शाम के धुंधलके में जब सूरज की आखिरी किरणें भी विदा ले रही थीं, तब आर्यन और सोनिया शहर के उस पुराने और सुनसान बॉटनिकल गार्डन के सबसे दूर वाले कोने में बैठे थे। वे दोनों कॉलेज के जमाने के सबसे अच्छे दोस्त थे, और आज करीब आठ सालों के बाद मिले थे। सोनिया ने एक गहरे नीले रंग की शिफॉन की साड़ी पहनी थी, जिसमें से उसका गठा हुआ बदन रह-रहकर चमक रहा था। उसकी उम्र अब तीस के करीब थी, जिसने उसके शरीर में एक अलग ही परिपक्वता और उभार भर दिए थे। आर्यन की निगाहें बार-बार सोनिया के उन भारी और गोल-मटोल तरबूजों पर टिक जाती थीं, जो उसकी कसी हुई ब्लाउज के भीतर सांसों की गति के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। साड़ी का पल्लू बार-बार खिसक रहा था, जिससे उसके उन तरबूजों की गहराई साफ़ झलक रही थी और उन पर लगे छोटे-छोटे मटर जैसे उभार साड़ी के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिख रहे थे।
उन दोनों के बीच की बातचीत पुरानी यादों से शुरू हुई, लेकिन हवा में एक अनकही उत्तेजना और भारीपन बढ़ने लगा था। गार्डन की उस बेंच पर बैठे-बैठे आर्यन ने महसूस किया कि सोनिया भी उसे उसी तरह की प्यासी नज़रों से देख रही है। सोनिया के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सा खालीपन और तृष्णा थी। आर्यन ने धीरे से अपना हाथ सोनिया की कमर पर रखा, जहाँ साड़ी और ब्लाउज के बीच का खुला हिस्सा था। उसकी मखमली त्वचा का स्पर्श होते ही आर्यन के शरीर में बिजली दौड़ गई। उसने महसूस किया कि सोनिया की त्वचा गर्म थी और उस पर हल्का पसीना आ रहा था। सोनिया ने मना नहीं किया, बल्कि वह थोड़ा और आर्यन की ओर खिसक आई, जिससे उसके एक तरबूज का दबाव आर्यन की बांह पर महसूस होने लगा। उस कोमल और भारी स्पर्श ने आर्यन के भीतर सोए हुए शैतान को जगा दिया था और उसके पायजामे के भीतर उसका खीरा अब अपनी जगह बनाने के लिए फड़फड़ाने लगा था।
सोनिया ने अपनी गर्दन झुकाई और धीमी आवाज़ में कहा, ‘आर्यन, तुम्हें पता है मैंने कॉलेज के समय से ही तुम्हारे बारे में क्या-क्या सोचा था?’ आर्यन ने उसकी गर्दन के पास अपनी नाक ले जाकर उसकी खुशबू को गहराई से महसूस किया और फुसफुसाया, ‘जो तुमने सोचा था, शायद वही आज मेरे मन में भी चल रहा है।’ उसने सोनिया के कान के पास हल्के से अपनी जीभ फिराई, जिससे सोनिया के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और आर्यन के बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं। आर्यन का हाथ अब सोनिया के पेट से होते हुए ऊपर की ओर बढ़ने लगा और उसने एक तरबूज को अपनी हथेली में भर लिया। वह इतना भारी और मुलायम था कि आर्यन का मन किया कि वह उसे वहीं मरोड़ दे। सोनिया के मुँह से एक दबी हुई आह निकली और उसके मटर अब और भी सख्त होकर आर्यन की हथेली में चुभने लगे थे।
धीरे-धीरे वे दोनों बेंच से उठकर झाड़ियों के पीछे एक घनी घास वाली जगह पर चले गए, जहाँ अंधेरा और भी गहरा था। आर्यन ने सोनिया को एक पुराने पेड़ के तने से सटा दिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वह सोनिया के मुँह का मीठा रस पीने लगा, जैसे कोई प्यासा बरसों बाद पानी पा गया हो। सोनिया भी पूरी शिद्दत से उसका साथ दे रही थी। आर्यन के हाथ अब सोनिया की साड़ी की पिन खोलने में लगे थे। जैसे ही साड़ी का पल्लू नीचे गिरा, सोनिया के दोनों विशाल तरबूज ब्लाउज की कैद में फड़फड़ाने लगे। आर्यन ने बिना देर किए ब्लाउज के हुक खोल दिए। जैसे ही कपड़ा हटा, सोनिया की छाती पर सजे वे दो सफेद पहाड़ जैसे तरबूज चांदनी में चमक उठे। उनके बीच की घाटी इतनी गहरी थी कि कोई भी उसमें खो जाए। आर्यन ने अपनी जीभ से उन मटरों को सहलाना शुरू किया, जिससे सोनिया की कमर ऊपर की ओर कमान की तरह मुड़ने लगी।
सोनिया के हाथ अब आर्यन की बेल्ट की ओर बढ़ रहे थे। उसने कांपते हाथों से आर्यन का पायजामा नीचे किया, तो उसका आठ इंच लंबा और सख्त खीरा झटके से बाहर निकल आया। सोनिया उसे देखकर दंग रह गई; उसने अपनी उंगलियों से उस खीरे की लंबाई को नापा और फिर धीरे से उसे अपने मुँह में ले लिया। सोनिया का खीरा चूसना इतना आनंददायक था कि आर्यन को लगा उसका रस अभी निकल जाएगा। वह उसकी जीभ और होंठों के तालमेल से पागल हो रहा था। कुछ देर तक खीरा चूसने के बाद सोनिया ने उसे छोड़ दिया और घास पर लेट गई। उसने अपनी टांगें फैला दीं, जिससे उसकी रेशमी खाई का द्वार साफ़ दिखने लगा। वहां छोटे-छोटे घुंघराले बाल थे, जो उस खाई की रखवाली कर रहे थे। आर्यन ने झुककर अपनी उंगली उस खाई में डाली, तो पाया कि वह पहले से ही बहुत गीली और चिपचिपी हो चुकी थी।
आर्यन ने अपनी उंगली से सोनिया की खाई को खोदना शुरू किया। सोनिया अपने कूल्हे हवा में उठाकर आर्यन की उंगलियों को और गहराई तक बुला रही थी। ‘ओह आर्यन… और जोर से… मेरी खाई को पूरा खाली कर दो,’ वह कराहते हुए बोली। आर्यन ने अब अपनी जीभ का इस्तेमाल किया और सोनिया की खाई को चाटना शुरू किया। उस रसीली खाई का स्वाद किसी अमृत जैसा था। सोनिया की सिसकारियां अब गार्डन के सन्नाटे को चीर रही थीं। उसका पूरा बदन पसीने से तर-बतर हो चुका था। जब सोनिया बर्दाश्त की हद पार करने लगी, तो उसने आर्यन को अपने ऊपर खींच लिया। आर्यन ने अपने सख्त खीरे को सोनिया की गीली खाई के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। आधा खीरा एक ही बार में उस तंग खाई के भीतर समा गया। सोनिया के मुँह से एक चीख निकल गई, जो खुशी और हल्के दर्द का मिला-जुला अहसास था।
आर्यन ने रुककर उसे संभलने का मौका दिया और फिर धीरे-धीरे खुदाई शुरू की। हर धक्के के साथ सोनिया के तरबूज हवा में उछल रहे थे और उसकी चूड़ियाँ खनक रही थीं। ‘तुम बहुत अच्छा खोदते हो आर्यन… मुझे ऐसे ही खोदते रहो,’ सोनिया ने अपनी टांगें आर्यन की कमर के गिर्द लपेट लीं ताकि वह और गहराई तक जा सके। सामने से खुदाई करते हुए आर्यन ने उसके दोनों तरबूजों को अपने हाथों में दबोच लिया और उन्हें बुरी तरह मसलने लगा। सोनिया का पूरा बदन कांप रहा था और उसकी खाई से निकलने वाला रस अब आर्यन के खीरे को और भी चिकना बना रहा था। खुदाई की गति अब बढ़ती जा रही थी। आर्यन के धक्कों की आवाज़ उस सन्नाटे में साफ़ सुनाई दे रही थी।
कुछ देर बाद आर्यन ने सोनिया को पलटा दिया और उसे घुटनों के बल खड़ा कर दिया। अब वह पिछवाड़े से खोदने के लिए तैयार था। सोनिया का पिछवाड़ा इतना गोल और मांसल था कि उसे देखते ही आर्यन का जोश दोगुना हो गया। उसने पीछे से अपना खीरा फिर से सोनिया की खाई में उतारा। यह पोजीशन सोनिया को और भी ज्यादा सुख दे रही थी। वह अपने हाथों को जमीन पर टिकाए हुए बार-बार पीछे की ओर झटके मार रही थी ताकि आर्यन का खीरा उसकी गहराई के आखिरी कोने को छू सके। खुदाई अब अपने चरम पर थी। आर्यन का पूरा शरीर पसीने से नहाया हुआ था और उसकी सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। सोनिया भी अब अपनी चरम सीमा के करीब थी। उसका शरीर अकड़ने लगा था और उसकी आवाज़ अब गले में ही दबने लगी थी।
अचानक सोनिया ने जोर से आर्यन के हाथों को पकड़ा और उसका पूरा शरीर जोर-जोर से थरथराने लगा। उसकी खाई से भारी मात्रा में गर्म रस छूटने लगा, जिसने आर्यन के खीरे को पूरा भिगो दिया। सोनिया के रस निकलने के कुछ ही सेकंड बाद आर्यन भी अपनी सीमा तक पहुँच गया। उसने कुछ आखिरी और बहुत गहरे धक्के लगाए और अपना सारा गर्म सफेद रस सोनिया की खाई की गहराइयों में उड़ेल दिया। दोनों अगले कुछ मिनटों तक एक-दूसरे के ऊपर गिरे रहे, सांसों की आवाज़ों के अलावा वहाँ कोई और शब्द नहीं था। सोनिया की हालत ऐसी थी जैसे उसके शरीर से सारी जान निकल गई हो, लेकिन उसके चेहरे पर एक परम सुख की चमक थी।
धीरे-धीरे आर्यन सोनिया के ऊपर से हटा और उसके पास ही घास पर लेट गया। सोनिया ने अपनी बिखरी हुई साड़ी को समेटा और आर्यन की बाहों में सिमट गई। गार्डन की ठंडी हवा अब उनके पसीने से तर शरीरों को सुकून दे रही थी। उस रात की खुदाई ने न केवल उनकी शारीरिक भूख को शांत किया था, बल्कि उनके बीच के पुराने भावनात्मक बंधन को एक नई और गहरी डोर से बांध दिया था। सोनिया ने आर्यन के माथे को चूमा और कहा, ‘आज तुमने मुझे फिर से जीना सिखा दिया।’ आर्यन ने उसे अपनी बाहों में और कस लिया, यह जानते हुए कि यह मुलाकात अब एक अंतहीन सिलसिले की शुरुआत थी।