शालिनी सुबह के नौ बजे घर में अकेली थीं। पति पिछले हफ्ते से दिल्ली के दौरे पर गए हुए थे और राहुल कॉलेज से लौटकर अभी-अभी सोया था। शालिनी ने राहुल की कल की यूनिफॉर्म उठाई – वो धोने के लिए रखी थी। पैंट की जेब से कुछ चमकदार चीज गिर पड़ी – एक छोटा सा पैकेट। शालिनी ने उठाकर देखा – “Durex Extra Thin – Feel Everything”। कॉ@#म। उनके १९ साल के बेटे की जेब में कॉ@#म। शालिनी की सांस एक पल को रुक गई। हाथ कांपने लगे। मन में तूफान सा उठा – ये कब से? किसके लिए? क्या राहुल अब इतना बड़ा हो गया कि किसी के साथ… लेकिन अगले ही पल उनके शरीर में एक अजीब सी गर्म लहर दौड़ गई। स्त@#@ भारी हो गए, नि@#@ल सख्त होने लगे, चू@#@त में हल्की सी नमी महसूस हुई। शालिनी ने खुद को झटका – “नहीं… ये गलत है…” और जल्दी से कॉ@#म अपनी साड़ी के ब्लाउज में छुपा लिया।
राहुल कमरे से निकला, आंखें मलता हुआ। शालिनी ने पैंट हाथ में रखी हुई देखकर कहा – “बेटा… ये कल की पैंट है… अभी धुली नहीं है… तू नई पहन ले… मैं शाम तक धोकर रख दूंगी।” राहुल ने हल्के से सिर हिलाया – “ठीक है मा… कोई बात नहीं।” वो नई पैंट लेकर कमरे में चला गया। शालिनी ने राहुल की पीठ देखते हुए सोचा – उसकी चौड़ी कंधे, मजबूत कमर… और वो कॉ@#म… लेकिन तभी मन में एक विचार आया – “बाजार जाना है… सब्जी और कुछ जरूरी सामान लाना है… राहुल को साथ ले चलती हूं… शायद बातचीत में कुछ पता चल जाए…” शालिनी ने राहुल को आवाज लगाई – “बेटा… बाजार चल… स्कूटी ले ले… मा के साथ घूम आएंगे…” राहुल खुश होकर तैयार हो गया।
दोनों स्कूटी पर बैठे। शालिनी पीछे बैठीं, साड़ी का पल्लू ठीक किया लेकिन गर्मी की वजह से ब्लाउज के ऊपरी हुक खुले हुए थे। राहुल ने स्कूटी स्टार्ट की। गांव की सड़क खराब थी – गड्ढे, कीचड़, उबड़-खाबड़। हर गड्ढे पर राहुल ब्रेक लगाता, स्कूटी अचानक रुकती और शालिनी का शरीर आगे झुक जाता। उनका स्त@#@ राहुल की पीठ से जोर से दब जाता। पहली बार शालिनी ने महसूस किया – राहुल की पीठ की गर्मी, उसकी मांसपेशियां… और उनका अपना स्त@#@ दबने से एक मीठी कंपकंपी दौड़ गई। शालिनी ने मन में सोचा – “उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है… बेटा… ब्रेक मत लगाओ… लेकिन लगाओ भी…” राहुल ने रियर व्यू मिरर में देखा – मा की आंखें बंद, होंठ थोड़े खुले, सांसें तेज… वो समझ गया कि मा को अच्छा लग रहा है। वो जानबूझकर ब्रेक लगाने लगा – हर गड्ढे पर, हर मोड़ पर। हर बार स्त@#@ दबते, कभी एक, कभी दोनों… शालिनी की चू@#@त में नमी बढ़ती जा रही थी। राहुल का ल@#@#ंड भी स्कूटी पर सख्त हो चुका था। बाजार पहुंचकर दोनों सामान लेते रहे लेकिन नजरें एक-दूसरे पर टिकी रहतीं।
शाम को घर लौटकर दोनों थके हुए थे। रात को शालिनी बाथरूम के पास से गुजर रही थीं। दरवाजे में एक छोटा सा छेद था। अंदर राहुल नहा रहा था। शालिनी रुक गईं। राहुल नंगा था, पानी उसके मजबूत शरीर पर बह रहा था। शालिनी की नजरें उसके ल@#@#ंड पर टिक गईं – सख्त, मोटा, पानी में चमकता हुआ। तभी राहुल ने लॉन्ड्री की टोकरी से एक पैंटी उठाई – शालिनी की, हल्की गुलाबी, जिस पर थोड़ी नमी थी। राहुल ने उसे नाक पर रखकर सूंघा, फिर मुंह में लिया, चूसा। शालिनी की सांस रुक गई। राहुल ने पैंटी को ल@#@#ंड पर लपेटा, ऊपर-नीचे करने लगा – “मा… उफ्फ… मा की चू@#@त… मा की पैंटी…” शालिनी ने देखा – राहुल तेजी से हाथ चला रहा था, फिर जोर से कराहा और पैंटी पर अपना गर्म रस छोड़ दिया। शालिनी का शरीर कांप उठा।
राहुल बाहर निकल गया। शालिनी ने बाथरूम में घुसकर दरवाजा बंद किया। पैंटी अभी भी गीली थी – राहुल का रस चिपका हुआ। शालिनी ने उसे उठाया, नाक के पास लाया, सूंघा – मीठा, नमकीन गंध। फिर जीभ निकाली, चाटा – “उफ्फ… बेटा का रस… कितना गर्म… कितना मीठा…” उन्होंने पैंटी को चूसा, रस को चाटा। फिर अपनी साड़ी उतारी, नंगी हो गईं। बाथरूम के शॉवर के नीचे खड़ी होकर उंगली चू@#@त में डाली – “आह… बेटा… तू मा को पागल कर रहा है…” उंगलियां तेज कीं, क्लिट दबाया, दूसरी उंगली अंदर घुसाई। शालिनी कराह रही थीं – “बेटा… मा की चू@#@त तेरे रस से गीली है… आह… मा झड़ रही है…” उन्होंने org@#@ms लिया – शरीर कांप उठा, चू@#@त से रस बहने लगा।
अगले दिन राहुल कॉलेज से लौटा। शालिनी रसोई में थीं। राहुल ने पीछे से आकर गले लगाया – “मा… आज बहुत थक गया हूं।” शालिनी का शरीर सिहर गया। राहुल की छाती उनकी पीठ से सट गई थी। उन्होंने हल्के से कहा – “बेटा… थोड़ा पीछे हट…” लेकिन राहुल ने नहीं हटाया। शालिनी ने महसूस किया कि राहुल का ल@#@#ंड हल्का सा उनकी ग@#@ड से टकरा रहा है। शाम को डिनर के बाद राहुल ने कहा – “मा, पीठ में दर्द है… थोड़ी मालिश कर दोगी?” शालिनी ने हां कह दी। राहुल शर्ट उतारकर लेट गया। शालिनी ने तेल लगाकर मालिश शुरू की। उनकी उंगलियां राहुल की चौड़ी पीठ पर घूम रही थीं। राहुल ने आह भरी – “मा… कितना अच्छा लग रहा है…” शालिनी की सांसें तेज हो गईं। उनकी उंगलियां धीरे-धीरे राहुल की कमर तक सरक गईं। राहुल ने पलटकर देखा – शालिनी की साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, स्त@#@ की गहराई दिख रही थी। राहुल की सांसें तेज हो गईं। शालिनी ने जल्दी से पल्लू ठीक किया और बोलीं – “बस… आज इतना ही।”
राहुल अब हर दिन सोचता – “मा का व्यवहार क्यों बदल रहा है? वो कॉ@#म कहां गया? कल तो जेब में था…” वो जानबूझकर घर में शर्ट उतारकर घूमने लगा। शालिनी की नजरें उसकी छाती पर, उसकी कमर पर टिक जातीं। तीसरे दिन शाम को शालिनी ने खुद से ही कहा – “बेटा… आज मा की भी पीठ में बहुत दर्द है… तू मालिश कर दे ना… बहुत थक गई हूं।” राहुल ने हां कहा। शालिनी ने जानबूझकर ब्लाउज के ऊपरी तीन हुक खोल दिए, ब्रा का स्ट्रैप नीचे सरकाया, और लेट गईं। राहुल ने तेल लगाया। उंगलियां पीठ पर, फिर कमर पर। शालिनी ने हल्की आह भरी – “उफ्फ… बेटा… ऐसे ही… और नीचे… बहुत अच्छा लग रहा है…” राहुल की उंगलियां शालिनी की कमर के नीचे सरकीं। शालिनी ने ब्रा पूरी तरह खोल दी – “यहाँ भी दर्द है… बेटा… दोनों तरफ से दबा दे…” राहुल ने दोनों स्त@#@ हाथों में लिए, धीरे से दबाए। शालिनी की सांसें तेज हो गईं – “आह… बेटा… ऐसे ही… नि@#@ल को भी सहला…” राहुल ने नि@#@ल को उंगलियों से मसला। शालिनी कराह रही थीं – “उफ्फ… कितना अच्छा… बेटा… और जोर से…”
राहुल का ल@#@#ंड अब सख्त हो चुका था। शालिनी ने महसूस किया और मुस्कुराईं – “बेटा… तुझे भी अच्छा लग रहा है ना… मा को भी…” उन्होंने राहुल की कमर पर हाथ रखा, धीरे से पैंट के ऊपर से ल@#@#ंड को सहलाया। राहुल सिहर उठा। शालिनी ने कहा – “बेटा… मा भी थकी हुई है… तू मा की जांघों पर भी मालिश कर दे…” राहुल ने जांघों पर तेल लगाया, उंगलियां अंदर की तरफ सरकाईं। शालिनी ने टांगें थोड़ी फैलाईं – “और अंदर… मा की चू@#@त के पास… दर्द हो रहा है वहाँ भी…” राहुल की उंगलियां प@#@ी के ऊपर से चू@#@त को छू गईं। शालिनी गीली थीं। उन्होंने राहुल का हाथ पकड़कर प@#@ी साइड की – “यहाँ… उंगली डाल दे… मा को राहत मिलेगी…” राहुल ने उंगली डाली। शालिनी चीखी – “आह… बेटा… धीरे… लेकिन मत निकालना… और गहराई में…”
राहुल ने उंगलियां तेज कीं। शालिनी कराह रही थीं – “उफ्फ… बेटा… मा की चू@#@त तेरी उंगलियों से पिघल रही है… और कर…” शालिनी ने राहुल की पैंट खोली, ल@#@#ंड बाहर निकाला, हाथ में लिया – “बेटा… तेरा इतना सख्त… मा को भी छूने दे…” उन्होंने ल@#@#ंड सहलाया, टिप को अंगूठे से घुमाया। दोनों एक-दूसरे को सहला रहे थे। शालिनी ने कहा – “बेटा… वो कॉ@#म… मा ने छुपाया था… लेकिन अब… मा चाहती है कि तू मा को पूरा महसूस करे…” राहुल ने कॉ@#म निकाला। शालिनी ने देखा और बोलीं – “धीरे… पहले मा को तैयार कर…”
राहुल ने मुंह लगाया, जीभ से चू@#@त के होंठ चाटे, क्लिट को चूसा, अंदर जीभ घुसाई। शालिनी चीखी – “आआह्ह… बेटा… ऐसी चाट… मा की चू@#@त पिघल रही है… उफ्फ… और जोर से चूसो… क्लिट को दांतों से हल्का काटो…” शालिनी ने पहला org@#@ms लिया – शरीर कांप उठा, चू@#@त से रस बहने लगा। राहुल ने कॉ@#म चढ़ाया – धीरे से, टिप से लेकर नीचे तक। शालिनी ने खुद ऊपर बैठ गईं। ल@#@#ंड के सिर को चू@#@त के मुंह पर रगड़ा, फिर धीरे-धीरे नीचे उतरीं – “आह… इतना मोटा… मा की चू@#@त फैल रही है… धीरे… पूरा अंदर… आह्ह… अब पूरा भर गया… उफ्फ… कितना गहरा… मा की चू@#@त की दीवारें तेरे ल@#@#ंड को निचोड़ रही हैं…”
धीरे-धीरे शालिनी ऊपर-नीचे होने लगीं। हर बार नीचे उतरते वक्त ल@#@#ंड पूरी तरह अंदर चला जाता, चू@#@त के अंदर की हर नस को छूता। राहुल ने स्त@#@ पकड़े, दबाए, नि@#@ल को उंगलियों से मसलते हुए चूसा। शालिनी की गति धीरे-धीरे तेज हुई – “जोर से… बेटा… मा को चोद… तेरी मा की चू@#@त अब तेरी है… हर थ्रस्ट में मा को महसूस करा… आह… और गहरा… मा की चू@#@त को फाड़ दो… मा तेरी पूरी तरह हो गई है…” राहुल ने नीचे से धक्के मारे – ऊपर उठकर, फिर जोर से नीचे, हर बार चू@#@त के सबसे गहरे हिस्से को छूते हुए। शालिनी की कराहें कमरे में गूंज रही थीं – “उफ्फ… बेटा… इतना जोर… मा फिर झड़ रही है… आआह्ह… दूसरा org@#@ms… चू@#@त कांप रही है… रस निकल रहा है… तेरे ल@#@#ंड पर बह रहा है…”
राहुल ने पोजीशन बदली – शालिनी को घुटनों पर किया, पीछे से ल@#@#ंड डाला। ग@#@ड ऊपर उठाकर धक्के मारे। हर धक्के पर चू@#@त से थप-थप की आवाज आ रही थी, शालिनी की स्त@#@ नीचे लटककर झूल रहे थे। राहुल ने एक हाथ से स्त@#@ दबाया, दूसरे से ग@#@ड थपथपाई। शालिनी चीख रही थीं – “आह… पीछे से… और गहरा… मा की चू@#@त अब पूरी तरह तेरी… रोज ऐसा कर… मा तेरी रखैल बन गई है… तेरे ल@#@#ंड से मा की चू@#@त कभी अलग नहीं होगी…” शालिनी ने तीसरा org@#@ms लिया – शरीर झटके से कांपा, चू@#@त ने ल@#@#ंड को इतना निचोड़ा कि राहुल भी कराह उठा।
आखिर में राहुल ने शालिनी को वापस लिटाया, टांगें कंधों पर रखीं और जोर-जोर से धक्के मारे। हर थ्रस्ट के साथ चू@#@त के अंदर की गर्मी बढ़ रही थी। शालिनी की आंखें बंद, मुंह खुला, कराहें निकल रही थीं – “बेटा… मा को भर दो… कॉ@#म में भी… मा की चू@#@त तेरे रस से गर्म हो जाए… मा सब लेगी…” राहुल ने आखिरी धक्के मारे – “मा… ले… सब तेरे लिए…” और कॉ@#म गर्म रस से भर गया। दोनों थककर लिपट गए, ल@#@#ंड अभी भी अंदर, धीरे-धीरे नरम हो रहा था।
शालिनी ने राहुल को चु@#@न दिया, फुसफुसाईं – “बेटा… अब हर रात… लेकिन पापा के आने तक… सिर्फ हमारा राज रहेगा…” राहुल ने कहा – “मा… अगली बार बिना कॉ@#म के?” शालिनी ने मुस्कुराकर कहा – “देखेंगे… लेकिन अभी तो मा को सुरक्षित रखना है… ताकि हम रोज ऐसा गहरा, ऐसा पागलपन भरा मिलन कर सकें…” और दोनों फिर से एक-दूसरे से लिपट गए। रात अभी बाकी थी।