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मेहेक और रोहन की रसभरी चु@@ई

मेहेक और रोहन का रिश्ता जीजा और साली का था, लेकिन उनके बीच की केमिस्ट्री हमेशा से ही कुछ अलग और गहरी रही थी। रोहन अपनी पत्नी के साथ अपने ससुराल आया हुआ था, जहाँ उसकी पत्नी किसी काम से बाज़ार गई हुई थी और घर पर सिर्फ रोहन और मेहेक अकेले थे। मेहेक की उम्र अभी केवल बाईस साल थी, उसका शरीर पूरी तरह से ढला हुआ और किसी अप्सरा जैसा आकर्षक था। उसके गेहूंए रंग की त्वचा पर जब सूरज की रोशनी पड़ती थी, तो वह सोने की तरह चमकने लगती थी। रोहन उसे चोरी-छिपे देख रहा था और उसके मन में मेहेक के लिए दबी हुई इच्छाएं फिर से जागने लगी थीं।

मेहेक ने उस दिन एक तंग गुलाबी रंग का सूट पहना हुआ था, जो उसके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को बखूबी बयां कर रहा था। उसके सीने पर उभरे हुए दो रसीले तरबूज कुर्ती के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। उन तरबूजों के बीच की गहरी घाटी रोहन की आँखों को अपनी ओर खींच रही थी। जब मेहेक किचन में काम करते हुए इधर-उधर मुड़ती, तो उसका भारी और गोल पिछवाड़ा हवा में एक विशेष लय के साथ हिलता था। रोहन की नज़रें बार-बार उस मांसल उभार पर टिक जाती थीं और उसे देखते ही रोहन के पजामे के भीतर उसका खीरा धीरे-धीरे सिर उठाने लगा था।

रोहन सोफे पर बैठा था और मेहेक उसके लिए चाय लेकर आई। चाय देते वक्त मेहेक का हाथ गलती से रोहन की उंगलियों से छू गया। उस एक स्पर्श ने जैसे रोहन के पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ा दी। मेहेक ने भी उस करंट को महसूस किया और उसकी नज़रें झुक गईं, लेकिन उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान और शर्म की सुर्खी आ गई। दोनों के बीच एक अनकहा और गहरा भावनात्मक जुड़ाव पहले से ही था, जो अब धीरे-धीरे कामुकता की ओर मुड़ने लगा था। कमरे की शांति में केवल उनकी धड़कनों की आवाज़ सुनाई दे रही थी और हवा में एक अजीब सी गर्मी घुल गई थी।

मेहेक की सांसें कुछ तेज़ होने लगी थीं और रोहन की हिम्मत अब बढ़ने लगी थी। उसने मेहेक का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने पास खींच लिया। मेहेक ने कोई विरोध नहीं किया, बस अपनी आँखें मूँद लीं। रोहन ने उसके करीब जाकर उसके गले पर अपनी गर्म सांसें छोड़ीं, जिससे मेहेक के पूरे शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई। उसने अपनी कोमल बाहें रोहन के गले में डाल दीं। रोहन ने धीरे से उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके माथे को छुआ। आकर्षण की यह आग अब दोनों के मन में पूरी तरह से जल चुकी थी और झिझक का पर्दा धीरे-धीरे हटने लगा था।

रोहन ने अपनी उंगलियों को मेहेक की कमर पर फेरना शुरू किया, जिससे उसकी कुर्ती के नीचे दबी हुई त्वचा सिहर उठी। मेहेक ने एक गहरी आह भरी और रोहन के कंधे पर अपना सिर रख दिया। रोहन ने अब अपने हाथ ऊपर की ओर बढ़ाए और उसके रेशमी तरबूजों को हल्के से सहलाना शुरू किया। मेहेक के मुँह से एक दबी हुई कराह निकली और उसने रोहन को और भी कसकर पकड़ लिया। रोहन को महसूस हुआ कि उन तरबूजों के ऊपर मौजूद छोटे मटर अब सख्त होने लगे थे, जो मेहेक की चरम उत्तेजना का सबूत दे रहे थे। वह अपनी शर्म को पीछे छोड़कर अब पूरी तरह से रोहन के स्पर्श का आनंद लेने लगी थी।

जैसे-जैसे वक्त बीत रहा था, उनकी उत्तेजना और भी बढ़ती जा रही थी। रोहन ने मेहेक की कुर्ती के बटन धीरे-धीरे खोलने शुरू किए। जैसे ही कपड़ा हटा, मेहेक के दूधिया और सुडौल तरबूज पूरी तरह से सामने आ गए। रोहन ने झुककर अपने चेहरे को उन तरबूजों के बीच में दबा दिया और उनकी खुशबू को अपने अंदर उतारने लगा। मेहेक की सांसें फूल रही थीं और वह रोहन के बालों में अपनी उंगलियां फँसाकर उसे और भी करीब खींच रही थी। रोहन ने एक तरबूज को अपने हाथ में भरकर सहलाया और दूसरे के मटर को अपने होंठों से धीरे से दबाया, जिससे मेहेक की पूरी देह धनुष की तरह तन गई।

अब रोहन का हाथ मेहेक के नीचे के हिस्से की ओर बढ़ा। उसने धीरे से उसकी सलवार की डोरी ढीली की और उसे नीचे सरका दिया। मेहेक की रेशमी और मखमली जांघों के बीच उसकी गीली और रसीली खाई अब रोहन के सामने थी। उस खाई के आसपास उगे हुए मुलायम और काले बाल रोहन की उत्तेजना को चरम पर पहुँचा रहे थे। रोहन ने अपनी उंगलियों को उस खाई के मुहाने पर रखा, तो उसे महसूस हुआ कि मेहेक पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी। उसकी खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस रोहन की उंगलियों को भिगो रहा था। रोहन ने धीरे-धीरे उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे मेहेक बेहाल होकर बिस्तर पर लोटने लगी।

मेहेक ने अब रोहन के पजामे को नीचे उतारा और उसके विशाल और सख्त खीरा को बाहर निकाला। खीरा पूरी तरह से तनाव में था और अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा था। मेहेक ने उस खीरा को अपने हाथों में लिया और उसकी गरमाहट को महसूस किया। उसने धीरे से अपना मुँह खोला और उस खीरा को अपने मुँह में ले लिया। खीरा चूसना मेहेक के लिए एक नया अनुभव था, लेकिन वह रोहन को सुख देने के लिए पूरी मेहनत कर रही थी। रोहन की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा था और वह मजे के समंदर में डूबता जा रहा था। वह बस मेहेक के सिर को पकड़कर उसे और भी गहराई से अंदर लेने का इशारा कर रहा था।

जब सहनशीलता खत्म होने लगी, तो रोहन ने मेहेक को सीधा लेटाया और उसके पैरों को ऊपर की ओर मोड़ दिया। यह सामने से खोदना यानी मिशनरी पोजीशन थी। रोहन ने अपने खीरा की नोक को मेहेक की तंग और गर्म खाई के द्वार पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। मेहेक के मुँह से एक चीख निकली क्योंकि उसका खीरा काफी बड़ा था और मेहेक की खाई काफी तंग थी। लेकिन जैसे-जैसे रोहन ने अपनी गति बढ़ाई, मेहेक का दर्द मजे में तब्दील होने लगा। खुदाई की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी और दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो गए।

रोहन अब और भी आक्रामक हो गया था। उसने मेहेक को पलटा और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। पीछे से खोदना या डॉगी स्टाइल रोहन का पसंदीदा था। उसने मेहेक के भारी पिछवाड़े को अपने दोनों हाथों से पकड़कर पीछे से अपना खीरा उसकी खाई में गहराई तक उतार दिया। हर धक्के के साथ मेहेक के तरबूज जोर-जोर से उछल रहे थे और उसकी आहें और भी तेज़ हो रही थीं। वह बार-बार कह रही थी, “जीजू, और तेज़… मुझे पूरी तरह से खोद डालो… बहुत मजा आ रहा है!” रोहन की खुदाई अब अपनी चरम सीमा पर पहुँच रही थी।

काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद दोनों का शरीर जवाब देने लगा था। रोहन को महसूस हुआ कि उसका रस अब निकलने ही वाला है। उसने आखिरी कुछ धक्के इतनी तेज़ी से मारे कि मेहेक भी कांपने लगी। मेहेक की खाई के अंदर से भी रस छूटने लगा था और ठीक उसी समय रोहन का खीरा भी भारी मात्रा में अपना गर्म रस उसकी खाई की गहराइयों में छोड़ गया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, उनकी सांसें अब भी तेज़ थीं और शरीर पूरी तरह से पसीने में भीगा हुआ था। वह सुख का अनुभव इतना गहरा था कि दोनों कुछ पलों के लिए दुनिया ही भूल गए थे।

खुदाई खत्म होने के बाद रोहन ने मेहेक को अपनी बाहों में भर लिया। मेहेक का चेहरा अब भी लाल था और उसकी आँखों में एक अजीब सी संतुष्टि थी। उसने रोहन के सीने पर अपना सिर रखा और धीरे से बोली, “जीजू, आपने तो मुझे आज स्वर्ग दिखा दिया।” रोहन ने उसके माथे को चूमा और उसे अहसास दिलाया कि यह रिश्ता अब सिर्फ जीजा-साली का नहीं, बल्कि रूहानी और जिस्मानी तौर पर एक-दूसरे से जुड़ चुका है। दोनों ने मुस्कुराते हुए अपने कपड़े ठीक किए और उस पल की यादों को हमेशा के लिए अपने दिल में संजो लिया।

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