मदहोश भाभी की रसीली चु@@ई—>सुनीता भाभी की उम्र लगभग तीस साल रही होगी लेकिन उनके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उन्हें देखते ही सुध-बुध खो बैठता था। जब वह रेशमी साड़ी पहनकर घर के आंगन में चलती थीं, तो उनके भारी और सुडौल तरबूज साड़ी के नीचे ऐसे हिलते थे जैसे किसी बड़े से तालाब में पानी की लहरें उठ रही हों। उनके चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान रहती थी, जो उनके गुलाबी होंठों को और भी ज्यादा आकर्षक बना देती थी। उनके शरीर की हर गोलाई और हर ढलान जैसे किसी कलाकार की सबसे बेहतरीन कृति हो, और उनके चलने का अंदाज इतना मोहक था कि उनके पीछे की भारी बनावट यानी उनका पिछवाड़ा हर कदम पर एक अलग ही ताल में झूमता था।
रोहित जो कि उनका देवर था, पिछले कुछ दिनों से शहर से अपनी पढ़ाई पूरी करके लौटा था और वह भाभी की खूबसूरती का कायल हो चुका था। सुनीता भाभी के पति अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहर से बाहर रहते थे, जिस वजह से सुनीता अक्सर अकेली महसूस करती थीं और इसी अकेलेपन ने रोहित के लिए उनके दिल में एक अलग ही जगह बना दी थी। रोहित जब भी उन्हें देखता, उसकी नजरें उनके खुले हुए पेट और नाभि के पास रुक जातीं, जहाँ साड़ी का पल्लू खिसक कर उनके गोरे बदन की चमक बिखेर देता था। वह अक्सर अपनी भाभी की मदद करने के बहाने रसोई में चला जाता, जहाँ मसालों की महक और सुनीता भाभी के पसीने की मिली-जुली गंध उसे पागल कर देती थी।
एक दोपहर जब घर में सन्नाटा था और बाहर तेज धूप खिली हुई थी, रोहित और सुनीता भाभी हॉल में बैठकर टीवी देख रहे थे। सुनीता भाभी ने एक झीनी सी सूती साड़ी पहनी हुई थी, जिसके ब्लाउज के पीछे की डोर थोड़ी ढीली थी, जिससे उनकी गोरी पीठ का बड़ा हिस्सा नजर आ रहा था। रोहित की धड़कनें तेज हो रही थीं और उसका ध्यान टीवी से ज्यादा भाभी के बदन की उस गर्माहट पर था जो उसके बगल में बैठने के कारण उसे महसूस हो रही थी। सुनीता भी शायद इस तनाव को महसूस कर रही थीं, क्योंकि उनकी सांसें भी थोड़ी भारी हो गई थीं और उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, जिससे उनके तरबूज साड़ी के भीतर से झांकने की कोशिश कर रहे थे।
बातों-बातों में रोहित का हाथ गलती से सुनीता भाभी के हाथ से टकरा गया, लेकिन इस बार किसी ने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। एक बिजली सी दोनों के शरीर में दौड़ गई और देखते ही देखते वह स्पर्श एक गहरी छुअन में बदल गया। रोहित ने धीरे से अपना हाथ सुनीता की कमर पर रखा, जहाँ उनकी रेशमी त्वचा मखमल की तरह कोमल और ठंडी महसूस हो रही थी। सुनीता ने एक लंबी आह भरी और अपनी आँखें बंद कर लीं, जैसे वह बरसों से इसी स्पर्श का इंतजार कर रही थीं। रोहित ने अपनी हिम्मत जुटाई और उनके करीब खिसक गया, उनकी गर्दन के पीछे अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए उसने उन्हें पीछे से बाहों में भर लिया।
सुनीता का शरीर कांपने लगा और उन्होंने धीरे से रोहित की ओर मुड़कर उसे देखा, उनकी आँखों में हवस और प्यार का एक अजीब संगम था। रोहित ने बिना देर किए अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और एक गहरा चुंबन शुरू किया, जिसमें दोनों की सांसें एक-दूसरे में घुलने लगीं। सुनीता ने रोहित के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं और उसे अपनी ओर और भी मजबूती से खींच लिया। इस चुंबन में एक ऐसी तड़प थी जो बताती थी कि दोनों का मन और शरीर एक-दूसरे के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रोहित के हाथ अब धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहे थे और उन्होंने सुनीता भाभी के भारी तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया।
उन तरबूजों की कोमलता और उनकी गोलाई रोहित को किसी दूसरी ही दुनिया में ले जा रही थी। उसने साड़ी के पल्लू को धीरे से कंधे से नीचे गिरा दिया और सुनीता भाभी के ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज खुला, उनके दूध जैसे सफेद तरबूज पूरी तरह आजाद हो गए, जिन पर गुलाबी रंग के छोटे-छोटे मटर दमक रहे थे। रोहित ने अपने मुंह को उन मटरों के पास ले जाकर उन्हें धीरे से चूसना शुरू किया, जिससे सुनीता की कराह पूरे कमरे में गूँजने लगी। वह रोहित का सिर अपने सीने से चिपकाए हुए बस आहें भर रही थीं और उनका शरीर कामवासना की आग में जल रहा था।
रोहित ने धीरे-धीरे सुनीता भाभी के नीचे के कपड़े भी हटा दिए और अब वह पूरी तरह प्राकृतिक अवस्था में उसके सामने थीं। उनकी गहरी और गीली खाई अब रोहित के सामने थी, जो पूरी तरह से रसीली हो चुकी थी। रोहित ने अपना खीरा बाहर निकाला, जो उत्तेजना के मारे पूरी तरह सख्त और लंबा हो चुका था। सुनीता ने जब रोहित के उस बड़े और कड़क खीरे को देखा, तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने धीरे से हाथ बढ़ाकर उस खीरे को छुआ और उसकी गर्माहट महसूस की। रोहित ने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और खुद उनके पैरों के बीच बैठ गया, अपनी उंगली से उनकी खाई को धीरे से सहलाते हुए उसने वहां की नमी को महसूस किया।
सुनीता अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रही थीं, उन्होंने रोहित को अपने ऊपर खींच लिया और उसे अपनी खाई में घुसने का इशारा किया। रोहित ने अपने खीरे का सिरा सुनीता की रसीली खाई पर टिकाया और एक झटके में उसे अंदर डाल दिया। सुनीता के मुंह से एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की थी। जैसे ही वह खीरा पूरी तरह से खाई की गहराई में समाया, सुनीता ने अपने पैर रोहित की कमर के चारों ओर कस लिए। रोहित ने अब सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ वह गहराई तक जा रहा था और सुनीता की खाई से एक अजीब सी रसीली आवाज आ रही थी जो कमरे के सन्नाटे को चीर रही थी।
खुदाई की यह प्रक्रिया अब और भी तेज होती जा रही थी, रोहित के पसीने की बूंदें सुनीता के बदन पर गिर रही थीं। दोनों एक-दूसरे की बाहों में बुरी तरह जकड़े हुए थे और हर धक्के के साथ सुनीता का पिछवाड़ा बिस्तर पर जोर-जोर से टकरा रहा था। रोहित ने अब उन्हें घुमाकर पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में कर दिया, जहाँ से उनके शरीर की गोलाई और भी कामुक लग रही थी। पीछे से जब रोहित ने अपना खीरा उनकी खाई में दोबारा डाला, तो सुनीता ने तकिए को अपने दांतों से दबा लिया। वह खुदाई इतनी दमदार और गहरी थी कि सुनीता का पूरा शरीर हर बार आगे की ओर झटके खा रहा था और उनके तरबूज तेजी से नीचे की ओर लटक कर हिल रहे थे।
काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों के शरीर जवाब देने लगे थे। रोहित की गति अब अपनी चरम सीमा पर थी और सुनीता भी अपने चरम पर पहुँचने वाली थीं। अचानक सुनीता के शरीर में एक तेज कंपन हुआ और उनकी खाई से बहुत सारा रस निकलने लगा, जिससे रोहित का खीरा पूरी तरह भीग गया। ठीक उसी पल रोहित ने भी अपने अंदर एक विस्फोट महसूस किया और उसका रस भी भाभी की खाई की गहराइयों में छूटने लगा। दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, उनकी सांसें अब भी तेज थीं लेकिन दिल में एक असीम शांति और संतुष्टि थी। इस पहली खुदाई ने उनके रिश्ते को एक नया और गहरा मोड़ दे दिया था, जिसे वह कभी भुला नहीं पाएंगे।