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Suman Ma’am Ki Chu@@i


Suman Ma’am Ki Chu@@i—>

आर्यन लगभग पांच साल बाद अपनी सबसे पसंदीदा ट्यूशन टीचर सुमन के घर की दहलीज पर खड़ा था। सुमन मैडम उसे तब पढ़ाती थीं जब वह कॉलेज के शुरुआती दिनों में था, और तब से ही उसके मन में उनके प्रति एक गहरा और अनकहा आकर्षण था। आज जब सुमन ने दरवाजा खोला, तो आर्यन की सांसें थम सी गईं। सुमन ने एक सफेद रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर के हर घुमाव को बड़ी खूबसूरती से बयां कर रही थी। उनकी उम्र अब अड़तीस के करीब थी, लेकिन उनके चेहरे की चमक और शरीर की ढलान पहले से कहीं ज्यादा कामुक और परिपक्व हो गई थी। उनकी आंखों में वही पुरानी सौम्यता थी, लेकिन आज उसमें एक अनजानी सी प्यास भी झलक रही थी जिसने आर्यन के दिल की धड़कन बढ़ा दी।

सुमन का शरीर किसी तराशी हुई मूरत की तरह था, उनके ऊपर के दोनों तरबूज साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से अपनी मौजूदगी का पुरजोर एहसास करा रहे थे। जब वह चलती थीं, तो उनके तरबूज हल्की सी हलचल के साथ ऊपर-नीचे होते थे, जो देखने वाले को मदहोश करने के लिए काफी था। उनकी कमर पतली थी लेकिन उनके नीचे का पिछवाड़ा काफी भारी और मांसल था, जो साड़ी में पूरी तरह से उभर कर दिख रहा था। आर्यन की नजरें बार-बार उनके चेहरे से हटकर उनके रेशमी बदन की गहराइयों में खो जा रही थीं। सुमन ने उसे अंदर बुलाया और सोफे पर बैठने को कहा, उनकी आवाज में एक अजीब सा कंपन था जैसे वह भी इस मुलाकात से उतनी ही बेचैन थीं जितना कि आर्यन खुद था।

बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं, लेकिन आज शब्दों के पीछे एक अलग ही जज्बात छिपे थे। सुमन ने आर्यन को गौर से देखा और कहा कि तुम अब पहले वाले छोटे लड़के नहीं रहे, अब तो तुम काफी गबरू जवान हो गए हो। यह कहते हुए उन्होंने अपना हाथ आर्यन के कंधे पर रखा, और उस एक स्पर्श ने आर्यन के पूरे बदन में बिजली की एक लहर दौड़ा दी। उनके हाथों की नरमी और उनके शरीर से आती मोगरे की धीमी खुशबू ने आर्यन के दिमाग को सुन्न कर दिया था। उसने महसूस किया कि उसकी पतलून के अंदर उसका खीरा धीरे-धीरे अपनी नींद से जाग रहा है और पूरी ताकत के साथ ऊपर की ओर सरक रहा है।

वातावरण में एक भारीपन छा गया था, दोनों के बीच की दूरी अब धीरे-धीरे कम होने लगी थी। सुमन उठीं और पानी लाने के बहाने रसोई की तरफ गईं, आर्यन भी उनके पीछे-पीछे चला गया। रसोई की तंग जगह में जब दोनों एक-दूसरे के करीब आए, तो साड़ी का वह पतला पर्दा भी उनके बीच की तपिश को नहीं रोक पा रहा था। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर सुमन की कमर पर अपना हाथ रखा, उनकी त्वचा मखमल की तरह कोमल और गर्म थी। सुमन ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी। उनके तरबूज आर्यन के सीने से सट गए थे, और आर्यन को अपने सीने पर उनके मटर जैसे सख्त दानों का दबाव महसूस हो रहा था जो उत्तेजना के मारे तन गए थे।

आर्यन ने धीरे से सुमन के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उनके होठों का रसपान करना शुरू किया, यह एक ऐसा अहसास था जिसके लिए वह सालों से तड़प रहा था। सुमन ने भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दिया, उनकी जीभ एक-दूसरे के साथ खेलने लगी और कमरे में सिसकियों की आवाज गूंजने लगी। आर्यन का हाथ धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ा और वह सुमन के भारी पिछवाड़े को सहलाने लगा, जो साड़ी के ऊपर से ही बेहद मुलायम और गदबदा महसूस हो रहा था। सुमन के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली और उन्होंने आर्यन को और भी कसकर अपनी बाहों में भर लिया। अब शर्म की सारी दीवारें गिर चुकी थीं और केवल एक बेकाबू प्यास बची थी जिसे बुझाना दोनों के लिए जरूरी हो गया था।

आर्यन ने सुमन को गोद में उठाया और बेडरूम की तरफ ले गया, जहां मद्धम रोशनी उनके जिस्मों की नुमाइश कर रही थी। उसने बड़े ही प्यार से सुमन की साड़ी के पल्लू को हटाया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही ब्लाउज खुला, सुमन के दूधिया और भारी तरबूज पूरी तरह आजाद होकर आर्यन के सामने आ गए। उनके ऊपर छोटे-छोटे मटर बिल्कुल सुर्ख और सख्त थे, जो आर्यन को अपनी ओर बुला रहे थे। आर्यन ने झुककर एक तरबूज को अपने मुंह में लिया और उसे चूसने लगा, सुमन ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फंसा लीं। वह बार-बार कह रही थीं, ‘ओह आर्यन, तुमने मुझे पागल कर दिया है, मुझे आज तुम्हारी खुदाई की बहुत जरूरत है।’

अब आर्यन ने सुमन के नीचे के वस्त्र भी धीरे-धीरे उतार दिए, और उनके पैरों के बीच की वह रहस्यमयी खाई अब पूरी तरह उजागर थी। उस खाई के आसपास के बाल बहुत ही करीने से कटे हुए थे और वहां से एक हल्की सी नमी झलक रही थी। आर्यन ने अपने हाथ की उंगली से खोदना शुरू किया, तो सुमन का पूरा बदन धनुष की तरह तन गया। उनकी खाई से निकलने वाला प्राकृतिक रस अब उनकी जांघों तक बहने लगा था। आर्यन ने अब देर न करते हुए अपनी पतलून उतारी और अपना विशाल और सख्त खीरा बाहर निकाला। सुमन की आंखें उस खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर फटी की फटी रह गईं, उन्होंने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस खीरे को सहलाने लगीं।

सुमन ने अब आर्यन के खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़ी ही सादगी से चूसने लगीं, उनका यह अंदाज आर्यन को चरम सुख की ओर ले जा रहा था। कुछ देर बाद, आर्यन ने सुमन को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उनके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। यह सामने से खोदना शुरू करने का वक्त था। जैसे ही आर्यन ने अपने खीरे की नोक को सुमन की तंग खाई के मुहाने पर रखा, सुमन की सांसें तेज हो गईं। उसने धीरे से दबाव बनाया और उसका खीरा धीरे-धीरे उस गर्म और मखमली खाई के अंदर समाने लगा। सुमन के चेहरे पर दर्द और आनंद का एक मिला-जुला भाव था, वह आर्यन की पीठ पर अपने नाखून गड़ा रही थीं और जोर-जोर से आहें भर रही थीं।

खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी रफ़्तार पकड़ चुकी थी, हर धक्के के साथ आर्यन का खीरा सुमन की खाई की गहराइयों को नाप रहा था। कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाज और भारी सांसों का शोर था। सुमन ने आर्यन से कहा, ‘आर्यन, मुझे पिछवाड़े से खोदो, मुझे वही पसंद है।’ आर्यन ने उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ा किया और खुद पीछे खड़ा हो गया। यह पिछवाड़े से खोदने का अंदाज सुमन को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। जैसे ही आर्यन ने पीछे से धक्का मारना शुरू किया, सुमन के तरबूज हवा में झूलने लगे। आर्यन ने पीछे से ही उनके दोनों तरबूजों को कसकर पकड़ लिया और अपनी खुदाई जारी रखी, हर प्रहार सुमन को स्वर्ग के द्वार तक ले जा रहा था।

काफी देर तक चली इस जबरदस्त खुदाई के बाद, दोनों के शरीर पसीने से तर-बतर हो चुके थे। आर्यन को महसूस हुआ कि अब उसका रस निकलने वाला है, उसने अपनी गति और बढ़ा दी। सुमन भी अपनी चरम सीमा पर थीं, उनकी खाई अब बुरी तरह धड़क रही थी और वह आर्यन का नाम पुकार रही थीं। अचानक सुमन का पूरा बदन थरथराने लगा और उनकी खाई से रस छूटने लगा, ठीक उसी समय आर्यन ने भी अपना सारा गर्म रस उनकी गहराइयों में छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे के ऊपर निढाल होकर गिर पड़े, उनकी सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। सुमन ने आर्यन के माथे को चूमा और उसे सीने से लगा लिया, उस पल में केवल प्यार, संतुष्टि और एक गहरा जुड़ाव था जो शब्दों से परे था।

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