निधि की यादगार चु@@ई—>
निधि मैम और मेरा रिश्ता आज से दस साल पहले शुरू हुआ था जब मैं उनके पास गणित के ट्यूशन पढ़ने जाया करता था, तब वो मेरी सबसे पसंदीदा अध्यापिका हुआ करती थीं और उनके समझाने का तरीका इतना सरल था कि मैं घंटों उनके पास बैठा रहता था। आज दस साल बाद जब मैं शहर वापस लौटा, तो उनसे मिलने की तड़प मेरे दिल में फिर से जाग उठी और मैंने उनके घर जाने का फैसला किया, जहाँ पहुँचकर मैंने देखा कि वह पहले से भी ज्यादा खूबसूरत और जवान लग रही थीं। उनकी उम्र अब 34 के करीब थी, लेकिन उनके चेहरे का निखार और शरीर की सुडौल बनावट किसी कम उम्र की लड़की को भी मात दे सकती थी, जिसे देखकर मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा।
उस दिन उन्होंने एक गहरे नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी हुई थी, जो उनके शरीर से इस कदर चिपकी हुई थी कि उनके अंगों का हर उभार साफ झलक रहा था, विशेष रूप से उनके दो बड़े और गोल-मटोल तरबूज जो साड़ी के पतले पल्लू के नीचे अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। जब वो सोफे पर बैठीं, तो उनके तरबूज थोड़े और उभर आए और उनके बीच की गहरी घाटी साफ दिखाई देने लगी, जिसने मेरे भीतर की सोई हुई कामुक इच्छाओं को फिर से जगा दिया। उनके शरीर की बनावट बहुत ही आकर्षक थी, उनकी पतली कमर और भारी पिछवाड़ा उस साड़ी में किसी अप्सरा की तरह लग रहा था, जिसे देखकर किसी भी पुरुष का मन डोल जाए।
बातों-बातों में पुरानी यादें ताजा होने लगीं और माहौल में एक अजीब सी गर्माहट महसूस होने लगी, निधि मैम ने मेरे करीब आकर सोफे पर बैठते हुए मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराने लगीं। उनकी उस मुस्कराहट में एक तरह का आमंत्रण था, जो मेरे दिल की धड़कनों को और तेज कर रहा था, और मुझे लगने लगा कि वो भी शायद वही महसूस कर रही हैं जो मैं कर रहा हूँ। उनके जिस्म से आने वाली धीमी-धीमी खुशबू मेरे दिमाग को सुन्न कर रही थी और मुझे उनकी साड़ी के पल्लू के पीछे छिपे उन रसीले तरबूज को छूने की तीव्र इच्छा होने लगी थी।
अचानक उन्होंने कमरे की खिड़की बंद की और लाइट को थोड़ा धीमा कर दिया, जिससे कमरे का माहौल और भी रूमानी हो गया, और फिर वो मेरे और करीब आकर बैठ गईं जिससे उनके शरीर की गर्मी मुझे साफ महसूस होने लगी। मेरे मन में एक पल के लिए झिझक हुई कि क्या मैं सही कर रहा हूँ, लेकिन निधि मैम ने मेरी झिझक को ताड़ते हुए मेरा हाथ पकड़कर अपनी रेशमी जांघ पर रख दिया, जिससे मेरे पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई। उनकी आँखों में अब एक बेबसी और प्यास थी, जो सालों से दबी हुई थी, और उन्होंने धीरे से अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और अपनी गरम सांसें मेरी गर्दन पर छोड़ने लगीं।
मैने धीरे से अपना हाथ उनके कमर के घेरे पर घुमाया और फिर धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाते हुए उनके भारी तरबूज पर रख दिया, जिसे छूते ही मेरी उंगलियों ने उनकी कोमलता का एहसास किया। जैसे ही मेरा हाथ उनके तरबूज पर पहुँचा, उन्होंने एक गहरी आह भरी और अपनी आँखें मूंद लीं, जिससे मुझे यकीन हो गया कि वो भी इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। मैंने अपनी उंगलियों से उनके साड़ी के कपड़े के ऊपर से ही उनके मटर को महसूस किया, जो अब उत्तेजना के मारे सख्त हो गए थे और मेरे स्पर्श का आनंद ले रहे थे।
निधि मैम ने धीरे से अपना ब्लाउज खोला और अपने उन विशाल और दूध जैसे सफेद तरबूज को आजाद कर दिया, जिन्हें देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं, क्योंकि वो देखने में बहुत ही रसीले और टाइट लग रहे थे। मैंने झुककर उनके एक मटर को अपने मुंह में लिया और उसे चूसना शुरू किया, जबकि मेरा दूसरा हाथ उनके दूसरे तरबूज को सहला रहा था, जिससे उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। वो बार-बार मेरा नाम पुकार रही थीं और कह रही थीं कि ‘समीर, तुमने मुझे आज पूरी तरह से बेकाबू कर दिया है, आज मुझे अपना बना लो और मेरी प्यास बुझा दो।’
उत्तेजना अब अपने चरम पर थी, मैंने उनके साड़ी और पेटीकोट को धीरे से उतारा, जिससे उनकी रेशमी त्वचा और उनकी गहरी और नम खाई मेरे सामने आ गई, जो पूरी तरह से साफ और मखमली थी। उनकी खाई के पास के काले बाल हल्के से चमक रहे थे, और मैंने अपनी उंगलियों से उनकी खाई के किनारों को सहलाना शुरू किया, जिससे वो खुशी से झूम उठीं और अपनी कमर ऊपर उठाने लगीं। उनके शरीर का हर हिस्सा अब कांप रहा था और पसीने की बूंदें उनके माथे पर चमक रही थीं, जो उनकी कामुकता को और भी बढ़ा रही थीं, और मैंने धीरे से अपना चेहरा उनकी खाई के पास ले जाकर उसे चाटना शुरू किया।
जब मैंने उनकी खाई चाटना शुरू किया, तो निधि मैम ने जोर से मेरे बाल पकड़ लिए और अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाने लगीं, उनकी सिसकारियां अब कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। उन्होंने मुझसे कहा, ‘समीर, अब और इंतजार नहीं होता, अपना गरम खीरा निकालो और मेरी इस प्यासी खाई में डाल दो, मुझे आज तुम्हारी गहराई तक जाना है।’ मैंने बिना देर किए अपना सख्त और लंबा खीरा बाहर निकाला, जिसे देखकर उनकी आँखें चमक उठीं और उन्होंने उसे अपने हाथों में लेकर सहलाना शुरू किया, जिससे मुझे स्वर्ग जैसा आनंद महसूस होने लगा।
मैने उन्हें सोफे पर सीधा लिटाया और सामने से खोदना शुरू करने के लिए अपनी स्थिति बनाई, जैसे ही मेरा खीरा उनकी गरम और तंग खाई के मुहाने पर पहुँचा, हम दोनों की सांसें रुक सी गईं। जैसे ही मैंने एक जोरदार धक्का दिया, मेरा पूरा खीरा उनकी गहराई में समा गया और निधि मैम के मुँह से एक तेज चीख निकली, जो दर्द की कम और आनंद की ज्यादा थी। हम दोनों एक-दूसरे के शरीर में पूरी तरह से खो गए थे और कमरे में सिर्फ मांस से मांस टकराने की और भारी सांसों की आवाजें गूँज रही थीं, जो हमारी खुदाई की गति के साथ और भी तेज होती जा रही थीं।
खुदाई की गति अब बहुत बढ़ गई थी, मैंने उन्हें करवट दिलाकर पिछवाड़े से खोदना शुरू किया, जिससे मेरा खीरा उनकी खाई के हर कोने को छू रहा था और उन्हें असीम सुख पहुँचा रहा था। वो बार-बार कह रही थीं, ‘हाँ समीर, ऐसे ही खोदो, आज मेरी इस गहरी खाई को अपने खीरे के रस से भर दो, मुझे तुम्हारी खुदाई बहुत पसंद आ रही है।’ उनकी भारी गांड के हिलने से जो नजारा बन रहा था, उसने मुझे पागल कर दिया था और मैं पूरी ताकत के साथ उनके अंदर धक्के लगा रहा था, जिससे हम दोनों का पसीना एक-दूसरे में मिल रहा था।
काफी देर तक चली इस गहन खुदाई के बाद, मुझे महसूस हुआ कि मेरा रस अब निकलने ही वाला है, और निधि मैम भी अपने चरमोत्कर्ष के करीब थीं क्योंकि उनकी खाई की पकड़ अब और भी मजबूत हो गई थी। उन्होंने मुझसे कहा, ‘समीर, मत रुकना, आज सारा रस मेरे अंदर ही छोड़ देना,’ और ठीक उसी पल हम दोनों का रस एक साथ छूट गया, जिससे पूरे शरीर में एक अजीब सी शांति और थकावट छा गई। रस छूटने के बाद हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में ढीले पड़ गए, हमारी धड़कनें अभी भी तेज थीं लेकिन मन को एक अद्भुत तृप्ति मिल चुकी थी।
कुछ देर बाद जब हम सामान्य हुए, तो निधि मैम ने मुझे अपनी छाती से लगा लिया और मेरे माथे को चूमते हुए कहा कि आज की यह खुदाई उनके जीवन की सबसे यादगार घटना रहेगी जिसे वो कभी नहीं भूल पाएंगी। हम दोनों बिना कपड़ों के ही वहीं सोफे पर लेटे रहे और काफी देर तक एक-दूसरे के जिस्म की गर्माहट महसूस करते रहे, पुरानी यादें अब एक नए और गहरे रिश्ते में बदल चुकी थीं। वो पल हमारे लिए सिर्फ शारीरिक सुख नहीं था, बल्कि दो रूहों का मिलन था जिसने हमें एक-दूसरे के और भी करीब ला दिया था, और हमने तय किया कि यह सिलसिला अब ऐसे ही चलता रहेगा।