
राहुल अपनी मामी मीना के घर शादी की तैयारियों के लिए पहुँचा था और दोपहर की चिलचिलाती धूप में घर के अंदर भी एक अजीब सी तपिश महसूस हो रही थी। मीना मामी ने एक बहुत ही पतली नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी जो उनके सुडौल बदन से ऐसे लिपटी थी जैसे कोई दूसरी खाल हो और उनके चलने पर उनके शरीर के हर मोड़ का पता चल रहा था। राहुल की नज़रें बार-बार उनके हिलते हुए भारी तरबूजों पर टिक जाती थीं जो गहरे गले के ब्लाउज के अंदर से बाहर आने को बेताब दिख रहे थे और उन पर उभरे हुए छोटे मटर साफ नज़र आ रहे थे।
मीना मामी की उम्र चालीस के करीब थी लेकिन उनका शरीर किसी जवान लड़की की तरह कसा हुआ था और उनके चलने का अंदाज़ बहुत ही मादक था। जब वो झुककर अलमारी के नीचे वाले खाने से सामान निकालतीं तो उनका भारी और गोल पिछवाड़ा साड़ी को पीछे से एकदम खींच देता था जिससे राहुल के भीतर एक बिजली सी दौड़ जाती थी। उनके कमर की गोलाई और नाभि के पास रेंगता हुआ पसीना राहुल के भीतर एक ऐसी प्यास जगा रहा था जिसे बुझाना अब उसके लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा था और उसका अपना खीरा उसकी जींस के अंदर तंग महसूस होने लगा था।
राहुल कमरे में पंखा ठीक करने की कोशिश कर रहा था तभी मीना मामी उसके पास आईं और स्टूल को पकड़कर खड़ी हो गईं जिससे उनकी बगलों की खुशबू सीधे राहुल के नथुनों तक पहुँचने लगी। राहुल ने नीचे देखा तो उसे मामी के तरबूजों के बीच की गहरी घाटी साफ दिखाई दे रही थी और उसकी धड़कनें अचानक से तेज़ हो गईं। मीना मामी ने भी राहुल की आँखों में छिपी उस भूख को पहचान लिया था और उन्होंने अपनी नज़रों को झुका लिया पर उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई थी जिसने राहुल को एक मौन निमंत्रण दे दिया था।
स्टूल से उतरते समय राहुल का हाथ जानबूझकर मामी की कमर के रेशमी अहसास से टकरा गया और एक पल के लिए दोनों ठहर गए जैसे समय रुक गया हो। राहुल ने देखा कि मामी की साँसें तेज़ हो गई थीं और उनके सीने पर मौजूद वो मटर अब ब्लाउज के कपड़े को चीरकर बाहर झाँकने की कोशिश कर रहे थे। राहुल ने धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा और उन्हें अपनी ओर खींचा तो मामी ने कोई विरोध नहीं किया बल्कि अपनी आँखें बंद कर लीं जिससे राहुल की हिम्मत और भी ज़्यादा बढ़ गई थी।
राहुल ने धीरे से मामी के गुलाबी होंठों को अपने होंठों के बीच लिया और उन्हें चूसने लगा जिससे मामी के मुँह से एक हल्की सी कराह निकली और उन्होंने राहुल के बालों में अपनी उंगलियाँ फँसा दीं। वो दोनों एक दूसरे के शरीर की गर्मी को महसूस कर रहे थे और राहुल के हाथ अब मामी की पीठ पर रेंगते हुए नीचे की ओर जा रहे थे जहाँ उनका भारी पिछवाड़ा किसी मखमली गद्दी की तरह महसूस हो रहा था। कमरे का तापमान अब और भी बढ़ गया था और दोनों के शरीरों के बीच की झिझक की दीवार पूरी तरह से गिर चुकी थी और सिर्फ एक गहरी इच्छा शेष थी।
राहुल ने धीरे से मामी की साड़ी का पल्लू सरकाया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा जिससे उनके विशाल तरबूज पूरी तरह से आज़ाद होकर बाहर आ गिरे। राहुल ने अपनी जीभ से उनके उन सख्त मटरों को सहलाना शुरू किया तो मामी ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगीं। उनके भारी तरबूज अब राहुल के हाथों में थे और वो उन्हें पूरी शिद्दत से दबा रहा था जबकि मामी का हाथ अब राहुल की जींस के अंदर पहुँचकर उसके सख्त हो चुके खीरे को सहलाने लगा था।
मामी ने राहुल की जींस खोली और उसके लंबे और कड़क खीरे को बाहर निकाला जिसे देखते ही उनकी आँखों में एक चमक आ गई और उन्होंने उसे अपने मुँह में भर लिया। राहुल की आँखों के सामने अंधेरा छा गया जब मामी ने उस खीरे को अपने गीले मुँह के अंदर गहराई तक लेना शुरू किया और अपनी जीभ से उसके हर हिस्से को सहलाया। राहुल अब बेकाबू हो रहा था इसलिए उसने मामी को बिस्तर पर लिटाया और उनकी टाँगों के बीच की रेशमी बालों वाली खाई को अपनी उंगलियों से टटोलने लगा जो अब पूरी तरह से गीली और चिपचिपी हो चुकी थी।
राहुल ने अपनी जीभ को उस गहरी और रसीली खाई पर रखा और उसे चाटना शुरू किया जिससे मामी का पूरा शरीर धनुष की तरह मुड़ गया और वो बिस्तर की चादर को अपनी उंगलियों में भींचने लगीं। खाई से निकलने वाला मीठा रस अब राहुल के मुँह में भर रहा था और मामी की आहें अब चीखों में बदलने लगी थीं जो कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। राहुल ने अब और इंतज़ार नहीं किया और अपने कड़क खीरे को उस खाई के मुहाने पर टिका दिया जहाँ से गर्मी की लहरें बाहर निकल रही थीं और धीरे से अपना दबाव बनाना शुरू किया।
जैसे ही खीरे का सिरा उस तंग और गर्म खाई के अंदर गया मामी के मुँह से एक लंबी आह निकली और उन्होंने राहुल को अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया। राहुल ने धीरे-धीरे धक्का मारना शुरू किया और हर धक्के के साथ उसका खीरा उस खाई की गहराई को नाप रहा था जिससे एक अजीब सी सुरीली आवाज़ पैदा हो रही थी। कमरे में सिर्फ उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और उनकी भारी साँसें सुनाई दे रही थीं और राहुल अब पूरी तेज़ी के साथ सामने से खुदाई करने लगा था जिससे मामी के तरबूज ऊपर नीचे उछल रहे थे।
मामी अब पूरी तरह से कामुकता के सागर में डूबी हुई थीं और वो राहुल से और भी ज़ोर से खोदन के लिए कह रही थीं क्योंकि उन्हें उस खुदाई में असीम आनंद मिल रहा था। राहुल ने उन्हें घुमाया और उन्हें बिस्तर पर घुटनों के बल झुका दिया ताकि वो उनके भारी पिछवाड़े से खुदाई कर सके और जब उसने अपना खीरा पीछे से उनकी खाई में उतारा तो मामी की आँखों से खुशी के आँसू निकल आए। हर धक्के के साथ राहुल का खीरा उनकी गहराई को झकझोर रहा था और मामी अपने कूल्हों को पीछे की ओर धकेलकर उस अहसास को और भी गहरा बना रही थीं।
खुदाई की गति अब बहुत तेज़ हो चुकी थी और राहुल का पूरा शरीर पसीने से लथपथ था लेकिन उसकी ऊर्जा में कोई कमी नहीं आई थी बल्कि वो और भी जंगली होता जा रहा था। मामी अब अपने चरम के करीब थीं और उनकी आवाज़ अब लड़खड़ाने लगी थी क्योंकि उनका शरीर काँप रहा था और उनकी खाई अब राहुल के खीरे को कसकर जकड़ रही थी। राहुल ने अपनी रफ़्तार को चरम पर पहुँचा दिया और एक आखिरी ज़ोरदार धक्के के साथ उसका सारा गर्म रस मामी की गहरी खाई के अंदर छूट गया और साथ ही मामी का भी रस निकल गया।
दोनों काफी देर तक एक दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर पड़े रहे और उनकी साँसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं लेकिन उनके दिलों की धड़कन अभी भी उस रोमांच को दोहरा रही थी। मामी ने राहुल के माथे को चूमा और उसे अपनी छाती से लगा लिया जहाँ अब भी शांति का अहसास हो रहा था और उस दोपहर की वो खुदाई उन दोनों के लिए एक अटूट बंधन बन गई थी। राहुल को अपनी मामी के जिस्म की वो खुशबू और उनकी वो तंग खाई हमेशा के लिए अपनी यादों में बस गई महसूस हुई और वो जानते थे कि ये सिलसिला अब रुकने वाला नहीं था।