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पुरानी दोस्त की चु@@ई

नील और सानिया बचपन के सबसे करीबी दोस्त थे और स्कूल के दिनों में नील के मन में सानिया के लिए एक गहरा आकर्षण था जिसे वह कभी व्यक्त नहीं कर पाया था। सालों बाद जब वे एक शांत हिल स्टेशन के गेस्ट हाउस में मिले तो पुरानी यादें ताजा हो गईं और सानिया की खूबसूरती देखकर नील के होश उड़ गए। सानिया अब छब्बीस साल की एक परिपक्व और बेहद आकर्षक महिला बन चुकी थी जिसकी देह की बनावट किसी अप्सरा जैसी कामुक और सुडौल थी। उसने गहरे नीले रंग की रेशमी साड़ी पहनी थी जो उसके गोरे और चमकदार बदन पर बिजली की तरह चमक रही थी और उसके हर अंग को उभार रही थी।

सानिया के शरीर की बनावट बहुत ही मोहक थी जिसे देख नील का मन मचलने लगा था क्योंकि उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार ढलकता और उसके कसकर बंधे ब्लाउज से झांकते हुए उसके विशाल तरबूज नील की आंखों को अपनी ओर खींच रहे थे। उसके तरबूजों का उभार इतना गहरा और मादक था कि ब्लाउज की डोरी उन्हें थामने में असमर्थ लग रही थी और उस पर लगे छोटे-छोटे मटर जैसे दाने कपड़े के ऊपर से ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। सानिया जब चलती तो उसके पिछवाड़े का भारी और मांसल हिस्सा किसी लयबद्ध संगीत की तरह हिलता था जिसे देखकर नील के शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ने लगी थी और उसका दिल तेजी से धड़कने लगा था।

रात का सन्नाटा गहरा रहा था और गेस्ट हाउस के लिविंग रूम में जलती हुई हल्की पीली रोशनी उनके बीच एक भावनात्मक और कामुक वातावरण बना रही थी। सानिया ने अपनी आंखों में एक शरारत भरी चमक के साथ नील की तरफ देखा और पुरानी बातों को याद करते हुए उसके काफी करीब आ गई जिससे उसकी सांसों की महक नील के चेहरे पर महसूस होने लगी। नील ने धीरे से सानिया के कंधे पर हाथ रखा और उसकी रेशमी त्वचा का स्पर्श पाकर वह कांप गया जबकि सानिया ने भी पीछे हटने के बजाय अपना सिर नील के कंधे पर रख दिया और अपनी इच्छा जताई। उन दोनों के बीच सालों से दबा हुआ प्यार और आकर्षण अब एक ज्वालामुखी की तरह फूटने को तैयार था और उनकी धड़कनें एक-दूसरे की सांसों में घुलने लगी थीं।

नील ने हिम्मत जुटाई और सानिया के चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसके होंठों का स्वाद लेना शुरू किया जो किसी शहद की तरह मीठे और रसीले लग रहे थे। सानिया ने भी नील की गर्दन में अपनी बाहें डाल दीं और उसे अपनी ओर जोर से खींच लिया जिससे उसके भारी तरबूज नील की चौड़ी छाती से टकराकर पूरी तरह पिचक गए। नील ने अपनी उंगलियां सानिया की कमर के उस खुले हिस्से पर रखीं जो साड़ी और ब्लाउज के बीच से झांक रही थी और वहां की कोमल त्वचा को सहलाते हुए वह उसे धीरे-धीरे बेडरूम की ओर ले जाने लगा। सानिया की सिसकारियां अब कमरे की शांति को भंग कर रही थीं और वह नील के कान के पास धीरे से फुसफुसा रही थी कि वह आज उसकी सारी प्यास बुझा दे।

बेडरूम में पहुंचते ही नील ने सानिया की साड़ी को धीरे-धीरे उसकी देह से अलग करना शुरू किया और जैसे-जैसे कपड़ा नीचे गिरा सानिया का दूधिया बदन नील की आंखों के सामने पूरी तरह नग्न होने लगा। उसके शरीर पर अब सिर्फ छोटे-छोटे अंतःवस्त्र बचे थे लेकिन नील ने उन्हें भी उतारने में देर नहीं लगाई और अब सानिया अपने पूरे नैसर्गिक रूप में उसके सामने थी। नील ने नीचे झुककर सानिया के विशाल तरबूजों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें अपनी हथेलियों से दबाते हुए उनके ऊपर लगे मटर को अपनी जीभ से सहलाने लगा। सानिया की पीठ बिस्तर से उठ गई और वह अपनी उंगलियां नील के बालों में फंसाकर उसके चेहरे को अपने तरबूजों के बीच जोर-जोर से दबाने लगी और गहरी आहें भरने लगी।

नील अब सानिया के पूरे शरीर को अपनी जीभ से पूजने लगा था और धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ते हुए उसने सानिया की जांघों के बीच मौजूद उस गहरी और गीली खाई तक अपनी पहुंच बना ली। सानिया की खाई से बहते हुए प्राकृतिक रस की खुशबू ने नील को दीवाना बना दिया और उसने अपनी जीभ से उस खाई को चाटना शुरू किया जिससे सानिया बिस्तर पर छटपटाने लगी। उसकी उंगलियां बेड की चादर को कसकर जकड़ रही थीं और वह बार-बार नील का नाम पुकारते हुए और भी गहराई से खाई चाटने की विनती कर रही थी। नील ने सानिया की इच्छा पूरी करते हुए अपनी दो उंगलियां उस गहरी खाई में डाल दीं और अंदर-बाहर करते हुए उसे पूरी तरह से गीला और तैयार कर दिया।

अब समय आ चुका था कि नील अपने कठोर और तनावग्रस्त खीरे को सानिया की उस प्यासी खाई के हवाले कर दे जो काफी समय से उसका इंतजार कर रही थी। नील ने सानिया की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे के सिर को सानिया की खाई के मुहाने पर सटाया जिससे सानिया के मुंह से एक लंबी सिसकारी निकली। नील ने एक गहरा धक्का दिया और उसका पूरा खीरा सानिया की तंग और गर्म खाई के अंदर समा गया जिसे महसूस करते ही सानिया की आंखों में आंसू आ गए और उसने नील को कसकर गले लगा लिया। सानिया की तंगी नील के खीरे को चारों तरफ से जकड़ रही थी और वह धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाते हुए इस खुदाई के सुख को महसूस करने लगा और सानिया भी नीचे से अपनी कमर उठाकर उसका साथ देने लगी।

कमरे में अब सिर्फ मांस के टकराने की आवाजें और सानिया की सुरीली कराहें गूंज रही थीं जो नील को और भी उत्तेजित कर रही थीं और वह अपनी गति बढ़ाते हुए गहरी खुदाई करने लगा। उसने सानिया को बेड पर उल्टा लेटा दिया और उसके मांसल पिछवाड़े को ऊपर उठाकर पिछवाड़े से खोदना शुरू किया जो सानिया के लिए एक अलग ही चरम सुख का अनुभव था। सानिया अपनी हथेलियों के बल झुकी हुई थी और नील के हर धक्के के साथ उसके तरबूज हवा में झूल रहे थे जिन्हें नील पीछे से थामकर जोर-जोर से मसल रहा था। सानिया जोर-जोर से चिल्ला रही थी कि वह और तेज खोदे और उसके अंदर तक अपने खीरे का पूरा रस उड़ेल दे ताकि वह पूरी तरह तृप्त हो सके।

नील ने फिर सानिया को सीधा किया और सामने से खोदना जारी रखा जबकि सानिया ने अपने पैरों को नील की कमर के चारों ओर लपेट लिया था ताकि वह उसे और भी गहराई तक महसूस कर सके। उन दोनों का शरीर पसीने से लथपथ था और उनकी सांसें इतनी तेज थीं जैसे वे किसी लंबी दौड़ से लौटे हों लेकिन उनकी ऊर्जा कम होने का नाम नहीं ले रही थी। नील अब अपने चर्मोत्कर्ष के करीब था और उसने अपनी गति को तूफानी बना दिया जिससे सानिया का पूरा बदन थरथराने लगा और वह जोर-जोर से झटके खाने लगी। कुछ ही पलों बाद नील के खीरे से गरम रस निकलना शुरू हुआ और सानिया की खाई भी अपने रस से भर गई जिससे दोनों एक-दूसरे के ऊपर निढाल होकर गिर पड़े।

खुदाई खत्म होने के बाद नील सानिया के बगल में लेट गया और उसने सानिया को अपनी बाहों में समेट लिया जबकि सानिया अभी भी अपनी सांसें सामान्य करने की कोशिश कर रही थी। उसके चेहरे पर एक अलग ही संतुष्टि और चमक थी जो बता रही थी कि उसने आज अपने जीवन का सबसे सुखद पल जिया है और नील के प्रति उसका प्यार और बढ़ गया है। वे दोनों काफी देर तक बिना कुछ बोले बस एक-दूसरे की धड़कनें सुनते रहे और गेस्ट हाउस की वह रात उनकी अधूरी प्रेम कहानी के पूरा होने की गवाह बन गई। नील ने सानिया के माथे को चूमा और वे दोनों एक-दूसरे के आगोश में ही सो गए यह जानते हुए कि अब उनके बीच कोई दूरी नहीं बची है।

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