मौसी की रसीली चु@@ई—>आर्यन अपनी मौसी नेहा के घर पहुँचा था, जहाँ शांति और सन्नाटे के बीच एक अजीब सी उत्तेजना हवा में तैर रही थी। नेहा की उम्र करीब ३५ साल थी, लेकिन उनकी काया किसी कमसिन कली जैसी ही कसरती और सुडौल थी, जो किसी भी मर्द के मन में तूफान ला सकती थी। गर्मी का मौसम था और नेहा ने एक हलकी नीली शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर के हर घुमाव को इतनी बारीकी से उजागर कर रही थी कि आर्यन की नजरें उन पर टिक कर रह गईं। साड़ी का कपड़ा इतना महीन था कि उनके बदन की गोराई साफ़ झलक रही थी और आर्यन ने जैसे ही उन्हें देखा, उसके मन के किसी कोने में दबी हुई प्यास अचानक जाग उठी।
नेहा मौसी का बदन बहुत ही आकर्षक और कामुक था, उनके सीने पर लदे दो बड़े और रसीले तरबूज साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब लग रहे थे। जब वो घर के कामों के लिए यहाँ-वहाँ चलती थीं, तो उनके भारी तरबूज एक लय में ऊपर-नीचे होते थे, जिसे देखकर आर्यन की धड़कनें बेकाबू होने लगती थीं। उनके तरबूजों के बीच की गहरी घाटी और साड़ी के नीचे उभरे छोटे-छोटे मटर के दाने जैसे उभार आर्यन की आँखों को सुकून दे रहे थे। उनकी कमर के नीचे का हिस्सा, उनका चौड़ा पिछवाड़ा, हर कदम के साथ जिस तरह से मटकता था, उसे देखकर आर्यन का अपनी भावनाओं पर काबू रखना मुश्किल होता जा रहा था।
उस रात घर में कोई नहीं था क्योंकि मौसा जी एक व्यापारिक दौरे पर शहर से बाहर गए हुए थे, और घर की इस तन्हाई ने दोनों के बीच एक अनकहा आकर्षण पैदा कर दिया था। नेहा और आर्यन साथ में रात का खाना खा रहे थे, लेकिन खाने से ज्यादा उनकी निगाहें एक-दूसरे को टटोल रही थीं। नेहा ने देखा कि आर्यन उनकी साड़ी के गिरे हुए पल्लू को देख रहा है, तो उन्होंने जानबूझकर उसे ठीक करने के बजाय थोड़ा और खिसका दिया। अब उनके गोल, चिकने कंधे और गर्दन की सुराहीदार बनावट पूरी तरह से उजागर थी, जिस पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं। उनकी आँखों में एक ऐसी गहरी प्यास थी जो शायद बरसों से अधूरी थी।
डिनर खत्म होने के बाद जब आर्यन पानी पीने के बहाने किचन में गया, तो उसने देखा कि नेहा वहां पहले से ही खड़ी खिड़की के बाहर देख रही थीं। जैसे ही आर्यन उनके करीब पहुँचा, रसोई की उस तंग जगह में दोनों के शरीर लगभग एक-दूसरे को छूने लगे। आर्यन ने अपनी हिम्मत जुटाई और धीरे से नेहा के कंधे पर अपना हाथ रखा। उस छुअन से नेहा की पूरी देह में एक सिहरन दौड़ गई और उन्होंने अपनी आँखें मूंद लीं। कमरे की खामोशी में उनकी बढ़ती हुई सांसों की आवाज साफ सुनाई दे रही थी, जो इस बात का सबूत थी कि वे भी इसी पल का इंतजार कर रही थीं।
आर्यन ने धीरे से नेहा को अपनी ओर घुमाया और उनकी आँखों में देखा, जहाँ झिझक और इच्छा का एक भयंकर संघर्ष चल रहा था। नेहा ने धीमी आवाज में कहा, ‘आर्यन, यह हम क्या कर रहे हैं, तुम जानते हो न कि हमारा रिश्ता क्या है?’ लेकिन उनके शब्दों में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक बेबसी और समर्पण था। आर्यन ने उनकी कमर पर हाथ रखते हुए उन्हें अपने करीब खींच लिया और उनके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा, ‘रिश्ते तो समाज के लिए होते हैं मौसी, पर इस वक्त सिर्फ हम हैं और हमारी ये बेकाबू चाहत।’ इतना कहकर आर्यन ने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मधुर रसपान शुरू कर दिया।
नेहा ने शुरू में थोड़ी प्रतिरोध दिखाया लेकिन जल्द ही वे आर्यन की बाहों में पिघल गईं और उसका साथ देने लगीं। उनकी जुबानें आपस में उलझ रही थीं और दोनों एक-दूसरे की सांसों को पी रहे थे। आर्यन का हाथ धीरे-धीरे नीचे फिसला और उन्होंने नेहा के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके रसीले तरबूजों को सहलाना शुरू कर दिया। नेहा के मुंह से एक आह निकली और उन्होंने अपने हाथ आर्यन के बालों में फंसा लिए। साड़ी का पल्लू अब जमीन पर गिर चुका था और नेहा का सुडौल शरीर आर्यन के सामने अपनी पूरी भव्यता के साथ मौजूद था।
आर्यन ने धीरे से नेहा के ब्लाउज के हुक खोले, जिससे उनके दोनों भारी तरबूज आजाद होकर बाहर आ गए। उनकी गोलाई और उन पर मौजूद गहरे गुलाबी मटर के दाने देखकर आर्यन पागल सा हो गया। उसने अपना चेहरा उनके बीच की खाई में छिपा दिया और उन्हें पागलों की तरह चूमने लगा। नेहा की सिसकारियां अब और तेज हो गई थीं, वे आर्यन के सिर को अपने तरबूजों पर और जोर से दबा रही थीं। आर्यन ने एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी साड़ी और पेटीकोट के अंदर डाल दिया, जहाँ उन्हें रेशमी बाल महसूस हुए जो उनकी गर्म खाई की रक्षा कर रहे थे।
आर्यन ने अपनी उंगलियों से उस गर्म और गीली खाई को सहलाना शुरू किया, तो नेहा का शरीर धनुष की तरह तन गया। वे बार-बार ‘आह, आर्यन’ पुकार रही थीं। आर्यन ने धीरे से अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, तो पाया कि नेहा पहले से ही पूरी तरह से तैयार थीं, उनकी खाई से प्यार का रस रिस रहा था। नेहा ने भी अब संयम खो दिया और आर्यन की पेंट की चेन खोलकर उसके अंदर छिपे हुए सख्त और लम्बे खीरे को बाहर निकाल लिया। उस गर्म और फन उठाए हुए खीरे को देखते ही नेहा की आँखों में एक चमक आ गई और उन्होंने तुरंत उसे अपने मुंह में ले लिया।
नेहा ने जिस तरह से उस खीरे को चूसना शुरू किया, आर्यन की तो जान ही निकल गई। वे अपने खीरे को उनके मुंह के अंदर और बाहर कर रहे थे, और नेहा पूरे समर्पण के साथ उसे गप-गप कर रही थीं। कुछ देर बाद आर्यन ने उन्हें बेड पर लिटा दिया और उनकी दोनों टांगों को फैलाकर उनकी रसीली खाई के मुहाने पर अपना चेहरा ले गए। आर्यन ने अपनी जुबान से उनकी खाई चाटना शुरू किया, तो नेहा के पैर हवा में कांपने लगे। वे बिस्तर की चादर को अपनी मुट्ठियों में भींच रही थीं और उनका पूरा शरीर पसीने से लथपथ हो गया था।
जब दोनों की उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच गई, तो आर्यन ने नेहा को सामने से खोदना शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने अपने फन उठाए हुए खीरे को नेहा की तंग और फिसलन भरी खाई के छेद पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया। नेहा के मुंह से एक चीख निकल गई क्योंकि आर्यन का खीरा काफी बड़ा था, लेकिन अगले ही पल उन्हें एक अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई। आर्यन अब धीरे-धीरे अपनी कमर चलाने लगे, और हर धक्के के साथ नेहा के भारी तरबूज इधर-उधर उछल रहे थे। कमरे में केवल उनके शरीर के टकराने की आवाज और नेहा की सिसकारियां गूँज रही थीं।
आर्यन ने अब नेहा को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदना शुरू किया। इस पोजीशन में नेहा का भारी पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठा हुआ था और आर्यन पीछे से अपने खीरे को उनकी खाई की गहराई तक उतार रहे थे। नेहा अपनी दोनों हथेलियों को बेड पर टिकाए हुए झटके खा रही थीं। ‘हाँ, आर्यन, और जोर से… मुझे पूरी तरह से खोद दो,’ नेहा ने हांफते हुए कहा। आर्यन की गति अब और तेज हो गई थी, वे पागलों की तरह खुदाई कर रहे थे। हर धक्के के साथ उनका खीरा नेहा की कोख तक जा टकराता था, जिससे नेहा को बेपनाह आनंद मिल रहा था।
खुदाई की यह प्रक्रिया काफी देर तक चलती रही, दोनों के शरीर पसीने से भीग चुके थे और सांसें उखड़ रही थीं। आर्यन को महसूस हुआ कि अब उनका रस छूटने वाला है, और ठीक उसी समय नेहा की खाई की दीवारें भी सिकुड़ने लगीं। नेहा ने एक ज़ोरदार चीख मारी और उनके शरीर से काम-रस का फव्वारा छूट गया। ठीक उसी वक्त आर्यन ने भी अपने खीरे से सारा सफेद रस नेहा की खाई के अंदर ही उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, पूरी तरह से थके हुए लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट।
कुछ देर तक दोनों उसी अवस्था में लेटे रहे, सिर्फ उनकी धड़कनों की आवाज सुनाई दे रही थी। नेहा ने आर्यन के माथे को चूमा और उन्हें अपनी बाहों में समेट लिया। उनकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, बल्कि एक सुकून था। नेहा ने धीरे से कहा, ‘तुमने आज मुझे वो खुशी दी है जो मैंने कभी महसूस नहीं की थी।’ आर्यन ने उनके तरबूजों को प्यार से सहलाया और मुस्कुराते हुए उन्हें अपने सीने से लगा लिया। वह रात उनके जीवन की सबसे यादगार और कामुक रात बन गई थी, जहाँ रिश्तों की मर्यादा प्यार और वासना के सैलाब में बह गई थी।
अगली सुबह जब सूरज की किरणें कमरे में दाखिल हुईं, तो नेहा और आर्यन एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए सो रहे थे। उनके बिखरे हुए कपड़े और बिस्तर की सलवटें रात की उस भीषण खुदाई की गवाही दे रही थीं। आर्यन जब जागा तो उसने नेहा को प्यार से निहारा, जो नींद में भी बहुत खूबसूरत लग रही थीं। उन्होंने धीरे से उनके मटर जैसे निप्पल्स को छुआ, जिससे नेहा की नींद खुल गई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुरा दिए, यह जानते हुए कि यह सिर्फ एक रात का खेल नहीं था, बल्कि एक नई और गहरी शुरुआत थी।