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title{ “title”: “जादुई पेंटब्रश और राजू की कहानी”, “content”: “एक छोटे से गाँव में राजू नाम का एक गरीब लेकिन बेहद प्रतिभाशाली लड़का रहता था। राजू को चित्रकारी का बहुत शौक था, लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह एक ब्रश और रंग खरीद सके। वह दिन भर खेत की मिट्टी पर लकड़ी की टहनी से सुंदर चित्र बनाया करता था।एक रात, राजू के सपने में एक वृद्ध व्यक्ति आए और उन्होंने उसे एक चमकता हुआ पेंटब्रश दिया। जब राजू सुबह उठा, तो उसने देखा कि उसके हाथ में वही जादुई ब्रश था। राजू ने खुशी-खुशी दीवार पर एक सुनहरी मछली का चित्र बनाया। जैसे ही चित्र पूरा हुआ, मछली दीवार से निकलकर पानी के बर्तन में तैरने लगी!जादुई शक्ति का सदुपयोगराजू समझ गया कि यह कोई साधारण ब्रश नहीं है। उसने अपनी जादुई कला का उपयोग गाँव वालों की मदद के लिए करना शुरू कर दिया। जब किसी किसान को हल की ज़रूरत होती, राजू हल बना देता। जब किसी गरीब के पास खाना नहीं होता, वह लजीज पकवानों का चित्र बना देता जो सच हो जाते।धीरे-धीरे राजू की प्रसिद्धि राज्य के लालची राजा तक पहुँच गई। राजा ने राजू को अपने दरबार में बुलाया और आदेश दिया, “मेरे लिए सोने के सिक्कों का पहाड़ बनाओ!” राजू जानता था कि राजा बहुत लालची है और वह इस धन का उपयोग प्रजा की भलाई के लिए नहीं करेगा।राजू की चतुराईराजू ने बड़ी चतुराई से एक विशाल समुद्र का चित्र बनाया और उसके बीच में एक छोटा सा सोने का पहाड़। राजा ने चिल्लाकर कहा, “मुझे वहाँ ले जाने के लिए एक जहाज़ बनाओ!” राजू ने एक बड़ा जहाज़ बनाया। जैसे ही राजा और उसके सैनिक जहाज़ पर सवार होकर समुद्र के बीच पहुँचे, राजू ने ब्रश से तेज लहरें और तूफान बना दिया।राजा डर के मारे कांपने लगा और उसने राजू से माफ़ी मांगी। राजू ने तूफान शांत कर दिया और राजा को सुरक्षित किनारे पर ले आया। राजा की आँखें खुल गईं और उसने अपना लालच छोड़ दिया।सीख: प्रतिभा और शक्ति का उपयोग हमेशा दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए, न कि स्वार्थ या लालच के लिए।” }

content{ “title”: “जादुई पेंटब्रश और राजू की कहानी”, “content”: “ एक छोटे से गाँव में राजू नाम का एक गरीब लेकिन बेहद प्रतिभाशाली लड़का रहता था। राजू को चित्रकारी का बहुत शौक था, लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह एक ब्रश और रंग खरीद सके। वह दिन भर खेत की मिट्टी पर … Read more

मामी की जोरदार चु@#ई भाभी के साथ मिलकर

पिछली कहानी में अपने पढ़ा था किस तरह से में मामा के घर गया छुट्टियां मानने और मैने वहां अपनी भाभी की चू@@ई की अगर पहला पार्टी नहीं पढ़ा है तो यहां से पढ़े 👇                            मामा के घर भाभी की चु@#ई  छुट्टियां खत्म … Read more

मामा के घर भाभी की चु@#ई

 गर्मियों की छुट्टियों में मैंने फैसला किया कि इस बार शहर की भागदौड़ से दूर, मामा के गांव जाकर कुछ दिन आराम से बिताऊंगा। मामा का घर बड़ा सा था, चारों तरफ हरियाली और शांत वातावरण, जो मेरे थके हुए मन को सुकून देता। वहां पहुंचते ही मामा और मामी ने बड़े प्यार से स्वागत … Read more

मामा के घर भाभी की चु@#ई

गर्मियों की छुट्टियों में मैंने फैसला किया कि इस बार शहर की भागदौड़ से दूर, मामा के गांव जाकर कुछ दिन आराम से बिताऊंगा। मामा का घर बड़ा सा था, चारों तरफ हरियाली और शांत वातावरण, जो मेरे थके हुए मन को सुकून देता। वहां पहुंचते ही मामा और मामी ने बड़े प्यार से स्वागत … Read more

भाभी की चु@@ई

शाम का धुंधलका गाँव पर छा गया था। प्रिया, २९ साल की, भरे-भरे जिस्म वाली, गोरी त्वचा पर हल्की लाली लिए, आँगन में कपड़े सुखा रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू हवा में लहरा रहा था, जिससे उसके बड़े-बड़े आम जैसे फल आधे-आधे झलक रहे थे। अंगूर जैसे छोटे-छोटे फल ब्लाउज के पतले कपड़े से … Read more

ससुराल में चु#@#ई

 रात के ग्यारह बज चुके थे। घर में सन्नाटा छाया हुआ था, सिर्फ दूर कहीं छत पर पंखे की हल्की-हल्की आवाज और कभी-कभी सड़क से गुजरती गाड़ी की दूर होती धुन सुनाई दे रही थी। देविका अपने कमरे में अकेली लेटी हुई थी, पति रवि ऑफिस के काम से दो दिन के लिए बाहर गए … Read more

पेट्रोल पम्प वालो ने मिलकर खोदा

मेरा नाम सरिता था, और मैं उस छोटे से गांव में रहती थी जहां खेतों की हरी-भरी फैलावत दूर-दूर तक नजर आती थी, सुबह से शाम तक घास काटना, पोटली बनाकर सिर पर रखकर घर लौटना, यही मेरी दिनचर्या थी, घर में पति काम पर शहर जाते थे, बच्चे स्कूल में, और मैं अकेली उन … Read more

मेरी पहली गर्लफ्रेंड

 मेरा नाम राहुल है, और मैं दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में रहता था, जहां सड़कें संकरी होती थीं और घरों की बालकनियां इतनी करीब कि पड़ोसियों की हलचल आसानी से महसूस होती थी। कॉलेज का पहला साल था, इंजीनियरिंग की पढ़ाई में व्यस्त, लेकिन मेरा मन हमेशा उन छोटी-मोटी घटनाओं में उलझता जो जीवन … Read more

मेरी पहली गर्लफ्रेंड

मेरा नाम राहुल है, और मैं दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में रहता था, जहां सड़कें संकरी होती थीं और घरों की बालकनियां इतनी करीब कि पड़ोसियों की हलचल आसानी से महसूस होती थी। कॉलेज का पहला साल था, इंजीनियरिंग की पढ़ाई में व्यस्त, लेकिन मेरा मन हमेशा उन छोटी-मोटी घटनाओं में उलझता जो जीवन … Read more

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