विधवा चाची के साथ रसीली चु@@ई का सुख —> आंगन में बैठी सुमित्रा चाची की उदासी उनकी आंखों में साफ दिख रही थी। दोपहर की तपती धूप उनके चेहरे पर खेल रही थी और उनके सादे सफेद लिबास के नीचे से उनके भारी तरबूज उभर कर सामने आ रहे थे। मैंने दूर से ही उन्हें देखा और मेरी धड़कनें तेज होने लगीं। उनके अकेलेपन में एक ऐसी कशिश थी जो मुझे उनकी तरफ खींच रही थी।
मैं उनके पास जाकर बैठ गया और धीरे से उनके कंधे पर हाथ रखा। सुमित्रा चाची ने अपनी भीगी पलकें ऊपर उठाईं और एक फीकी मुस्कान दी। उस स्पर्श में एक अजीब सी बिजली थी जिसने मेरे भीतर की दबी हुई इच्छाओं को जगा दिया था। कमरे के सन्नाटे में हमारी सांसों की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी, जो धीरे-धीरे भारी होती जा रही थी।
हवा में एक अजीब सी खामोशी थी जो धीरे-धीरे उत्तेजना में बदल रही थी। चाची के रेशमी बालों की खुशबू मेरे नथुनों से टकरा रही थी। मैंने महसूस किया कि उनका शरीर मेरी नजदीकी से हल्का सा कांप रहा था। उनके सफेद ब्लाउज के अंदर कैद तरबूज मेरी नजरों को बार-बार अपनी ओर खींच रहे थे। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, हमारे बीच का संकोच पिघलने लगा था।
मैंने धीरे से उनका हाथ अपने हाथ में लिया। उनके हाथ ठंडे थे लेकिन मेरी छुअन से उनमें गर्माहट आने लगी थी। सुमित्रा चाची ने अपनी नजरें झुका लीं, लेकिन उन्होंने अपना हाथ पीछे नहीं खींचा। उनके चेहरे पर आई लाली यह साफ बता रही थी कि उनके भीतर भी वही आग सुलग रही थी जो मुझे जला रही थी। उनकी सांसें अब तेज चलने लगी थीं।
कमरे का तापमान अचानक बढ़ गया था, या शायद यह हमारे भीतर की बेचैनी थी। मैंने उनके चेहरे के करीब जाकर उनके कान के पास धीरे से फुसफुसाया। मेरी सांसों की गर्मी ने उनके बदन में एक सिहरन पैदा कर दी। उन्होंने धीरे से अपनी आंखें बंद कर लीं और अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, जिससे उनकी लंबी सुराहीदार गर्दन पूरी तरह मेरे सामने थी।
मेरे हाथों ने धीरे से उनके ब्लाउज की ओर कदम बढ़ाया। जैसे ही मेरी उंगलियों ने उनके बदन को छुआ, उन्होंने एक गहरी आह भरी। मैंने महसूस किया कि उनके तरबूज के ऊपर छोटे मटर जैसे दाने सख्त होने लगे थे। यह उनकी उत्तेजना का प्रमाण था। उनकी साड़ी का पल्लू धीरे से कंधे से फिसल कर नीचे गिर गया, जिससे उनकी खूबसूरती और निखर उठी।
अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं रहा था। मैंने उनके होंठों को चूमना शुरू किया, जो बहुत प्यासे लग रहे थे। उनका शरीर पूरी तरह से ढीला पड़ गया था और वे मेरे आगोश में समा गई थीं। मेरे हाथ उनके तरबूजों को सहला रहे थे, और उनके मटर जैसे हिस्से मेरी हथेलियों के बीच दब रहे थे। उस स्पर्श ने हमारे भीतर कामुकता का सैलाब ला दिया था।
धीरे-धीरे हमने एक-दूसरे के कपड़ों को हटाना शुरू किया। जब वे पूरी तरह नग्न हुईं, तो उनकी गोरी देह किसी अप्सरा जैसी लग रही थी। उनकी गहरी खाई और उसके आसपास के रेशमी बाल देखकर मेरा खीरा पूरी तरह से अकड़ गया था। चाची ने जब मेरे खीरा को देखा, तो उनकी आंखों में एक अजीब सी चमक और प्यास दौड़ गई जो सदियों पुरानी लग रही थी।
उन्होंने झुककर धीरे से मेरे खीरा को छुआ और उसे सहलाने लगीं। उनकी उंगलियों का स्पर्श इतना जादुई था कि मुझे अपनी नसों में खून का प्रवाह तेज महसूस हुआ। फिर उन्होंने धीरे से अपना मुंह नीचे किया और खीरा चूसना शुरू कर दिया। उनके मुंह की गर्माहट और जीभ के स्पर्श ने मुझे स्वर्ग जैसा सुख महसूस कराया। मैं उनके सिर के बालों को सहलाता रहा।
खीरा चूसना बंद करके उन्होंने मेरी आंखों में देखा और मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया। मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को फैलाकर उनकी खाई का मुआयना किया। वह जगह काफी रसीली और गर्म थी। मैंने धीरे से सामने से खोदना शुरू किया। पहले थोड़ा अवरोध महसूस हुआ, लेकिन फिर मैं गहराई तक समाता चला गया। हम दोनों की आहें गूंज उठीं।
खुदाई की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। हर धक्के के साथ उनके तरबूज उछल रहे थे और उनके मटर जैसे हिस्से मेरे सीने से टकरा रहे थे। सुमित्रा चाची ने अपने हाथ मेरी पीठ पर गड़ा दिए थे और वे मेरे नाम को बार-बार पुकार रही थीं। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों और देह के टकराने की आवाजें आ रही थीं। पसीने से तरबतर हमारे शरीर एक-दूसरे से चिपक रहे थे।
फिर मैंने उन्हें घुमाया और पिछवाड़े से खोदना शुरू करने का फैसला किया। वे घुटनों के बल बैठ गईं और अपना पिछवाड़ा मेरी तरफ उठा दिया। यह दृश्य इतना उत्तेजक था कि मेरा खीरा और भी कठोर हो गया। मैंने पीछे से अपनी पूरी ताकत के साथ खुदाई जारी रखी। चाची बेड की चादर को कसकर पकड़े हुए थीं और जोर-जोर से सिसकारियां भर रही थीं।
उनके शरीर की हर मांसपेशी अब तनाव में थी। हम दोनों ही चरम सीमा के करीब पहुंच रहे थे। खुदाई इतनी गहरी और तेज थी कि मुझे महसूस हुआ कि बस अब कुछ ही क्षणों की बात है। सुमित्रा चाची का शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और उन्होंने अपनी कमर को पीछे की ओर जोर से झटका दिया। उनकी खाई से ढेर सारा रस निकलने लगा।
ठीक उसी समय मेरे खीरा से भी गर्म धाराओं के रूप में रस निकलने लगा जो उनकी गहराई में समा गया। हम दोनों ही पसीने से लथपथ एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। वह क्षण इतना भावुक और सुकून भरा था कि शब्द कम पड़ जाएं। चाची ने मुझे कसकर गले लगा लिया और उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े। हमने काफी देर तक ऐसे ही लेटे रहने का आनंद लिया।
धीरे-धीरे हमारी धड़कनें सामान्य होने लगीं। मैंने उनके माथे को चूमा और उन्हें विश्वास दिलाया कि वे अकेली नहीं हैं। यह मिलन सिर्फ शारीरिक नहीं था, बल्कि दो तड़पती रूहों का संगम था। चाची के चेहरे पर जो शांति अब दिख रही थी, वह मैंने पहले कभी नहीं देखी थी। उस दिन की खुदाई ने हमारे बीच एक अटूट रिश्ता बना दिया था।
रात के साये अब गहरे हो रहे थे, लेकिन हमारे भीतर एक नई रोशनी थी। हमने फिर से अपने कपड़े पहने, लेकिन हमारे स्पर्श में अभी भी वही गर्माहट बाकी थी। सुमित्रा चाची ने मेरी ओर देखकर मुस्कुराया और उनके उस मुस्कान में तृप्ति का भाव था। यह चु@@ई का अनुभव मेरे जीवन की सबसे हसीन याद बन गया था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता।
हमने रसोई में जाकर साथ में खाना बनाया, और हर बार जब हमारा शरीर एक-दूसरे से टकराता, तो वही पुरानी बिजली कौंध जाती। उनके तरबूज की यादें अभी भी मेरे दिमाग में ताजा थीं। मैंने महसूस किया कि प्यार और इच्छा जब एक साथ मिलते हैं, तो वह अनुभव अलौकिक हो जाता है। सुमित्रा चाची अब केवल मेरी चाची नहीं, मेरी प्रेरणा बन चुकी थीं।
अगली सुबह जब मैं विदा होने लगा, तो उन्होंने मेरा हाथ थामकर धीरे से दबाया। उनकी आंखों में फिर से मिलने का वादा था। मैंने भी मुस्कुराकर उनके गालों को छुआ। उस हवेली की दीवारों ने हमारे गुप्त मिलन को अपने भीतर समेट लिया था। वह रसीली रात और वह गहरी खुदाई हमेशा मेरे दिल के किसी कोने में महकती रहेगी।
घर लौटते वक्त मेरे मन में सिर्फ चाची की छवि थी। उनकी वह खाई, उनके रसीले तरबूज और वह मटर जैसे निप्पल, सब कुछ जैसे मेरी आंखों के सामने घूम रहा था। मैंने जान लिया था कि रिश्तों की गरिमा के बीच भी भावनाओं का अपना एक अलग संसार होता है। वह सफर खत्म हो गया था, लेकिन कहानी अभी बाकी थी।
अंत में, वह अनुभव मुझे यह सिखा गया कि इंसान की जरूरतें और उसकी भावनाएं कभी-कभी सामाजिक बंधनों से बड़ी हो जाती हैं। सुमित्रा चाची के साथ बिताया वह हर लम्हा एक कविता की तरह था। उस रसीली चु@@ई ने हम दोनों को एक नया जीवन और एक नई पहचान दी थी, जो सिर्फ हमारे बीच एक खूबसूरत राज की तरह सुरक्षित थी।