सुमन भाभी की पहली चु@@ई—>सुमन और समीर के बीच का रिश्ता हमेशा से ही बहुत प्यारा और सम्मानजनक रहा था, लेकिन इस बार गर्मियों की छुट्टियों में जब समीर अपने बड़े भाई के घर रहने आया, तो हवाओं में एक अलग ही बेचैनी घुली हुई थी। सुमन भाभी की उम्र करीब बत्तीस साल थी और उनका शरीर किसी ढली हुई प्रतिमा की तरह आकर्षक था, जिसे देख कर समीर का मन अक्सर भटक जाता था। उनके चेहरे की चमक और उनकी आँखों में छिपी शरारत समीर को रह-रह कर अपनी ओर खींचती थी, जबकि समीर अभी मात्र चौबीस साल का एक गबरू जवान था जिसके शरीर में वासना का लावा उबल रहा था।
सुमन भाभी के शारीरिक बनावट की बात करें तो उनके पास भारी और गोल तरबूज थे जो अक्सर उनकी साड़ी के ब्लाउज से बाहर झाँकने को बेताब रहते थे और उनके चलने पर जब उनका भारी पिछवाड़ा हिलता था, तो समीर की धड़कनें रुक जाती थीं। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनके कूल्हे काफी चौड़े और मांसल थे, जो किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी थे। जब भी वह रसोई में झुककर काम करतीं, तो समीर की नजरें उनके तरबूज की गहराई और उनके ब्लाउज के नीचे छिपे मटर के दानों को ढूंढने लगती थीं, जिससे उसके मन में अजीब सी हलचल पैदा होती थी।
उस दोपहर घर पर कोई नहीं था और बाहर सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था, घर के अंदर का माहौल भी धीरे-धीरे गर्म हो रहा था क्योंकि समीर और सुमन सोफे पर करीब बैठे टीवी देख रहे थे। समीर की नजरें बार-बार सुमन भाभी के खुले कंधे और उनकी साड़ी के पल्लू से फिसलकर नीचे की ओर जा रही थीं, जहाँ से उनके तरबूज का ऊपरी हिस्सा साफ दिखाई दे रहा था। सुमन को भी समीर की नजरों का अहसास था, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज करने के बजाय अपनी साड़ी को थोड़ा और ढीला छोड़ दिया, जिससे समीर के अंदर की इच्छा और तीव्र हो गई।
समीर ने हिम्मत जुटाकर सुमन भाभी के हाथ पर अपना हाथ रखा, तो उन्होंने उसे हटाया नहीं बल्कि एक गहरी सांस लेकर अपनी आँखें मूंद लीं और समीर को और करीब आने का मूक आमंत्रण दे दिया। समीर की उंगलियां धीरे-धीरे उनकी मखमली बाहों पर रेंगने लगीं और उसने महसूस किया कि भाभी का शरीर कांप रहा था और उनकी सांसें तेज चलने लगी थीं। उस वक्त कमरे में सिर्फ कूलर की आवाज और उन दोनों की धड़कनों की गूंज सुनाई दे रही थी, जो एक-दूसरे की बढ़ती हुई प्यास को बयां कर रही थी।
समीर ने धीरे से सुमन भाभी को अपनी ओर खींचा और उनके चेहरे को अपने हाथों में लेकर उनके होंठों का स्वाद चखना शुरू किया, जो किसी शहद की तरह मीठे और रसीले लग रहे थे। भाभी ने भी अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं और वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में बुरी तरह जकड़ गए, जैसे बरसों की कोई अधूरी प्यास आज बुझने वाली हो। समीर के हाथ अब भाभी के भारी तरबूज पर पहुँच चुके थे, जिन्हें उसने जोर से दबाया तो भाभी के मुंह से एक दबी हुई आह निकली और उन्होंने समीर के बालों को अपनी उंगलियों से जकड़ लिया।
धीरे-धीरे समीर ने भाभी की साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा, जिससे उनके गोरे और चमकदार तरबूज पूरी तरह आजाद होकर सामने आ गए, जिन पर छोटे-छोटे गुलाबी मटर के दाने उभरे हुए थे। समीर ने अपनी जीभ से उन मटर को सहलाना शुरू किया, जिससे भाभी का शरीर धनुष की तरह मुड़ गया और वे सिसकारियाँ लेने लगीं। भाभी ने समीर की टी-शर्ट उतार दी और उसके सीने पर अपनी हथेलियाँ रगड़ने लगीं, जिससे समीर का उत्तेजना का स्तर सातवें आसमान पर पहुँच गया और उसका खीरा उसकी पैंट के अंदर छटपटाने लगा।
समीर ने अब अपना हाथ भाभी के पेट के नीचे ले जाते हुए उनकी पेटीकोट के अंदर डाल दिया, जहाँ उसे घने बाल महसूस हुए और उनके बीच छिपी हुई रेशमी और गीली खाई मिली। जैसे ही समीर की उंगलियों ने उस खाई के मुहाने को छुआ, भाभी ने एक लंबी आह भरी और समीर को अपनी ओर और जोर से खींच लिया। समीर अब भाभी की खाई चाटना चाहता था, इसलिए उसने उन्हें सोफे पर लिटाया और उनके पैरों के बीच जाकर उनकी उस गीली जगह को अपनी जीभ से सहलाने लगा, जिससे भाभी का रस निकलने को बेताब हो गया।
भाभी ने समीर का सिर पकड़कर अपनी खाई पर दबा दिया और जोर-जोर से अपने कूल्हे हिलाने लगीं, क्योंकि समीर की जीभ का जादू उन्हें पागल कर रहा था। समीर ने अपनी उंगली से खोदना शुरू किया तो भाभी का शरीर थरथराने लगा और उन्होंने समीर से विनती की कि अब वे और इंतजार नहीं कर सकतीं। समीर ने अपनी पैंट उतारी और अपना लंबा, सख्त और तना हुआ खीरा बाहर निकाला, जिसे देखकर भाभी की आँखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने उसे अपने हाथों में लेकर सहलाया।
समीर ने भाभी को पलंग पर लिटाया और खुद उनके ऊपर आकर अपने खीरे के सिर को उनकी रसीली खाई के मुहाने पर टिकाया और धीरे से दबाव डाला। जैसे ही खीरा अंदर गया, भाभी ने समीर के कंधों को अपने नाखूनों से खुरच दिया और एक दर्द भरी लेकिन सुखद चीख उनके गले से निकली। समीर ने रुककर उन्हें चूमना शुरू किया ताकि वे सहज महसूस कर सकें और फिर धीरे-धीरे सामने से खोदना शुरू कर दिया, जिससे कमरे में थप-थप की आवाजें गूंजने लगीं।
हर एक धक्के के साथ समीर का खीरा भाभी की खाई की गहराइयों को नाप रहा था और भाभी के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जिन्हें समीर अपने हाथों से मसल रहा था। भाभी बार-बार समीर के कान में फुसफुसा रही थीं, ‘ओह समीर, तुम कितना अच्छा खोदते हो, आज मेरी सारी प्यास बुझा दो, मुझे पूरी तरह अपना बना लो।’ समीर ने खुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और अब वह पूरी ताकत से भाभी के अंदर समा रहा था, जिससे वे दोनों पसीने से तर-बतर हो गए थे और उनकी सांसें एक-दूसरे में मिल रही थीं।
समीर ने अब भाभी की पोजीशन बदली और उन्हें घुटनों के बल खड़ा कर दिया ताकि वह पिछवाड़े से खोदना शुरू कर सके, जो कि भाभी को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। जब समीर का खीरा उनके पिछवाड़े की दिशा से उनकी खाई में जा रहा था, तो भाभी अपने हाथ बिस्तर की चादर पर जमाए हुए जोर-जोर से कराह रही थीं। उनके भारी कूल्हों पर पड़ने वाले समीर के थप्पड़ों की आवाज और खुदाई की तीव्रता ने माहौल को एकदम कामुक बना दिया था, जहाँ सिर्फ जिस्मों की भूख शांत हो रही थी।
अंत में जब समीर को लगा कि उसका रस निकलने वाला है, उसने भाभी को सीधा किया और पूरी गहराई तक अपने खीरे को उनकी खाई में उतार दिया। भाभी का शरीर भी जोर-जोर से झटके ले रहा था क्योंकि उनका रस छूटना शुरू हो गया था और ठीक उसी पल समीर ने भी अपना सारा गर्म रस उनकी खाई की गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए हाफ रहे थे और कमरे में एक अजीब सी शांति छा गई थी, जिसमें सिर्फ उनकी तेज धड़कनें ही सुनाई दे रही थीं।
खुदाई के बाद की वह हालत बहुत ही सुखद थी, सुमन भाभी समीर की छाती पर अपना सिर रखे हुए थीं और समीर उनके बालों को सहला रहा था। उनके शरीर अभी भी पसीने से चिपचिपे थे, लेकिन उनके मन को एक असीम शांति मिल चुकी थी और उस दिन के बाद उनके रिश्ते में एक नई गहराई आ गई थी। भाभी ने समीर की ओर देखकर मुस्कुराया और कहा, ‘तुमने तो आज मुझे अपनी खुदाई का दीवाना बना दिया समीर,’ और समीर ने उन्हें फिर से अपनी बाहों में कस लिया।