तपती दोपहर की अधूरी प्यास और बागान की खुदाई
गांव की वह सुनसान दोपहर और पुरानी हवेली का वह पिछला हिस्सा, जहाँ मालती अक्सर अकेले वक्त बिताया करती थी। मालती की उम्र करीब तीस के पार रही होगी, उसका शरीर एक पके हुए आम की तरह रसीला और गठा हुआ था, जिसकी बनावट किसी को भी अपनी ओर खींचने के लिए काफी थी। उस … Read more