मीना चाची की दबी इच्छा और दोपहर की वह रसभरी खुदाई—>
मीना चाची का व्यक्तित्व हमेशा से ही घर में चर्चा का विषय रहा है। उनकी उम्र लगभग चौंतीस वर्ष है, लेकिन उनके बदन की बनावट आज भी किसी कमसिन कली जैसी कसी हुई और आकर्षक है। उनके चेहरे की चमक और उनकी गहरी काली आँखों में एक अजीब सी कशिश है जो किसी को भी अपनी ओर खींचने की ताकत रखती है। जब वो घर के कामकाज में व्यस्त होती हैं, तो उनकी साड़ी के पल्लू से झांकती उनकी पतली कमर और उनकी चाल की लचक मेरे मन में अजीब सी हलचल पैदा कर देती थी। आज घर पर कोई नहीं था और मीना चाची रसोई में दोपहर का खाना बना रही थीं, उनके माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं जो उनकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थीं।
उनके शरीर का हर अंग जैसे किसी कुशल शिल्पी ने बहुत फुरसत में गढ़ा हो, उनके अंगों की गोलाई देखते ही बनती थी। उनकी छाती पर उभरे हुए दो भारी और रसीले तरबूज उनकी साड़ी के ब्लाउज को फाड़कर बाहर आने को बेताब दिखते थे। उन तरबूजों के ऊपरी हिस्से पर छोटे-छोटे मटर जैसे दाने कपड़ों के ऊपर से ही अपनी सख्त उपस्थिति दर्ज कराते थे, जो उनकी उत्तेजना का प्रमाण दे रहे थे। जब वो नीचे झुककर कुछ काम करतीं, तो पीछे से उनका सुडौल और गद्देदार पिछवाड़ा किसी ऊंचे पहाड़ की ढलान जैसा लुभावना लगता था। उनके बदन की महक और उनके चलने का कातिलाना अंदाज मेरे दिल की धड़कनें इस कदर बढ़ा देता था कि मेरा मन अशांत रहने लगा था।
हमारे बीच एक अजीब सी खामोशी और तनाव हमेशा बना रहता था, जो शब्दों से ज्यादा आँखों के इशारों में बात करता था। मैं अक्सर उन्हें छुप-छुप कर देखा करता था और मुझे लगता था कि वो भी जानबूझकर कभी अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा देतीं तो कभी झुककर मुझे अपने रसीले तरबूजों का नजारा दिखातीं। उस दिन दोपहर की सुनसान खामोशी में जब मैंने रसोई में प्रवेश किया, तो उनकी प्यासी नज़रें मेरी नज़रों से टकराईं। उनकी आँखों में एक ऐसी गहरी प्यास थी, एक ऐसी दबी हुई इच्छा जो बरसों से उनके भीतर सुलग रही थी। मैंने उसी पल महसूस कर लिया कि आज वो झिझक हमेशा के लिए खत्म होने वाली है जो हमारे बीच एक अदृश्य दीवार बनी हुई थी।
मैं बहुत धीरे से उनके पास गया और अपना कांपता हुआ हाथ उनकी मखमली और गरम कमर पर रख दिया। स्पर्श होते ही वो पूरी तरह कांप उठीं, लेकिन उन्होंने मेरा हाथ हटाने की कोशिश नहीं की, बल्कि उनकी सांसें और भी तेज चलने लगी थीं। उनके शरीर से निकलने वाली गर्मी मेरे हाथों के जरिए मेरे पूरे वजूद में समा रही थी। मैंने उन्हें हौले से अपनी ओर खींचा और उनके कानों के पास जाकर बहुत धीमी आवाज़ में फुसफुसाया कि वो आज कितनी ज्यादा सुंदर और उत्तेजक लग रही हैं। उन्होंने अपनी आँखें धीरे से बंद कर लीं और अपना सिर समर्पण के भाव में मेरे मजबूत कंधे पर टिका दिया। वो लम्हा जैसे वक्त की गहराइयों में थम सा गया था, जहाँ सिर्फ हमारी तेज धड़कनों की आवाज़ गूँज रही थी।
मैंने धीरे से अपना हाथ ऊपर उठाया और साड़ी के ऊपर से ही उनके भारी तरबूजों को हल्के हाथों से सहलाना और भींचना शुरू किया। उनके मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली और उनके मटर जैसे दाने और भी सख्त होकर मेरी हथेलियों को चुभने लगे थे। मैंने बड़ी कोमलता से उनकी साड़ी के ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले, जिससे उनकी गोरी और बेदाग पीठ और फिर उनके विशाल तरबूज पूरी तरह आज़ाद होकर मेरे सामने आ गए। मैंने अपने दोनों हाथों में उन तरबूजों को भरकर दबाना शुरू किया और उनके मटर को अपनी उंगलियों से सहलाया। मीना चाची अब पूरी तरह मदहोश हो रही थीं, उनकी सिसकारियां रसोई की दीवारों से टकराकर वापस लौट रही थीं और मेरा खीरा भी अब अपनी हदें पार करने को बेताब था।
उन्होंने नीचे झुककर मेरे पेंट की बटन खोली और मेरा अत्यंत गर्म और लोहे जैसा सख्त खीरा अपने हाथों में ले लिया। उन्होंने अपने कोमल और रेशमी हाथों से मेरे खीरे को सहलाया और उसे बहुत ही प्यार से गौर से देखने लगीं। फिर उन्होंने धीरे से मेरा खीरा अपने मुँह में ले लिया और उसे बड़े चाव से चूसने लगीं। उनका खीरा चूसना इतना सुखद और जादुई था कि मुझे लगा जैसे मेरे पैरों तले से ज़मीन खिसक रही हो। मैंने उनके रेशमी बालों को पकड़ लिया और उन्हें और गहराई तक जाने का इशारा किया। इसके बाद मैंने उन्हें स्लैब पर लिटाया और उनकी टांगों के बीच बनी उस रहस्यमयी गहरी खाई को निहारने लगा जो काले घने बालों से ढकी हुई थी।
मैंने अपनी उंगली से उनकी गीली खाई में खुदाई शुरू की, जिससे उनके शरीर में बिजली सी दौड़ गई। वो ऊपर नीचे होने लगीं और उनकी खाई से अब चिपचिपा और गर्म रस बहकर निकलने लगा था। मैंने उनकी खाई को चाटना शुरू किया, जिससे वो बेकाबू होकर मेरा सिर अपनी जांघों के बीच जोर से भींचने लगीं। अब सब्र का हर बांध पूरी तरह टूट चुका था और जिस्म की आग चरम पर थी। मैंने उन्हें सामने से खोदने की स्थिति में व्यवस्थित किया और अपने सख्त खीरे की नोक उनकी रसभरी खाई के मुहाने पर टिका दी। एक ज़ोरदार और सधे हुए धक्के के साथ मेरा पूरा खीरा उनकी तंग खाई के अंदर समा गया। उनके मुँह से एक सुरीली चीख निकली और उन्होंने मुझे कसकर बाहों में जकड़ लिया।
हमारी खुदाई की रफ़्तार अब हर बीतते पल के साथ बढ़ने लगी थी और पूरा वातावरण उत्तेजना से भर गया था। हर गहरे धक्के के साथ मेरा खीरा उनकी खाई की अंतिम गहराइयों को नाप रहा था और उन्हें परम सुख दे रहा था। मीना चाची पूरी तरह उन्माद में चिल्ला रही थीं, “अहह… अजय, और तेज़ खोदो, मुझे आज पूरा खत्म कर दो!” मैंने उनकी स्थिति बदली और उन्हें पिछवाड़े से खोदने लगा। पीछे से उनके उभरे हुए भारी पिछवाड़े पर हल्की चोट मारते हुए जब मैं उन्हें जोर-जोर से खोद रहा था, तो टकराने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। उनके तरबूज बेतरतीब तरीके से झूल रहे थे और मेरा खीरा अब पूरी तरह से उनके पवित्र रस में भीग चुका था।
कुछ मिनटों की उस धुआंधार और निरंतर खुदाई के बाद, मुझे स्पष्ट महसूस हुआ कि अब मेरा गरम रस निकलने ही वाला है। मीना चाची का शरीर भी अब बेतहाशा कांपने लगा था और उनकी खाई मेरे खीरे को बार-बार अंदर की ओर बुरी तरह जकड़ रही थी। मैंने पूरी ताकत समेटकर आख़िरी कुछ बहुत तेज़ धक्के लगाए और हम दोनों का काम-रस एक साथ पूरी तीव्रता के साथ छूट गया। मेरा सारा गर्म और गाढ़ा रस उनकी खाई की गहराई में झरने की तरह बह गया। हम दोनों पूरी तरह निढाल होकर एक-दूसरे के शरीर पर ढेर हो गए। वो लम्हा परम शांति और तृप्ति का था, जहाँ जिस्मों की बरसों पुरानी भूख हमेशा के लिए शांत हो चुकी थी।
काफी देर तक हम रसोई के फर्श पर वैसे ही एक-दूसरे से लिपटे रहे, एक-दूसरे की गरम सांसों को महसूस करते हुए। मीना चाची ने मेरे माथे पर अपने होंठ रखे और मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने अपने पूरे जीवन में कभी ऐसा दिव्य अहसास नहीं किया था। उनके शरीर की शिथिलता और उनकी संतुष्ट आँखों की चमक यह साफ बता रही थी कि यह सिर्फ एक जिस्मानी रिश्ता नहीं था, बल्कि दो प्यासी आत्माओं का मिलन था। हमने धीरे-धीरे उठकर अपने कपड़े ठीक किए, लेकिन हमारे बीच का वह गहरा और रसीला राज अब हमेशा के लिए एक ऐसी मधुर स्मृति बन चुका था, जिसने हमें शब्दों से परे एक-दूसरे के बहुत करीब ला खड़ा किया था।