Join WhatsApp Click Here
Join Telegram Click Here

रेशमी साड़ी और चाची की गहरी खाई का रहस्य —> कहानी

गर्मी की वह दोपहर बहुत ही शांत और भारी थी, जब सूरज की तपिश खिड़की के पर्दों को चीरकर कमरे के भीतर अपनी गर्मी बिखेर रही थी। आर्यन पिछले एक हफ्ते से अपनी मीनाक्षी चाची के घर रुका हुआ था, क्योंकि उसके कॉलेज की छुट्टियां चल रही थीं। चाची की उम्र करीब चौंतीस साल थी, लेकिन उनके शरीर का रख-रखाव ऐसा था कि कोई भी उन्हें देखकर दंग रह जाए। उनका रंग एकदम कंचन जैसा गोरा था और उनके शरीर के उभार किसी को भी मदहोश करने के लिए काफी थे। चाची के भारी तरबूज साड़ी के पतले कपड़े के नीचे से अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे, और जब वह चलती थीं, तो उनके पीछे का भारी पिछवाड़ा एक लय में ऊपर-नीचे होता था, जिसे देखकर आर्यन का मन विचलित हो जाता था।

चाची का व्यक्तित्व जितना गंभीर था, उनका शरीर उतना ही कामुक और भरा हुआ था। उनके रेशमी बदन पर जब पसीना चमकता, तो आर्यन की नजरें उनके तरबूज के बीच वाली गहरी लकीर पर जाकर टिक जाती थीं। उन तरबूजों के ऊपर नन्हे मटर जैसे उभार अक्सर साड़ी और ब्लाउज के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखते थे। आर्यन अक्सर रात को बिस्तर पर लेटे हुए चाची के उसी रूप के बारे में सोचता और उसका खीरा पजामे के अंदर ही अकड़ कर पत्थर जैसा हो जाता था। चाची के पति, यानी आर्यन के चाचा, अक्सर काम के सिलसिले में शहर से बाहर रहते थे, जिससे चाची के भीतर की प्यास और अकेलापन उनकी आँखों में साफ झलकता था।

उस दिन दोपहर को घर में कोई नहीं था और कूलर की ठंडी हवा के बीच एक अजीब सी उत्तेजना तैर रही थी। चाची अपने कमरे में बिस्तर पर अधलेटी होकर कोई मैगजीन पढ़ रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था, जिससे उनके दोनों तरबूज और उनके बीच की वह गहरी घाटी पूरी तरह से दिखाई दे रही थी। आर्यन पानी पीने के बहाने कमरे के पास से गुजरा और उसकी नजर चाची के उस खुले बदन पर पड़ गई। उसने देखा कि चाची की साँसें तेज चल रही थीं और उनका एक हाथ अनजाने में ही अपने तरबूजों को सहला रहा था। आर्यन की धड़कनें तेज हो गईं और उसका खीरा पूरी तरह से तनाव में आ गया।

आर्यन धीरे से कमरे के अंदर दाखिल हुआ, तो चाची ने उसे देखकर भी अपनी साड़ी ठीक नहीं की, बल्कि उनकी आँखों में एक चुनौती भरी चमक आ गई। आर्यन ने हिम्मत जुटाकर उनके पास बैठकर उनके पैर दबाने शुरू किए। चाची ने धीरे से अपनी आँखें बंद कर लीं और एक लंबी आह भरी। आर्यन का हाथ धीरे-धीरे ऊपर की ओर सरकने लगा, पहले घुटनों तक और फिर उनकी रेशमी जांघों के ऊपरी हिस्से तक। वहाँ पहुँचते ही उसे चाची की गहरी खाई के पास उगे हुए रेशमी बालों का अहसास हुआ। चाची ने फुसफुसाते हुए कहा, ‘आर्यन, यह तुम क्या कर रहे हो? अगर किसी ने देख लिया तो?’ लेकिन उनके शब्दों में मनाही कम और आमंत्रण ज्यादा था।

आर्यन ने बिना कुछ कहे अपना हाथ सीधे चाची की खाई पर रख दिया, जो पहले से ही गीली हो चुकी थी। चाची के मुंह से एक जोर की कराह निकली और उन्होंने आर्यन का सिर पकड़कर अपने तरबूजों के बीच भींच लिया। आर्यन उन भारी तरबूजों की खुशबू और उनके ऊपर उभरे हुए सख्त मटर को अपने होंठों से सहलाने लगा। चाची की उत्तेजना अब चरम पर थी, उन्होंने आर्यन की पैंट की चैन खोली और उसके सख्त और गरम खीरे को बाहर निकाल लिया। खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर चाची की आँखें फटी की फटी रह गई और उन्होंने तुरंत उस खीरे को अपने मुंह में ले लिया और उसे चाटने लगीं।

कमरे में सिर्फ चाची के खीरा चूसने की आवाजों और उनकी सिसकियों का शोर था। थोड़ी देर बाद आर्यन ने चाची को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उनकी टांगों को फैलाकर उनकी गहरी खाई का मुआयना किया। वह खाई पूरी तरह से गुलाबी और रसीली हो चुकी थी। आर्यन ने पहले अपनी उंगली से खोदना शुरू किया, जिससे चाची बिस्तर पर मछली की तरह तड़पने लगीं। फिर उसने अपने गरम खीरे को उस खाई के मुहाने पर टिकाया और एक जोरदार धक्का दिया। चाची के मुंह से एक लंबी चीख निकली, ‘उफ़ आर्यन… कितना बड़ा खीरा है तुम्हारा… पूरी खाई भर दी तुमने!’

आर्यन ने सामने से खोदना (missionary) जारी रखा, हर धक्के के साथ उसका खीरा चाची की गहराई को नाप रहा था। चाची के तरबूज ऊपर-नीचे उछल रहे थे और आर्यन हर धक्के के साथ उनके मटर को अपने दांतों से हल्का सा काट लेता था। कुछ देर बाद आर्यन ने चाची को पलट दिया और पिछवाड़े से खोदना (doggy style) शुरू किया। चाची का भारी पिछवाड़ा आर्यन के पेट से टकराकर एक गूंज पैदा कर रहा था। चाची बार-बार कह रही थीं, ‘और जोर से खोदो आर्यन… अपनी चाची की इस खाई को आज पूरी तरह से भर दो!’ खुदाई की गति अब बहुत तेज हो चुकी थी और कमरे का तापमान बढ़ गया था।

अंत में, जब दोनों का सब्र जवाब दे गया, तो चाची का पूरा शरीर जोर-जोर से कांपने लगा। उनकी खाई से ढेर सारा रस छूटने लगा और आर्यन ने भी अपना सारा गरम रस चाची की गहराई में उड़े़ल दिया। दोनों पसीने से लथपथ एक-दूसरे की बाहों में गिर पड़े। चाची का चेहरा गुलाबी हो चुका था और उनकी आँखों में एक अजीब सा सुकून था। उस दोपहर की उस गहरी खुदाई ने उनके बीच के रिश्ते को हमेशा के लिए बदल दिया था। आर्यन ने चाची के माथे को चूमा और चाची ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘अगली दोपहर का इंतज़ार रहेगा।’

Leave a Comment

You cannot copy content of this page