कविता की उम्र अभी मुश्किल से बत्तीस साल रही होगी, लेकिन उनके शरीर की बनावट किसी बीस साल की मदमस्त युवती को मात देती थी। उनकी कमर की गोलाई और उनके भारी-भरकम और उभरे हुए तरबूज जब उनकी रेशमी साड़ी के नीचे से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते थे, तो देखने वाले की सांसें थम जाती थीं। कविता के चेहरे पर हमेशा एक हल्की सी मुस्कान रहती थी, जो उनकी आँखों की गहराई और उनके होंठों की सुर्खी के साथ मिलकर एक जानलेवा आकर्षण पैदा करती थी। उनका पिछवाड़ा इतना सुडौल और गदराया हुआ था कि जब वो चलती थीं, तो ऐसा लगता था जैसे दो पहाड़ियां आपस में टकरा रही हों। उनकी चाल में एक ऐसी मादकता थी जो घर के माहौल में एक अनकही गर्मी भर देती थी।
आर्यन, जो अभी इक्कीस साल का हुआ था और शहर से अपनी पढ़ाई पूरी करके वापस लौटा था, अपनी इस नई और जवान सौतेली माँ की खूबसूरती को देख कर दंग रह गया था। कविता के बदन की बनावट किसी अप्सरा से कम नहीं थी, उनके भारी तरबूज जब उनकी पतली कमर के ऊपर डोलते थे तो आर्यन की आँखों में एक अजीब सी चमक आ जाती थी। उनकी साड़ी के ब्लाउज से झांकते हुए उनके गोरे तरबूज और उन पर उभरे हुए छोटे-छोटे मटर किसी भी मर्द का मन डोलने के लिए काफी थे। जब वो चलती थीं, तो उनके पिछवाड़े की मटक आर्यन के खीरे में एक नई जान फूंक देती थी और उसे अपनी पतलून में जगह कम महसूस होने लगती थी।
घर में सन्नाटा था क्योंकि आर्यन के पिता एक लंबे व्यापारिक दौरे पर बाहर गए हुए थे, और घर में सिर्फ आर्यन और कविता ही बचे थे। रात का समय था और घर के हॉल में हल्की सी रोशनी जल रही थी, कविता सोफे पर बैठकर कोई मैगजीन पढ़ रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया था, जिससे उनके बाएं तरबूज का ऊपरी हिस्सा और उनके गोरे बदन की चमक साफ दिखाई दे रही थी। आर्यन वहीं पास में खड़ा उन्हें देख रहा था, उसके मन में एक अजीब सी हलचल मची हुई थी। उसे लग रहा था कि कविता भी उसे देख रही हैं, और उनकी आँखों में एक ऐसी प्यास है जो उसे अपनी ओर खींच रही है।
आर्यन धीरे से उनके पास गया और बोला, ‘माँ, आप अभी तक सोई नहीं? रात काफी हो गई है।’ कविता ने धीरे से अपनी नजरें ऊपर उठाईं और एक नशीली मुस्कान के साथ कहा, ‘नींद कहाँ आती है आर्यन, जब दिल में इतनी बेचैनी और शरीर में इतनी तड़प हो।’ उनके स्वर में एक ऐसी कामुकता थी जिसने आर्यन के बदन में बिजली सी दौड़ा दी। कविता ने अपना हाथ बढ़ाकर आर्यन का हाथ पकड़ा और उसे धीरे से अपने पास सोफे पर बैठा लिया। उनके बदन से आती मोगरे की खुशबू आर्यन के दिमाग को सुन्न कर रही थी, और उसके खीरे ने अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ अपनी मौजूदगी का अहसास कराना शुरू कर दिया था।
कविता ने अपनी उंगलियां आर्यन के बालों में घुमाईं और धीरे से उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, ‘क्या तुम्हें मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है, आर्यन? क्या तुम्हें नहीं लगता कि ये रात बहुत लंबी और सुनी है?’ आर्यन की धड़कनें तेज हो गई थीं, उसने हिम्मत जुटाकर अपना हाथ कविता की पतली कमर पर रखा। उनकी त्वचा का रेशमी अहसास उसे पागल बना रहा था। उसने धीरे से अपना हाथ ऊपर की ओर सरकाया और उनके भारी तरबूज की गोलाई को छुआ। कविता के मुंह से एक दबी हुई आह निकली और उन्होंने अपनी आँखें बंद कर लीं। उनके मटर अब ब्लाउज के कपड़े को चीरकर बाहर आने को बेताब लग रहे थे।
आर्यन ने धीरे से कविता के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके रस को चखने लगा। ये उनका पहला स्पर्श था, जो बहुत ही गहरा और भावनात्मक था। कविता ने भी पूरे जोश के साथ उसका साथ दिया और अपने हाथ आर्यन की पीठ पर कस लिए। दोनों के बीच की झिझक अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी। आर्यन ने धीरे से कविता की साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से हटा दिया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज खुला, कविता के विशाल और गोरे तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गिरे। आर्यन उन्हें देखकर सम्मोहित हो गया और उन पर अपने मुंह से प्यार करने लगा, उसने उनके मटरों को अपनी जुबान से सहलाना शुरू किया।
कविता उत्तेजना के मारे कांप रही थीं, उन्होंने आर्यन की पतलून की चेन खोली और उसके कड़क हो चुके खीरे को बाहर निकाला। जैसे ही उनका हाथ उस गरम और सख्त खीरे पर पड़ा, उनके मुंह से एक लंबी सिसकारी निकली। उन्होंने धीरे से उस खीरे को अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया। आर्यन को ऐसा लग रहा था जैसे वो स्वर्ग के दरवाजे पर खड़ा हो। कविता की जुबान जब उसके खीरे के ऊपरी हिस्से को सहलाती थी, तो उसके बदन में कंपकंपी छूट जाती थी। उधर आर्यन ने कविता के पैरों के बीच अपनी उंगलियां डाल दीं और उनकी रेशमी खाई को टटोलने लगा।
कविता की खाई पूरी तरह से गीली और लिसलिसी हो चुकी थी, आर्यन की उंगलियां जब उस गहरी खाई में अंदर-बाहर होने लगीं, तो कविता का शरीर धनुष की तरह तन गया। वो अपनी कमर को ऊपर उठाकर आर्यन की उंगलियों को और गहराई में महसूस करना चाहती थीं। आर्यन ने अब अपनी उंगली से खाई को खोदना शुरू किया, जिससे कविता का रस धीरे-धीरे बाहर निकलने लगा। दोनों की सांसें अब एक-दूसरे में घुली जा रही थीं। कविता ने आर्यन को अपने ऊपर खींच लिया और उसे अपनी खाई के मुहाने पर सेट किया।
आर्यन ने धीरे से अपने सख्त खीरे को कविता की तंग और गर्म खाई में उतारा। जैसे ही खीरा अंदर गया, दोनों के मुंह से एक साथ आह निकली। वो बहुत ही तंग और सुखद अहसास था। कविता ने अपने पैर आर्यन की कमर के चारों ओर लपेट लिए ताकि वो गहराई तक खुदाई कर सके। आर्यन ने अब धीरे-धीरे अपनी कमर चलानी शुरू की, हर धक्के के साथ उसका खीरा कविता की खाई की गहराइयों को छू रहा था। कविता की सिसकारियां अब कमरे की खामोशी को चीर रही थीं, वो बार-बार कह रही थीं, ‘और तेज आर्यन, मुझे पूरी तरह से खोद डालो।’
खुदाई की प्रक्रिया अब बहुत तेज हो गई थी, आर्यन पूरी ताकत के साथ कविता के बदन से टकरा रहा था। उनके तरबूज हर धक्के के साथ उछल रहे थे और आर्यन के सीने से रगड़ खा रहे थे। कमरे में सिर्फ जिस्मों के टकराने की आवाज़ और भारी सांसों का शोर था। आर्यन ने कविता को उल्टा घुमाया और उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वो उनके पिछवाड़े से खुदाई करने के लिए तैयार था। उसने अपने खीरे को पीछे से उनकी खाई में उतारा और तेज झटके देने लगा। कविता का पूरा शरीर थर-थर कांप रहा था, उन्हें ऐसा सुख मिल रहा था जो उन्होंने पहले कभी महसूस नहीं किया था।
काफी देर तक तेज खुदाई करने के बाद, दोनों अपने चरम पर पहुँचने वाले थे। कविता की खाई अब बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी और आर्यन का खीरा भी फटने को बेताब था। आखिरी के कुछ जोरदार झटकों के साथ आर्यन का सारा रस कविता की खाई के अंदर छूट गया और उसी पल कविता का भी रस निकलना शुरू हुआ। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े, उनके शरीर पसीने से लथपथ थे और सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। उस रात के बाद उनके बीच का रिश्ता सिर्फ सौतेली माँ और बेटे का नहीं रहा था, बल्कि वो दो प्यासे रूह बन चुके थे जिन्होंने एक-दूसरे की आग को शांत किया था।