पुरानी दोस्त की चु@@ई—>रात के सन्नाटे में दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ गूँज रही थी और सुनसान गार्डन के कोने में बनी उस छोटी सी कुटिया के भीतर भावनाओं का एक सैलाब उमड़ रहा था। आर्यन ने दस साल बाद अपनी पुरानी स्कूल क्रश काव्या को देखा था, लेकिन आज की काव्या उस पुरानी शर्मीली लड़की से बिलकुल अलग थी। उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो आर्यन के भीतर सोई हुई इच्छाओं को जगा रही थी। वे दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब बैठे थे, इतने करीब कि आर्यन को काव्या के शरीर की गर्माहट और उसके परफ्यूम की भीनी-भीनी खुशबू साफ़ महसूस हो रही थी। हवा में एक अजीब सी बेचैनी थी, जो धीरे-धीरे एक गहरी चाहत में बदल रही थी। आर्यन का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था जैसे वह अभी उसकी छाती फाड़कर बाहर आ जाएगा। काव्या भी खामोश थी, लेकिन उसकी झुकी हुई पलकें और कांपते हुए होंठ बहुत कुछ कह रहे थे।
काव्या की शारीरिक बनावट आज पूरी तरह से ढल चुकी थी और वह किसी कामुक प्रतिमा जैसी लग रही थी। उसकी साड़ी के पतले रेशमी कपड़े के नीचे उसके बड़े और रसीले तरबूज साफ़ अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे थे। जब भी वह गहरी सांस लेती, उसके वे तरबूज ऊपर-नीचे होते और आर्यन की धड़कनें बढ़ा देते। उसके तरबूजों के बीच की वह गहरी और तंग घाटी आर्यन को अपनी ओर खींच रही थी। आर्यन की नज़रें बार-बार काव्या के उन मटरों पर जाकर टिक जातीं जो साड़ी के कपड़े को चीरकर बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। काव्या का निचला हिस्सा यानी उसका पिछवाड़ा भी काफी सुडौल और मांसल था, जो बैठने की वजह से और भी ज्यादा उभर कर आ रहा था। उसके बदन का हर कोना जैसे आर्यन को पुकार रहा था कि आओ और मुझे इस प्यास से आज़ाद करो।
उनके बीच का भावनात्मक जुड़ाव आज फिर से ज़िंदा हो उठा था। वे घंटों तक पुरानी यादों के बारे में बातें करते रहे, लेकिन उन बातों के पीछे एक अनकहा आकर्षण छिपा था। आर्यन ने गौर किया कि बात करते-करते काव्या बार-बार अपनी उँगलियों से अपने बालों को पीछे करती और अपनी गर्दन को हल्का सा तिरछा कर लेती, जिससे उसके गर्दन की सुराहीदार बनावट और भी साफ़ दिखने लगती। आर्यन को याद आने लगा कि कैसे स्कूल के दिनों में वह सिर्फ़ उसे दूर से देखकर ही खुश हो जाता था, लेकिन आज वह उसके इतने करीब थी कि वह उसके जिस्म की हर हलचल को महसूस कर सकता था। उसके मन में एक द्वंद्व चल रहा था—क्या वह आगे बढ़े या अपनी मर्यादा में रहे? पर काव्या की आँखों में उसे अपने लिए वही प्यास नज़र आई जो उसके खुद के भीतर जल रही थी।
आकर्षण की यह डोर अब और भी मज़बूत हो चुकी थी। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और काव्या की हथेली पर रख दिया। स्पर्श होते ही काव्या के पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया और उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। आर्यन ने महसूस किया कि काव्या का हाथ हल्का सा कांप रहा था, लेकिन उसने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। आर्यन ने धीरे-धीरे अपनी उँगलियों को उसकी उँगलियों में फंसा लिया और उसे अपनी ओर खींचने लगा। काव्या का सिर धीरे से आर्यन के कंधे पर टिक गया। आर्यन ने उसकी रेशमी जुल्फों में अपना चेहरा छिपाया और उसकी खुशबू को अपने भीतर उतारने लगा। झिझक अब धीरे-धीरे कम हो रही थी और उसकी जगह एक बेकाबू बेकरारी लेती जा रही थी। कमरे की मद्धम रोशनी में दोनों की परछाइयां एक होती नज़र आ रही थीं।
झिझक का वह आख़िरी बांध तब टूटा जब आर्यन ने काव्या के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लिया और उसके माथे को छुआ। काव्या ने एक गहरी आह भरी और आर्यन की कमीज़ को अपनी मुट्ठियों में भींच लिया। आर्यन ने अपने होंठ उसके होंठों के करीब लाए और धीरे-धीरे उनके अधरों का मिलन हुआ। आर्यन ने काव्या के होठों का रस पीना शुरू किया, तो काव्या ने भी पूरी शिद्दत के साथ उसका साथ दिया। यह सिर्फ एक चुंबन नहीं था, बल्कि सालों की दबी हुई हसरतों का विस्फोट था। आर्यन का एक हाथ काव्या की कमर पर था, जहाँ से वह उसकी साड़ी को धीरे-धीरे ढीला करने लगा। उसकी उँगलियाँ काव्या की चिकनी त्वचा पर रेंग रही थीं, जिससे काव्या के शरीर में सिहरन पैदा हो रही थी। वह आर्यन के और करीब सट गई, जैसे वह उसके भीतर ही समा जाना चाहती हो।
अब आर्यन के हाथों ने काव्या के उन भारी तरबूजों को अपने कब्ज़े में ले लिया था। ब्लाउज के ऊपर से ही वह उन्हें धीरे-धीरे सहलाने लगा। काव्या के मुँह से सिसकारियां निकलने लगीं। आर्यन ने उसके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले, और जैसे ही वह कपड़ा हटा, उसके दूधिया सफेद तरबूज पूरी तरह से आज़ाद हो गए। आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं; उन तरबूजों पर गुलाबी रंग के मटर सख़्त हो चुके थे। आर्यन ने झुककर एक तरबूज को अपने मुँह में भर लिया और उसके मटर को अपनी जीभ से सहलाने लगा। काव्या ने अपना सिर पीछे की ओर झुका लिया और उसकी आहें तेज़ हो गईं। “आर्यन… आह… तुम क्या कर रहे हो…” वह लड़खड़ाती आवाज़ में बोली, लेकिन उसके हाथों ने आर्यन के सिर को अपने सीने से और ज़ोर से चिपका लिया था।
धीरे-धीरे आर्यन ने काव्या को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया। अब वह कुदरत के अनमोल तोहफे की तरह उसके सामने लेटी थी। आर्यन की नज़रें नीचे की ओर गईं जहाँ घने काले बालों के बीच उसकी गुलाबी खाई छिपी हुई थी। वह खाई पूरी तरह से नम हो चुकी थी और उससे एक भीनी सी गंध आ रही थी जो आर्यन को पागल कर देने के लिए काफी थी। आर्यन ने अपना खीरा भी अब आज़ाद कर लिया था, जो अपनी पूरी लंबाई और मोटाई के साथ खड़ा होकर हमले के लिए तैयार था। उसने काव्या की जांघों को फैलाया और अपनी जीभ से उसकी खाई को सहलाना शुरू किया। काव्या बिस्तर पर तड़पने लगी, उसके हाथ चादर को कसकर पकड़ चुके थे। आर्यन अपनी जीभ से उस खाई की गहराई को नाप रहा था और काव्या का रस धीरे-धीरे बाहर निकलने लगा था।
जब बेकरारी अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई, तो आर्यन ने काव्या के ऊपर अपनी जगह बनाई। उसने अपने कड़क खीरे की नोक को काव्या की गीली खाई के द्वार पर रखा। काव्या ने उसे अपनी बाहों में कस लिया। आर्यन ने एक धीरे से धक्के के साथ अपने खीरे का अगला हिस्सा उस खाई के भीतर उतारा। काव्या के मुँह से एक तीखी कराह निकली, “आह… आर्यन… बहुत बड़ा है…” पर आर्यन रुका नहीं, उसने अपनी कमर को धीरे-धीरे हिलाना शुरू किया और आधा खीरा उस संकरी खाई के भीतर समा गया। वह खाई इतनी तंग थी कि आर्यन को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसका खीरा किसी मखमली शिकंजे में फंस गया हो। हर धक्के के साथ काव्या के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन के सीने से टकरा रहे थे।
अब खुदाई की प्रक्रिया ने अपनी रफ़्तार पकड़ ली थी। आर्यन ने सामने से खोदना (missionary) शुरू किया और गहरे धक्के लगाने लगा। हर बार जब उसका पूरा खीरा काव्या की खाई के अंतिम छोर तक पहुँचता, काव्या की आँखें ऊपर चढ़ जातीं और वह ज़ोर-ज़ोर से सिसकने लगती। “हाँ आर्यन… और तेज़… मुझे पूरी तरह से खोदो… आह!” काव्या की आवाज़ में एक ऐसी तड़प थी जिसने आर्यन को और भी हिंसक बना दिया। पसीने की बूंदें आर्यन के माथे से टपककर काव्या के तरबूजों पर गिर रही थीं। कमरे में उनके शरीरों के टकराने की आवाज़ और काव्या की आहें गूँज रही थीं। आर्यन ने काव्या की टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया ताकि वह और भी गहराई तक खुदाई कर सके।
कुछ देर बाद आर्यन ने काव्या की पोजीशन बदली और उसे घुटनों के बल बैठाकर पिछवाड़े से खोदना (doggy style) शुरू किया। पीछे से उसके सुडौल पिछवाड़े का नज़ारा देखकर आर्यन का जोश और बढ़ गया। उसने अपने हाथों से काव्या के तरबूजों को पीछे से पकड़ा और अपने खीरे को पूरी ताकत से उसकी खाई में उतारने लगा। काव्या के कूल्हे आर्यन के हर धक्के का जवाब उतनी ही तेज़ी से दे रहे थे। वह बार-बार पीछे मुड़कर आर्यन को देख रही थी और उसकी आँखों में वह संतुष्टि साफ़ झलक रही थी। खुदाई अब अपने अंतिम पड़ाव पर थी। आर्यन को महसूस हुआ कि उसके भीतर का सैलाब अब बाहर आने को बेताब है। उसने अपनी रफ़्तार को और बढ़ा दिया और काव्या की खाई के भीतर ही अपने खीरे को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगा।
अंततः वह क्षण आ गया जब दोनों का रस छूटने लगा। काव्या के शरीर में एक ज़ोरदार कंपन हुआ और उसकी खाई ने आर्यन के खीरे को कसकर जकड़ लिया। आर्यन ने भी अपने खीरे का सारा गर्म रस काव्या की गहरी खाई में उड़ेल दिया। दोनों एक-दूसरे पर गिर पड़े, उनकी सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। पूरे शरीर में एक अजीब सी थकावट और साथ ही एक असीम शांति महसूस हो रही थी। काव्या की हालत अधमरी जैसी हो गई थी, उसकी आँखों में पानी था और चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान। आर्यन ने उसे अपनी बाहों में समेट लिया और उसके माथे को चूमा। वे दोनों घंटों तक उसी हालत में लेटे रहे, जैसे वक्त थम सा गया हो। यह सिर्फ जिस्मों का मिलन नहीं था, बल्कि दो रूहों की बरसों पुरानी अधूरी प्यास का बुझना था।