
होटल की वो मदहोश रात और नेहा का आकर्षण—>
शहर की शोर-शराबे वाली गलियों से दूर, एक आलीशान होटल के कमरे में मैं और नेहा अकेले थे। नेहा मेरे पड़ोस में रहती थी, लेकिन यहाँ एक बिजनेस ट्रिप के दौरान हमारी मुलाकात अजनबी की तरह हुई थी। रात का वक्त था और कमरे की मद्धम रोशनी में नेहा का चेहरा किसी अप्सरा जैसा चमक रहा था। हम दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी, जिसमें हजारों अनकही बातें और दबी हुई इच्छाएं तैर रही थीं। नेहा ने काले रंग की एक बेहद कसी हुई ड्रेस पहनी थी, जो उसके बदन के हर उतार-चढ़ाव को बखूबी बयान कर रही थी, जिससे माहौल में एक भारी उत्तेजना भर गई थी।
नेहा का शरीर किसी तराशे हुए पत्थर की तरह था, जिसमें हर जगह खूबसूरती भरी हुई थी। उसकी छाती पर उभरे हुए दो बड़े-बड़े रसीले तरबूज उसकी ड्रेस से बाहर आने को बेकरार दिख रहे थे। जब वो सांस लेती, तो वे तरबूज ऊपर-नीचे होते और मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगता। उसका पिछवाड़ा भी काफी गदराया हुआ और सुडौल था, जो उसकी कमर की पतली बनावट के साथ एक अद्भुत संगम बना रहा था। उसे इस हाल में देखकर मेरे मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और मेरा शरीर अंदर ही अंदर एक गर्म ज्वालामुखी की तरह उबलने लगा था।
हम दोनों बालकनी में खड़े होकर बाहर के नज़ारे देख रहे थे, लेकिन हमारा ध्यान एक-दूसरे के जिस्म की गर्माहट पर था। नेहा ने धीरे से अपना हाथ मेरी बांह पर रखा और अपनी आँखें झुका लीं। उसके स्पर्श ने मेरे पूरे शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ा दी। उसने दबी आवाज में कहा कि वह अपनी शादीशुदा जिंदगी से खुश नहीं है और उसे अपनी जिंदगी में प्यार और गर्माहट की कमी महसूस होती है। उसकी आँखों में एक अजीब सी तड़प थी, जिसने मुझे उसकी ओर खिंचने पर मजबूर कर दिया। हमारा यह भावनात्मक जुड़ाव धीरे-धीरे एक गहरी जिस्मानी प्यास में बदलने लगा था।
मैंने धीरे से उसके गालों को छुआ और फिर अपने चेहरे को उसके करीब ले गया। नेहा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मैंने उसके गुलाबी होंठों का रसपान करना शुरू कर दिया। जैसे ही हमारे होंठ आपस में मिले, पूरी दुनिया थम सी गई। हम दोनों एक-दूसरे के मुँह के रस को पी रहे थे और हमारी सांसें तेज होने लगी थीं। मेरा हाथ धीरे से उसकी पीठ से नीचे की ओर सरकने लगा और मैंने उसके भारी पिछवाड़े को हल्के से दबाया। उसकी एक दबी हुई आह निकली, जिसने मेरे अंदर की आग को और ज्यादा भड़का दिया और हम दोनों बेड की तरफ बढ़ने लगे।
बिस्तर पर लेटाते ही मैंने उसकी ड्रेस की जिप धीरे-धीरे नीचे की और सरकाई। जैसे ही ड्रेस नीचे गिरी, उसके दूध जैसे सफेद और गोल तरबूज मेरे सामने थे। उन तरबूजों के बीच के हिस्से में गुलाबी रंग के मटर उभरे हुए थे, जो ठंड और उत्तेजना से सख्त हो गए थे। मैंने अपनी जीभ से उन मटरों को सहलाया और फिर एक तरबूज को अपने मुँह में भर लिया। नेहा अपने हाथ मेरे बालों में फँसाकर अपनी कमर ऊपर उठा रही थी। उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था और वह रह-रह कर अपनी आँखें मूँद लेती थी, जैसे उसे स्वर्ग का आनंद मिल रहा हो।
अब मेरी बारी थी कि मैं उसके नीचे के हिस्से की गहराई का जायजा लूँ। मैंने उसकी पैंटी उतारी, तो सामने उसकी गहरी और रेशमी खाई नजर आई। उस खाई के चारों तरफ काले और मुलायम बाल फैले हुए थे, जो उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे। उस खाई से एक हल्की सी नमी निकल रही थी, जो इस बात का सबूत थी कि नेहा पूरी तरह से तैयार है। मैंने अपनी उंगली से उसकी खाई को खोदना शुरू किया, तो वह जोर-जोर से कराहने लगी। मेरी उंगली जैसे ही उसकी खाई के अंदर गहराई तक जाती, वह अपना पिछवाड़ा उछालकर मेरा साथ देने लगती थी।
मेरे नीचे का खीरा अब पूरी तरह से अकड़ कर पत्थर की तरह सख्त हो गया था। नेहा ने धीरे से मेरे हाथ को पकड़ा और मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया। उसने मेरे खीरे को अपने मुलायम हाथों में लिया और उसे सहलाने लगी। कुछ ही पलों में उसने मेरा खीरा अपने मुँह में ले लिया। उसके मुँह की गर्माहट और जीभ की फिसलन ने मुझे पागल कर दिया था। वह बड़ी ही कुशलता से मेरे खीरे को चूस रही थी, जैसे कोई बच्चा पसंदीदा लॉलीपॉप का आनंद लेता है। उसकी इस हरकत ने मुझे चरम सीमा तक पहुँचा दिया था, लेकिन मैंने खुद को काबू में रखा।
अब खुदाई का असली वक्त आ चुका था। मैंने नेहा को सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। यह सामने से खोदने (मिशनरी) की मुद्रा थी। जैसे ही मैंने अपने खीरे की नोक उसकी खाई के द्वार पर रखी, नेहा ने एक लंबी सांस ली। मैंने धीरे से एक ही झटके में अपना पूरा खीरा उसकी गहरी खाई के अंदर उतार दिया। वह दर्द और आनंद के मिश्रित भाव से चीख पड़ी। उसकी खाई इतनी तंग और गर्म थी कि मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी मखमली आग के दरिया में उतर गया हूँ। मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर होने लगा और कमरे में हमारे जिस्मों के टकराने की आवाज़ गूँजने लगी।
कुछ देर सामने से खुदाई करने के बाद, मैंने उसे उलटा लेटने को कहा। अब वह घुटनों के बल खड़ी थी और उसका भारी पिछवाड़ा ऊपर की ओर उठा हुआ था। मैंने पीछे से अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में दाखिल किया। इस बार गहराई और भी ज्यादा महसूस हो रही थी। मैंने उसके दोनों तरबूजों को पीछे से पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर चलानी शुरू की। वह जोर-जोर से चिल्ला रही थी और कह रही थी, ‘हाँ राहुल, मुझे ऐसे ही और खोदो, आज मेरा सब कुछ निकाल दो।’ उसकी बातों ने मेरी रफ़्तार और बढ़ा दी और मैं पागलों की तरह उसकी खाई की खुदाई करने लगा।
अंत में, हम दोनों अपने चरम पर पहुँच गए। नेहा का शरीर बुरी तरह कांपने लगा और उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। उसकी खाई से भारी मात्रा में रस निकलने लगा और साथ ही मेरा खीरा भी अपना सारा गर्म रस उसकी गहराई में छोड़ने लगा। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े। नेहा की हालत ऐसी थी जैसे वह किसी गहरी बेहोशी में हो, उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान थी। हमने उस रात एक-दूसरे की रूह और जिस्म को पूरी तरह से पा लिया था, और वह होटल का कमरा हमारी इस बेतहाशा खुदाई का गवाह बन गया था।