अधूरी शिक्षा का पूरा सबक—>
उस शाम जब राहुल अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर अंजलि मैडम के घर पहुँचा, तो बाहर का वातावरण काफी शांत और सुनसान था। अंजलि मैडम, जिनकी उम्र अब बत्तीस के करीब रही होगी, एक सूती साड़ी में बेहद कयामत ढा रही थीं। राहुल ने इतने सालों बाद उन्हें देखा था, और उनके शरीर में आए बदलावों ने उसे अंदर तक झकझोर दिया था। उनकी देह अब और भी ज्यादा भर गई थी, उनके शरीर के घुमाव और भी ज्यादा गहरे और आमंत्रित करने वाले लग रहे थे। अंजलि के चेहरे पर एक परिपक्वता थी जो राहुल के जवान मन को अपनी ओर खींच रही थी। कमरे में किताबों की पुरानी महक और अंजलि के परफ्यूम की खुशबू मिलकर एक नशीला माहौल बना रही थी।
अंजलि जब चाय बनाने के लिए मुड़ीं, तो उनकी साड़ी का पल्लू उनके कंधों से थोड़ा खिसक गया था, जिससे उनके बड़े-बड़े और सुडौल तरबूज आधे से ज्यादा दिखाई दे रहे थे। उनके तरबूजों की गोलाई इतनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली थी कि राहुल की नजरें वहाँ से हट ही नहीं रही थीं। उन तरबूजों के बीच की जो गहरी घाटी बन रही थी, वह किसी को भी अपना दीवाना बनाने के लिए काफी थी। राहुल ने महसूस किया कि उसके पजामे के भीतर उसका खीरा अब पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो चुका था। अंजलि की हर हरकत में एक गजब की लचक थी, और उनके चलने पर उनके पीछे का विशाल पिछवाड़ा जो हिल रहा था, उसने राहुल के संयम की परीक्षा लेनी शुरू कर दी थी।
चाय पीते हुए दोनों पुरानी यादों में खो गए, लेकिन बातों के बीच की खामोशी में एक अलग ही तनाव था। राहुल ने गौर किया कि अंजलि की नजरें भी बार-बार उसके कपड़ों के उस उभार की तरफ जा रही थीं जहाँ उसका खीरा अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा था। अंजलि ने अपनी आँखों से एक शरारती इशारा किया और धीरे से राहुल के पास आकर बैठ गईं। उनके शरीर की गर्मी अब राहुल को महसूस हो रही थी। अंजलि के तरबूजों की ऊपरी परत पर उभरे हुए छोटे-छोटे मटर उनकी उत्तेजना की कहानी खुद बयान कर रहे थे। राहुल ने हिम्मत जुटाई और अंजलि के हाथ पर अपना हाथ रखा, जो कि बहुत कोमल और रेशमी महसूस हो रहा था।
अंजलि ने अपना हाथ हटाया नहीं, बल्कि राहुल की उंगलियों को अपने हाथ में भींच लिया और अपनी आँखें बंद कर लीं। राहुल ने धीरे से उनके तरबूजों की ओर अपना हाथ बढ़ाया और जैसे ही उसकी हथेली ने उस मुलायम मांस को छुआ, अंजलि के मुँह से एक धीमी आह निकली। राहुल ने महसूस किया कि उनके तरबूज उम्मीद से ज्यादा नरम और भारी थे। वह उन्हें सहलाने लगा और उसकी उंगलियां बार-बार उन सख्त हो चुके मटरों को मसल रही थीं। अंजलि ने अपने शरीर को राहुल की ओर धकेल दिया, जिससे उनके तरबूज राहुल के सीने से बुरी तरह दब गए। अंजलि की सांसें तेज हो गई थीं और वे बार-बार राहुल के गले में अपना चेहरा छिपा रही थीं।
अब संयम का बांध टूट चुका था। राहुल ने अंजलि की साड़ी का पल्लू पूरी तरह हटा दिया और उनके ब्लाउज के हुक खोलने लगा। जैसे ही उनके दोनों तरबूज आजाद होकर बाहर आए, राहुल ने उन पर अपना मुँह जमा दिया और उन्हें चूसने लगा। अंजलि की कराहें अब कमरे की दीवारों से टकराने लगी थीं। राहुल का खीरा अब पूरी तरह से बाहर आने को बेताब था। उसने अपने कपड़े उतारे और अंजलि की साड़ी और पेटीकोट भी नीचे सरका दिया। अंजलि की सुंदर और घने बालों वाली खाई अब राहुल की आँखों के सामने थी। उसने देखा कि अंजलि की खाई पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहाँ से प्राकृतिक रस की बूंदें टपक रही थीं।
राहुल ने अपनी उंगलियों से खाई के किनारों को सहलाना शुरू किया और फिर अचानक अपनी उंगली से खोदना शुरू कर दिया। अंजलि अपने कूल्हे ऊपर उठाकर राहुल की उंगली का साथ देने लगीं। उनकी खाई इतनी तंग और गर्म थी कि राहुल का खीरा अब और इंतजार नहीं कर सकता था। राहुल ने अंजलि को बिस्तर पर लेटाया और उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। यह सामने से खोदने की सबसे बेहतरीन स्थिति थी। राहुल ने अपने खीरे की नोक को अंजलि की गीली खाई के मुहाने पर टिकाया और एक गहरा धक्का लगाया। अंजलि ने दर्द और सुख के मिले-जुले अहसास में राहुल की पीठ में अपने नाखून गड़ा दिए।
खुदाई की प्रक्रिया अब अपनी पूरी रफ़्तार में थी। राहुल हर धक्के के साथ अपने खीरे को अंजलि की खाई की गहराइयों तक ले जा रहा था। कमरे में सिर्फ शरीर के टकराने की आवाज़ और अंजलि की सिसकारियां गूँज रही थीं। राहुल ने अंजलि के तरबूजों को अपने हाथों में जोर-जोर से मसलते हुए अपनी गति और बढ़ा दी। अंजलि चिल्ला रही थीं, “राहुल, और जोर से खोदो… मुझे पूरा खत्म कर दो आज!” उनके पिछवाड़े के नीचे राहुल ने एक तकिया लगा दिया था ताकि खुदाई और भी गहराई से हो सके। अंजलि की खाई से निकलता हुआ चिपचिपा रस अब राहुल के खीरे को और भी ज्यादा फिसलन भरा बना रहा था।
कुछ देर बाद राहुल ने अंजलि को घुमाया और उन्हें पिछवाड़े से खोदने की मुद्रा में ला दिया। अंजलि अब अपने घुटनों के बल खड़ी थीं और उनका विशाल पिछवाड़ा राहुल की आँखों के ठीक सामने था। राहुल ने पीछे से अपने खीरे को दोबारा अंजलि की खाई में उतारा। इस स्थिति में उसे अंजलि की तंग खाई का और भी ज्यादा अहसास हो रहा था। राहुल के हर धक्के पर अंजलि के तरबूज नीचे झूल रहे थे। खुदाई इतनी दमदार थी कि अंजलि अब पूरी तरह से पसीने में तरबतर हो चुकी थीं। दोनों के शरीर से निकलने वाला पसीना अब आपस में मिल चुका था और एक अजीब सी कामुक महक पूरे वातावरण में फैल गई थी।
अंत में जब दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँचने वाले थे, राहुल ने अंजलि के बालों को पकड़कर पीछे की ओर खींचा और आखिरी कुछ जोरदार धक्के लगाए। अंजलि के शरीर में एक तेज कंपन हुआ और उनकी खाई ने जोर-जोर से राहुल के खीरे को जकड़ लिया। अगले ही पल अंजलि का सारा रस निकल गया और साथ ही राहुल का खीरा भी अपने रस को अंजलि की खाई की गहराइयों में छोड़ने लगा। दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। कमरे में अब सिर्फ उनके भारी सांसों की आवाज़ थी। अंजलि ने राहुल को कसकर गले लगाया और उसके माथे को चूम लिया। उस अधूरी शिक्षा का आज राहुल को सबसे सुखद और पूरा सबक मिल चुका था।