महकते बदन की प्यास और नंदिनी चाची का समर्पण—>दोपहर की तपती धूप और घर की सन्नाटे भरी खामोशी में आर्यन और उसकी चाची नंदिनी अकेले थे, क्योंकि परिवार के बाकी सदस्य एक शादी में गए हुए थे। 22 साल का आर्यन अपनी 32 साल की चाची की खूबसूरती का कायल था, जो हमेशा एक शालीन लेकिन कामुक साड़ी में लिपटी रहती थीं। उस दिन गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, और नंदिनी चाची रसोई में काम करते हुए पसीने से तर-बतर हो रही थीं, जिससे उनकी पतली साड़ी उनके बदन से चिपक कर उनके शरीर के हर उतार-चढ़ाव को नुमाया कर रही थी।
नंदिनी चाची का शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था, उनके भरे हुए तरबूज साड़ी के पल्लू से झांकने की कोशिश कर रहे थे और उनकी गहरी खाई जैसी नाभि पसीने की बूंदों से चमक रही थी। जब वह झुककर कोई सामान उठातीं, तो उनके तरबूजों का भारीपन और उनके ऊपर उभरे हुए मटर जैसे दाने साफ़ महसूस किए जा सकते थे, जिसने आर्यन के मन में एक अजीब सी हलचल पैदा कर दी थी। वह दूर खड़ा होकर बस उनकी लचकती कमर और उनके सुडौल पिछवाड़े को देख रहा था, जो हर कदम के साथ एक मदहोश कर देने वाली लय में हिल रहे थे।
आर्यन के मन में पिछले कई दिनों से अपनी चाची के प्रति एक गहरा खिंचाव पनप रहा था, जो केवल शारीरिक नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी था, क्योंकि नंदिनी ने हमेशा उसे बहुत प्यार और दुलार दिया था। लेकिन आज की वह मदहोश कर देने वाली दोपहर कुछ अलग ही संदेश दे रही थी, जहाँ शब्दों से ज्यादा खामोश निगाहें बातें कर रही थीं। जब नंदिनी ने पलटकर आर्यन को अपनी ओर टकटकी लगाए देखते हुए पाया, तो उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान और हया की लाली दौड़ गई, जिसने आर्यन की हिम्मत को और बढ़ा दिया।
नंदिनी की साँसों की गर्मी अब आर्यन के चेहरे पर महसूस हो रही थी, और जैसे ही उसने ऊपर की रैक से डिब्बा उतारने के लिए हाथ बढ़ाया, उसका शरीर पूरी तरह से आर्यन के सीने से सट गया। उस पल की सिहरन ऐसी थी कि दोनों के शरीर कांप उठे, और आर्यन के हाथों ने बिना सोचे समझे चाची की पतली कमर को थाम लिया, जिससे उनके बीच की बची-खुची दूरी भी खत्म हो गई। नंदिनी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि अपनी आँखें मूंद लीं और एक गहरी आह भरी, जो इस बात का संकेत था कि वह भी इसी पल का इंतज़ार कर रही थीं।
आर्यन ने धीरे से अपना चेहरा उनकी गर्दन के पास ले जाकर उनके बदन की खुशबू को महसूस किया और फिर धीरे-धीरे उनके मटर जैसे निप्पल को साड़ी के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया। नंदिनी के मुँह से एक मदभरी कराह निकली और उन्होंने आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं, जैसे वह उसे और करीब बुला रही हों। कमरे का तापमान अब बढ़ने लगा था और दोनों की धड़कनें एक-दूसरे को साफ़ सुनाई दे रही थीं, जहाँ शर्म की दीवारें अब ढहने के कगार पर खड़ी थीं।
धीरे-धीरे आर्यन के हाथ नंदिनी के ब्लाउज के हुक तक पहुँच गए और एक-एक करके उन्हें खोलने लगे, जिससे उनके विशाल और गोरे तरबूज आज़ाद होकर बाहर निकल आए। उन तरबूजों की गोलाई और उनके बीच की गहरी घाटी को देखकर आर्यन का खीरा पूरी तरह से अकड़ गया था और पजामे के अंदर अपनी जगह बनाने के लिए बेकरार था। नंदिनी ने भी अब संकोच त्याग दिया था और आर्यन के खीरे को ऊपर से ही सहलाते हुए कहा, ‘आर्यन, आज मुझे अपनी प्यास से तृप्त कर दो, बहुत दिनों से यह बदन सुलग रहा है।’
आर्यन ने अब नंदिनी को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया और उनकी रेशमी और नम खाई को अपनी उंगलियों से टटोलने लगा, जहाँ से पहले ही मदहोश कर देने वाला रस रिस रहा था। वह अपनी उंगली से खाई की गहराई को नाप रहा था और नंदिनी बिस्तर पर पड़ी तड़प रही थीं, उनके पैर हवा में कांप रहे थे और वह बार-बार आर्यन का नाम पुकार रही थीं। आर्यन ने अब अपना खीरा निकाला जो किसी लोहे की रॉड जैसा सख्त हो चुका था और उसे चाची की खाई के मुहाने पर टिका दिया, जहाँ से गर्मी की लहरें निकल रही थीं।
उसने धीरे से अपने खीरे का अगला हिस्सा खाई के अंदर धकेला, तो नंदिनी ने अपनी आँखें सिकोड़ लीं और जोर से आर्यन के कंधे पर अपने नाखून गड़ा दिए। जैसे-जैसे खीरा अंदर जा रहा था, खाई की तंग दीवारें उसे चारों तरफ से जकड़ रही थीं, जिससे आर्यन को एक असीम सुख का अनुभव हो रहा था। आर्यन ने अब अपनी रफ्तार बढ़ाई और सामने से खोदना शुरू किया, हर धक्के के साथ नंदिनी के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके मटर जैसे हिस्से आर्यन के सीने से रगड़ खा रहे थे।
कमरे में केवल उनके जिस्मों के टकराने की आवाज़ और नंदिनी की सिसकारियां गूँज रही थीं, जो अब पूरी तरह से इस खुदाई का आनंद ले रही थीं। आर्यन ने उन्हें घुमाकर पिछवाड़े से खोदने की पोजीशन में कर दिया और पीछे से अपने खीरे को उनकी गहराई में उतारने लगा, जिससे नंदिनी की चीखें और भी तीखी हो गईं। ‘ओह आर्यन, और जोर से… आज मुझे पूरी तरह से भर दो,’ नंदिनी ने हाँफते हुए कहा, और आर्यन ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए खुदाई की गति को चरम पर पहुँचा दिया।
जैसे ही खुदाई अपनी पराकाष्ठा पर पहुँची, दोनों के शरीरों में एक ज़ोरदार कंपन हुआ और नंदिनी की खाई से गरम-गरम रस फूट पड़ा, जिसने आर्यन के खीरे को पूरी तरह से सराबोर कर दिया। आर्यन ने भी अपना सारा सफेद रस उनकी गहराई में ही छोड़ दिया और दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए पसीने में भीगे बिस्तर पर गिर पड़े। उस पल की शांति में एक अजीब सा सुकून था, जहाँ दोनों के मन और शरीर एक-दूसरे में विलीन हो चुके थे, और उनकी थकी हुई साँसें उस दोपहर की गवाह बन रही थीं।