भाभी के साथ शादी में रसीली चु@@ई का आनंद —> शादी का माहौल चारों तरफ खुशियों और ढोल-नगाड़ों से भरा हुआ था, लेकिन मेरी नजरें केवल सुनीता भाभी पर टिकी हुई थीं। उन्होंने गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जिसमें उनके रसीले आम जैसे उभार साफ झलक रहे थे। मैं बस मौका ढूंढ रहा था कि कब उनके करीब जाऊं और उनके बदन की खुशबू को महसूस कर सकूं। भाभी की कमर का लचीलापन देखकर मेरा मन मचलने लगा था।
भीड़भाड़ के बीच भाभी ने मुझे इशारा किया कि मैं उनके कमरे में आकर उनकी ज्वेलरी ठीक करने में मदद करूँ। जब मैं कमरे में पहुँचा, तो वहाँ की खामोशी में मेरी धड़कनें तेज हो गईं। भाभी आईने के सामने खड़ी थीं और उनकी पीठ का खुला हिस्सा मुझे खुदाई करने के लिए आमंत्रित कर रहा था। मैंने धीरे से पीछे से जाकर उनके मखमली बदन पर हाथ रखा, तो वो सिहर उठीं।
भाभी ने पलकें झुका लीं और मैंने अपनी उंगलियों से उनके बदन की मालिश शुरू कर दी। उनके रसीले संतरे साड़ी के नीचे से बाहर आने को बेताब लग रहे थे। मैंने धीरे से उनके ब्लाउज की डोरी ढीली की और अपनी जुबान से उनकी गर्दन को सहलाया। कमरे की गर्मी बढ़ने लगी थी और मुझे महसूस हो रहा था कि अब जुताई का सही समय आ गया है।
भाभी ने फुसफुसाते हुए कहा कि कोई आ जाएगा, लेकिन मैंने उन्हें अपनी बाहों में भरकर उनके होंठों का रस पीना शुरू कर दिया। उनके मुँह से निकलती आहें मेरे नसो से भरा खीरा को और भी कठोर बना रही थीं। मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनके रसीले आमों को हाथों से दबाना और मरोड़ना शुरू किया। भाभी अब पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थीं।
जैसे ही मैंने उनकी साड़ी हटाई, उनके बदन की चमक देखकर मेरी आँखों में चमक आ गई। उनकी गहरी खाई अब पूरी तरह से सामने थी। मैंने अपनी उंगली से खाई की गहराई नापना शुरू किया, जिससे भाभी तड़प उठीं। वो बार-बार मेरा हाथ पकड़कर उसे अपनी खाई की ओर ले जा रही थीं। मुझे समझ आ गया था कि अब खुदाई करने का वक्त आ गया है।
मैंने अपना लंबा मोटा खीरा निकाला और उनकी खाई के मुहाने पर टिका दिया। भाभी ने उसे अपने हाथों में लेकर सहलाया और फिर उसे चूसना शुरू कर दिया। खीरा चूसना उन्हें बहुत पसंद आ रहा था। उनके मुँह की गर्मी ने मुझे पागल कर दिया था। अब मेरी सहनशक्ति जवाब दे रही थी और मुझे बस अपनी गर्मी शांत करनी थी।
मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर पीछे से खुदाई शुरू की। जैसे ही मेरा मूसल उनकी गहराई में गया, उन्होंने एक जोर की चीख मारी जो तकिए में दब गई। पिछवाड़े से खुदाई करते समय जो आनंद मिल रहा था, वो शब्दों में बयान करना मुश्किल था। हर धक्के के साथ भाभी का पिछवाड़ा हिल रहा था और मुझे अंदर तक मक्खन जैसी चिकनाहट महसूस हो रही थी।
भाभी अब पूरी तरह से सवारी करने के मूड में थीं। वो मेरे ऊपर बैठ गईं और खुद ही जुताई करने लगीं। उनके ऊपर-नीचे होने से रसीले आम मेरे चेहरे के सामने नाच रहे थे। मैं उन्हें हाथों से दबाते हुए उनके रस का आनंद ले रहा था। पूरी रात हम इसी तरह प्रकृति के खेल में डूबे रहे और एक-दूसरे की गर्मी को शांत करते रहे।
खाई में उंगली और फिर मूसल की चोट ने भाभी को पूरी तरह तृप्त कर दिया था। अंत में, जब रस निकलने का समय आया, तो मैंने अपनी पिचकारी उनकी गहराई में ही छोड़ दी। भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया और हम दोनों पसीने से लथपथ होकर मलाई जैसे अहसास में खो गए। वो रात हमारे लिए एक खूबसूरत बाग की सैर की तरह थी।
अगली सुबह जब हम शादी के मंडप में मिले, तो हमारी आँखों में एक राज छुपा था। भाभी के चेहरे पर जो निखार था, वो रात की मेहनत और खुदाई का ही नतीजा था। हम दोनों जानते थे कि यह तो बस शुरुआत है, अभी तो बहुत सारे खेतों की जुताई और बहुत सारे रसीले फलों का स्वाद चखना बाकी है।
शादी के फंक्शन चलते रहे, लेकिन हमारी गुप्त मुलाकातों का सिलसिला थमा नहीं। हर बार जब भी मौका मिलता, हम किसी कोने में जाकर मसाज और मालिश के बहाने एक-दूसरे के शरीर की गर्मी शांत करते। भाभी की रसीली खाई हमेशा मेरे मूसल के लिए तैयार रहती थी और मेरा खीरा हमेशा उनकी जुताई करने के लिए बेताब रहता था।
गांव के उस पुराने घर के हर कोने में हमने अपनी यादें छोड़ी थीं। कभी स्टोर रूम में तो कभी छत के ऊपर, हमने हर जगह अपनी मलाई और मक्खन का खेल खेला। भाभी का साथ मिलना मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं था। उनके रसीले बदन की खुशबू आज भी मेरे जेहन में ताज़ा है और वो मरोड़ना और दबाना मुझे हमेशा याद रहेगा।
जब शादी खत्म हुई और विदाई का समय आया, तो भाभी की आँखों में नमी थी, लेकिन उनके होंठों पर एक संतोष भरी मुस्कान थी। उन्होंने धीरे से मेरे कान में कहा कि घर आकर फिर से सवारी करना। मैंने मुस्कुराते हुए वादा किया कि मैं जल्द ही उनके बाग की देखभाल करने और रसीले आमों का स्वाद लेने दोबारा आऊंगा।
इस तरह हमारी यह छोटी सी लेकिन बेहद रोमांचक प्रेम कहानी शादी के शोर-शराबे के बीच परवान चढ़ी। प्रकृति के इन प्रतीकों ने हमारी भावनाओं को एक नया रूप दिया था। रसीला खीरा और गहरी खाई का यह मिलन हमेशा के लिए मेरे दिल में बस गया था। भाभी और मेरे बीच का यह गुप्त रिश्ता अब और भी गहरा हो चुका था।
आज भी जब मैं किसी शादी में जाता हूँ, तो मुझे वही लाल साड़ी और वो रसीले आम याद आ जाते हैं। सुनीता भाभी ने मुझे प्यार और वासना का जो पाठ पढ़ाया था, वो किसी भी किताब से कहीं ज्यादा प्रभावी था। हमने मिलकर जो खुदाई की थी, उसकी फसल आज भी मेरे ख्यालों में लहलहाती है और मुझे उस रात की याद दिलाती है।