जिम की तन्हाई और पुरानी सीनियर का नशा—>
आर्यन अपनी पुरानी स्कूल की सीनियर माया को जिम के खाली कोने में देख रहा था, जहाँ रोशनी थोड़ी मद्धम थी। माया की उम्र करीब अठ्ठाईस साल थी, लेकिन उसका शरीर किसी तराशी हुई संगमरमर की मूरत जैसा था जिसे कुदरत ने बड़ी फुर्सत से गढ़ा हो। उसने बेहद कसी हुई गहरे नीले रंग की जिम लेगिंग्स और एक छोटा सा सफेद स्पोर्ट्स ब्रा पहना हुआ था, जिससे उसके उभरे हुए और रसीले बड़े-बड़े तरबूज साफ झलक रहे थे। हर बार जब वह भारी वजन उठाती और गहरी सांस लेती, उसके तरबूजों के बीच की घाटी और भी गहरी हो जाती थी और उनके ऊपर मौजूद छोटे-छोटे मटर कपड़े के महीन रेशों को चीर कर बाहर आने को बेताब दिखाई देते थे। आर्यन का गला सूख रहा था और उसकी नजरें माया के पसीने से भीगे बदन पर जमी हुई थीं।
माया ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, उसकी नजरें आर्यन से मिलीं और उसके चेहरे पर एक जानलेवा मुस्कान तैर गई। आर्यन आगे बढ़ा और माया के पसीने से लथपथ बदन की महक उसके नथुनों में समा गई, जो किसी नशीली शराब से कम नहीं थी। माया के गोल और भारी पिछवाड़े को लेगिंग्स ने इस कदर जकड़ा हुआ था कि उसकी हर हरकत पर आर्यन का दिल धड़क उठता था। उसने धीरे से माया की कमर पर हाथ रखा, जहाँ की त्वचा रेशम जैसी मुलायम और पसीने के कारण थोड़ी फिसलन भरी थी। माया ने भी कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी पीठ आर्यन के सीने से सटा दी, जिससे आर्यन को अपने पीछे अपने कड़क होते खीरे की हलचल महसूस होने लगी। उन दोनों के बीच स्कूल के दिनों से ही एक अनकहा आकर्षण था, जो आज इस सुनसान जिम में अपनी सारी हदें पार करने को व्याकुल था।
आर्यन ने धीरे से अपने हाथ ऊपर उठाए और माया के तरबूजों को अपनी हथेलियों में भर लिया। वे इतने भारी और गरम थे कि आर्यन की उंगलियां उनमें धंसती चली गईं। माया के मुंह से एक दबी हुई आह निकली और उसने अपनी गर्दन पीछे झुका दी। आर्यन अब उसके कान के पास फुसफुसा रहा था और उसके होठों का रस धीरे-धीरे पी रहा था। माया की सांसें तेज हो गई थीं और उसने महसूस किया कि उसकी रेशमी खाई अब गीली होने लगी है। आर्यन ने बिना देर किए माया को पास पड़ी एक बेंच पर झुका दिया। माया का पिछवाड़ा अब आर्यन के बिल्कुल सामने था, जो ऊपर की ओर उठा हुआ किसी पहाड़ी की तरह सुडौल लग रहा था। आर्यन ने अपनी उंगलियों से उस पिछवाड़े के बीच की दरार को सहलाया, जिससे माया का पूरा शरीर थरथरा उठा और उसने कसकर बेंच को पकड़ लिया।
झिझक अब पूरी तरह मिट चुकी थी और उसकी जगह सिर्फ एक जंगली प्यास ने ले ली थी। आर्यन ने माया की लेगिंग्स को धीरे-धीरे नीचे सरकाया, जिससे उसके गोरे बदन और वहां उगे काले-काले बारीक बालों का नजारा साफ हो गया। माया की खाई अब पूरी तरह से रस छोड़ रही थी और वह आर्यन के स्पर्श के लिए तड़प रही थी। आर्यन ने अपनी उंगली से खाई में उंगली करना शुरू किया, तो माया की कराहें जिम की दीवारों से टकराने लगीं। वह बार-बार कह रही थी, ‘आर्यन, और नहीं सहा जाता, मुझे पूरा खोद डालो।’ आर्यन ने अपने कपड़े उतार फेंके और अपना तना हुआ, गरम और सख्त खीरा बाहर निकाला। जैसे ही उसने अपने खीरे के अगले हिस्से को माया की गीली खाई के मुहाने पर रखा, माया ने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक गहरी सांस भरी।
आर्यन ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका पूरा खीरा माया की तंग और गरम खाई के अंदर समा गया। माया के मुंह से एक चीख निकली जो दर्द और बेइंतहा मजे का मिश्रण थी। वह गहराई इतनी सुखद थी कि आर्यन को लगा जैसे वह स्वर्ग के किसी द्वार में प्रवेश कर गया हो। उसने धीरे-धीरे अपनी कमर चलाना शुरू किया और खुदाई की प्रक्रिया को एक लय दी। हर धक्के के साथ माया के तरबूज हवा में उछल रहे थे और आर्यन उन्हें अपने हाथों से मसल रहा था। ‘उह्ह… आर्यन, तुम बहुत अच्छा खोद रहे हो, अपनी पूरी ताकत लगा दो,’ माया ने चिल्लाते हुए कहा। आर्यन ने अब उसे पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे उसकी गहराई और भी बढ़ गई। माया के अंदर का तापमान इतना बढ़ गया था कि आर्यन का खीरा पिघलने को तैयार था।
कमरे में सिर्फ शरीर के टकराने की आवाजें और भारी सांसों का शोर था। आर्यन ने अब माया को सीधा लेटाया और सामने से खोदना शुरू किया। उसने माया की टांगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह खाई की आखिरी गहराई तक पहुंच सके। माया के हाथ आर्यन के बालों में फंसे हुए थे और वह उसे बार-बार चूम रही थी। जैसे-जैसे खुदाई तेज हुई, दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल गया। माया की खाई अब आर्यन के खीरे को कसकर जकड़ने लगी थी, जो इस बात का संकेत था कि उसका रस निकलने वाला है। ‘आर्यन, मैं… मैं पहुंचने वाली हूँ, मेरा रस छूट रहा है!’ माया ने कांपते हुए चिल्लाया और तभी उसकी खाई ने आर्यन के खीरे को पूरी ताकत से भींच लिया। आर्यन ने भी अंतिम तीन-चार तेज धक्के दिए और अपना सारा गरम रस माया की खाई की गहराई में उड़ेल दिया।
सब कुछ शांत होने के बाद दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए। माया का शरीर अभी भी हल्का-हल्का कांप रहा था और आर्यन की सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। वह अहसास इतना गहरा और संतोषजनक था कि शब्द कम पड़ रहे थे। माया ने आर्यन के माथे को चूमा और धीरे से मुस्कुराई, उसकी आंखों में अब एक अलग ही सुकून था। वे दोनों वहीं फर्श पर पड़े रहे, जहाँ पसीने और जिस्मानी खुशबू ने वातावरण को अभी भी कामुक बना रखा था। उस रात की खुदाई ने न सिर्फ उनके शरीरों को बल्कि उनकी पुरानी दबी हुई इच्छाओं को भी पूरी तरह तृप्त कर दिया था।