ऑफिस की उस ऊँची इमारत की अठारहवीं मंजिल पर सन्नाटा पसरा हुआ था, केवल एयर कंडीशनर की हल्की सी गूँज ही उस खामोशी को तोड़ रही थी। रोहन अपने केबिन में बैठा लैपटॉप पर उंगलियाँ चला रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार बाहर अपनी केबिन के ठीक सामने बैठी अपनी सेक्रेटरी मेघा पर जा रहा था। मेघा आज एक गहरे नीले रंग की टाइट स्कर्ट और सफेद शर्ट पहने हुए थी, जिसमें उसके शरीर के उभार किसी कयामत से कम नहीं लग रहे थे। रात के दस बज चुके थे और पूरी मंजिल पर उन दोनों के अलावा और कोई नहीं था। मेघा की पीठ रोहन की तरफ थी, और जब भी वह अपनी फाइलें व्यवस्थित करने के लिए झुकती, उसकी स्कर्ट उसके भारी और गोल पिछवाड़े पर इस कदर तन जाती कि रोहन की साँसें थमने लगती थीं। रोहन ने देखा कि मेघा के शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे, जिससे उसके गोरे और उभरे हुए तरबूज साफ नजर आ रहे थे, जो हर हलचल के साथ धीरे-धीरे हिल रहे थे।
मेघा की कद-काठी किसी मॉडल से कम नहीं थी, उसके पास एक ऐसा आकर्षण था जो किसी भी पुरुष को पागल कर दे। उसके तरबूज इतने बड़े और सख्त थे कि वे शर्ट के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब लगते थे। जब भी वह चलती, उसके शरीर का हर हिस्सा एक लय में हिलता था, जिससे रोहन के अंदर का खीरा बार-बार करवटें बदलने लगता था। मेघा के लम्बे काले बाल उसकी पीठ पर नागिन की तरह लहरा रहे थे, और उसकी पतली कमर और भारी पिछवाड़े का मेल ऐसा था कि कोई भी उसे देखते ही मदहोश हो जाए। रोहन पिछले कई महीनों से इस आकर्षण को दबाए हुए था, लेकिन आज की तन्हाई ने उसकी हिम्मत को एक नई उड़ान दे दी थी। उसने देखा कि मेघा के चेहरे पर हल्की थकान थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो उसे बार-बार रोहन की तरफ देखने पर मजबूर कर रही थी।
दोनों के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी था, जो सिर्फ काम तक सीमित नहीं था। रोहन ने कई बार मेघा की निजी समस्याओं में उसकी मदद की थी, और मेघा भी रोहन की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखती थी। उनके बीच अक्सर गहरी बातें होती थीं, जिनसे उन्हें एक-दूसरे की पसंद और नापसंद का पता चल गया था। इस जुड़ाव ने उनके बीच एक अदृश्य डोर खींच दी थी, जो अब धीरे-धीरे शारीरिक आकर्षण में बदल रही थी। रोहन को महसूस हो रहा था कि मेघा भी शायद वही महसूस कर रही है जो वह खुद महसूस कर रहा था। आज रात का वह माहौल, डिम लाइट और तन्हाई उनके बीच की उस दबी हुई आग को सुलगाने के लिए काफी थी। रोहन ने अपना लैपटॉप बंद किया और धीरे से उठकर मेघा की तरफ बढ़ा, उसके दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं।
जैसे ही रोहन मेघा के पास पहुँचा, उसने देखा कि मेघा एक फाइल देख रही थी लेकिन उसकी नज़रें कहीं और थीं। रोहन ने अपना हाथ धीरे से मेघा के कंधे पर रखा, मेघा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने ऊपर देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी झिझक और बेताबी का मिश्रण था। रोहन ने धीरे से उसके बालों को पीछे किया और उसकी गर्दन पर अपने होठों का स्पर्श दिया। मेघा की आँखों से एक हल्की सी आह निकली और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। वह जानती थी कि यह गलत हो सकता है, लेकिन उसका मन और शरीर इस समय किसी भी सामाजिक बंधन को मानने के लिए तैयार नहीं थे। रोहन की छुअन में एक ऐसी आग थी जिसने मेघा के अंदर की प्यास को जगा दिया था। वह कुर्सी से उठी और रोहन के बिल्कुल करीब खड़ी हो गई, उनकी साँसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं।
रोहन ने बिना किसी देरी के मेघा को अपनी बाहों में भर लिया और उसके होठों का मीठा रसपान करने लगा। यह उनके बीच का पहला स्पर्श था, जो इतना गहरा और भावुक था कि दोनों के शरीर कांपने लगे। मेघा ने भी अपनी बाहें रोहन की गर्दन के चारों ओर डाल दीं और उसके रसपान का जवाब उतनी ही शिद्दत से देने लगी। रोहन के हाथ धीरे-धीरे मेघा की पीठ से होते हुए उसके तरबूजों तक पहुँचे। उसने शर्ट के ऊपर से ही उन भारी तरबूजों को सहलाना शुरू किया, जिससे मेघा के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। रोहन ने एक-एक करके मेघा के शर्ट के बटन खोले, और जैसे ही शर्ट हटी, मेघा के दूध जैसे सफेद और विशाल तरबूज रोहन की आँखों के सामने थे। उनके बीच के मटर गुलाबी और सख्त हो चुके थे, जो रोहन के खीरे को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे।
रोहन ने नीचे झुककर मेघा के तरबूजों को अपने मुँह में भर लिया और उनके मटर को अपनी जीभ से सहलाने लगा। मेघा ने अपनी उंगलियाँ रोहन के बालों में फंसा लीं और उसकी कशिश में खुद को पूरी तरह सौंप दिया। धीरे-धीरे रोहन ने मेघा की स्कर्ट भी उतार दी, और अब वह सिर्फ अपनी जांघिया में थी। रोहन ने अपनी उंगली से मेघा की खाई को सहलाना शुरू किया, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। मेघा की खाई की गर्माहट और गीलापन रोहन को पागल कर रहा था। उसने मेघा को ऑफिस की मेज पर लिटा दिया और उसकी जांघिया को धीरे से सरकाया। अब मेघा की खाई पूरी तरह से रोहन के सामने थी, जो गुलाबी और मासूम दिख रही थी, जिसके किनारों पर हल्के बाल थे। रोहन ने अपनी जीभ से मेघा की खाई चाटना शुरू किया, जिससे मेघा का पूरा शरीर धनुष की तरह तन गया और वह जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी।
मेघा अब और इंतजार नहीं कर सकती थी, उसने रोहन की पैंट की जिप खोली और उसके विशाल खीरे को बाहर निकाला। खीरा पूरी तरह से सख्त और गर्म था। मेघा ने उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। रोहन को ऐसा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। मेघा का खीरा चूसना इतना प्रभावी था कि रोहन को लगा उसका रस अभी निकल जाएगा। उसने मेघा को रोका और उसे मेज पर दोबारा लिटाया। रोहन ने मेघा की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे के सिर को उसकी खाई के मुहाने पर टिकाया। दोनों की आँखें मिलीं, जिनमें सिर्फ और सिर्फ प्यास थी। रोहन ने एक झटके में अपना खीरा मेघा की खाई में उतार दिया। मेघा की आँखों से एक तीखी आह निकली और उसने रोहन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए।
शुरू में यह खुदाई धीमी थी, रोहन धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था ताकि मेघा उस गहराई और दबाव को महसूस कर सके। मेघा की खाई इतनी तंग और गर्म थी कि रोहन को हर धक्के में जन्नत का अहसास हो रहा था। धीरे-धीरे रोहन ने अपनी गति बढ़ाई, और अब केबिन में केवल उनके शरीरों के टकराने की आवाजें और मेघा की कराहें गूँज रही थीं। रोहन मेघा के तरबूजों को हाथों से मसलते हुए उसे गहराई से खोद रहा था। मेघा भी पूरी लय में अपने कूल्हों को ऊपर उठा रही थी ताकि रोहन का खीरा उसकी गहराई के हर कोने को छू सके। खुदाई अब अपने चरम पर पहुँच रही थी, मेघा का चेहरा पसीने से भीग चुका था और उसके बाल मेज पर बिखरे हुए थे। रोहन ने उसे घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया।
पिछवाड़े से खुदाई करते समय रोहन को मेघा के भारी कूल्हों का नजारा साफ दिख रहा था। वह हर धक्के के साथ मेघा की कमर को जोर से पकड़ लेता और अपना पूरा खीरा उसके अंदर उतार देता। मेघा चिल्ला रही थी, “रोहन… और तेज… मुझे पूरी तरह खोद दो… आह…” उसकी आवाज़ में एक ऐसी तड़प थी जिसने रोहन के अंदर के जानवर को जगा दिया था। वह अब पागलों की तरह उसे खोद रहा था, हर धक्का मेघा की गहराई को चीरता हुआ जा रहा था। कुछ ही मिनटों में मेघा के शरीर में एक तेज कंपन हुआ और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा। वह थककर मेज पर गिर पड़ी, लेकिन रोहन अभी भी नहीं रुका था। उसने मेघा को सामने से खोदा और कुछ ही पलों बाद रोहन का भी रस निकल गया, जो मेघा की खाई के अंदर ही भर गया।
खुदाई खत्म होने के बाद दोनों वहीं मेज पर एक-दूसरे से लिपटे रहे। दोनों की साँसें अभी भी तेज थीं और पूरा शरीर पसीने से तर-बतर था। रोहन ने मेघा के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में कस लिया। मेघा के चेहरे पर एक अजीब सी शांति और संतुष्टि थी। उन्हें पता था कि उन्होंने आज ऑफिस की मर्यादा तोड़ी है, लेकिन उस पल में उन्हें किसी बात का पछतावा नहीं था। वे दोनों काफी देर तक उसी अवस्था में लेटे रहे, उस अहसास को महसूस करते हुए जो अभी-अभी उनके बीच से गुजरा था। धीरे-धीरे उन्होंने अपने कपड़े पहने और एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए मुस्कुरा दिए। वह रात उनके जीवन की सबसे यादगार और कामुक रात बन गई थी, जिसने उनके रिश्ते को एक नया और गहरा आयाम दे दिया था।