कविता की रेशमी चु@@ई
शाम का वक्त था और बाज़ार की हलचल अब धीरे-धीरे कम होने लगी थी, लेकिन समीर की छोटी सी दर्जी की दुकान में अभी भी काम का बोझ कम नहीं हुआ था। समीर अपनी सिलाई मशीन पर झुककर बड़ी बारीकी से धागे पिरो रहा था, तभी दरवाजे पर लगी छोटी सी घंटी बजी और कविता … Read more