साली की मदहोश चु@@ई —> दोपहर का वक्त था और घर के सभी सदस्य शादी की खरीदारी के लिए बाजार गए हुए थे। घर में सिर्फ राजेश और उसकी साली कविता अकेले थे। कविता अपनी बड़ी बहन के घर कुछ दिनों के लिए रहने आई थी। उसकी उम्र करीब 24 साल थी और उसका शरीर किसी तराशी हुई मूरत जैसा था। राजेश काफी समय से कविता की ओर आकर्षित था, लेकिन लोक-लाज के डर से उसने कभी अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं किया था। आज मौका पाकर उसका मन बेचैन हो उठा था। कविता हॉल में सोफे पर लेटी हुई कोई पत्रिका पढ़ रही थी। उसने एक छोटी सी कुर्ती और लेगिंग्स पहनी थी, जिससे उसके शरीर के उभार साफ नजर आ रहे थे। उसके तरबूज कुर्ती के भीतर से बाहर निकलने को बेताब लग रहे थे और उनकी गोलाई राजेश की धड़कनों को तेज कर रही थी।
राजेश धीरे से उसके पास जाकर बैठ गया और उसे गौर से देखने लगा। कविता की त्वचा मखमली थी और उसके चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी। राजेश की नजरें बार-बार उसके उन उभरे हुए तरबूजों पर जा टिकती थीं, जिनके बीच की गहरी लकीर उसे अपनी ओर खींच रही थी। कविता ने जब राजेश को अपनी ओर देखते हुए पाया, तो वह थोड़ी शर्मा गई। उसने अपनी कुर्ती को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन इससे उसके तरबूज और भी ज्यादा उभर कर सामने आ गए। राजेश ने महसूस किया कि कविता भी शायद इस खिंचाव को महसूस कर रही थी। उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं और उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी। राजेश ने हिम्मत जुटाई और धीरे से अपना हाथ उसकी जांघ पर रख दिया।
कविता के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने राजेश का हाथ हटाया नहीं। उसके मन में एक तरफ शर्म थी और दूसरी तरफ एक अनजानी इच्छा। राजेश ने धीरे-धीरे अपना हाथ ऊपर की ओर सरकाना शुरू किया। उसकी उंगलियां कविता की कोमल त्वचा को महसूस कर रही थीं। उसने महसूस किया कि कविता के तरबूज अब और भी ज्यादा सख्त हो गए हैं और उनके ऊपर के मटर कुर्ती के कपड़े को चीर कर बाहर आने की कोशिश कर रहे थे। राजेश ने अपना चेहरा उसके करीब लाया और उसकी गर्दन पर अपनी गर्म सांसें छोड़नी शुरू कर दीं। कविता ने अपनी आंखें बंद कर लीं और एक धीमी सी आह भरी। उसे लग रहा था जैसे उसके शरीर के भीतर कोई ज्वालामुखी फटने वाला हो।
राजेश ने अब धीरे से उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया और उनका रस पीने लगा। यह स्पर्श इतना गहरा और भावुक था कि दोनों के बीच की सारी झिझक पल भर में खत्म हो गई। कविता ने भी अपनी बाहें राजेश के गले में डाल दीं और उसे अपनी ओर खींचने लगी। राजेश के हाथों ने अब उन बड़े-बड़े तरबूजों को अपने कब्जे में ले लिया था। वह उन्हें धीरे-धीरे दबाने लगा, जिससे कविता के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं। राजेश ने उसकी कुर्ती के बटन खोले और उन तरबूजों को पूरी तरह से आजाद कर दिया। वे इतने सफेद और रसीले लग रहे थे कि राजेश खुद को रोक नहीं पाया और एक तरबूज को अपने मुंह में भरकर उसके ऊपर लगे मटर को जीभ से सहलाने लगा।
कविता के शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वह बिस्तर पर लेट गई और राजेश उसके ऊपर आ गया। राजेश ने महसूस किया कि उसकी पैंट के भीतर उसका खीरा अब पूरी तरह से कड़क हो चुका था और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा था। उसने अपनी और कविता की सारी बाधाएं यानी कपड़े हटा दिए। अब दोनों पूरी तरह से कुदरती हालत में थे। राजेश ने देखा कि कविता की खाई बेहद साफ और सुंदर थी, जिसके आसपास छोटे-छोटे रेशमी बाल थे। उस खाई से एक हल्की सी खुशबू आ रही थी और वह पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। राजेश ने अपनी उंगली से उस खाई की गहराई को मापना शुरू किया, जिससे कविता का पूरा शरीर कांप उठा।
राजेश ने अपनी उंगली से खाई को थोड़ा और कुरेदा और महसूस किया कि वहां से रस निकलना शुरू हो गया था। कविता अपनी कमर ऊपर उठा-उठा कर राजेश के हाथ का साथ दे रही थी। अब राजेश से और सब्र नहीं हो रहा था। उसने अपना कड़क और लंबा खीरा बाहर निकाला और उसे कविता की खाई के मुहाने पर रखा। जैसे ही खीरे का सिरा उस गीली खाई से टकराया, कविता के मुंह से एक लंबी आह निकली। राजेश ने धीरे से दबाव डाला और अपना खीरा आधा भीतर उतार दिया। कविता ने कसकर राजेश के कंधों को पकड़ लिया। वह दर्द और आनंद के एक अनोखे संगम में गोते लगा रही थी।
राजेश ने उसे संभलने का मौका दिया और फिर एक गहरा धक्का मारकर अपना पूरा खीरा उसकी खाई की गहराई तक पहुंचा दिया। कविता की आंखों से दो बूंद आंसू निकल आए, लेकिन वे दर्द के नहीं बल्कि तृप्ति के थे। राजेश ने अब सामने से खोदना शुरू किया। हर धक्के के साथ उसका खीरा कविता की खाई की दीवारों से टकरा रहा था, जिससे एक मदहोश कर देने वाली आवाज पैदा हो रही थी। कविता अब पूरी तरह से इस खेल में डूब चुकी थी। वह राजेश की लय के साथ अपनी कमर हिला रही थी। उसके तरबूज हर धक्के के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे, जिन्हें राजेश बीच-बीच में अपने हाथों से मसल देता था।
खुदाई की यह प्रक्रिया काफी लंबी चली। राजेश ने अब कविता को घुमाया और उसे पिछवाड़े से खोदने की स्थिति में ला खड़ा किया। पीछे से देखने पर कविता का पिछवाड़ा किसी पके हुए फल की तरह गोल और भारी नजर आ रहा था। राजेश ने अपने खीरे को फिर से उसकी खाई में डाला और पीछे से धक्के लगाने शुरू किए। यह तरीका कविता को और भी ज्यादा आनंद दे रहा था। वह बिस्तर पर अपना सिर टिकाकर जोर-जोर से आहें भर रही थी। उसे लग रहा था जैसे राजेश का खीरा उसके शरीर के हर कोने को छू रहा हो। राजेश भी अब अपने रस के निकलने के करीब था। उसकी सांसें फूल रही थीं और उसका शरीर पसीने से तर-बतर हो गया था।
राजेश ने अपनी गति और तेज कर दी। वह अब किसी जंगली जानवर की तरह कविता की खाई को खोद रहा था। हर धक्के के साथ वह कविता के कानों में गंदे और मीठे शब्द फुसफुसा रहा था, जिससे कविता की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई थी। अचानक कविता का शरीर अकड़ गया और उसकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा। वह बुरी तरह से कांपने लगी। ठीक उसी पल राजेश ने भी अपना पूरा खीरा उसकी गहराई में धंसा दिया और अपना सारा गर्म रस उसकी खाई के भीतर छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए बिस्तर पर गिर पड़े। दोनों की सांसें इतनी तेज थीं कि पूरे कमरे में उनकी आवाज गूंज रही थी।
कुछ देर तक दोनों शांत रहे, जैसे इस पल को पूरी तरह से महसूस करना चाहते हों। कविता का चेहरा गुलाबी हो गया था और उसकी आंखों में एक अजीब सा सुकून था। राजेश ने उसके माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसे महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं थी, बल्कि उनके बीच के भावनात्मक जुड़ाव का एक गहरा प्रकटीकरण था। कविता ने राजेश की छाती पर अपना सिर रखा और धीरे से बोली, ‘जीजू, आपने तो मुझे आज स्वर्ग दिखा दिया।’ राजेश मुस्कुराया और उसे और भी कसकर पकड़ लिया। दोनों को पता था कि यह राज उनके बीच ही रहेगा, लेकिन इस एक दोपहर ने उनके रिश्तों की परिभाषा हमेशा के लिए बदल दी थी।
धीरे-धीरे घर के बाकी सदस्यों के आने का समय हो रहा था। दोनों ने खुद को संभाला और अपने कपड़े ठीक किए। कमरे में अभी भी उस खुदाई की महक बसी हुई थी। कविता ने बिखरे हुए बालों को ठीक किया और आईने में खुद को देखा, उसकी आंखों में अब एक नई चमक थी। राजेश ने खिड़की के बाहर देखा, सूरज ढलने को था, लेकिन उसके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हो चुका था। वह जानता था कि अब जब भी उन्हें मौका मिलेगा, वह फिर से इस रसीली खाई और कड़क खीरे के खेल को दोहराएंगे। यह उनकी जिंदगी का सबसे यादगार और गहरा अनुभव बन गया था, जिसने उन्हें एक-दूसरे के और भी करीब ला दिया था।