सिमरन की बेकाबू चुदाई—>
महानगर की उस गगनचुंबी इमारत के दसवें माले पर रहने वाली सिमरन की जिंदगी ऊपर से जितनी शांत दिखती थी, उसके भीतर उतनी ही गहरी तड़प और अकेलापन समाया हुआ था। सिमरन की उम्र लगभग बत्तीस साल थी, लेकिन उसके शरीर की बनावट किसी खिलती हुई कली जैसी थी, जिसमें परिपक्वता का रस पूरी तरह भर चुका था। उसका रंग दूधिया सफेद था और जब वह चलती थी, तो उसके बदन का हर हिस्सा एक लय में थिरकता था। सिमरन का पति अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहर से बाहर रहता था, जिससे उसके मन की इच्छाएं और शरीर की भूख अक्सर अधूरी रह जाती थी। वह अपनी बालकनी में खड़ी होकर अक्सर ढलते हुए सूरज को देखती और अपनी सूनी रातों के बारे में सोचकर ठंडी आहें भरती रहती थी। उसके शरीर के उतार-चढ़ाव किसी भी पुरुष को पागल करने के लिए काफी थे, लेकिन उसे किसी ऐसे की तलाश थी जो उसकी रूह और जिस्म दोनों को गहराई से समझ सके।
उसी इमारत में ठीक सिमरन के बगल वाले फ्लैट में राहुल नाम का एक युवक हाल ही में रहने आया था, जिसकी उम्र करीब छब्बीस साल रही होगी। राहुल नियमित रूप से जिम जाता था, जिसके कारण उसका शरीर काफी गठीला और सुडौल था। उसकी चौड़ी छाती और मजबूत भुजाएं उसकी मर्दानगी का एहसास कराती थीं। एक शाम जब सिमरन अपने घर के बाहर खड़ी थी, तभी राहुल वहां से गुजरा और दोनों की नजरें मिलीं। सिमरन ने गौर किया कि राहुल के पास वे सब कुछ था जिसकी वह कल्पना करती थी—एक लंबी कद-काठी, तीखे नयन-नक्श और वह खास आकर्षण जो किसी स्त्री के दिल में हलचल पैदा कर दे। सिमरन के भारी तरबूज उसकी पतली कुर्ती के भीतर से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे, और राहुल की नजरें अनचाहे ही उन पर ठहर गईं। उस एक पल के मौन संवाद ने दोनों के बीच एक अनकही डोर बांध दी थी, जो भविष्य में एक गहरी खुदाई की ओर इशारा कर रही थी।
एक रात जब शहर में बिजली गुल हो गई और सिमरन के घर का इन्वर्टर भी जवाब दे गया, तो वह घबराकर बाहर आई। तभी उसे राहुल दिखा जो अपनी बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था। सिमरन ने झिझकते हुए उससे मदद मांगी और राहुल तुरंत उसके घर आ गया। अंधेरे कमरे में मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में जब वे दोनों पास आए, तो वातावरण में एक अजीब सी गर्मी पैदा होने लगी। सिमरन की सांसें तेज चलने लगी थीं और उसके रेशमी कपड़ों से आती खुशबू राहुल के होश उड़ा रही थी। राहुल ने जब सिमरन की कमर के पास अपना हाथ ले जाकर उसे सहारा देने की कोशिश की, तो सिमरन के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उसे अपनी कमर पर राहुल की उंगलियों का स्पर्श किसी पिघलते हुए लावे जैसा महसूस हुआ, जिसने उसकी दबी हुई इच्छाओं के ज्वालामुखी को दहका दिया था।
राहुल ने धीरे से सिमरन के कंधे पर हाथ रखा और उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया कि वह कितनी सुंदर लग रही है। सिमरन की आंखों में शर्म और चाहत का संगम था, उसने अपना सिर राहुल की मजबूत छाती पर टिका दिया। राहुल ने उसकी गर्दन पर अपने होंठों का स्पर्श किया, जिससे सिमरन के शरीर में सिहरन दौड़ गई और उसके तरबूजों के ऊपर लगे मटर सख्त होने लगे। सिमरन ने राहुल की कमीज के बटन खोलने शुरू किए और उसके गठीले बदन को छूते ही वह मदहोश हो गई। दोनों के बीच की झिझक अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और वासना की अग्नि ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया था। सिमरन ने धीरे से राहुल के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके होंठों का मधुर संगम हुआ, जो एक लंबी और गहरी खुदाई की शुरुआत मात्र थी।
राहुल ने सिमरन को गोद में उठाकर बेडरूम की ओर रुख किया, जहां मोमबत्ती की रोशनी उनके साये को दीवारों पर नाचते हुए दिखा रही थी। उसने सिमरन को बिस्तर पर लिटाया और धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगा। सिमरन का नग्न शरीर किसी अप्सरा जैसा चमक रहा था; उसके उभरे हुए तरबूज और उनकी मटरें राहुल को अपनी ओर खींच रही थीं। राहुल ने झुककर सिमरन के उन रसीले तरबूजों को अपने मुंह में लिया और उन्हें सहलाने लगा, जिससे सिमरन के मुंह से दबी-दबी आहें निकलने लगीं। उसकी उंगलियां राहुल के बालों में उलझ गईं और वह अपनी कमर ऊपर उठाकर राहुल के स्पर्श को और गहराई से महसूस करने की कोशिश करने लगी। सिमरन की खाई अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और वह अपनी प्यास बुझाने के लिए बेताब थी।
राहुल ने अब अपनी उंगलियों से सिमरन की रेशमी खाई को सहलाना शुरू किया। सिमरन का पूरा बदन कांप उठा और वह राहुल के नाम की रट लगाने लगी। राहुल ने अपनी उंगली से खाई में उंगली करना शुरू किया, जिससे सिमरन के शरीर से रस निकलने की कगार पर पहुंच गया। सिमरन ने तड़पते हुए राहुल के पैंट की जिप खोली और उसके भीतर छिपे विशाल और सख्त खीरा को बाहर निकाला। उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर सिमरन की आंखें फटी रह गईं। उसने तुरंत उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे चूसने लगी। खीरा चूसना राहुल के लिए भी एक नया और सुखद अनुभव था, जिससे उसके बदन में उत्तेजना की लहरें उठने लगीं। सिमरन का उत्साह और उसकी कुशलता देखकर राहुल अब और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता था।
उसने सिमरन को बेड के किनारे पर टिकाया और खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। राहुल ने सिमरन की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने सख्त खीरा को उसकी तंग खाई के मुहाने पर टिका दिया। एक गहरे झटके के साथ राहुल ने अपना खीरा सिमरन की खाई के भीतर उतार दिया। सिमरन के मुंह से एक जोर की चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम आनंद की थी। उसे महसूस हुआ जैसे उसका अस्तित्व उस एक झटके में पूर्ण हो गया हो। राहुल ने सामने से खोदना शुरू किया और हर धक्के के साथ सिमरन का शरीर बेड पर पीछे की ओर खिसक जाता। दोनों के शरीर से पसीना बह रहा था और कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाजें और उनकी भारी सांसें गूंज रही थीं।
खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। राहुल अब पूरी ताकत के साथ सिमरन की खाई को खोद रहा था। सिमरन ने अपने पैरों को राहुल की कमर के चारों ओर कस लिया ताकि वह हर धक्के की गहराई को महसूस कर सके। उसके तरबूज हवा में उछल रहे थे और राहुल उन्हें अपने हाथों से भींच रहा था। सिमरन बार-बार कह रही थी, ‘हाँ राहुल, और गहराई से खोदो, मुझे खत्म कर दो।’ राहुल का खीरा पूरी तरह से सिमरन की खाई की दीवारों को रगड़ते हुए अंदर-बाहर हो रहा था, जिससे पैदा होने वाली ऊष्मा उन्हें पागल कर रही थी। सिमरन का चेहरा लाल हो चुका था और उसकी आंखें अधखुली थीं, वह उस सुख के सागर में पूरी तरह डूब चुकी थी जिसे वह वर्षों से खोज रही थी।
राहुल ने अब स्थिति बदली और सिमरन को उल्टा लेटने को कहा। उसने सिमरन को घुटनों के बल किया और पीछे से उसके भारी पिछवाड़े को पकड़कर अपनी ओर खींचा। सिमरन का वह सुडौल पिछवाड़ा राहुल को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। उसने एक बार फिर अपना खीरा सिमरन की खाई में पीछे से डाला। पिछवाड़े से खोदना सिमरन के लिए एक अलग ही स्तर का सुख लेकर आया। वह बिस्तर की चादर को अपने हाथों में भींच रही थी और उसके मुंह से बेतहाशा आवाजें निकल रही थीं। राहुल की गति अब बेकाबू हो चुकी थी, वह किसी जंगली शिकारी की तरह सिमरन के जिस्म को रौंद रहा था। हर प्रहार के साथ सिमरन का रस छूटने के करीब पहुंच रहा था और वह बस उस अंतिम पल का इंतजार कर रही थी।
अंततः वह क्षण आ ही गया जब दोनों का धैर्य जवाब दे गया। राहुल ने अपनी गति को चरम पर पहुँचाया और सिमरन का शरीर पूरी तरह से अकड़ गया। उसकी खाई से रस निकलने लगा और वह जोर-जोर से कांपने लगी। ठीक उसी समय राहुल ने भी अपने खीरे से सारा गर्म रस सिमरन की गहराई में उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे में सिमटे हुए काफी देर तक वैसे ही पड़े रहे, उनकी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। सिमरन के चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी और उसकी आंखों में राहुल के प्रति एक नया सम्मान और प्रेम जाग उठा था। उस रात की उस गहन खुदाई ने न केवल उनके शरीरों को जोड़ा था, बल्कि उनकी रूहों के बीच के अकेलेपन को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया था। सिमरन को अब समझ आ गया था कि असली सुख केवल शरीर के मिलन में नहीं, बल्कि उस समर्पण में है जो उन्होंने आज रात महसूस किया था।