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जवान सौतेली माँ की चु@@ई


जवान सौतेली माँ की चु@@ई—>

घर में सन्नाटा पसरा हुआ था और बाहर की उमस भरी गर्मी कमरे के भीतर भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थी। मेघा सोफे पर बैठी हुई थी, उसकी उम्र महज बत्तीस साल थी और वह समीर की सौतेली माँ थी, लेकिन उनके बीच उम्र का फासला इतना कम था कि समीर उसे कभी माँ के नजरिए से देख ही नहीं पाया। मेघा की देह किसी तराशे हुए संगमरमर की तरह थी, उसके शरीर का हर अंग जैसे जवानी की भरपूर मिठास से लबालब भरा हुआ था। उसकी पतली कमर और भारी कूल्हे जब वह चलती थी तो एक अलग ही लय पैदा करते थे, जिसे देखकर समीर अक्सर अपनी सुध-बुध खो बैठता था। समीर ने देखा कि मेघा की साड़ी का पल्लू थोड़ा खिसक गया था और उसके रेशमी कपड़े के पीछे से उसके भारी और रसीले तरबूज अपनी पूरी गोलाई के साथ चमक रहे थे।

मेघा के तरबूज इतने बड़े और सख्त थे कि साड़ी का ब्लाउज उन्हें सँभालने में नाकाम लग रहा था, और समीर की नजरें बार-बार उन पर जाकर टिक जाती थीं। उन तरबूजों के बीच की गहरी घाटी किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थी और समीर का मन करता था कि वह बस उन में अपना चेहरा छिपा ले। मेघा ने समीर की नज़रों को महसूस किया और एक हल्की सी मुस्कान उसके होठों पर तैर गई, जो न तो पूरी तरह से मनाही थी और न ही पूरी तरह से आमंत्रण। उसके चेहरे पर फैली वह गुलाबी रंगत और आँखों में छाई हल्की सी कामुकता ने समीर के दिल की धड़कनें बढ़ा दी थीं। समीर ने महसूस किया कि उसके शरीर के निचले हिस्से में हलचल शुरू हो गई है और उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी लंबाई और सख्ती दिखाने लगा है।

समीर धीरे से मेघा के करीब जाकर बैठ गया, उनके बीच की दूरी अब खत्म हो चुकी थी और वह मेघा के शरीर से उठने वाली उस भीनी-भीनी खुशबू को महसूस कर सकता था। मेघा ने अपनी पलकें झुका लीं, लेकिन उसने खुद को दूर नहीं किया, जिससे समीर का हौसला और भी बढ़ गया। उसने धीरे से अपना हाथ मेघा के कंधे पर रखा और महसूस किया कि उसकी त्वचा मखमली एहसास से भरी हुई थी। मेघा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और उसने एक लंबी, गहरी सांस ली, जिससे उसके भारी तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे और उन पर लगे नन्हे मटर साड़ी के ऊपर से ही साफ उभरकर दिखने लगे। समीर ने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे उसके गले से नीचे उतारना शुरू किया, जहाँ की गर्माहट उसे और भी बेचैन कर रही थी।

मेघा ने समीर की आँखों में देखते हुए धीमी आवाज में कहा, “समीर, ये तुम क्या कर रहे हो, अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा?” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी थराहट थी, जिसमें डर से ज्यादा चाहत छिपी हुई थी। समीर ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होंठों के करीब जाकर फुसफुसाया, “घर में कोई नहीं है मेघा, आज बस मैं और तुम हैं, और ये दूरी अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रही।” उसने बिना इंतज़ार किए मेघा के होठों को अपने काबू में ले लिया और उन्हें पागलों की तरह चूसने लगा, जिससे मेघा के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। मेघा ने भी अब हार मान ली थी और उसने अपने हाथ समीर के बालों में डाल दिए, उसे अपनी ओर और भी जोर से खींच लिया।

समीर के हाथ अब मेघा की साड़ी के नीचे पहुँच चुके थे और वह उन बड़े-बड़े तरबूजों को अपनी हथेलियों में भरकर भींचने लगा था। मेघा की सिसकारी गूँज उठी जब समीर ने उसके एक मटर को अपने दांतों के बीच हल्के से दबाया, जिससे उसे दर्द और आनंद का एक अनोखा मिश्रण महसूस हुआ। वह पूरी तरह से कामुकता के सागर में डूब चुकी थी और उसका हाथ खुद-ब-खुद समीर की पैंट की ज़िप तक पहुँच गया। जैसे ही उसने समीर के सख्त और गर्म खीरे को छुआ, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं क्योंकि वह खीरा अपनी पूरी ताकत के साथ बाहर आने को बेताब था। समीर ने जल्दी से अपने और मेघा के कपड़े उतार दिए और अब वे दोनों एक-दूसरे के सामने पूरी तरह निर्वस्त्र खड़े थे।

मेघा की देह की बनावट देखकर समीर के मुँह से लार टपकने लगी, उसके सुडौल शरीर पर जगह-जगह कामुक उभार थे और उसकी गहरी खाई के चारों ओर काले और रेशमी बाल एक अलग ही आकर्षण पैदा कर रहे थे। समीर ने मेघा को बिस्तर पर लेटाया और अपनी जीभ से उसके पूरे शरीर को नापने लगा, उसने मेघा की खाई चाटना शुरू किया तो मेघा बिस्तर की चादरों को अपनी मुट्ठियों में भींचने लगी। उसकी खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस अब समीर के चेहरे पर लग चुका था, जो उसे और भी उत्तेजित कर रहा था। मेघा ने समीर का सिर पकड़कर अपनी खाई पर और जोर से दबाया, वह अब बस उस चरम सुख को पाने के लिए तड़प रही थी जिसे उसने सालों से महसूस नहीं किया था।

समीर ने अब अपने हाथ की उंगली से खोदना शुरू किया, उसने एक और फिर दो उंगलियाँ मेघा की तंग खाई के भीतर डाल दीं, जिससे मेघा की कमर हवा में उछल गई। उसकी खाई इतनी तंग और गर्म थी कि समीर को लग रहा था जैसे वह किसी जलते हुए ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा हो। मेघा ने सिसकते हुए कहा, “समीर, अब और नहीं, प्लीज मुझे वो खीरा चाहिए, मुझे अपनी खुदाई से पूरा भर दो!” समीर ने अपने भारी खीरे को उठाया और उसे मेघा की खाई के मुहाने पर सेट किया, जो पूरी तरह से गीली और तैयार हो चुकी थी। जैसे ही उसने एक जोरदार धक्का मारा, मेघा की एक लंबी चीख निकल गई क्योंकि वह खीरा उसकी गहराई तक पहुँच गया था।

शुरुआत में मेघा को थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन जैसे-जैसे समीर ने सामने से खोदना जारी रखा, वह दर्द मीठे आनंद में बदल गया। कमरे में थप-थप की आवाज़ें गूँजने लगीं और समीर के हर धक्के के साथ मेघा के भारी तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे। समीर ने मेघा की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह और भी गहराई तक खुदाई कर सके, और हर बार जब वह पूरा खीरा भीतर डालता, मेघा की आँखें पलट जातीं। समीर की रफ़्तार अब बढ़ती जा रही थी, वह एक अनुभवी खोदी की तरह मेघा के शरीर के हर कोने को अपनी गिरफ्त में ले चुका था और मेघा बस उसकी लय पर नाच रही थी।

बीच में समीर ने मेघा को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, यह पोजीशन मेघा को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। जब समीर का सख्त खीरा पीछे से उसकी खाई में जा रहा था, तो मेघा के मुँह से सिर्फ ‘उफ़… आह… समीर’ ही निकल रहा था। उसका पूरा शरीर पसीने से नहा चुका था और उसके शरीर की गंध समीर के पौरुष को और भी बढ़ा रही थी। समीर ने उसके कूल्हों को कसकर पकड़ा और पागलों की तरह धक्के मारने लगा, जिससे मेघा को महसूस हुआ कि वह अब अपने रस छूटने के करीब है। उसकी खाई की दीवारें समीर के खीरे को कसने लगी थीं, जो इस बात का संकेत था कि वह अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती।

कुछ ही पलों में मेघा का पूरा शरीर काँपने लगा और उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा, वह चरम सुख की ऊंचाइयों पर पहुँच चुकी थी। उसी समय समीर ने भी अपनी रफ़्तार को अपनी अंतिम सीमा तक पहुँचा दिया और अपने खीरे का सारा गर्म रस मेघा की गहराई में खाली कर दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े, उनकी सांसें इतनी तेज चल रही थीं जैसे कोई मैराथन दौड़कर आए हों। कमरे का तापमान अब भी गर्म था, लेकिन उनके मन को एक असीम शांति और संतुष्टि मिल चुकी थी। मेघा ने समीर के माथे को चूमा और उसके सीने पर अपना सिर रख दिया, उनके शरीर अभी भी एक-दूसरे की गर्माहट को महसूस कर रहे थे।

इस खुदाई के बाद मेघा का चेहरा और भी ज्यादा दमकने लगा था, जैसे किसी मुरझाए हुए फूल को पानी मिल गया हो। समीर ने उसे अपनी बाहों में और कस लिया, उसे अहसास था कि यह रिश्ता अब एक नई मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ सिर्फ जिस्मानी भूख नहीं बल्कि एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी शामिल था। वे दोनों काफी देर तक वैसे ही लेटे रहे, उस पल को जी रहे थे जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। मेघा ने समीर की आँखों में देखते हुए कहा कि उसने आज तक ऐसा सुख कभी महसूस नहीं किया था, और समीर ने वादा किया कि वह उसे हमेशा इसी तरह प्यार और संतुष्टि देता रहेगा।

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