कामुक चाची की चुदाई—>
गर्मियों की उन लंबी और सुस्त दोपहरियों में शहर की हलचल से दूर समीर अपने चाचा के घर रहने आया था। समीर की उम्र लगभग बाईस वर्ष थी और उसका शरीर कसरती और गठीला था, जो उसकी नियमित जिम जाने की आदत को दर्शाता था। उसकी चाची, रेखा, जिनकी उम्र अड़तीस साल थी, भारतीय सुंदरता का साक्षात स्वरूप थीं। रेखा का रंग निखरा हुआ गेहुआं था और उनके शरीर की बनावट ऐसी थी कि कोई भी उन्हें एक बार देख ले तो देखता ही रह जाए। उनके शरीर के ऊपरी हिस्से में मौजूद दो विशाल तरबूज उनकी सूती साड़ी के भीतर से हमेशा बाहर निकलने को बेताब नजर आते थे। उनकी कमर पतली थी, लेकिन नीचे का पिछवाड़ा काफी भारी और मांसल था, जो चलते समय एक लयबद्ध तरीके से हिलता था। समीर अक्सर उन्हें चोरी-छिपे देखा करता था, खासकर जब वे रसोई में काम करती थीं या आंगन में कपड़े सुखाती थीं। रेखा की आंखों में एक अजीब सी गहराई थी, जो समीर को अपनी ओर खींचती थी।
समीर और रेखा के बीच एक बहुत ही प्यारा और गहरा भावनात्मक जुड़ाव था, जो समय के साथ और भी गहरा होता जा रहा था। रेखा समीर का बहुत ख्याल रखती थीं, उसकी पसंद का खाना बनाना और उसकी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। समीर भी रेखा की हर बात मानता था, लेकिन धीरे-धीरे उसके मन में चाची के प्रति सम्मान के साथ-साथ एक तीव्र कामुक आकर्षण ने भी जन्म लेना शुरू कर दिया था। जब भी रेखा उसके पास से गुजरतीं, उनके शरीर से आने वाली चमेली के तेल और पसीने की मिली-जुली भीनी-भीनी खुशबू समीर की धड़कनों को तेज कर देती थी। वह अक्सर कल्पना करता कि काश वह उन रेशमी बालों को सहला सके या उनके उन भारी तरबूजों को अपने हाथों में भर सके। रेखा भी समीर की नजरों के बदलते अंदाज को भांप रही थीं, लेकिन उन्होंने कभी इस पर ऐतराज नहीं जताया, बल्कि उनके व्यवहार में एक तरह की मौन स्वीकृति और शरारत बढ़ गई थी।
एक दोपहर जब घर में कोई नहीं था और बाहर सूरज आग उगल रहा था, समीर ड्राइंग रूम में सोफे पर लेटा हुआ था। रेखा वहां आईं और उन्होंने एक पतली नाइटी पहन रखी थी, जिसके भीतर से उनके तरबूज साफ झलक रहे थे और उनके मटर की आकृति भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। समीर ने उन्हें देखा और उसकी सांसें अटक गईं। रेखा उसके पास बैठीं और बोलीं, ‘समीर, आज बहुत उमस है, मेरा सिर भारी हो रहा है, क्या तुम थोड़ी मालिश कर दोगे?’ समीर का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा, उसने कांपते हाथों से रेखा के कंधों को छूना शुरू किया। जैसे ही उसका हाथ उनके गले के नीचे उतरा, उसे उनकी त्वचा की गर्मी और कोमलता का अहसास हुआ। रेखा ने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी, जिससे उनके तरबूज ऊपर-नीचे होने लगे। समीर का खीरा उनकी नाइटी के नीचे अपनी जगह बनाने के लिए छटपटाने लगा था। वह झिझक रहा था, लेकिन रेखा के शरीर से निकलने वाली उत्तेजना उसे आगे बढ़ने के लिए उकसा रही थी।
समीर के हाथों की मालिश धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ने लगी और वह रेखा की पीठ पर अपनी उंगलियों से जादू करने लगा। रेखा ने धीरे से अपना सिर पीछे झुकाया और समीर की गोद में रख दिया, जिससे उनका चेहरा सीधे समीर की आंखों के सामने आ गया। दोनों की नजरें मिलीं और उस पल में सारी झिझक धुआं हो गई। समीर ने हिम्मत जुटाकर उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनका रसपान करने लगा। रेखा ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया और अपनी बाहें समीर के गले में डाल दीं। समीर के हाथ अब बेकाबू होकर रेखा के विशाल तरबूजों पर जा टिके थे, जिन्हें वह अपनी हथेलियों में दबाकर उनके भारीपन का आनंद ले रहा था। रेखा के मटर उत्तेजना के कारण सख्त हो गए थे, जो समीर की उंगलियों के नीचे साफ महसूस हो रहे थे। दोनों के बीच की सांसों की गर्मी कमरे के तापमान को बढ़ा रही थी और अब कपड़ों का बोझ असहनीय होता जा रहा था।
समीर ने धीरे-धीरे रेखा की नाइटी के बटन खोले और उनके गोरे शरीर को पूरी तरह से आजाद कर दिया। रेखा के शरीर पर मौजूद प्राकृतिक बाल उनकी कामुकता को और बढ़ा रहे थे। समीर ने अपना चेहरा उनके तरबूजों के बीच घुसा दिया और उन्हें बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूसने लगा। रेखा के मुंह से दबी-कुचली कराहें निकलने लगीं, ‘ओह समीर… तुम बहुत अच्छा कर रहे हो… मत रुको।’ समीर अब नीचे की ओर बढ़ा और उसने रेखा की टांगों को फैलाया, जहां उनकी गीली खाई उसका इंतजार कर रही थी। समीर ने अपनी जुबान से उनकी खाई चाटना शुरू किया, जिससे रेखा का पूरा शरीर कांपने लगा। वह अपने हाथ समीर के बालों में फंसाकर उसके चेहरे को अपनी खाई की ओर और जोर से दबाने लगीं। रेखा की खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस समीर के मुंह को सराबोर कर रहा था और वह पूरी तरह से इस स्वाद में खो चुका था।
अब रेखा से और सब्र नहीं हो रहा था, उन्होंने समीर का हाथ पकड़कर उसे अपने खीरे को बाहर निकालने का इशारा किया। जैसे ही समीर का फन उठाता हुआ खीरा बाहर आया, रेखा उसे देखकर दंग रह गईं। उन्होंने तुरंत समीर का खीरा मुंह में ले लिया और उसे बड़ी सफाई से चूसने लगीं। समीर को ऐसा सुख मिल रहा था जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था। रेखा की जीभ जब खीरे के अगले हिस्से पर फिरती, तो समीर के शरीर में बिजली की लहर दौड़ जाती। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद रेखा ने समीर को अपने ऊपर आने को कहा। समीर ने रेखा की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे को उनकी गहरी और रसीली खाई के द्वार पर टिका दिया। रेखा ने समीर की आंखों में देखते हुए कहा, ‘समीर, आज मुझे पूरी तरह से खोद दो, मुझे अपनी बना लो।’
समीर ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका आधा खीरा रेखा की तंग खाई के भीतर समा गया। रेखा के मुंह से एक चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम सुख की थी। समीर ने धीरे-धीरे अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की और कमरे में दोनों के शरीरों के टकराने की आवाजें गूंजने लगीं। समीर पूरी ताकत से रेखा को खोद रहा था और हर धक्के के साथ रेखा के तरबूज पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे। रेखा अपने पैरों से समीर की कमर को जकड़ चुकी थीं ताकि वह और गहराई तक जा सके। ‘आह समीर… तुम तो बहुत बड़े खिलाड़ी निकले… और जोर से… हाँ, वहीं… बहुत अच्छा लग रहा है!’ रेखा की उत्तेजना चरम पर थी। समीर ने अब उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे रेखा को एक नया और अनूठा आनंद मिलने लगा। उनका मांसल पिछवाड़ा समीर के हर धक्के को झेलते हुए थरथरा रहा था।
खुदाई की यह प्रक्रिया काफी लंबी चली, जिसमें दोनों ने कई बार अपनी पोजीशन बदली। समीर कभी सामने से खोदता तो कभी रेखा को अपने ऊपर बिठाकर उनके तरबूजों का आनंद लेता। कमरे में पसीने की गंध और कामुक आवाजों का एक अलग ही संसार बसा हुआ था। समीर का खीरा अब पूरी तरह से आग उगलने को तैयार था और रेखा की खाई भी रस से लबालब भरी हुई थी। अंत में समीर ने एक बहुत ही तेज और गहरा धक्का दिया और रेखा के भीतर ही अपना सारा रस छोड़ना शुरू कर दिया। उसी समय रेखा का भी रस निकलना शुरू हुआ और वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में कसकर लिपट गए। रेखा का पूरा शरीर झटके ले रहा था और समीर की सांसें बेकाबू थीं। वह पल किसी दिव्य सुख से कम नहीं था, जहाँ दो जिस्म एक रूह में तब्दील हो चुके थे।
काफी देर तक दोनों वैसे ही लेटे रहे, शांत और संतुष्ट। रेखा ने समीर के माथे को चूमा और कहा, ‘तुमने आज मुझे वो सुख दिया है समीर, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।’ समीर ने भी उन्हें अपनी बाहों में और जोर से भींच लिया। उनकी त्वचा पर पसीना अभी भी चमक रहा था और कमरे की खामोशी में उनकी धड़कनें साफ सुनी जा सकती थीं। रेखा की हालत ऐसी थी जैसे किसी ने उन्हें पूरी तरह से तृप्त कर दिया हो, उनके चेहरे पर एक अजीब सी शांति और चमक थी। समीर को भी अपनी मर्दानगी पर गर्व महसूस हो रहा था। उन्होंने तय किया कि यह राज सिर्फ उन दोनों के बीच ही रहेगा, एक ऐसा मीठा और कामुक राज जो उनके रिश्ते को एक नई गहराई दे चुका था। उस दिन के बाद से उन दोनों के बीच की केमिस्ट्री पूरी तरह बदल गई थी, अब वे सिर्फ चाची और भतीजा नहीं, बल्कि एक-दूसरे की जरूरतों को समझने वाले गहरे राजदार बन चुके थे।