अंजली मैम के साथ बिताए गए वे दिन मुझे आज भी याद आते हैं जब मैं उनके ट्यूशन में बैठकर उनकी पढ़ाई से ज्यादा उनके शरीर के उतार-चढ़ाव को देखा करता था। आज बरसों बाद हम एक सुनसान पार्क के उस कोने में बैठे थे जहाँ शाम का धुंधला सा साया हर तरफ फैला हुआ था और हवाओं में एक अजीब सी मादकता घुली हुई थी। अंजली मैम अब भी वैसी ही खूबसूरत और कयामत लग रही थीं जैसी वे पहले हुआ करती थीं बस अब उनके शरीर में एक भरापुरापन आ गया था जो किसी भी मर्द को पागल करने के लिए काफी था। उन्होंने एक नीले रंग की पतली सी शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी जिसके अंदर से उनकी गोरी पीठ और कमर का उभार साफ़ झलक रहा था और उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार उनके भारी तरबूज से फिसल रहा था।
उनकी बनावट ऐसी थी कि देखकर ही किसी का भी मन मचल जाए विशेष रूप से उनके वे उभरे हुए तरबूज जो ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे और उनके बीच की गहरी घाटी साफ दिखाई दे रही थी। अंजली मैम जब साँस लेती थीं तो उनके तरबूज ऊपर-नीचे होते थे और उनके ऊपर लगे नन्हे मटर साफ़ तौर पर ब्लाउज के कपड़े के ऊपर से ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। उनका पिछवाड़ा भी काफी बड़ा और मांसल था जो साड़ी के नीचे से गोल और सुडौल नज़र आ रहा था जिसे देखकर मेरा मन कर रहा था कि बस उसे सहलाता रहूँ। हम दोनों बेंच पर बिल्कुल करीब बैठे थे और हमारी जाँघें एक-दूसरे से स्पर्श कर रही थीं जिससे मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी और मेरा मन बेचैन होने लगा था।
अंजली मैम ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा कि रोहन तुम बहुत बड़े हो गए हो और अब तुम्हारी बातों में भी वो पुराना वाला भोलापन नहीं रहा बल्कि एक अजीब सी कशिश आ गई है। मैंने उनकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया और उनके हाथ पर अपना हाथ रखा तो मैंने महसूस किया कि उनका हाथ काँप रहा था और उनके चेहरे पर एक हल्की सी लाली छा गई थी। हमारे बीच एक भावनात्मक जुड़ाव था जो सालों पुराना था लेकिन आज उस जुड़ाव में एक शारीरिक आकर्षण का तड़का लग गया था जिसने माहौल को और भी अधिक उत्तेजक बना दिया था। मुझे महसूस हो रहा था कि वे भी इस पल का उतना ही इंतज़ार कर रही थीं जितना कि मैं और उनकी भारी साँसें इस बात की गवाह थीं कि उनके अंदर भी इच्छाओं का तूफान उमड़ रहा है।
मैंने धीरे से अपनी उँगलियाँ उनकी कलाई से ऊपर ले जाते हुए उनकी नंगी कमर पर रखीं तो उन्होंने एक लंबी आह भरी और अपनी आँखें मूंद लीं जिससे मुझे आगे बढ़ने का इशारा मिल गया। उनकी कमर बहुत मुलायम और मखमली थी और जैसे ही मैंने उसे छुआ उनके शरीर में एक सिहरन दौड़ गई और वे मेरी तरफ और अधिक झुक गईं। उनकी साँसें अब मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं जिनमें से एक मीठी सी खुशबू आ रही थी और हम दोनों के बीच की दूरी अब खत्म होने वाली थी क्योंकि हमारी धड़कनें एक-दूसरे को सुनाई दे रही थीं। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था और मुझे अपनी पेंट के अंदर अपने खीरा के सख्त होने का अहसास होने लगा था जो अब बाहर आने के लिए बेकरार था।
मैंने हिम्मत जुटाई और उनके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर उनके होंठों की तरफ बढ़ा और जब हमारे होंठ एक-दूसरे से मिले तो लगा जैसे दुनिया रुक गई हो। वह चुंबन बहुत ही गहरा और भावुक था जिसमें बरसों की प्यास और तड़प घुली हुई थी और हम दोनों एक-दूसरे के मुँह के रस को चखने लगे थे। अंजली मैम के हाथ मेरे बालों में उलझ गए थे और वे मुझे अपनी ओर और जोर से खींच रही थीं जैसे वे भी मेरे करीब आने के लिए बेताब हों। उनकी जीभ मेरे मुँह के अंदर गहराई तक जा रही थी और हम दोनों की साँसों का शोर उस सुनसान पार्क के सन्नाटे को चीर रहा था जो अब पूरी तरह से कामुकता के रंग में रंग चुका था।
धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके पल्लू को हटाकर उनके भारी और नरम तरबूज तक पहुँच गया और जैसे ही मैंने उन्हें सहलाया मैम के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली कराह निकली। उनके तरबूज इतने बड़े और मुलायम थे कि मेरी हथेली में भी पूरे नहीं आ रहे थे और मैं उन्हें दबाते हुए उनके मटर को अपनी उंगलियों से मसलने लगा। वे दर्द और आनंद के मिले-जुले अहसास से झूम उठीं और उन्होंने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया जिससे उनकी गर्दन की सुराहीदार बनावट और भी उभर आई। मैंने अपने मुँह को उनके तरबूज की गहराई में डाल दिया और वहाँ की खुशबू और पसीने के स्वाद को चखने लगा जो मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था।
अंजली मैम ने सिसकते हुए कहा कि रोहन अब और सब्र नहीं होता प्लीज कुछ करो और उनकी यह बात सुनकर मेरा खीरा अपनी पूरी ताकत से पेंट को चीरने लगा था। मैंने उनके ब्लाउज के हुक धीरे-धीरे खोले और जैसे ही उनके तरबूज आज़ाद हुए वे उछलकर बाहर आ गए जिनकी गोलाई और चमक देखकर मेरी आँखें चुंधिया गईं। उनके मटर अब पूरी तरह से सख्त और खड़े हो चुके थे जिन्हें मैंने बारी-बारी से अपने मुँह में लेना शुरू किया और उन्हें चूसने लगा जैसे कोई छोटा बच्चा दूध पीता हो। मैम के हाथ मेरी पीठ पर गड़ गए थे और वे अपनी कमर को ऊपर की ओर उठा रही थीं जैसे वे अपनी खाई को मेरे खीरे के करीब लाना चाहती हों।
मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट को धीरे से ऊपर उठाया और जब मेरी नज़र उनकी रसीली खाई पर पड़ी तो मैं दंग रह गया क्योंकि वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहाँ से काम-रस की धारा बह रही थी। उनकी खाई के पास के बाल बहुत ही करीने से तराशे हुए थे और वहाँ की त्वचा रेशम जैसी कोमल थी जिसे छूते ही वे जोर-जोर से काँपने लगीं। मैंने अपनी उँगली को धीरे से उनकी खाई के अंदर डाला तो उन्होंने एक चीख मारी और अपनी जाँघों को मेरे हाथ पर कस लिया जैसे वे उस आनंद को अपने अंदर कैद कर लेना चाहती हों। मैं अपनी उंगली से खोदना जारी रखा और उनकी खाई की गहराई को नापने लगा जो अब पूरी तरह से मेरे स्वागत के लिए तैयार थी।
अंजली मैम की उत्तेजना अब चरम पर थी और उन्होंने काँपते हाथों से मेरी पेंट की जिप खोली और मेरे विशाल खीरा को बाहर निकाला जिसे देखते ही उनकी आँखें फटी की फटी रह गई। उन्होंने उसे अपने हाथ में पकड़ा और उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस करते हुए उसे चूमना शुरू कर दिया जिससे मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया। फिर उन्होंने उस खीरे को धीरे-धीरे अपने मुँह में लेना शुरू किया और उसे चूसने लगीं जैसे वे उसे पूरी तरह से निगल जाना चाहती हों। उनके मुँह की गर्मी और जीभ के स्पर्श ने मुझे पागल कर दिया था और मुझे महसूस होने लगा था कि अब खुदाई का वक्त आ गया है क्योंकि हम दोनों ही अब और इंतज़ार नहीं कर सकते थे।
मैंने उन्हें घास पर लिटाया और उनके ऊपर आकर सामने से खोदना शुरू करने के लिए अपने खीरे के सिरे को उनकी खाई के मुहाने पर रखा जो पहले से ही रस से लथपथ थी। जैसे ही मैंने धीरे से धक्का दिया मेरा खीरा उनकी तंग और गरम खाई के अंदर फिसलने लगा और अंजली मैम ने दर्द और सुख के मारे अपनी आँखें जोर से बंद कर लीं। वह एहसास इतना अद्भुत था कि शब्दों में बयान करना मुश्किल है क्योंकि उनकी खाई की दीवारें मेरे खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थीं। मैंने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और खुदाई का असली आनंद लेने लगा जिससे उनके तरबूज जोर-जोर से उछलने लगे और पूरे माहौल में हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़ गूँजने लगी।
मैम बार-बार कह रही थीं कि रोहन और तेज खोदो मुझे और गहराई तक महसूस होने दो और उनकी यह मांग सुनकर मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी। हर धक्के के साथ मेरा खीरा उनकी खाई की गहराई को छू रहा था और उनके मटर मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे जिससे एक अलग ही सुख की अनुभूति हो रही थी। हम दोनों पसीने में नहा चुके थे और हमारी साँसें एक सुर में चल रही थीं जैसे हम दो जिस्म एक जान हो गए हों। खुदाई की उस प्रक्रिया में हम इतने डूब गए थे कि हमें समय और स्थान का कोई होश नहीं रहा और बस एक-दूसरे के शरीर की गर्मी में जलते रहे जो अब बुझने का नाम नहीं ले रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया जो मेरा सबसे पसंदीदा तरीका था और उनकी झुकी हुई पीठ और उभरा हुआ पिछवाड़ा देखकर मेरी कामवासना और बढ़ गई। मैंने पीछे से अपने खीरे को उनकी खाई में उतारा और जब मैंने जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू किया तो उनके पिछवाड़े के दोनों गाल आपस में टकराकर थप्प-थप्प की आवाज़ करने लगे। अंजली मैम दोनों हाथों से घास को मुट्ठी में भींचे हुए थीं और उनके मुँह से निकलने वाली आहें अब पूरी तरह से मदहोश कर देने वाली थीं। हर बार जब मेरा खीरा पूरी तरह से अंदर जाता था वे एक लंबी और गहरी साँस लेती थीं जो इस बात का संकेत था कि वे अपनी चरम सीमा के करीब पहुँच रही हैं।
खुदाई का वह दौर लगभग आधे घंटे तक चला और अब हम दोनों का शरीर जवाब देने लगा था क्योंकि हमारा रस छूटने वाला था। अंजली मैम ने तड़पते हुए कहा कि रोहन मेरा रस निकलने वाला है और उसी पल मैंने भी महसूस किया कि मेरा खीरा अब फटने को तैयार है। मैंने अपनी रफ्तार को बिजली की तरह तेज कर दिया और उनकी खाई के सबसे गहरे कोने तक पहुँच गया जहाँ हम दोनों का रस एक साथ छूटा और एक गर्म धारा ने उनकी खाई को अंदर से भर दिया। वह अहसास इतना सुकून भरा था कि हम दोनों कुछ देर तक उसी अवस्था में एक-दूसरे से लिपटे रहे और हमारी साँसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं जबकि हम दोनों का पसीना आपस में मिल गया था।
खुदाई खत्म होने के बाद अंजली मैम की हालत ऐसी थी कि वे हिल भी नहीं पा रही थीं और उनके चेहरे पर एक असीम शांति और संतुष्टि के भाव थे। वे मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी रहीं और उनकी उँगलियाँ मेरे शांत पड़े खीरे को सहला रही थीं जैसे वे उस पल को हमेशा के लिए संजो लेना चाहती हों। पार्क के उस सुनसान कोने में हमने वह सब कुछ पा लिया था जिसकी कल्पना हमने बरसों से की थी और वह रात हमारे जीवन की सबसे यादगार रातों में से एक बन गई थी। अंत में हमने अपने कपड़े ठीक किए और एक-दूसरे को आखिरी बार चूमकर विदा ली लेकिन हमारे दिलों में वह आग अब भी सुलग रही थी जो भविष्य में फिर से जलने के लिए बेकरार थी।