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गरम खेत में रसीली चु@@ई की प्यास

दोपहर का समय था और सूरज अपनी पूरी तपिश बिखेर रहा था। गाँव के बाहरी इलाके में स्थित कमला का बड़ा सा खेत आज कुछ ज्यादा ही शांत था। कमला, जिसकी उम्र करीब 30 साल थी, अपने बदन की सुडौलता के लिए पूरे गाँव में मशहूर थी। उसके शरीर के अंग किसी **रसीले तरबूज** की तरह उभरे हुए थे और उसकी चाल में वो मदहोशी थी कि देखने वाला अपना होश खो दे। आज कमला अपने खेत में **रसीले आम** और ताजे **खीरों** की देखरेख कर रही थी। उसके बदन पर बंधी साड़ी पसीने से भीगकर उसके बदन से चिपक गई थी, जिससे उसके शरीर के उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा साफ नजर आ रहे थे।

तभी वहां रामू आया, जो कमला के खेत में **जुताई करना** और **खुदाई** का काम देखता था। रामू जवान था और उसका शरीर किसी **मूसल** की तरह सख्त और मजबूत था। उसने देखा कि कमला एक ऊँचे स्थान पर खड़ी होकर बेलों को ऊपर चढ़ा रही थी, जिससे उसका **पिछवाड़ा** पूरी तरह से उभर कर सामने आ रहा था। रामू की नजरें कमला के उस भारी और गोल **पिछवाड़े** पर टिक गईं। वह धीरे से उसके पास गया और बोला, “मालकिन, बहुत गर्मी है, आप आराम क्यों नहीं करतीं?” कमला ने पीछे मुड़कर देखा, उसकी आँखों में एक अजीब सी **गर्मी** थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “काम तो करना ही पड़ता है रामू, वरना ये **रसीले संतरे** और फल खराब हो जाएंगे।”

रामू ने हिम्मत जुटाई और कमला के पास जाकर खड़ा हो गया। उसने देखा कि कमला की चोली के अंदर से उसके **तरबूज** जैसे उभार सांसों की वजह से ऊपर-नीचे हो रहे थे। रामू ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ एक **लंबा मोटा खीरा** कमला की तरफ बढ़ाया और कहा, “ये देखिए मालकिन, आज की फसल का सबसे बेहतरीन और **नसो से भरा खीरा** है।” कमला ने उस खीरे को अपने हाथ में लिया और उसे सहलाने लगी। खीरे की लंबाई और मोटाई देखकर कमला के मन में हलचल मच गई। उसने अपनी जीभ से अपने होठों को चाटा और रामू की आँखों में आँखें डालकर उस **खीरा चूसना** शुरू कर दिया।

यह नजारा देखकर रामू के शरीर में बिजली दौड़ गई। उसने धीरे से कमला के कंधों पर हाथ रखा और उसकी **मालिश** करने लगा। “मालकिन, आपकी थकान उतार देता हूँ,” रामू ने फुसफुसाते हुए कहा। कमला ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। रामू के हाथ अब कमला के **बाल** सहलाते हुए नीचे की ओर आने लगे। उसने कमला की कमर को **दबाना** और **मरोड़ना** शुरू किया। कमला के मुँह से हल्की सी आह निकली। रामू ने अब साड़ी के पल्लू को हटाकर उसके **रसीले संतरों** पर हाथ रख दिया और उन्हें **मक्खन** की तरह मलने लगा।

कमला की **गर्मी शांत करना** अब रामू की प्राथमिकता थी। उसने कमला को जमीन पर बिछाए हुए पुआल पर लेटा दिया। कमला की जांघों के बीच की **खाई** अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वहां से **मलाई** जैसा सफेद **रस निकलना** शुरू हो गया था। रामू ने झुककर कमला की उस गहरी **खाई चाटना** शुरू किया। कमला ने अपनी टांगें फैला दीं और रामू के सिर को अपनी ओर खींच लिया। रामू की जुबान जब उसकी **खाई** के अंदर गई, तो कमला तड़प उठी। वह बार-बार कह रही थी, “रामू, और अंदर तक **खुदाई** करो।”

रामू ने अब अपनी **उंगली से खोदना** शुरू किया। वह अपनी दो उंगलियाँ कमला की **खाई में उंगली** डालकर तेजी से ऊपर-नीचे करने लगा। कमला का शरीर धनुष की तरह तन गया था। वह अपनी उंगलियों से रामू के **बालों** को खींच रही थी। रामू ने अब अपनी उंगलियों को बाहर निकाला और अपना **नसो से भरा खीरा** यानी अपना औजार बाहर निकाला। कमला उसे देखकर दंग रह गई, वह किसी **मूसल** से कम नहीं था। कमला ने उसे पकड़ लिया और अपनी जीभ से उसे सहलाने लगी।

रामू ने अब कमला को **घोड़ी बनाकर खोदना** शुरू करने का फैसला किया। उसने कमला को घुटनों के बल खड़ा किया और उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने कमला के भारी **पिछवाड़े** को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे जोर-जोर से **मरोड़ना** शुरू किया। फिर उसने अपना **लंबा मोटा खीरा** उसकी **खाई** के मुहाने पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। कमला के मुँह से एक तेज चीख निकली, लेकिन वह दर्द की नहीं बल्कि चरम आनंद की थी। रामू अब पागलों की तरह **पिछवाड़े से खोदना** शुरू कर चुका था। हर धक्के के साथ कमला का पूरा शरीर हिल रहा था।

खेत के उस एकांत कोने में अब सिर्फ थप-थप की आवाजें गूँज रही थीं। रामू किसी कुशल किसान की तरह कमला की जमीन पर **जुताई करना** जारी रखे हुए था। उसने कमला को फिर से सीधा लेटाया और उसके ऊपर चढ़कर **सवारी करना** शुरू कर दिया। कमला ने अपनी दोनों टांगें रामू की कमर के गिर्द लपेट लीं। रामू का **मूसल** अब पूरी तरह से कमला की **खाई** की गहराई नाप रहा था। कमला बार-बार कह रही थी, “रामू, आज पूरी **खुदाई** कर दे, मेरा सारा **रस निकाल** दे।”

जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा, दोनों के शरीरों से पसीना टपकने लगा। रामू की गति अब और भी तेज हो गई थी। वह **उंगली से खोदना** और **खाई चाटना** के बीच सामंजस्य बिठाते हुए कमला को स्वर्ग का अनुभव करा रहा था। अंत में, रामू का शरीर कांपने लगा और उसने एक अंतिम जोरदार धक्का दिया। उसके औजार से **पिचकारी** की तरह सफेद **मलाई** निकली और कमला की **खाई** को पूरी तरह से भर दिया। कमला भी उसी क्षण झड़ गई और उसका सारा **रस** बाहर निकल आया।

दोनों काफी देर तक एक-दूसरे की बाहों में लिपटे रहे। खेत की ठंडी हवा अब उनकी **गर्मी शांत करना** शुरू कर चुकी थी। रामू ने कमला के माथे को चूमा और कहा, “अगली बार फिर से **खुदाई** करेंगे मालकिन।” कमला ने मुस्कुराते हुए रामू को अपने पास खींच लिया और फिर से उस **नसो से भरे खीरे** को सहलाने लगी। वह जानती थी कि यह तो बस शुरुआत है, अभी पूरे सीजन की **जुताई** बाकी है।

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