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बारिश की रात और पुरानी हवेली

बारिश की तेज़ बूंदें खिड़कियों पर थपथपा रही थीं और पुरानी हवेली की लकड़ी की छत से पानी टपकने की आवाज़ आ रही थी। नेहा अकेली थी, उसकी साड़ी भीगकर शरीर से चिपक गई थी, ब्लाउज पारदर्शी हो चुका था और उसकी स्त@#@ की पूरी आकृति साफ़ नज़र आ रही थी। वह कमरे में घूम … Read more

जंगल की वो रात

माया उस घने जंगल के किनारे बने छोटे से झोपड़े में अकेली बैठी थी। रात इतनी गहरी और घनी थी कि बाहर सिर्फ पत्तियों की फुसफुसाहट, हवा की सिसकारी और दूर-दूर उल्लू की उदास, लंबी पुकार सुनाई दे रही थी। शहर की चकाचौंध से भागकर वह यहां आई थी – जहां न कोई सवाल करता … Read more

जंगल की वो रात

**जंगल की वो रात – और भी गहरी, और भी जंगली** माया उस घने जंगल के किनारे बने छोटे से झोपड़े में अकेली बैठी थी। रात इतनी गहरी और घनी थी कि बाहर सिर्फ पत्तियों की फुसफुसाहट, हवा की सिसकारी और दूर-दूर उल्लू की उदास, लंबी पुकार सुनाई दे रही थी। शहर की चकाचौंध से … Read more

जंगल की वो रात

माया उस घने जंगल के किनारे बने छोटे से झोपड़े में अकेली थी। रात गहरी हो चुकी थी, और बाहर बारिश नहीं, बल्कि सिर्फ पत्तियों की सरसराहट और दूर कहीं उल्लू की आवाज थी। माया यहां इसलिए आई थी क्योंकि शहर की भीड़ से भागना चाहती थी। उसकी सफेद सूती ड्रेस हल्की सी गीली थी … Read more

ऑफिस का पहला दिन और चार मुस्टंडे

प्रिया आज अपने नए ऑफिस के पहले दिन बहुत उत्साहित थी लेकिन साथ ही उसके मन में एक अजीब सी घबराहट भी थी क्योंकि वह एक अनजान जगह पर आई थी जहां चार मजबूत कद-काठी वाले मुस्टंडे पुरुष पहले से ही काम कर रहे थे जिनकी घनी काली मूंछें उनकी मर्दानगी को और ज्यादा उभार … Read more

**पड़ोसी की रसीली चु@#@ई**

**पड़ोसी की रसीली चु@#@ई** बाहर मूसलाधार बारिश की बूंदें खिड़की के कांच पर दस्तक दे रही थीं और कमरे के भीतर एक अजीब सी खामोशी और गर्मी छाई हुई थी, जहाँ नेहा अपनी पतली मलमल की साड़ी में सोफे पर बैठी किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी। उसकी साड़ी का पल्लू बार-बार कंधे से … Read more

एक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह अपनी रोज़ी-रोटी कमाने के लिए रोज़ जंगल जाकर लकड़ियाँ काटता था। एक दिन नदी के किनारे एक पेड़ काटते समय उसकी कुल्हाड़ी अचानक हाथ से फिसलकर गहरे पानी में गिर गई। रामू बहुत दुखी हुआ और नदी के किनारे बैठकर रोने लगा क्योंकि उसके पास दूसरी कुल्हाड़ी खरीदने के पैसे नहीं थे। तभी नदी से एक जल देवता प्रकट हुए। उन्होंने रामू से रोने का कारण पूछा। रामू ने सारी बात बता दी। जल देवता ने पानी में डुबकी लगाई और एक सोने की कुल्हाड़ी बाहर निकाली। उन्होंने पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” रामू ने कहा, “नहीं, यह मेरी नहीं है।” देवता ने फिर डुबकी लगाई और इस बार चाँदी की कुल्हाड़ी निकाली। रामू ने उसे भी लेने से मना कर दिया। तीसरी बार देवता ने लोहे की एक पुरानी कुल्हाड़ी निकाली। उसे देखते ही रामू खुशी से चिल्लाया, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है!” जल देवता रामू की ईमानदारी देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने रामू को उसकी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी उपहार स्वरूप दे दीं। रामू अपनी ईमानदारी के कारण धनवान बन गया और खुशी-खुशी रहने लगा।

एक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह अपनी रोज़ी-रोटी कमाने के लिए रोज़ जंगल जाकर लकड़ियाँ काटता था। एक दिन नदी के किनारे एक पेड़ काटते समय उसकी कुल्हाड़ी अचानक हाथ से फिसलकर गहरे पानी में गिर गई। रामू बहुत दुखी हुआ और नदी के किनारे बैठकर रोने लगा क्योंकि … Read more

titleएक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल जाकर लकड़ियाँ काटता और उन्हें बाज़ार में बेचकर अपना गुज़ारा करता था। एक दिन नदी के किनारे लकड़ी काटते समय उसकी कुल्हाड़ी अचानक गहरे पानी में गिर गई। अपनी कुल्हाड़ी खोने के गम में रामू किनारे बैठकर रोने लगा। तभी नदी से एक जलदेवता प्रकट हुए और उन्होंने रामू से उसके दुख का कारण पूछा। रामू ने सारी बात सच-सच बता दी। जलदेवता ने नदी में डुबकी लगाई और एक सोने की कुल्हाड़ी निकालकर बाहर लाए। उन्होंने पूछा, “क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है?” रामू ने ईमानदारी से कहा, “नहीं महाराज, यह मेरी नहीं है।” देवता ने फिर डुबकी लगाई और इस बार चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आए। रामू ने फिर मना कर दिया। तीसरी बार देवता ने लोहे की वही पुरानी कुल्हाड़ी निकाली। उसे देखते ही रामू खुशी से उछल पड़ा और बोला, “हाँ, यही मेरी कुल्हाड़ी है!” जलदेवता रामू की सच्चाई और ईमानदारी से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे उसकी लोहे की कुल्हाड़ी के साथ-साथ सोने और चाँदी की कुल्हाड़ियाँ भी उपहार में दे दीं। रामू अपनी ईमानदारी के कारण रातों-रात अमीर बन गया और सुख से रहने लगा।

contentएक गाँव में रामू नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। वह रोज़ जंगल जाकर लकड़ियाँ काटता और उन्हें बाज़ार में बेचकर अपना गुज़ारा करता था। एक दिन नदी के किनारे लकड़ी काटते समय उसकी कुल्हाड़ी अचानक गहरे पानी में गिर गई। अपनी कुल्हाड़ी खोने के गम में रामू किनारे बैठकर रोने लगा। तभी नदी … Read more

titleएक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। रामू बहुत ईमानदार और मेहनती था। एक दिन जब वह अपने खेत में खुदाई कर रहा था, तो उसका फावड़ा किसी धातु की चीज़ से टकराया। उसने और गहराई से खोदा तो उसे मिट्टी के नीचे दबा हुआ एक बड़ा सा पीतल का घड़ा मिला। रामू ने घड़ा बाहर निकाला और उसे साफ किया। जैसे ही उसने घड़े को देखा, वह दंग रह गया। वह घड़ा सोने के सिक्कों से लबालब भरा हुआ था। रामू की गरीबी पल भर में दूर हो सकती थी, लेकिन उसकी ईमानदारी ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उसने सोचा, “यह खेत मेरा नहीं है, मैंने इसे जमींदार से किराए पर लिया है। इसलिए इस घड़े पर मेरा हक नहीं है।” रामू तुरंत वह घड़ा लेकर गाँव के जमींदार के पास पहुँचा और उसे सारी बात बता दी। जमींदार रामू की ईमानदारी देखकर बहुत प्रभावित हुआ। जमींदार ने कहा, “रामू, अगर तुम चाहते तो इसे खुद रख सकते थे और किसी को पता भी नहीं चलता। तुम्हारी इस सच्चाई ने मेरा दिल जीत लिया है।” जमींदार ने उस घड़े में से आधे सिक्के इनाम के तौर पर रामू को दे दिए और बाकी आधे गाँव के विकास के लिए रख लिए। रामू अब धनवान हो गया था, लेकिन उसने अपनी सादगी और मेहनत कभी नहीं छोड़ी। गाँव के सभी लोग रामू का सम्मान करने लगे। **सीख:** ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।

contentएक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। रामू बहुत ईमानदार और मेहनती था। एक दिन जब वह अपने खेत में खुदाई कर रहा था, तो उसका फावड़ा किसी धातु की चीज़ से टकराया। उसने और गहराई से खोदा तो उसे मिट्टी के नीचे दबा … Read more

title{ “title”: “जादुई घड़ा और ईमानदार किसान”, “content”: “एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब लेकिन बहुत ईमानदार किसान रहता था। वह दिन-भर अपने खेत में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन फिर भी उसे मुश्किल से दो वक्त की रोटी मिल पाती थी।एक दिन, जब रामू अपने खेत की खुदाई कर रहा था, तो उसका हल किसी सख्त चीज़ से टकराया। उसने सावधानी से मिट्टी हटाई तो उसे एक बड़ा सा मिट्टी का घड़ा मिला। रामू ने सोचा, ‘यह घड़ा तो खाली है, पर काफी मजबूत लग रहा है, शायद घर में पानी भरने के काम आए।’उसने अपना तौलिया उस घड़े में डाल दिया और उसे लेकर घर आ गया। जब उसने घर पहुँचकर घड़े से अपना तौलिया निकाला, तो वह दंग रह गया। घड़े में एक के बदले 100 तौलिए थे! रामू को समझ आ गया कि यह कोई साधारण घड़ा नहीं, बल्कि एक जादुई घड़ा है जो किसी भी चीज़ को सौ गुना बढ़ा देता है।रामू ने उसमें एक सिक्का डाला, तो वह सौ सिक्के बन गए। धीरे-धीरे रामू की गरीबी दूर हो गई। लेकिन अमीर होने के बाद भी रामू में घमंड नहीं आया। वह उस घड़े की मदद से गाँव के अन्य गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा करने लगा।रामू की तरक्की देखकर उसका पड़ोसी श्यामू जलने लगा। एक रात श्यामू ने चुपके से वह घड़ा चुरा लिया। वह देखना चाहता था कि घड़े के अंदर क्या है। जैसे ही वह घड़े के ऊपर झुककर अंदर झाँकने लगा, उसका पैर फिसला और वह खुद घड़े के अंदर गिर गया।अगले ही पल, घड़े से एक-एक करके 100 श्यामू बाहर निकलने लगे। वे सब आपस में लड़ने लगे कि असली श्यामू कौन है और घर का मालिक कौन है। श्यामू की लालच ने उसे ऐसी मुसीबत में डाल दिया जिसका कोई अंत नहीं था।जब रामू को पता चला, तो उसने श्यामू की मदद की और उसे समझाया कि मेहनत और ईमानदारी से जो मिलता है, वही टिकता है। श्यामू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने लालच छोड़ दिया।सीख: लालच का फल हमेशा बुरा होता है, जबकि ईमानदारी और संतोष ही जीवन का असली धन है।” }

content{ “title”: “जादुई घड़ा और ईमानदार किसान”, “content”: “ एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब लेकिन बहुत ईमानदार किसान रहता था। वह दिन-भर अपने खेत में कड़ी मेहनत करता था, लेकिन फिर भी उसे मुश्किल से दो वक्त की रोटी मिल पाती थी। एक दिन, जब रामू अपने खेत की खुदाई … Read more

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