नेहा मैम का बागीचा और अधूरी प्यास की खुदाई—>
रोहन सालों बाद अपने पुराने गाँव लौटा था और पुरानी यादों के झोंकों के बीच उसे अपनी पुरानी ट्यूशन टीचर नेहा मैम की याद आई, जो अब भी उतनी ही खूबसूरत और आकर्षक थीं। वह गाँव के पुराने आम के बाग में टहलने गया था जहाँ उसकी अचानक मुलाकात नेहा मैम से हुई, जो अकेली बैठी प्रकृति का आनंद ले रही थीं। उनकी रेशमी साड़ी और उनके चेहरे की मासूम चमक देख रोहन का दिल जोरों से धड़कने लगा और वह उनकी मोहक सुगंध की ओर खिंचा चला गया, मानो कोई पुराना जादू फिर से चल गया हो और बरसों की दबी चाहत जाग उठी हो।
नेहा मैम की काया अब पहले से ज्यादा भरवां, मादक और परिपक्व हो गई थी, उनके तंग ब्लाउज से उभरते उनके पुष्ट और गोल तरबूज किसी का भी मन विचलित करने के लिए काफी थे। उनकी पतली कमर और भारी पिछवाड़ा उनके व्यक्तित्व में एक अलग ही कामुक कशिश भर रहे थे, जिसे देखकर रोहन की आँखों में दबी हुई कामुक इच्छाओं की तीव्र लहर दौड़ गई। उनकी मखमली गोरी त्वचा और उनके तरबूजों के बीच की वो गहरी घाटी किसी भी प्यासे राही को अपना दीवाना बनाने और उसमें हमेशा के लिए डूबने के लिए उकसा रही थी।
दोनों के बीच पुरानी यादों और वर्तमान की बातों का सिलसिला शुरू हुआ, लेकिन उन औपचारिक बातों के पीछे एक अनकही प्यास छिपी हुई थी जो बाग की गर्म हवा में साफ़ महसूस की जा सकती थी। नेहा मैम की आँखों में भी रोहन के युवा और गठीले शरीर के प्रति एक अलग सा खिंचाव था, मानो वे भी इस जवान शरीर की गर्मी को खुद में समेटकर अपनी तन्हाई दूर करना चाहती हों। उनकी सांसें धीरे-धीरे भारी होने लगी थीं और बाग की गहरी शांति में सिर्फ उनकी तेज होती धड़कनों की गूँज सुनाई दे रही थी।
अचानक रोहन ने सारी लोक-लाज छोड़कर हिम्मत जुटाई और नेहा मैम के कांपते हुए नाजुक हाथों को अपने हाथों में ले लिया, जिससे उनके पूरे शरीर में कामुक बिजली सी दौड़ गई। उसने धीरे से उनके सुंदर चेहरे को अपनी उंगलियों से सहलाया और उनके गुलाबी होंठों का गहरा स्पर्श किया, जो शहद की तरह मीठे और रसीले लग रहे थे। नेहा मैम ने भी कोई विरोध नहीं किया और रोहन के गले लग गईं, जिससे उनके दोनों विशाल तरबूज रोहन की मजबूत छाती से जोर से दब गए और दोनों के बीच की झिझक पूरी तरह मिट गई।
रोहन के हाथ अब नेहा मैम की साड़ी के पल्लू को धीरे से सरकाते हुए उनके रेशमी बदन की गहराई को खोजने लगे थे और उन्होंने उनकी त्वचा की अद्भुत गर्माहट को महसूस करना शुरू कर दिया था। उसने नेहा मैम के ब्लाउज के हुक एक-एक कर खोले जिससे उनके दोनों विशाल और गोरे तरबूज आज़ाद होकर बाहर आ गए और उनके ऊपर लगे मटर जैसे दाने उत्तेजना से सख्त हो गए थे। रोहन ने उन मटरों को अपनी उंगलियों और जीभ से सहलाया और नेहा मैम के मुँह से बेतहाशा उत्तेजक आहें निकलने लगीं जो बागीचे के सन्नाटे को चीर रही थीं।
अब रोहन का हाथ और भी नीचे की ओर बढ़ा जहाँ नेहा मैम की रेशमी और तंग खाई उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी, जो कामुकता के चरम पर होने के कारण अब पूरी तरह गीली और गर्म हो चुकी थी। उसने अपनी उंगलियों से उस खाई को गहराई से खोदना शुरू किया तो नेहा मैम ने मजे में अपनी आँखें बंद कर लीं और कामुकता के अनंत सागर में गोते लगाने लगीं। उधर रोहन का अपना कड़क और विशाल खेरा भी अब पतलून के अंदर पूरी तरह खड़ा होकर अपनी कैद से आज़ाद होने के लिए बेताब हो उठा था।
नेहा मैम ने अपने कांपते हाथों से रोहन का कठोर और गर्म खेरा पकड़ा और उसे धीरे-धीरे सहलाने लगीं, जिससे रोहन के पूरे अस्तित्व में एक सिहरन सी दौड़ गई। फिर उन्होंने उस खेरे को अपने मुँह में लेकर गहराई तक चूसना शुरू किया, जिससे रोहन की आँखों के सामने मजे का अंधकार छाने लगा और वह उत्तेजना की नई ऊंचाइयों को छूने लगा। कुछ देर बाद, रोहन ने उन्हें बागीचे की हरी घास पर लिटाया और अपनी सामने से खुदाई शुरू कर दी, उसका विशाल खेरा नेहा मैम की रसभरी खाई में गहराई तक समाता चला गया।
हर जोरदार धक्के के साथ नेहा मैम के भारी तरबूज ऊपर-नीचे तेजी से उछल रहे थे और उनके पिछवाड़े की घास से रगड़ खाने की सरसराहट इस खुदाई को और भी अधिक उत्तेजक बना रही थी। “ओह रोहन, तुम तो बिल्कुल जंगली हो गए हो, और जोर से खोदो, मुझे अपनी पूरी गहराई तक भर दो, मैं तुम्हारी होना चाहती हूँ,” नेहा मैम की मदहोश करने वाली आवाज़ ने रोहन को और भी बेकाबू बना दिया था। वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में बुरी तरह जकड़े हुए थे और पसीने से लथपथ होकर इस खुदाई के खेल का परम आनंद ले रहे थे।
खुदाई की रफ्तार अब अपने उच्चतम शिखर पर पहुँच चुकी थी और दोनों ही अपने अंतिम सुख के बेहद करीब थे, रोहन का कठोर खेरा उनकी खाई के भीतर पूरी तरह से धंसा हुआ था। अचानक नेहा मैम का पूरा शरीर थरथराने लगा और उनकी खाई से पवित्र काम-रस का झरना बहने लगा, और ठीक उसी क्षण रोहन ने भी अपने खेरे से सारा गर्म रस उनकी गहराई में विसर्जित कर दिया। दोनों पूरी तरह से निढाल होकर एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े, उनकी तेज चलती सांसें और जिस्मों का पसीना एक-दूसरे में पूरी तरह मिल चुका था।
उस अद्भुत और थका देने वाली खुदाई के बाद रोहन और नेहा मैम एक-दूसरे से लिपटे हुए बागीचे की शीतल शांति में पड़े रहे, उनके दिलों की धड़कनें अब धीरे-धीरे अपनी लय में लौट रही थीं। नेहा मैम ने बड़े प्यार से रोहन के माथे के पसीने को अपने पल्लू से पोंछा और उसे फिर से गले लगा लिया, उनकी आँखों में एक गहरा संतोष और नया प्रेम साफ़ झलक रहा था। वह शाम उनके जीवन की सबसे खूबसूरत और रसीली दास्तान बन गई थी, जिसे वे दोनों अपनी आखिरी सांस तक कभी नहीं भूल सकते थे।