बारिश की रात और पुरानी हवेली
बारिश की तेज़ बूंदें खिड़कियों पर थपथपा रही थीं और पुरानी हवेली की लकड़ी की छत से पानी टपकने की आवाज़ आ रही थी। नेहा अकेली थी, उसकी साड़ी भीगकर शरीर से चिपक गई थी, ब्लाउज पारदर्शी हो चुका था और उसकी स्त@#@ की पूरी आकृति साफ़ नज़र आ रही थी। वह कमरे में घूम … Read more