संगीता की जिम चु@@ई—>
शहर की भीड़भाड़ से दूर उस शांत गली में बने जिम में जब राहुल ने पहली बार कदम रखा था, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है। जिम की ट्रेनर संगीता, जिसकी उम्र करीब पैंतीस साल थी, फिटनेस की जीती-जागती मिसाल थी। उसकी कद-काठी ऐसी थी कि कोई भी उसे एक बार देख ले तो देखता ही रह जाए। राहुल अपनी पुरानी यादों को भुलाने के लिए यहाँ आया था, लेकिन संगीता के व्यक्तित्व ने उसे पहले ही दिन अपनी ओर खींच लिया था। संगीता के चलने का अंदाज, उसकी गंभीर आवाज और उसकी आँखों में छिपी एक अनकही गहराई राहुल को बेचैन करने के लिए काफी थी।
संगीता का शरीर किसी तराशी हुई मूर्ति की तरह था, जिसमें हर मोड़ पर एक अलग ही आकर्षण था। जब वह टाइट जिम वियर में अपनी एक्सरसाइज करती थी, तो उसके उभरे हुए तरबूज साफ नजर आते थे, जो हर सांस के साथ ऊपर-नीचे होते थे। उसकी कमर इतनी पतली थी कि कोई भी उसे अपनी बाहों में भरने के लिए मचल जाए, और उसका पिछवाड़ा कसरत की वजह से इतना सख्त और सुडौल हो गया था कि राहुल की नजरें अक्सर वहीं टिक जाती थीं। संगीता के चेहरे पर पसीने की बूंदें जब चमकती थीं, तो वह और भी ज्यादा कामुक लगने लगती थी, जिसे देखकर राहुल के मन में अजीब सी हलचल होने लगती थी।
जिम में बिताए गए उन चंद हफ्तों में राहुल और संगीता के बीच एक अनकहा सा रिश्ता पनपने लगा था। संगीता केवल उसकी ट्रेनर नहीं रही थी, बल्कि वह राहुल की हर छोटी-बड़ी बात का ख्याल रखने लगी थी। देर रात जब जिम खाली हो जाता था, तो वे दोनों घंटों बैठकर बातें करते थे। संगीता ने उसे अपने अकेलेपन के बारे में बताया और राहुल ने अपने टूटे हुए दिल का हाल सुनाया। इस भावनात्मक जुड़ाव ने उनके बीच की दूरी को कम कर दिया था, और अब वे एक-दूसरे के शरीर की खुशबू को भी पहचानने लगे थे।
एक शाम जिम में कोई नहीं था, बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी और अंदर का माहौल काफी गरम था। राहुल अपनी बेंच प्रेस कर रहा था और संगीता उसे सपोर्ट दे रही थी। जैसे ही राहुल ने वजन ऊपर उठाया, संगीता उसके चेहरे के ठीक ऊपर झुकी हुई थी। उसके गहरे गले के टॉप से उसके तरबूज राहुल के चेहरे के बिल्कुल करीब थे। राहुल की सांसें तेज हो गईं और उसने वजन को वापस स्टैंड पर रख दिया। उन दोनों की नजरें मिलीं और उस पल में दुनिया जैसे रुक सी गई। संगीता की आँखों में एक अजीब सी प्यास थी, जिसे राहुल ने तुरंत भांप लिया था।
राहुल ने धीरे से अपना हाथ उठाया और संगीता के गालों को छुआ। संगीता ने अपनी आँखें बंद कर लीं और राहुल के स्पर्श को महसूस करने लगी। उसके शरीर में एक हल्की सी कंपकंपी हुई, जो राहुल की उंगलियों तक पहुँच रही थी। राहुल ने उसे अपनी ओर खींचा और संगीता उसके सीने से लग गई। उन दोनों के बीच की झिझक अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी थी। राहुल ने संगीता के होठों की मिठास चखना शुरू किया, और संगीता ने भी पूरे जोश के साथ उसका साथ दिया। यह उनके बीच के आकर्षण का पहला वास्तविक विस्फोट था।
राहुल के हाथ अब संगीता की पीठ पर रेंग रहे थे, और वह उसे अपने और करीब खींच रहा था। उसने धीरे से संगीता के जिम टॉप को ऊपर उठाया, जिससे उसके दूध जैसे सफेद और सुडौल तरबूज सामने आ गए। उनके ऊपर लगे हुए नन्हे मटर उत्तेजना की वजह से पूरी तरह से सख्त हो गए थे। राहुल ने अपने हाथों में उन तरबूजों को भरा और उन्हें हल्के से दबाने लगा। संगीता के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली, और उसने राहुल के बालों में अपनी उंगलियां फँसा लीं। माहौल में अब सिर्फ उनकी भारी सांसों की आवाज गूँज रही थी।
संगीता अब पूरी तरह से राहुल के वश में थी, उसकी सांसें फूल रही थीं और उसका पूरा शरीर पसीने से भीग चुका था। राहुल ने उसे जिम की एक बेंच पर लिटाया और धीरे-धीरे उसके निचले कपड़े उतारने लगा। जैसे ही संगीता की गहरी खाई राहुल के सामने आई, उसकी उत्तेजना का ठिकाना नहीं रहा। संगीता की खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से निकलता प्राकृतिक रस उसकी जांघों तक बह रहा था। राहुल ने अपनी उंगली से खाई को खोदना शुरू किया, जिससे संगीता अपनी कमर ऊपर उठाने लगी और बिस्तर की चादर (जिम मैट) को कसकर पकड़ लिया।
संगीता की उत्तेजना अब चरम पर थी, उसने राहुल के पेंट की चेन खोली और उसका विशाल खीरा बाहर निकाला। राहुल का खीरा पूरी तरह से तनाव में था और अपनी मंजिल पाने के लिए बेताब था। संगीता ने बिना देर किए उस खीरे को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया। राहुल ने अपनी आँखें बंद कर लीं और इस अद्भुत सुख का आनंद लेने लगा। संगीता का खीरा चूसने का अंदाज इतना माहिर था कि राहुल को लगा जैसे उसका रस अभी निकल जाएगा, लेकिन उसने खुद पर काबू रखा।
अब समय आ गया था उस असली खेल का जिसके लिए दोनों तड़प रहे थे। राहुल ने संगीता को बेंच के किनारे पर खड़ा किया और उसे आगे झुकने को कहा। संगीता का पिछवाड़ा अब पूरी तरह से राहुल की ओर था। राहुल ने अपने खीरे को संगीता की खाई के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। संगीता के मुँह से एक लंबी चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं, बल्कि एक असीम सुख की थी। राहुल ने धीरे-धीरे खोदना शुरू किया, और हर धक्के के साथ संगीता की खाई में गहराई तक उतरने लगा।
खुदाई की गति अब धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी। राहुल संगीता के तरबूजों को पीछे से पकड़कर झटके दे रहा था, और संगीता हर धक्के पर जोर-जोर से कराह रही थी। ‘ओह राहुल, और तेज खोदो, मुझे पूरा भर दो!’ संगीता के ये शब्द राहुल को और भी ज्यादा उत्तेजित कर रहे थे। वह बिना रुके पूरी ताकत से संगीता की खाई की गहराई नाप रहा था। जिम के शीशों में उनका यह मिलन किसी फिल्म के सीन जैसा लग रहा था, जहाँ पसीने से लथपथ दो शरीर एक-दूसरे में समा जाने को बेताब थे।
काफी देर तक पिछवाड़े से खोदने के बाद, राहुल ने संगीता को घुमाया और उसे अपने नीचे लिटा लिया। यह सामने से खोदने का समय था। राहुल ने संगीता की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में उतार दिया। इस बार गहराई और भी ज्यादा महसूस हो रही थी। राहुल के हर धक्के पर संगीता के मटर उसके सीने से रगड़ रहे थे, जिससे उसे एक अलग ही रोमांच मिल रहा था। संगीता अब पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, वह राहुल को अपनी बाहों में कसकर भींच रही थी।
खुदाई का यह सिलसिला करीब आधे घंटे तक चलता रहा। दोनों के शरीर पसीने से नहा चुके थे और सांसें उखड़ रही थीं। राहुल को अब महसूस हो रहा था कि उसका रस छूटने वाला है। उसने संगीता के कानों में फुसफुसाया, ‘संगीता, मैं अब और नहीं रुक सकता।’ संगीता ने भी जवाब दिया, ‘हाँ राहुल, मेरा भी रस निकलने वाला है, मुझे अपने अंदर ही खाली कर दो!’ राहुल ने अपनी गति को और तेज कर दिया और अगले ही पल उसका गर्म रस संगीता की खाई की गहराइयों में समा गया।
संगीता ने भी एक लंबी कराह भरी और उसका पूरा शरीर कांपने लगा, उसका अपना रस भी राहुल के खीरे के साथ मिलकर एक हो गया। दोनों अगले कुछ मिनटों तक उसी अवस्था में लेटे रहे, एक-दूसरे की धड़कनों को सुनते हुए। उस खुदाई के बाद जो शांति और संतुष्टि उन्हें मिली थी, वह शब्दों में बयां करना नामुमकिन था। संगीता ने राहुल के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में भर लिया। वह रात उन दोनों के लिए सिर्फ एक शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि आत्माओं का मिलन बन गई थी।
जब वे जिम से बाहर निकले, तो बारिश थम चुकी थी और ठंडी हवा चल रही थी। संगीता की हालत ऐसी थी जैसे उसे कोई नया जीवन मिल गया हो, उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। राहुल को भी महसूस हुआ कि उसका अकेलापन अब दूर हो चुका है। उन्होंने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और अंधेरी सड़क पर चलने लगे, इस वादे के साथ कि यह तो बस उनके इस नए और गहरे रिश्ते की शुरुआत है, जहाँ हर रात ऐसी ही एक नई कहानी लिखी जाएगी।