रही थीं। आर्यन ने अब मौसी के तरबूजों के ऊपर बने मटर जैसे दानों को अपने मुँह में लेकर हल्के से दबाया, जिससे मौसी का पूरा शरीर कमान की तरह मुड़ गया। उनकी आवाज़ में एक अजीब सी तड़प थी, वो बार-बार आर्यन का नाम पुकार रही थीं। आर्यन अब और नीचे उतरा और मौसी की रेशमी पेटीकोट को धीरे से पैरों की तरफ सरका दिया। वहाँ मौसी की गहरी खाई अब उसके सामने थी, जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी और जिसके आस-पास के काले बाल ओस की बूंदों की तरह चमक रहे थे।
आर्यन ने अपनी उंगली से खाई को सहलाना शुरू किया, जिससे मौसी की तड़प और भी बढ़ गई। वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों से भींचने लगीं और उनके पैर आर्यन की कमर के पास कसने लगे। मौसी ने आर्यन के कान में फुसफुसाते हुए कहा, ‘आर्यन, अब और बर्दाश्त नहीं होता, मुझे अपनी खुदाई से पूरा कर दो।’ आर्यन ने अपनी पैंट उतारी और उसका सख्त खीरा अब पूरी तरह से तैयार होकर बाहर निकल आया था। खीरे की लंबाई और उसकी मोटाई देखकर मौसी की आँखों में एक अलग ही चमक आ गई, उन्होंने धीरे से अपना हाथ बढ़ाकर उस खीरे को थामा और उसे अपने मुँह के करीब ले आईं।
मौसी ने बड़े प्यार से आर्यन के खीरे को चूसना शुरू किया, उनके मुँह की गर्मी और ज़बान का कमाल आर्यन को पागल कर रहा था। वो अपना संतुलन खोने लगा था, मौसी के सिर को सहलाते हुए वो बस उस जन्नत का आनंद ले रहा था। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद, मौसी ने आर्यन को अपने ऊपर आने का इशारा किया। आर्यन ने खुद को संभाला और मौसी की टांगों के बीच आकर बैठ गया। उसने अपने खीरे की नोक को मौसी की गहरी खाई के द्वार पर रखा, जो पहले से ही रस से सराबोर थी।
आर्यन ने धीरे से दबाव बनाया और उसका खीरा आधा मौसी की खाई के भीतर समा गया। मौसी के मुँह से एक तेज़ चीख निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर वापस लौट आई, लेकिन वो चीख दर्द की नहीं बल्कि एक चरम सुख की थी। आर्यन ने रुककर उन्हें संभलने का मौका दिया और फिर धीरे-धीरे खुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ मौसी के भारी तरबूज ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे और कमरे में उनके अंगों के टकराने की आवाज़ गूँज रही थी। मौसी ने अपने हाथ आर्यन की पीठ पर गड़ा दिए थे और वो पूरी तरह से उस खुदाई के मजे में डूबी हुई थीं।
खुदाई की गति अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी, आर्यन सामने से खोदते हुए मौसी की आँखों में देख रहा था, जहाँ अब सिर्फ और सिर्फ संतुष्टि के भाव थे। मौसी ने अपनी टांगें आर्यन के कंधों पर रख लीं ताकि खुदाई और भी गहराई तक हो सके। आर्यन का खीरा हर बार मौसी की खाई की गहराई को छू रहा था, जिससे उन्हें एक अजीब सी झुनझुनी महसूस हो रही थी। मौसी के मुँह से निकलने वाली ‘आह-आह’ की आवाज़ें आर्यन को और भी उत्तेजित कर रही थीं। उसने अब मौसी को पलट दिया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार किया।
मौसी अब बिस्तर पर अपने घुटनों और हाथों के बल खड़ी थीं, उनका पिछवाड़ा आर्यन की तरफ उभरा हुआ था जो किसी सफेद पहाड़ जैसा सुंदर लग रहा था। आर्यन ने पीछे से अपनी पकड़ मज़बूत की और एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपना पूरा खीरा मौसी की खाई में उतार दिया। इस स्थिति में खुदाई का मज़ा और भी बढ़ गया था, क्योंकि आर्यन अब मौसी के तरबूजों को पीछे से पकड़कर सहला पा रहा था। मौसी का पूरा शरीर हर धक्के के साथ आगे-पीछे हो रहा था और वो खुशी से झूम रही थीं। कमरे का तापमान जैसे बढ़ गया था और दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे।
काफी देर तक इस दमदार खुदाई के बाद, दोनों अब अपने चरम पर पहुँचने वाले थे। आर्यन की साँसें उखड़ रही थीं और मौसी का शरीर बुरी तरह कांप रहा था। आर्यन ने अपनी गति को और भी तेज़ कर दिया, वो पागलों की तरह मौसी की खाई को खोद रहा था। अचानक मौसी ने एक लंबी कराह भरी और उनका शरीर पूरी तरह ढीला पड़ गया, उनकी खाई से गरम रस छूटने लगा। उसी पल आर्यन ने भी अपना पूरा ज़ोर लगाया और उसका सारा रस मौसी की गहराई में समा गया। दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, उनकी धड़कनें अभी भी बहुत तेज़ थीं।
अगले कुछ मिनटों तक कमरे में सिर्फ उनकी भारी साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। आर्यन ने धीरे से मौसी के माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में भर लिया। मौसी के चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जो शायद उन्होंने बरसों से महसूस नहीं की थी। उन्होंने आर्यन की छाती पर अपना सिर रखा और धीरे से कहा, ‘तुमने आज मुझे फिर से ज़िंदा कर दिया आर्यन।’ उस रात की उस खुदाई ने न केवल उनके जिस्मों को बल्कि उनकी रूहों को भी एक-दूसरे से हमेशा के लिए जोड़ दिया था। बिस्तर की हालत उनके बीच हुई उस जंग की गवाही दे रही थी, लेकिन उनके मन पूरी तरह शांत और तृप्त थे।